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जाओ, लोगों को चेला बनाओ
परमेश्वर ने हमसे कहा है, “जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ।” इस वचन के अनुसार, हम सोचते हैं कि यह कार्य किसी अन्य कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है, और लोगों को चेले बनाने की कोशिश करते हैं।
जो भी हो, सभी सदस्य इस कार्य के लिए योग्य नहीं ठहरते। इस समय प्रचारक जिन्हें परमेश्वर भेजने के लिए प्रसन्न होते हैं उनकी योग्यताओं का अध्ययन करने के द्वारा, आइए हम स्वयं पर विचार करें और जांच करें कि हम सुसमाचार के प्रचारक के लिए योग्य हैं या नहीं।
मत 28:16–20 ... इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।
परमेश्वर पर विश्वास करने, उनसे प्रेम करने या उनका पालन करने जैसी जो भी शिक्षा एक शिक्षक के पास है, वह चेलों को दिया जाना चाहिए। इसलिए चेले बनानेवाले शिक्षकों को प्रचारक बनने की आवश्यक योग्यताओं को धारण करना चाहिए। जिन शिक्षकों के पास उत्कृष्ट मानसिकता और दृढ़ विश्वास है, वह योग्य चेले बना सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है, तो हम उन्हें गलत उदाहरण दिखाएंगे और अपने पापमय रास्ते पर उनकी अगुवाई करेंगे।
इसलिए जो आज्ञाएं परमेश्वर ने हमें दी हैं, सिर्फ उनका पालन करना उन्हें सिखाना चाहिए। हम परमेश्वर की संस्कृतियों और आत्मिक रीतियों को सीख रहे हैं। आइए हम इन्हें और अधिक सीखें, ताकि सुसमाचार के प्रचारकों के रूप में, जिनसे परमेश्वर प्रसन्न होते हैं, हम सभी जातियों को जो हमने परमेश्वर से सीखा है, उसका प्रचार करने के लिए पूरी तरह से योग्य हो सकें। अब आइए हम देखें कि प्रचारकों की योग्यताएं क्या हैं।
सुसमाचार के प्रचारकों की योग्यताएं जिनसे परमेश्वर प्रसन्न होते हैं
पहले, सुसमाचार के प्रचारकों को पवित्र आत्मा से भरा रहना चाहिए।
प्रे 1:8 परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।
सुसमाचार का कार्य मनुष्य की योजना, ज्ञान और बुद्धि से पूरा नहीं होता, पर परमेश्वर से पूरा होता है; इसलिए प्रचारकों को सिर्फ पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के अनुसार करना चाहिए। जब हम परमेश्वर की इच्छा का पालन करने के लिए हमेशा अपने हृदय से प्रसन्न होते हैं, हम परमेश्वर की दृष्टि में सुसमाचार के प्रचारक बनने के लिए योग्य साबित होते हैं।
सभी युगों में, परमेश्वर ने ऐसे लोगों को चुना है जो अपनी हठ या विचार से नहीं, बल्कि सच्चे विश्वास के साथ परमेश्वर की इच्छा का पालन करते हैं, और परमेश्वर ने अपने वचन का प्रचार करने के लिए नबी और साधन के रूप में उनका इस्तेमाल किया है। पुराने और नए नियम के इतिहास के द्वारा, हम इस सत्य को समझ सकते हैं।
हमें सुसमाचार के प्रचारकों के रूप में पवित्र आत्मा से भर जाना चाहिए और यह ध्यान में रखते हुए कि जैसा परमेश्वर कहते हैं वैसा ही करना महत्वपूर्ण है, परमेश्वर की इच्छा का पालन करना चाहिए। फिर हम परमेश्वर को प्रसन्न करते हुए अच्छे फल उत्पन्न कर सकते हैं।
दूसरा, सुसमाचार के प्रचारकों को अपने उद्धार का निश्चय होना चाहिए।
1यूह 5:11–15 और वह गवाही यह है कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है... यदि हम उसकी इच्छा के अनुसार कुछ मांगते हैं, तो वह हमारी सुनता है... यह भी जानते हैं कि जो कुछ हम ने उससे मांगा, वह पाया है।
हमें बताना चाहिए कि पवित्र आत्मा के युग के उद्धारकर्ता, परमेश्वर के नाम पर भरोसा करने के द्वारा, हमें अपने उद्धार का दृढ़ निश्चय है, और हमें प्रचार के द्वारा अपने दृढ़ निश्चय का सबूत दिखाना चाहिए। अगर हम अपने विचार या बुद्धि पर नहीं, लेकिन परमेश्वर पर निर्भर रहेंगे, तो हम सब कुछ कर सकेंगे।
हम अपने उद्धार पर दृढ़ निश्चय करते हैं, क्योंकि हम आत्मा और दुल्हिन का पालन करते हैं। हमें अपने चेलों को हमारे समान विश्वास रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जब हम परमेश्वर को जानेंगे, और जब हम परमेश्वर के सत्य के वचनों को आत्मिक दुनिया को देखने वाली अपनी आंखें खोलकर महसूस करेंगे और उनसे गहराई से प्रभावित होंगे, तब हम अपने चेलों को भी उन्हें व्यक्त कर सकते हैं। जिन लोगों को अपने उद्धार पर निश्चय नहीं है, उन लोगों को हम अपने उन अनुग्रह के पलों को, जिनका हमने दृढ़ विश्वास के साथ अनुभव किया है, बांटने के द्वारा, उनका परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास करने और परमेश्वर से आशीष मांगने के लिए मार्गदर्शन कर सकते हैं।
तीसरा, सुसमाचार के प्रचारकों की प्रवृत्ति ऐसी होनी चाहिए, “अगर हम प्रचार न करें, तो यह हमसे सहा नहीं जाता।”
यिर्म 20:7–9 ... यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है। यदि मैं कहूं, “मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा,” तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता।
जब हमारे पास ऐसा जलता हुआ हृदय होगा, हम सुसमाचार के प्रचारकों के योग्य होंगे। अगर हम किसी दबाव से या कुढ़ते हुए सुसमाचार का प्रचार करेंगे, तो हमवह प्रचारक नहीं बनेंगे जिससे परमेश्वर प्रसन्न होते हैं।
चाहे हमें प्रचार करने के लिए कहा जाए या नहीं, हमें अपने उद्धार पर, जिसकी परमेश्वर ने हमसे प्रतिज्ञा की है, दृढ़ निश्चय है, इसलिए हमें सुसमाचार का प्रचार ऐसी मानसिकता के साथ करना चाहिए कि ‘मैं चुप नहीं रह सकता।’ तो फिर हम वह प्रचारक बनने के योग्य हो सकते हैं जो जाकर चेले बना सकता है।
बाइबल भविष्यवाणी करती है कि जगह जगह अकाल पडें.गे और भूकम्प होंगे, जाति पर जाति और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और सूरज, चांद और तारों में चिन्ह दिखाई देंगे। ये भविष्यवाणियां इन अंतिम दिनों में पूरी हो रही हैं। आज, उन मरने वाले लोगों को बचाने का रास्ता यही है, उन्हें परमेश्वर के जीवन के वचन का प्रचार करना। हमें जलते हुए हृदय के साथ और दृढ़ संकल्प के साथ सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए।
अगर हम बेपरवाह होकर लोगों को प्रचार करेंगे, तो वे भी उसे आधे–अधूरे मन से स्वीकार करेंगे। परमेश्वर के कार्यों में, चाहे एक छोटा सा कार्य क्यों न हो, हमें बड़े जोश के साथ उसे करना चाहिए। सुसमाचार का प्रचार करने के लिए हमें जोश और उत्साह की जरूरत होती है, जिसके द्वारा हम एक आत्मा को बचा सकते हैं। ऐसा जलता हुआ हृदय हमें निडर होकर उन लोगों को भी, जो सुनना नहीं चाहते, परमेश्वर के वचन का प्रचार करने में सक्षम बनाता है।
प्रे 4:16–20 ... परन्तु पतरस और यूहन्ना ने उनको उत्तर दिया, “तुम ही न्याय करो; क्या यह परमेश्वर के निकट भला है कि हम परमेश्वर की बात से बढ़कर तुम्हारी बात मानें। क्योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें।”
प्रेरितों ने इस दुनिया के झूठे धार्मिक नेताओं के सामने निडरतापूर्वक प्रचार किया। परमेश्वर ने हमें चुना है और हमें अनुमति दी है कि हम देखें और सुनें और महसूस करें कि परमेश्वर के वचन क्या हैं। यह इसलिए है क्योंकि परमेश्वर चाहते हैं कि हमने जो देखा है उसका प्रचार करें।
मत्ती के 28 वें अध्याय में, परमेश्वर ने हमें किसी निश्चित स्थान का उल्लेख किए बिना, सिर्फ जाने के लिए कहा है। हमें जलते हुए हृदय के साथ कहीं भी जाकर, जो हमने देखा है और सुना है उसका प्रचार करना चाहिए, ताकि परमेश्वर की महिमा प्रकट हो सके और हम परमेश्वर की शिक्षा का पालन करके आत्मिक फल फल सकें।
चौथा, सुसमाचार के प्रचारकों को सुसमाचार से लजाना नहीं चाहिए।
रो 1:16 क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करनेवाले के लिये, पहले तो यहूदी फिर यूनानी के लिये, उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ्य है।
परमेश्वर के प्रचारकों को सुसमाचार से लजाना नहीं चाहिए, पर जो सुसमाचार को स्वीकार नहीं करते उनके लिए खेद महसूस करते हुए, मजबूत विश्वास के साथ निडर होकर सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए।
जब हम सुसमाचार का प्रचार करते हैं, जो लोग सत्य को नहीं जानते उनके द्वारा हम बदनाम हो सकते हैं, और हमें ठट्ठों में उड़ाया जा सकता है और सताया जा सकता है। हालांकि, भले ही उन्हें पसंद है या नहीं, हमें प्रचार करना चाहिए जैसे परमेश्वर ने हमें आज्ञा दी है।
सुसमाचार इतना शक्तिशाली है कि उद्धार और अनंत स्वर्ग के राज्य में हमें ले जाने का उसमें अधिकार है। इसलिए हमें परमेश्वर की बुद्धि और शक्ति पर निर्भर रहकर, बड़े हियाव और गर्व के साथ सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में प्रचार के लिए शर्मिंदा महसूस नहीं करना चाहिए।
पांचवां, सुसमाचार के प्रचारकों को परमेश्वर के वचनों के हथियार बांध लेना चहिए।
1पत 1:23–25 क्योंकि तुम ने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से, परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है... प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है। और यही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था।
परमेश्वर के सुसमाचार के कार्य के लिए इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता कि मनुष्यों की गिनती ज्यादा है या कम है। जिनके हृदय में परमेश्वर के वचन जीवित हैं वे सुसमाचार के प्रचारकों के योग्य हैं।
जब हम परमेश्वर के अपरिवर्तनीय और अनंत जीवन के वचन से भर जाते और सशस्त्र हो जाते हैं, तब हम बुद्धिमान प्रचारक बन सकते हैं जो ठीक समय पर लोगों को आत्मिक भोजन दे सकते हैं, और हम वचन के द्वारा जो हमारे पास है, चेले भी बना सकते हैं और परमेश्वर की इच्छा का पालन करने के लिए उनकी अगुवाई कर सकते हैं।
अंत में, सुसमाचार के प्रचारकों को प्रार्थना के द्वारा पवित्र आत्मा की आग को अपने हृदय में जलाना चाहिए।
1शम 12:20–25 शमूएल ने लोगों से कहा... “यहोवा तो अपने बड़े नाम के कारण अपनी प्रजा को न तजेगा, क्योंकि यहोवा ने तुम्हें अपनी ही इच्छा से अपनी प्रजा बनाया है। फिर यह मुझ(शमूएल) से दूर हो कि मैं तुम्हारे लिये प्रार्थना करना छोड़कर यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरूं; मैं तो तुम्हें अच्छा और सीधा मार्ग दिखाता रहूंगा।”...
शमूएल ने जो परमेश्वर की इच्छा का पालन करने वाले एक विश्वासयोग्य याजक के रूप में नियुक्त किया गया, प्रार्थना करने में असफल न रहने के द्वारा परमेश्वर के विरुद्ध पाप नहीं किया।
अगर हमारे हृदय में जलन न रहे, हम दूसरों को जला नहीं सकते। हमें खुद को जलाने के लिए किसी और का इंतजार नहीं करना चाहिए, पर हमें स्वयं अपने अन्दर विश्वास की आग को जलाना चाहिए। जब हम अपना विश्वास परमेश्वर में रखेंगे और लगातार प्रार्थना करेंगे, सत्य की मशाल जल उठेगी और हम सब जातियों के लोगों को चेले बनाने के लिए सक्षम होंगे।
सुसमाचार के प्रचारक आत्मिक डाक्टर हैं जो आत्माओं को प्रेम से ठीक करते हैं
हालांकि, एक बहुत महत्वपूर्ण बात है जो हमें नहीं भूलनी चाहिए। परमेश्वर इस पृथ्वी पर धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बचाने के मकसद से आए। इसलिए बाइबल में यीशु की तुलना एक डाक्टर से की गई है।
मत 9:12–13 यह सुनकर यीशु ने उनसे कहा, “वैद्य भले चंगों के लिए नहीं परन्तु बीमारों के लिए आवश्यक है। इसलिए तुम जाकर इसका अर्थ सीख लो: ‘मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूं।’ क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं।”
‘पाप’ नाम की एक जानलेवा बीमारी से हम पीड़ित हैं। हमारी जानलेवा बीमारी का इलाज करने के लिए, मसीह इस पृथ्वी पर प्रेम, बलिदान और निष्ठा के उपाय के साथ आए। अपने बलिदान के प्रेम के द्वारा, वह हमारे बदले खुद पापबलि बने।
अगर हम मसीह के महान प्रेम को महसूस करेंगे, तो हमें जानलेवा बीमारी से गुजर रहे लोगों के पास जाकर, मसीह के उपाय, यानी प्रेम, बलिदान और निष्ठा के साथ उनको बचाना चाहिए।
और ज्यादा समझने के लिए, मैं आपको एक कहानी बताऊंगा। यह कहानी जोसियन राजवंश के एक प्रसिद्ध कोरियाई डाक्टर, हीयो जुन की है।
यह उसके महसूस करने के बाद था कि दवा एक परोपकारी कला थी जिसके कारण वह एक प्रसिद्ध डाक्टर बना।
यह तब हुआ जब हीयो जुन अपने गाव में एक डाक्टर था। एक दिन, एक औरत हांफते हुए उसके पास दौड़कर आई और उसे कोई भी दवाई बनाने के लिए कहा क्योंकि उसकी मां मरनेवाली थी। वह चिंतित था, क्योंकि उसको बीमारी की पहचान पता नहीं थी और वह गलत तरीके से दवाई नहीं बना सकता था। एक डाक्टर के रूप में वह मरीज के जीवन के लिए जिम्मेदार था।
उस समय, अचानक एक आवाज सुनाई दी, “ख्वाकह्यांगजंगकिसान के तीन पैकेज।” आश्चर्य से उसने पीछे मूड़कर देखा। वहां एक बूढ़ा आदमी फटे वस्त्र पहिने खड़ा था; उसने फिर से कहा, “ख्वाकह्यांगजंगकिसान के तीन पैकेज।” जैसे उस बूढ़े आदमी ने कहा, हीयो जुन ने ख्वाकह्यांगजंगकिसान के तीन पैकेज तैयार किए। मरीजा ने दवा ली और उसकी जान बची।
बाद में, एक सास उसके पास आई। उसने तुरंत अपनी उस बहू के लिए दवाई तैयार करने की विनती की जो भयंकर पेट दर्द की पीड़ा में थी। तब हीयो जुन ने फिर से उस बूढे. आदमी की आवाज सुनी, “ख्वाकह्यांगजंगकिसान के तीन पैकेज।” यह सोचकर कि वह बूढ़ा आदमी असाधारण है, हीयो जुन ने ख्वाकह्यांगजंगकिसान के तीन पैकेज उसके लिए तैयार किए। वह दवाई लेकर इस मरीजा की बीमारी भी ठीक हुई और उसके लिए उसने धन्यवाद भी दिया।
कई दिनों के बाद, एक और मरीज अलग प्रकार की बीमारी के साथ हीयो जुन के पास आया, और उसने कहा कि उसका जीवन संकट में है। बिना चूके, वह बूढ़ा आदमी आया, और उसने वही चीज कही, “ख्वाकह्यांगजंगकिसान के तीन पैकेज।” हीयो जुन ने उसे तैयार किया जैसा बूढ़े आदमी ने कहा था। जिन्होंने दवाई के चमत्कार का अनुभव किया, उन्होंने हीयो जुन के पास आकर उसका सम्मान किया।
तब हीयो जुन को आश्चर्य हुआ: ‘क्यों अलग–अलग प्रकार की बीमारियां एक ही प्रकार की दवाई से ठीक हुई हैं?’ वह उस बूढे. आदमी के पास गया और उसे इसका कारण पूछा। तब उस बूढ़े आदमी ने कहा, “तुम्हें क्या लगता है कि दवाई एक मरीज की बीमारी को ठीक करता है? अगर तुम ऐसा सोचते हो, तो तुम में अभी भी समझदारी की कमी है। समझदार मनुष्य अपने मरीज की बीमारी को प्रेम की ऊर्जा से ठीक करता है। मैं जानता हूं कि तुम चिकित्सा अभ्यास में ईमानदार हो। इसलिए मैं तुम से कह रहा हूं।”
फिर हीयो जुन को महसूस हुआ: ‘ऊर्जा जो डाक्टर से निकलती है, मरीज को एक प्रेरणा देती है, और वह प्रेरणा मरीज को एक विश्वास देती है कि वह ठीक हो जाएगा; जो मरीज की देखभाल करता है उसे पूरे हृदय से दवाई बनानी चाहिए और वह दवाई समय पर मरीज को देनी चाहिए, और फिर वह मरीज निश्चित रूप से बीमारी से ठीक हो जाएगा।’
बूढ़े आदमी के ऐसे सबक ने चिकित्सा अभ्यास के लिए उसकी आंख खोली और उसे परोपकारी चिकित्सा कला का विश्व प्रसिद्ध डाक्टर बनाया। हीयो जुन की यह कहानी हमें एक महत्वपूर्ण सबक देती है। हमें यह जांचने की जरूरत है कि सुसमाचार के प्रचार के कार्य में क्या हम परमेश्वर के प्रेम की शक्तिशाली ऊर्जा को समझने में असफल तो नहीं हुए, जैसे हीयो जुन एक बार दवा के पीछे अदृश्य ऊर्जा को पहचानने में असफल हुआ था?
प्रेम बलिदान और निष्ठा है
परमेश्वर प्रेम हैं।(1यूह 4:8) प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।(रो 13:10) मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं कि एक दूसरे से प्रेम रखो।(यूह 13:34) परमेश्वर ने हमारे प्रति महान प्रेम के साथ अपने आपको बलिदान किया; उन्होंने मनुष्य, यानी आत्मिक मरीजों की आत्मिक जानलेवा बीमारी को ठीक किया और उनको बचाया।
हमारे परमेश्वर के समान, जो हमारी आत्माओं के डाक्टर हैं, हमें मनुष्यजाति की आत्मिक बीमारी को ठीक करने के मिशन के लिए शक्ति दी गई है। जब डाक्टर के पास मरीज के प्रति अधिक प्रेम और निष्ठा होगी, मरीज डाक्टर पर विश्वास कर सकता है और उसकी बीमारी ठीक हो सकती है। ऐसा प्रेम और निष्ठा सुसमाचार के प्रचार में चाहिए। प्रेम को बलिदान और निष्ठा के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
परमेश्वर की सभी व्यवस्थाएं हमारे प्रति उनके महान प्रेम, बलिदान और निष्ठा के द्वारा दी गई हैं; यह एक चिकित्सा कला है जिसका अभ्यास सबसे परोपकारी डाक्टर कर सकते हैं। परमेश्वर ने सभी को सुसमाचार के कार्य के लिए वरदान दिया है। हमने परमेश्वर का प्रेम प्राप्त किया है। पवित्र आत्मा के विभिन्न वरदानों के अनुसार, हमें जीवन के जल की बड़ी शक्ति का प्रचार करने के लिए, जो यरूशलेम मंदिर से बहता है, पूरा प्रयास करना चाहिए।
यहेज 47:1–12 फिर वह मुझे भवन के द्वार पर लौटा ले गया; और भवन की डेवढ़ी के नीचे से एक सोता निकलकर पूर्व की ओर बह रहा था। भवन का द्वार तो पूर्वमुखी था, और सोता भवन की दाहिनी ओर और वेदी की दक्षिणी ओर नीचे से निकलता था। तब वह मुझे उत्तर के फाटक से होकर बाहर ले गया, और बाहर बाहर से घुमाकर बाहरी अर्थात् पूर्वमुखी फाटक के पास पहुंचा दिया, और दक्षिणी ओर से जल पसीजकर बह रहा था। जब वह पुरुष हाथ में मापने की डोरी लिए हुए पूर्व की ओर निकला, तब उसने भवन से लेकर, हजार हाथ तक उस सोते को मापा, और मुझे जल में से चलाया, और जल टखनों तक था। उसने फिर हजार हाथ मापकर मुझे जल में से चलाया, और जल घुटनों तक था, फिर और हजार हाथ मापकर मुझे जल में से चलाया, और जल कमर तक था। तब फिर उसने एक हजार हाथ मापे, और ऐसी नदी हो गई जिसके पार मैं न जा सका, क्योंकि जल बढ़कर तैरने के योग्य था; अर्थात् ऐसी नदी थी जिसके पार कोई न जा सकता था... और यह भवन से निकला हुआ सीधा ताल में मिल जाएगा; और उसका जल मीठा हो जाएगा। जहां जहां यह नदी बहे, वहां वहां सब प्रकार के बहुत अण्डे देनेवाले जीवजन्तु जीएंगे और मछलियां भी बहुत हो जाएंगी; क्योंकि इस सोते का जल वहां पहुंचा है, और ताल का जल मीठा हो जाएगा; और जहा कहीं यह नदी पहुंचेगी वहां सब जन्तु जीएंगे...
अगर जल मंदिर में ही रहता है, वह अपना असली मूल्य प्रदर्शित नहीं कर सकता। जब वह जल बहता है और सभी मनुष्यों को भिगोता है, तब वह उनकी आत्माओं को पुनर्जीवित कर सकता है। योग्य नबी और सुसमाचार के प्रचारक के रूप में, आइए हम पृथ्वी की छोर तक जाएं और सब जातियों के लोगों को चेला बनाएं और उन्हें सब बातें जो परमेश्वर ने हमें आज्ञा दी है, मानना सिखाएं।