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परमेश्वर पर ध्यान करो

मैं विश्वास करता हूं कि जब कभी भी नया महिना या नया वर्ष आता है, आप में से हर एक के पास बहुत सारी योजनाएं होती हैं। सभी योजनाओं को सफल बनाने के लिए, हमें अपनी क्षमताओं के बदले परमेश्वर पर निर्भर होना चाहिए। हम बहुत योजनाएं बना सकते हैं, पर जो उन्हें पूरा करते हैं, वह परमेश्वर हैं। हम बाइबल और अपने जीवन के द्वारा इसकी पुष्टि कर सकते हैं।

जड़ के बारे में सोचें जब आप फल को देखें



जब लोग किसी पेड़ को देखते हैं जिसने बहुत फल उत्पन्न किए हों, तब वे दिखाई देने वाले फल और शाखाओं पर ध्यान देते हैं, पर वे उसकी अदृश्य जड़ की भूमिका और प्रभाव के बारे में सोचना भूल जाते हैं। पेड़ को देखते समय, हमें न केवल उसके फल और शाखाओं पर ध्यान करना चाहिए, लेकिन उसकी जड़ के बारे में भी सोचना चाहिए जो पेड़ के अच्छे फल पैदा करने तक पानी और पोषण देती रहती है। भले ही पेड़ की शाखाएं कितनी ही मजबूत क्यों न हों, अगर उसके पास जड़ नहीं है, न तो कोई पेड़ जीवित रह सकता है और न ही फल पैदा कर सकता है।
सुसमाचार के फल पैदा करना भी ऐसा ही है। कभी कभी हम परमेश्वर की अदृश्य शक्ति और मदद पर ध्यान नहीं करते, पर केवल फल पैदा करने वाली दृश्य शाखाओं के रूप में खुद पर ध्यान करते हैं। हम कुछ हासिल करें या नहीं, यह हमारी क्षमताओं और बुद्धि पर नहीं, लेकिन पूरी तरह से परमेश्वर पर निर्भर करता है। इसलिए, हमें हमेशा सारी चीजों में पहले परमेश्वर पर ध्यान करना चाहिए, और यह समझना चाहिए कि परमेश्वर दुनिया का संचालन करते हैं और सभी लोगों और जातियों का नेतृत्व करते हैं। तब हम सुसमाचार के लिए अपनी सभी योजनाओं को पूरा कर सकेंगे और अपने निर्धारित किए हुए लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।

अभी आइए हम दानिय्येल की पुस्तक में राजा नबूकदनेस्सर की घटना के द्वारा, खुद को जांचें और पश्चाताप करें।

नबूकदनेस्सर का स्वप्न



दानिय्येल के दूसरे अध्याय में, राजा नबूकदनेस्सर ने इस दुनिया में होने वाली गंभीर घटनाओं के बारे में स्वप्न देखा था। दानिय्येल के चौथे अध्याय में, उसने फिर से भयानक स्वप्न देखा। वह स्वप्न इसके बारे में था कि उसके साथ क्या होने वाला है। उसके स्वप्न में‚ उसने एक पेड़ देखा। वह पेड़ बहुत बड़ा हो गया और उसकी ऊंचाई स्वर्ग तक पहुंची। उसके पत्ते सुंदर थे और उसके फल बहुत थे‚ और उसमें सभों के लिए भोजन था। उसके नीचे मैदान के सब पशुओं को छाया मिलती थी, और उसकी डालियों में आकाश की सब चिड़ियां बसेरा करती थीं। उसने एक पवित्र पहरुए को स्वर्ग से उतरते और ऊंचे शब्द से यह कहते देखा, “वृक्ष को काट डालो, उसकी डालियों को छांट दो, उसके पत्ते झाड़ दो और उसके फल बिखरा डालो; पशु उसके नीचे से हट जाएं, और चिड़ियें उसकी डालियों पर से उड़ जाएं। तौभी उसके ठूंठ को जड़ समेत भूमि में छोड़ो,… उस पर सात काल बीतें।”

बेबीलोन के ज्योतिषी, तंत्री, कसदी और टोनहे राजा के स्वप्न का अर्थ नहीं बता सके। इसलिए राजा ने दानिय्येल को बुलाया और उसे स्वप्न का अर्थ बताने के लिए कहा(दान 4:4–19) उसकी व्याख्या इस प्रकार थी:

दान 4:20–27 ... हे राजा, वह तू ही है। तू महान् और सामर्थी हो गया, तेरी महिमा बढ़ी और स्वर्ग तक पहुंच गई, और तेरी प्रभुता पृथ्वी की छोर तक फैली है। हे राजा, तू ने जो एक पवित्र पहिरुए को स्वर्ग से उतरते और यह कहते देखा कि वृक्ष को काट डालो और उसका नाश करो, तौभी उसके ठूंठ को जड़ समेत भूमि में छोड़ो, और इसको लोहे और पीतल के बन्धन से बांधकर मैदान की हरी घास के बीच में रहने दो; वह आकाश की ओस से भींगा करे, और उसको मैदान के पशुओं के संग ही भाग मिले; और जब तक सात युग उस पर बीत न चुकें, तब तक उसकी ऐसी ही दशा रहे। हे राजा, इसका फल जो परमप्रधान ने ठान लिया है कि राजा पर घटे, वह यह है, कि तू मनुष्यों के बीच से निकाला जाएगा, और मैदान के पशुओं के संग रहेगा; तू बैलों के समान घास चरेगा और आकाश की ओस से भींगा करेगा; और सात युग तुझ पर बीतेंगे, जब तक कि तू न जान ले कि मनुष्यों के राज्य में परमप्रधान ही प्रभुता करता है, और जिसे चाहे वह उसे दे देता है। उस वृक्ष के ठूंठ को जड़ समेत छोड़ने की आज्ञा जो हुई है, इसका अर्थ यह है कि तेरा राज्य तेरे लिये बना रहेगा; और जब तू जान लेगा कि जगत का प्रभु स्वर्ग ही में है, तब तू फिर से राज्य करने पाएगा...

हम भी परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, पर कभी कभी हम परमेश्वर के प्रभुता करने पर ध्यान नहीं करते; क्योंकि जड़ हमेशा अदृश्य होती है, जबकि उसकी शाखाएं और फल दृश्य हैं।
दानिय्येल ने राजा से कहा कि, वह उस समय फिर से राज्य करने पाएगा जब वह यह जान लेगा कि परमेश्वर जगत के प्रभु हैं, जैसे जड़, भले ही अदृश्य है, पोषण प्रदान करती है। परमेश्वर ने राजा नबूकदनेस्सर को वह स्वप्न इसलिए दिखाया कि परमेश्वर पूरी दुनिया पर प्रभुता करते हैं; वह राजाओं को नियुक्त करते हैं और उन्हें गद्दी से उतारते हैं और राज्यों को मजबूत या कमजोर बनाते हैं।

परमेश्वर का अनुग्रह उसके पास से चला गया जब उसने सोचा, “मैंने यह खुद किया है”



समय गुजर गया और राजा नबूकदनेस्सर भूल गया कि उसने अपने स्वप्न के बारे में दानिय्येल से क्या सुना था। एक वर्ष बाद, एक दिन वह बेबीलोन के राजभवन की छत पर टहल रहा था। जब उसने बेबीलोन की राजधानी को देखा, तब वह अभिमानी हुआ और सोचा, “क्या यह बड़ा बेबीलोन नहीं है, जिसे मैं ही ने अपने बल और सामर्थ्य से बनाया है?” उस समय से, वह गिरने लगा।

दान 4:28–37 ... बारह महीने के बीतने पर जब वह बेबीलोन के राजभवन की छत पर टहल रहा था, तब वह कहने लगा, “क्या यह बड़ा बेबीलोन नहीं है, जिसे मैं ही ने अपने बल और सामर्थ्य से राजनिवास होने को और अपने प्रताप की बड़ाई के लिये बसाया है?” यह वचन राजा के मुंह से निकलने भी न पाया था कि आकाशवाणी हुई, “हे राजा नबूकदनेस्सर, तेरे विषय में यह आज्ञा निकलती है : राज्य तेरे हाथ से निकल गया... उसी घड़ी यह वचन नबूकदनेस्सर के विषय में पूरा हुआ। वह मनुष्यों में से निकाला गया, और बैलों के समान घास चरने लगा, और उसकी देह आकाश की ओस में भीगती थी, यहां तक कि उसके बाल उकाब पक्षियों के परों से और उसके नाखून चिड़ियों के पंजों के समान बढ़ गए। उन दिनों के बीतने पर, मुझ नबूकदनेस्सर ने अपनी आंखें स्वर्ग की ओर उठाईं, और मेरी बुद्धि फिर ज्यों की त्यों हो गई; तब मैं ने परमप्रधान को धन्य कहा, और जो सदा जीवित है उसकी स्तुति और महिमा यह कहकर करने लगा... मेरा प्रताप और मुकुट मुझ पर फिर आ गया। मेरे मन्त्री और प्रधान लोग मुझ से भेंट करने के लिये आने लगे, और मैं अपने राज्य में स्थिर हो गया; और मेरी और अधिक प्रशंसा होने लगी। अब मैं नबूकदनेस्सर स्वर्ग के राजा को सराहता हूं; और उसकी स्तुति और महिमा करता हूं क्योंकि उसके सब काम सच्चे, और उसके सब व्यवहार न्याय के हैं; और जो लोग घमण्ड से चलते हैं, उन्हें वह नीचा कर सकता है।

जैसे ही राजा नबूकदनेस्सर ने सोचा, “मैंने यह खुद किया है,” उसकी सभी बुद्धि नष्ट हो गई, और उसे पशु का दिमाग दिया गया और सिंहासन से निकाला गया। सात सालों तक वह पशुओं के समान रहा, और फिर उसे महसूस हुआ कि मनुष्य कितना कमजोर और निर्बल है, और वह परमेश्वर पर ध्यान करने लगा।
‘मैं खुद पर काबू भी नहीं पा सका। मैंने कैसे यह कहने की हिम्मत की कि मैंने खुद बेबीलोन का बड़ा नगर बसाया है? परमेश्वर ने स्वयं यह सब पूरा किया है।’ जब उसने वह महसूस किया, उसका दिमाग पशु के दिमाग से बदल गया, और उसकी खोई हुई बुद्धि और समझ उसके पास लौट आई; और उसे उसका सिंहासन वापस दिया गया और वह फिर से राज्य का प्रशासन संभालने लगा।
‘मैंने यह खुद किया है।’ यह एक बहुत ही खतरनाक सोच है। अगर आपको खुद पर गर्व हो रहा है, तो आपको महसूस करना चाहिए कि यह शैतान का एक जलता हुआ तीर है जो आपके दिल में चुभ जाता है। जब राजा नबूकदनेस्सर ने सोचा, ‘मैंने यह खुद किया है,’ उसी समय उसकी सारी बुद्धि नष्ट हो गई, और उसे पशु का दिमाग दिया गया, और वह पशुओं की तरह रहा। हमारे पास भी तभी पशु का दिमाग होगा अगर हम परमेश्वर को भूल जाएंगे और सोचेंगे, ‘मैंने यह खुदकिया है।’ हमें हमेशा परमेश्वर पर ध्यान करना चाहिए, ताकि हमारे पास पशु का हृदय न हो।
यह मनोहर है कि हमें सत्य पर गर्व महसूस होता है। हालांकि, हमें अभिमानी नहीं होना चाहिए। यह हमारी क्षमता से नहीं हुआ कि हमने बहुत से खोए हुए सदस्यों को ढूंढ़ा है; जब हम उन्हें वचन का प्रचार करते हैं, हम खुद उन्हें संचालित नहीं कर सकते। जब हम पूरी तरह से परमेश्वर पर निर्भर थे, उन्होंने उन्हें ढूंढ़ने में हमारी मदद की है। हम कमजोर हैं; हम अपनी खुद की आत्मा भी नहीं संभाल सकते।
परमेश्वर को अपने कार्य को पूरा करने के लिए किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति की जरूरत नहीं है। परमेश्वर नबूकदनेस्सर के बदले किसी को भी बेबीलोन के राजा के रूप में चुना सकते थे जो उनके उद्देश्य को पूरा कर सकते थे। जब यहूदा इस्करियोती बारह चेलों में से बाहर निकला गया, क्या उसकी जगह तुरंत मत्तियाह नाम के दूसरे चेले ने नहीं ली?(प्रे 1:15–26) परमेश्वर ने हमें छह अरब लोगों में से चुना है। यह इसलिए नहीं है कि इस दुनिया में हमारे अलावा कोई नहीं है। अगर 1,44,000 में से कोई बाहर निकलता है, तो उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति ले लेगा।
परमेश्वर सब पर शासन करते हैं; वह हम पर, हमारे घर और चर्च पर शासन करते हैं। जब हम उसे समझेंगे, तब हम और हमारा परिवार और चर्च सही क्रम में हो सकते हैं। राजा नबूकदनेस्सर के उसे जानने के बाद, उसका राज्य उसे वापस दिया गया। परमेश्वर ने कहा, “छोटे से छोटा एक हजार हो जाएगा और सब से दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा।”(यश 60:22) भले ही हम कमजोर और छोटे हैं, हम विश्वास करते हैं कि यह भविष्यवाणी पूरी होगी, क्योंकि हम परमेश्वर पर भरोसा करते हैं।

मूसा कनान में प्रवेश नहीं कर पाया जब उसने सोचा, ‘मैंने यह खुद किया है’



पुराने नियम में, मूसा को एक महान नबी के रूप में माना जाता था जिसने इस्राएलियों को मिस्र से बाहर निकाला। लेकिन, वह कनान के करीब होकर भी उसमें प्रवेश नहीं कर पाया। यह इसलिए था क्योंकि उसने सोचा, ‘मैंने यह खुद किया है,’ और ऐसे शब्द को अपने मुंह से बाहर आने दिया, जैसे राजा नबूकदनेस्सर ने किया।

गिन 20:2–13 वहां मण्डली के लोगों के लिये पानी न मिला; इसलिये वे मूसा और हारून के विरुद्ध इकट्ठे हुए। और लोग यह कहकर मूसा से झगड़ने लगे, “भला होता कि हम उस समय ही मर गए होते जब हमारे भाई यहोवा के सामने मर गए! और तुम यहोवा की मण्डली को इस जंगल में क्यों ले आए हो कि हम अपने पशुओं समेत यहां मर जाएं?... तब यहोवा ने मूसा से कहा, “उस लाठी को ले, और तू अपने भाई हारून समेत मण्डली को इकट्ठा करके उनके देखते उस चट्टान से बातें कर, तब वह अपना जल देगी; इस प्रकार से तू चट्टान में से उनके लिये जल निकाल कर मण्डली के लोगों और उनके पशुओं को पिला।”... मूसा और हारून ने मण्डली को उस चट्टान के सामने इकट्ठा किया, तब मूसा ने उस से कहा, “हे दंगा करनेवालो, सुनो; क्या हम को इस चट्टान में से तुम्हारे लिये जल निकालना होगा?” तब मूसा ने हाथ उठाकर लाठी चट्टान पर दो बार मारी; और उसमें से बहुत पानी फूट निकला, और मण्डली के लोग अपने पशुओं समेत पीने लगे। परन्तु मूसा और हारून से यहोवा ने कहा, “तुम ने जो मुझ पर विश्वास नहीं किया, और मुझे इस्राएलियों की दृष्टि में पवित्र नहीं ठहराया, इसलिये तुम इस मण्डली को उस देश में पहुंचाने न पाओगे जिसे मैं ने उन्हें दिया है।”...

इस्राएली मूसा और हारून के विरुद्ध कुड़कुड़ाए क्योंकि वहां पानी नहीं था। तब मूसा, जिसने चालीस सालों तक उनकी शिकायतें सुनी थीं, और बर्दाश्त नहीं कर सका। वह क्रोधित हुआ, और उसने अपने जीवन में यह कहते हुए सबसे बड़ी गलती की, “क्या हम को इस चट्टान में से तुम्हारे लिये जल निकालना होगा?”
वह परमेश्वर थे जो उनको पानी दे सकते थे। हालांकि, मूसा ने ऐसे बात की जैसे वह और उसका भाई हारून उन्हें पानी दे सकते थे। तब परमेश्वर ने मूसा को डांटा, क्योंकि वह चालीस वर्षों तक परमेश्वर के लिए कार्य करते हुए भी इस प्रकार बात की। राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी महिमा, अधिकार और सब कुछ खोया, और पशुओं की तरह रहा जब वह भूल गया कि परमेश्वर ने कार्य किया। अगर हम सोचेंगे, ‘मैंने स्वयं यह किया है,’ तो हम अपने आप पर ऐसा ही दुर्भाग्य लाएंगे। इसलिए परमेश्वर हमें ऐसा न सोचने की सख्ती से चेतावनी देते हैं। अंत में, मूसा और हारून कनान में प्रवेश नहीं कर सके और जंगल में मर गए।

गिन 27:12–14 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, “इस अबारीम नामक पर्वत के ऊपर चढ़के उस देश को देख ले जिसे मैं ने इस्राएलियों को दिया है। और जब तू उसको देख लेगा, तब अपने भाई हारून के समान तू भी अपने लोगों में जा मिलेगा, क्योंकि सीन नामक जंगल में तुम दोनों ने मण्डली के झगड़ने के समय मेरी आज्ञा को तोड़कर मुझ से बलवा किया, और मुझे सोते के पास उनकी दृष्टि में पवित्र नहीं ठहराया।”...

परमेश्वर को भूलकर, उन्होंने कहा, ‘मैंने यह खुद किया है।’ यही कारण था कि वे कनान देश में प्रवेश करने के लिए अयोग्य ठहराए गए। यह हमारे लिए एक चेतावनी है जो स्वर्गीय कनान में प्रवेश करना चाहते हैं।
मूसा या राजा नबूकदनेस्सर के दिनों में, उनकी चेतावनी या शिक्षा के लिए कोई भी ऐतिहासिक घटना नहीं थी। अभी, हम बाइबल के द्वारा बहुत सारे उदाहरण अपने लिए चेतावनी के रूप में देख सकते हैं। जब राजा नबूकदनेस्सर ने कहा, “मैंने यह खुद किया है”, तब परमेश्वर का अनुग्रह उसके पास से चला गया। मूसा कनान में प्रवेश नहीं कर सका जब उसने कहा, “हम को तुम्हारे लिए जल निकालना होगा।” ये बातें इस युग के लोगों के लिए चेतावनी और शिक्षा के रूप में लिखी गई हैं।

सिर्फ परमेश्वर को महिमा दो



यह पृथ्वी एक कुठाली की तरह है जहां परमेश्वर अपने राज–पदधारी याजकों को शिक्षित करते हैं और परखते हैं। सभी युग, इतिहास, बहुत संबंध, और हमारे चारों ओर की परिस्थितियां... इन सभी बातों को इकट्ठा करके, हमें खुद को देखना चाहिए। तब हम समझ सकेंगे कि परमेश्वर ने, जो हमारी कमजोरी जानते हैं, हम में से हर एक को सबसे उचित परिस्थितियां दी हैं और अंत में हमें आशीष देने के लिए सभी मार्गों में हमारा नेतृत्व किया है।
हमें प्रार्थना में परमेश्वर से हमेशा हमारे साथ रहने के लिए लगातार कहना चाहिए। परमेश्वर ने हम, छोटे और कमजोर लोगों को चुना है और हमें विभिन्न परिस्थितियां दी हैं, ताकि हम स्वच्छ और शुद्ध हो सकें। इसे याद रखकर, हमें हमेशा आनन्दित रहना चाहिए और सब बातों में परमेश्वर को धन्यवाद और प्रशंसा और महिमा देनी चाहिए।

यिर्म 13:15–17 देखो, और कान लगाओ, गर्व मत करो, क्योंकि यहोवा ने यों कहा है। अपने परमेश्वर यहोवा की बड़ाई करो, इससे पहले कि वह अन्धकार लाए और तुम्हारे पांव अन्धेरे पहाड़ों पर ठोकर खाएं, और जब तुम प्रकाश का आसरा देखो, तब वह उसको मृत्यु की छाया में बदल दे और उसे घोर अन्धकार बना दे। पर यदि तुम इसे न सुनो, तो मैं अकेले में तुम्हारे गर्व के कारण रोऊंगा, और मेरी आंखों से आंसुओं की धारा बहती रहेगी, क्योंकि यहोवा की भेड़ें बंधुआ कर ली गई हैं।

परमेश्वर दुखी होते हैं और उन लोगों के लिए रोते हैं जो खुद को महिमा देने के कारण नष्ट हो रहे हैं। हमें सिर्फ परमेश्वर को महिमा देनी चाहिए। वह परमेश्वर हैं जो सुसमाचार का कार्य पूरा करते हैं। हम परमेश्वर के द्वारा सुसमाचार के सेवकों के रूप में बुलाए गए हैं; हम सिर्फ परमेश्वर का पालन करते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि उनकी आज्ञा हमें अनन्त जीवन की ओर ले जाएगी।
परमेश्वर जो पूरे ब्रह्मांड के अधिकारी हैं, क्यों हमें, जो कुछ भी नहीं हैं, परमेश्वर को महिमा देने की आज्ञा देते हैं? यह हमारे लिए है। अभिमान विनाश की ओर ले जाता है। स्वर्ग का राज्य सिर्फ नम्र लोगों के लिए है जो परमेश्वर को महिमा देते हैं।
जब हमने कुछ किया हो, चाहे वह छोटी बात हो या बड़ी, हमें यह महसूस करना चाहिए कि वह परमेश्वर की शक्ति के द्वारा पूरा हुआ है और परमेश्वर को महिमा देनी चाहिए। भजन संहिता में हम अपने पूर्वज दाऊद को हमेशा परमेश्वर को महिमा और प्रशंसा देते हुए देख सकते हैं।

मनुष्य जो परमेश्वर के मन के अनुसार है



भज 121:1–2 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्त्ता है।

भज 115:1–18 हे यहोवा, हमारी नहीं, हमारी नहीं, वरन् अपने ही नाम की महिमा, अपनी करुणा और सच्चाई के निमित्त कर... हे यहोवा के डरवैयो, यहोवा पर भरोसा रखो! तुम्हारा सहायक और ढाल वही है। यहोवा ने हम को स्मरण किया है; वह आशीष देगा; वह इस्राएल के घराने को आशीष देगा; वह हारून के घरानेको आशीष देगा। क्या छोटे क्या बड़े जितने यहोवा के डरवैये हैं, वह उन्हें आशीष देगा... परन्तु हम लोग याह को अब से लेकर सर्वदा तक धन्य कहते रहेंगे। याह की स्तुति करो!


परमेश्वर ने दाऊद से प्रेम किया क्योंकि उन्होंने उसके नम्र हृदय को देखा। दाऊद हमेशा परमेश्वर पर ध्यान करता था और उन पर भरोसा करता था और सिर्फ उनको महिमा देता था। इसी कारण वह हर युद्ध को जीत सका और परमेश्वर से यह मंजूरी ले सका कि वह परमेश्वर के मन के अनुसार है।
दाऊद की तरह, जब हम हमेशा परमेश्वर पर ध्यान करते हैं और सारी महिमा उन्हें देते हैं, तब हम सामर्थी बन सकते हैं और सभी लोगों से अधिक महान हो सकते हैं; और सत्य की ज्योति जिसका हम प्रचार करते हैं, और अधिक उज्ज्वल चमक बिखेरेगी।
हम अनजाने में मन में अभिमानी हो सकते हैं; हम यह सोचने के लिए प्रवृत्त होते हैं कि हम फल उत्पन्न करते हैं क्योंकि हम सक्षम हैं, और हमारा कुछ कर्तव्य है क्योंकि हम श्रेष्ठ हैं। यह अभिमानी मन है जो राजा नबूकदनेस्सर और मूसा का था। हालांकि, अगर हम हमेशा आनन्दित रहेंगे और परमेश्वर को हमें अपने पवित्र लोगों के रूप में चुनने के लिए धन्यवाद देंगे, तो हम कभी भी अभिमानी नहीं बनेंगे। हम परमेश्वर के बिना कुछ भी नहीं कर सकते। परमेश्वर हमारी ज्योति हैं। भले ही हमारे पास आंखें हैं, ज्योति के बिना हम नहीं देख सकते, और भले ही हमारे पास पर हैं, हम सीधे नहीं चल सकते।
जब हम परमेश्वर पर ध्यान करेंगे, हमारा विश्वास बढ़ेगा और नई वाचा के सत्य की ज्योति और अधिक चमकेगी, ताकि हमारे आत्मिक परिवार के सभी भाई और बहनें सत्य और प्रेम में एक हों। अगर हम सिर्फ खुद पर ध्यान करेंगे, तो परमेश्वर हमारे बीच नहीं रहेंगे, और हम एक नहीं बनेंगे, यानी हम 1,44,000 के एक समूह में नहीं, पर अलग अलग रहेंगे।
बाइबल हमें सिखाती है कि हम सामर्थी बनते हैं जब हम महसूस करते हैं कि परमेश्वर सारी चीजों का संचालन करते हैं। आइए हम हमेशा परमेश्वर पर ध्यान करें और अपने पिता और माता के वचनों के अनुसार सुसमाचार के कार्य को अनुग्रहपूर्वक पूरा करें।