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जीवन का सत्यपिता परमेश्वर और माता परमेश्वर और नई वाचा के बारे में बाइबल में वर्णित शिक्षाएं हैंजीवन का सत्य

टेक्स्ट उपदेशटेक्स्ट उपदेश परमेश्नर का मार्ग सिद्ध है; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है। भजन संहिता 18:30टेक्स्ट उपदेश

ज्योति और अंधकार

समय बिना रुके चलता रहता है जब हम सोते हैं, काम करते हैं, आराम लेते हैं और खाते हैं; चाहे हम कुछ भी करें, समय बीतता जाता है। चूंकि हम समय को बहता हुआ नहीं देख सकते, इसलिए हमने एक उपकरण का आविष्कार किया है, जिससे हम दिखाई न देने वाले समय को देख सकते हैं। वह घड़ी है। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। चूंकि हम दिखाई देनेवाली शारीरिक दुनिया में रहते हैं, इसलिए हम आत्मिक दुनिया की चीजों को देख या महसूस नहीं कर सकते। जैसे दिखाई न देने वाले समय के बहाव को मापने और देखने के लिए एक घड़ी बनाई गई, ठीक वैसे ही हमें उस आत्मिक दुनिया को दिखाने के लिए जिसे हम देख नहीं सकते, परमेश्वर ने एक उपकरण बनाया है। वह बाइबल है। कौन स्वर्ग जाएगा और कौ...

स्वर्गीय मूल्य और स्वर्गीय गणना–पद्धति

दुनिया में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का मूल्य गिनने का अपना मानक और तरीका होता है। कुछ लोग भौतिक चीजों या धन–दौलत को ज्यादा मूल्य देते हैं, कुछ लोग ज्ञान को ज्यादा मूल्य देते हैं, और कुछ लोग मनोरंजन या शौक को ज्यादा मूल्य देते हैं। दुनिया के लोगों के विपरीत, हम अदृश्य और अनन्त चीजों की आशा करते हैं। चूंकि हम “स्वर्ग के नागरिक” हैं, इसलिए हमें ‘लोग इसके बारे में क्या सोचेंगे?’ सोचने के बजाय ऐसा सोचना चाहिए कि, ‘परमेश्वर इसके बारे में क्या सोचेंगे?’ इस तरह हमें स्वर्गीय मानकों को प्राथमिकता देने की जरूरत है(2कुर 4:18; फिलि 3:20)। स्वर्गीय मानकों के अनुसार, हम सभी मूल्यवान हैं। सड़क के किनारे लुढ़कने वाले एक पत्थर के ट...

700 करोड़ लोगों को प्रचार करना और माता का प्रोत्साहन

हर कोई अपने आत्मिक घर की कमी महसूस करता है जो खुशी और हर्ष से भरपूर रहता है, और वहां जाने की कामना करता है। लेकिन स्वर्ग जाने के लिए हमें पहले पृथ्वी पर अपने दिए हुए जीवन के सही मार्ग पर पूरी तरह चलना चाहिए। जिस प्रकार इस्राएली 40 वर्ष तक जंगल के मार्ग पर चलने के बाद ही कनान देश में पहुंच सके, उसी प्रकार हम तभी स्वर्ग में पहुंच सकेंगे जब हम आत्मिक जंगल, यानी विश्वास के मार्ग पर पूरी तरह चलेंगे जिस पर पिता चले और माता आज चल रही हैं। हम अपने पापों के कारण इस पृथ्वी पर निकाल दिए गए हैं। अपनी पापी संतानों को स्वर्ग के राज्य में लौटाने के लिए, परमेश्वर ने उनके स्वर्ग वापस जाने की यात्रा में “प्रचार” नामक एक प्रक्रिया को ...