한국어 English 日本語 中文 Deutsch Español Tiếng Việt Português Русский लॉग इनरजिस्टर

लॉग इन

आपका स्वागत है

Thank you for visiting the World Mission Society Church of God website.

You can log on to access the Members Only area of the website.
लॉग इन
आईडी
पासवर्ड

क्या पासवर्ड भूल गए है? / रजिस्टर

ASEZ विश्वविद्यालय छात्र स्वयंसेवा दल मानवाधिकार दिवस संवर्धन अभियान आयोजित किया गया

  • देश | कोरिया
  • तिथि | 06/दिसंबर/2018
ⓒ 2018 WATV
10 दिसंबर, संयुक्त राष्ट्र के द्वारा स्थापित मानवाधिकार दिवस है। 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति द्वारा मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा की स्वीकृति के लिए इस तारीख को चुना गया था। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राज्य इस दिन को मनाते हैं और मानवाधिकारों में सुधार के लिए प्रयास करते हैं।

मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की 70वीं वर्षगांठ की स्मृति में, ASEZ चर्च ऑफ गॉड वर्ल्ड मिशन सोसाइटी विश्वविद्यालय छात्र स्वयंसेवा दल ने 6 से 13 दिसंबर तक 14 देशों में जैसे कि कोरिया, अमेरिका, दक्षिण अफ्रिका का गणराज्य, और यूक्रेन में 146 कैंपसों में मानवाधिकार दिवस संर्वधन अभियान आयोजित किया। यह मानवाधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए था ताकि हर एक को गरिमा, स्वतंत्रता और समानता जैसे बुनियादी मानवाधिकारों की गारंटी दी जा सके, और मानवजाति के प्रति प्रेम को महसूस कर सके जिसका मसीह ने नमूना दिखाया है।

ASEZ सदस्यों ने अपने कैंपसों में विज्ञापन बूथ और पैनल स्थापित किए, और नागरिकों के साथ साथ विश्वविद्यालय के छात्रों, प्रोफेसर, और स्कूल के कर्मचारियों को मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा और मानवाधिकारों की अवधारणा और महत्व की मुख्य बातों को जानने दिया। उन्होंने मानवाधिकार, नागरिक और राजनीतिक अधिकार, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार और कर्तव्यों को विस्तार से बताया जो हमें इन अधिकारों का आनन्द लेने के लिए करना चाहिए। डोंग-आ विश्वविद्यालय से विद्यार्थी इ जी युन ने प्रस्तुति सुनने के बाद कहा, “यह सीखना अर्थपूर्ण था कि मानवाधिकार जिसका आज मैं आनन्द लेती हूं, वह वास्तव में इतने अधिक प्रयासों के बाद प्राप्त होता है।”

ⓒ 2018 WATV
यह कॉलेजों द्वारा भी अच्छी तरह से प्राप्त किया गया। यूक्रेन के कीव में नेशनल शैक्षणिक ड्रैगोमनोव विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष, ग्रीगोरी तोरबीन ने कहा, “मैं छात्रों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों के लिए मानवाधिकारों की गारंटी के लिए और अधिक प्रयास करूंगा।” उन्होंने कैंपस में ASEZ अभियान की सराहना की और मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का समर्थन किया। गाचन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय भाषा केंद्र के प्रोफेसर रेक्षल लीन स्टॉट्स ने ASEZ की प्रशंसा करते हुए कहा, “अनेक लोग अभी भी मानवाधिकारों के उल्लंघन से पीड़ित हैं। यदि विश्वविद्यालय के छात्र बहुत सी जगहों में मानवाधिकारों के बारे में जागरूकता को बढ़ाएंगे, तो संसार में सकारात्मक बदलाव होगा।”

मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए ASEZ के प्रयास केवल अभियानों तक ही सीमित नहीं हैं। वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए SDGs(सतत विकास लक्ष्य) के नारे ‘कोई भी अकेला न छोड़ा जाना’ को लागू करने के लिए सेमिनार, फोरम और स्वयंसेवा कार्य जैसे विभिन्न गतिविधियां कर रहा है। 16 नवंबर को, 100 से अधिक ASEZ सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के आयोजन में भाग लिया, और मानवाधिकारों, कल्याण और पर्यावरण में भेदभाव रहित संसार बनाने का आग्रह किया। हाल ही में, ASEZ ने दुनिया की सुरक्षा और खुशी के लिए एक वैश्विक परियोजना ‘Reduce Crime Together(एकसाथ अपराध कम करना)’ शुरू किया। उसके प्रयासों के भाग के रूप में, वह ‘मदर्स स्ट्रीट’ पर्यावरण सफाई, सार्वजनिक आदेश अनुपालन अभियान और अपराध निवारण प्रणालियों को स्थापित करने के लिए वैश्विक साझेदारी बनाता है।

मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को घोषित करके अब 70 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन वैश्विक समाज अब भी भेदभाव, संघर्ष, और विवादों से पीड़ित है। ASEZ माता के प्रेम से 2019 में मानवाधिकार और कल्याण की संरक्षण पर काम करना जारी रखेगा।


मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा:
10 दिसंबर, 1948 में पेरिस में 3रे संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानवाधिकार की सार्वभौम घोषणा को घोषित किया गया। चूंकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, मानवाधिकारों का गंभीर रूप से उल्लंघन किया गया, तो विश्व समुदाय के भीतर सहमति थी कि उन्हें मौलिक मानवाधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता है। 187 अधिकारिक बैठकों और 1,400 से अधिक चर्चाओं के बाद, सदस्य राज्यों ने दस्तावेज पर सहमति व्यक्त की।
घोषणा में एक प्रस्तावना एवं 30 अनुच्छेद हैं। वह जिसका अनुवाद 250 से अधिक भाषाओं किया गया है, अंतरराष्ट्रीय संधियों के मानक के रूप में कार्य कर रहा है। मानवाधिकार से जुड़े संगठनों और कानूनों की स्थापना पर उसका बहुत प्रभाव है।
चर्च का परिचय वीडियो
CLOSE