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तीन बार में सात पर्व

अख़मीरी रोटी का पर्व मसीह के क्रूस पर दुख को दर्शाता है। वह पवित्र साल के अनुसार 15 जनवरी को मनाया जाता है।(लैव23:6) चर्च ऑफ गॉड दूसरी बार आने वाले आन सांग होंग की शिक्षा के अनुसार 15 जनवरी को अख़मीरी रोटी का पर्व मना रहा है।


अख़मीरी रोटी के पर्व का उद्गम

जो कष्ट जिसे इस्राएलियों ने फसह मनाने के बाद मिस्र से बिदा करके लाल समुद्र को पार करने तक उठाया वह अख़मीरी रोटी के पर्व की शुरूआत हुआ। उस समय जैसे ही मिस्र के राजा फिरौन ने इस्राएलियों को मुक्त किया था, उसका हृदय तुरंत बदल गया। उन्हें मिस्र में लौटा लेने के लिए छ: सौ चुने हुए रथ और मिस्र के सेना अधिकारियों और अन्य सब रथों को साथ लेकर फिरौन स्वयं उनका पीछा करने लगा। जैसे ही फिरौन निकट आया, इस्राएली अत्यन्त डर गए, अत: वे चिल्लाकर यहोवा की दुहाई देने लगे और मूसा को शिकायत करने लगे। उस समय यहोवा परमेश्वर ने मूसा की लाठी के द्वारा लाल समुद्र को सूखी भूमि के जैसा दो भागों में विभाजित किया। इससे सुरक्षित रूप से वे सूखी भूमि से होकर गए। यह लिखा है कि केवल पुरुषों की संख्या लगभग छ: लाख थी, तब कितने बच्चे और कितनी स्त्रियां उनमें हुए होंगे? परमेश्वर ने उनके पीछा करने को देर करने के लिए बादल और अग्नि के खम्भे के साथ मिस्रियों के सैनिकों से इस्राएलियों को अलग किया। हम कल्पना कर सकते हैं कि उस स्थिति में भाग जाने वालों के मन कितना हड़बड़िया हुए होंगे, और भगोड़े होकर घबरा हुआ मन था। उसी स्थिति में ये सब कठिनाइयां और मुश्किल अख़मीरी रोटी के पर्व का उद्गम थे। (निर्ग14:1-31)


अख़मीरी रोटी के पर्व की विधियां

पुराने नियम के समय परमेश्वर ने अख़मीरी रोटी(ख़मीर रहित बनाई रोटी) और कड़वे साग-पात उन्हें खाने के लिए दिया कि वे उन कठिनाइयों को स्मरण करें; इसलिए अख़मीरी रोटी दुख की रोटी कहलाती थी।(व्य16:3) यह एक भविष्यवाणी है जो दिखाती है कि यीशु क्रूस पर लटकाए जाने से दुख उठाएगा। नए नियम में हम उस दिन उपवास करने के द्वारा मसीह के दुख में सहभागी होते हैं।

मर2:20 परन्तु वे दिन आएंगे जब दूल्हा उनसे अलग किया जाएगा, और तब उस दिन वे उपवास करेंगे।


अख़मीरी रोटी के पर्व की भविष्यवाणी और पूर्णता

अख़मीरी रोटी का पर्व दुख का पर्व है, जो यीशु के क्रूस पर दुख को दर्शाता है। इस्राएलियों का लाल समुद्र में जाना यीशु मसीह को कब्र में जाने को दर्शाता है, और लाल समुद्र से अवतरण यीशु के पुनरुत्थान को दर्शाता है। ऐसा अर्थ बपतिस्मा में जिसे आज हम लेते हैं, विवक्षित किया जाता है। जिस प्रकार मूसा ने अख़मीरी रोटी के पर्व में मिस्र से सीनै जंगल में सांसारिक इस्राएलियों की अगुवाई की, उस प्रकार यीशु ने इस पर्व में क्रूस उठाने के द्वारा पापों के संसार से जो ‘मिस्र’ को दर्शाता है, विश्वास के जंगल में आत्मिक इस्राएलियों की अगुवाई की।

जो भी विश्वास करके बपतिस्मा लेता है वह लाल समुद्र से होकर विश्वास से जंगल में प्रवेश करने वाला है। अख़मीरी रोटी का पर्व मनाने का कारण है कि हम मसीह के क्रूस पर दुख में सहभागी रहें, जिसके द्वारा हमें भावी कठिनाइयों और उत्पीड़नों जिनका सामना हमें करना है, झेलने की शक्ति परमेश्वर से मिल सकती है।(लूक22:43-44)