पिन्तेकुस्त के दिन की प्रार्थना अवधि के दौरान कोरिया के राजधानी क्षेत्र में 6 नए मन्दिरों के उद्घाटनों के लिए आराधनाएं हुईं। 19 मई को सियोल के सांगे व वलग्ये चर्च से शुरू करके, सियोल के बोंगछन चर्च(20 तारीख), सियोल के मिआ व ओगुम चर्च(21 तारीख) और ग्यंगी के ग्वांजु के ओफो चर्च(22 तारीख) ने परमेश्वर को अपने नए मन्दिर समर्पित करने की खुशी पाई। 2015 में अब तक 22 नए मन्दिरों के उद्घाटन समारोह आयोजित किए गए।
माता ने पिता परमेश्वर को धन्यवाद दिया, जिन्होंने नए मन्दिरों के उद्घाटन समारोहों का आयोजन करने की अनुमति पर्व के समय में दी जब परमेश्वर बहुत आशीषें देते हैं, और उन्होंने प्रार्थना की कि सभी संतान पिछली बरसात की पवित्र आत्मा की आशीष पाएं। उन्होंने सदस्यों को प्रार्थना के महत्व के प्रति जागृत किया और बार–बार उनसे निवेदन किया कि, “पवित्र आत्मा को बहुतायत में पाने के लिए विश्वास के साथ अधिक तीव्रता से प्रार्थना कीजिए और पवित्र आत्मा की शक्ति के द्वारा साहस के साथ सुसमाचार का प्रचार करके नए मन्दिरों को अच्छे फलों से भर दीजिए।” 
ⓒ 2015 WATV
प्रत्येक उद्घाटन समारोह में प्रधान पादरी किम जू चिअल ने इस युग के चर्च के मिशन पर जोर दिया। इस आधार–वाक्य के साथ कि “परमेश्वर को ढूंढ़ना” उद्धार पाने की आधारभूत शर्त है(आम 5:4), उन्होंने शिक्षा दी कि, “बाइबल गवाही देती है कि नई वाचा का पालन करने वाले लोग परमेश्वर को सही ढंग से जानने वाले लोग हैं(यिर्म 31:31–34), तो उन लोगों को जो उद्धार की बाट जोहते हुए भी अनन्त जीवन के स्रोत, माता परमेश्वर को नहीं जानते, नई वाचा का प्रचार करना और स्वर्गीय माता का एहसास कराना चर्च की भूमिका है। जब हम सभी देशों में स्वर्गीय यरूशलेम माता की ज्योति चमकाएं, तब आत्मिक अंधकार दूर हट जाएगा। बाइबल की सभी भविष्यवाणियां पूरी होंगी। मुझे आशा है कि नए मन्दिरों का पूरे संसार के लोगों को स्वर्गीय माता की ओर लाने के महान कार्य के लिए इस्तेमाल किया जाए(रोम 1:18–20; 2थिस 1:7–10; उत 1:26–27; गल 4:26; प्रक 22:17)।”

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प्रत्येक चर्च के सदस्यों ने पड़ोसी चर्चों के सदस्यों के साथ नए मन्दिरों को समर्पित करने की खुशियां साझा कीं और कहा, “यह बहुत अर्थपूर्ण और धन्यवाद की बात है कि पिन्तेकुस्त के दिन पवित्र आत्मा के साथ हमने नए मन्दिर के उद्घाटन के अवसर पर आराधना करने की आशीष पाई है।” सदस्यों ने नए मन्दिरों को माता की गोद के समान स्नेह व प्रेम से भरपूर बनाने का संकल्प किया, ताकि बहुत सी आत्माएं शांति में निवास कर सकें।
सियोल का सांगे चर्च सुराक पर्वत और जुंगरांग नदी के पास स्थित होने से प्रकृति के साथ सामंजस्य रखता है। यह सिर्फ सदस्यों के लिए नहीं, बल्कि निवासियों के लिए भी एक आरामदायक जगह बना है। सियोल का वलग्ये चर्च जिसका बाह्य रूप धातु से बना है, साफ–स्वच्छ दिखता है। पहली मंजिल पर पुस्तक कैफे एक ऐसी जगह है जहां चर्च के सदस्य अपने पड़ोसियों के साथ संवाद कर सकते हैं। सियोल का बोंगछन चर्च सियोल के ग्वानआक के छंगरिम–डोंग में एक आवासीय क्षेत्र में स्थित है। आइवरी रंग की इमारत ज्यादा आरामदेह लग रही है। सियोल का मिआ चर्च सियोल के गांगबुक के मिआ–डोंग में यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। सियोल का ओगुम चर्च जो दो तल के तहखाने सहित तीन मंजिला इमारत है, सड़कों पर छोटी व निम्न इमारतों के साथ अच्छा तालमेल बिठाता है। ग्यंगी के ग्वांजु का ओफो चर्च एक शहरी–ग्रामीण क्षेत्र के मिश्रित रूप के शहर ग्वांजु में स्थित है। चूंकि यह ग्वांजु के एक विशाल क्षेत्र में स्थापित किया गया है, सुसमाचार के कार्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने की उम्मीद है। 
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