माता का हृदय और सिय्योन

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यदि सिय्योन में सत्य में हमारा बपतिस्मा हुआ है, तो हमें उन चीजों को उतारना चाहिए जो हमने संसार में सीखीं और नये मनुष्यत्व में फिर से जन्म लेना चाहिए।

आइए हम विचार करें कि कैसे हम एक दूसरे को उस्का सकते हैं और माता के विचार और प्रेम के द्वारा संयुक्त हो सकते हैं ताकि नए सदस्यों को सिय्योन की रीतियों के अनुरूप बनते हुए जो संसार से अलग हैं कठिन समय बिताना न पड़े।

(उदाहरण: शरीर के अंगों की एकता का महत्व)
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