한국어 English 日本語 中文 Deutsch Español Tiếng Việt Português Русский लॉग इनरजिस्टर

लॉग इन

आपका स्वागत है

Thank you for visiting the World Mission Society Church of God website.

You can log on to access the Members Only area of the website.
लॉग इन
आईडी
पासवर्ड

क्या पासवर्ड भूल गए है? / रजिस्टर

टेक्स्ट उपदेशों को प्रिंट करना या उसका प्रेषण करना निषेध है। कृपया जो भी आपने एहसास प्राप्त किया, उसे आपके मन में रखिए और उसकी सिय्योन की सुगंध दूसरों के साथ बांटिए।

हमारे घर के मालिक कौन हैं?

एक घर अपने मालिक की गरिमा या शैली को पूरी तरह से दिखाता है। जब आप अन्य लोगों के घरों में जाते हैं, तो उनमें से कुछ घर एक हार्दिक और दोस्ताना माहौल पेश करता है, लेकिन दूसरा ठंडा और अमित्र वातावरण पेश करता है। बस कुछ ही मिनटों के लिए घर में रहकर, आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि घर के मालिक किस तरह के व्यक्ति हैं कि क्या वह आलसी हैं या मेहनती, या क्या वह हर चीज के बारे में शांतचित्त हैं या सख्त। तो, एक घर ऐसी जगह है जो अपने मालिक के आंतरिक रूप को जैसा है वैसा ही प्रकट करता है।

फिर, आइए हम इस बारे में सोचें कि हमारे घर के मालिक कौन हैं। हम सब पवित्र आत्मा का एक मंदिर हैं, जहां परमेश्वर निवास करते हैं(1कुर 6:19)। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि परमेश्वर हमारी आत्माओं के मालिक हैं, हमारे घर के मालिक हैं, और हमारे चर्च के मालिक हैं। अगर हमें इस बारे में दृढ़ विश्वास नहीं है कि हमारे घर के मालिक कौन हैं, तो हम विश्वास के जीवन में विभिन्न परीक्षाओं में पड़ जाते हैं। लेकिन, जब हम सही ढंग से समझते हैं कि हमारे घर के मालिक कौन हैं, तो हम देख सकते हैं कि परमेश्वर हमारे हाथों को पकड़े हुए थे और हमें एक अटल विश्वास की ओर अगुवाई कर रहे हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, हम, सिय्योन के लोगों को मजबूत विश्वास के साथ स्वर्ग के अनंत राज्य की ओर ऊर्जावान कदम उठाने चाहिए।

परमेश्वर-केन्द्रित विश्वास


परमेश्वर ने कहा, “अपने पिता और अपनी माता का आदर करना”(निर्ग 20:12)। उन्होंने हमें अपने शारीरिक माता-पिता के साथ-साथ अपने आत्मिक माता-पिता का आदर करना सिखाया, और हमें परमेश्वर का भय मानते हुए अनुग्रहपूर्ण जीवन जीने को कहा।

व्य 4:9-10 “यह अत्यन्त आवश्यक है कि तुम अपने विषय में सचेत रहो, और अपने मन की बड़ी चौकसी करो, कहीं ऐसा न हो कि जो जो बातें तुम ने अपनी आंखों से देखीं उनको भूल जाओ, और वह जीवन भर के लिये तुम्हारे मन से जाती रहें; किन्तु तुम उन्हें अपने बेटों पोतों को सिखाना... जब यहोवा ने मुझ से कहा था, ‘उन लोगों को मेरे पास इकट्ठा कर कि मैं उन्हें अपने वचन सुनाऊं, जिस से वे सीखें, ताकि जितने दिन वे पृथ्वी पर जीवित रहें उतने दिन मेरा भय मानते रहें, और अपने बाल-बच्चों को भी यही सिखाएं’।”

परमेश्वर पूरे अंतरिक्ष के प्रभु और मालिक हैं। हमारे लिए, परमेश्वर एक पिता और एक माता हैं। तो परमेश्वर का भय मानने का अर्थ है परमेश्वर के प्रति आत्मिक रूप से संतानोचित कर्तव्य को पूरा करना। जब आप एक ऐसे घर में जाते हैं, जहां एक अच्छा बेटा होता है, तो आप संतानोचित कर्तव्य की पारिवारिक परंपरा को महसूस कर सकते हैं। इसी तरह, जब भी वे हमारे चर्च या हमारे घर का दौरा करते हैं और जब भी वे हमें देखते हैं, हमें लोगों को परमेश्वर के प्रति भय के माहौल को महसूस करने में मदद करने की जरूरत है।

अंतरिक्ष में पृथ्वी समुद्र के किनारे रेत का एक मात्र दाना है। क्या आपको लगता है कि परमेश्वर ने हमें उनका सम्मान करने के लिए कहा है क्योंकि वह इतनी छोटी जगह में रहने वाले लोगों से सम्मान पाना चाहते हैं? कदापि नहीं! परमेश्वर की प्रत्येक आज्ञा में हमें अंत में आशीष देने की गहन इच्छा है। इस तथ्य को समझते हुए, हमें अपने जीवन भर परमेश्वर की संतानों के रूप में उनका भय मानना चाहिए।

चर्च एक ऐसी जगह है जहां परमेश्वर के लोग परमेश्वर का भय मानना सीखने के लिए एक साथ आते हैं। चर्च में हमेशा भय के साथ परमेश्वर की आराधना की जानी चाहिए और परमेश्वर की शिक्षाएं जीवित होनी चाहिए। हालांकि, अगर हम चर्च के मालिक को बदलते हैं, तो समस्याएं पैदा होंगी। परमेश्वर के घर में काम करने वालों के रूप में, हम बस सेवकाई करते हैं जो परमेश्वर ने हमें सौंपी है। इस घर के मालिक परमेश्वर हैं। परमेश्वर के घर को परमेश्वर के तरीके के अनुसार, परमेश्वर के प्रसन्न होने की इच्छा के अनुसार संचालित किया जाना चाहिए। हमें केवल यह करना है कि हमें परमेश्वर के वचन पर रात दिन ध्यान करते रहना है और उसमें कुछ जोड़े या घटाए बिना अभ्यास में लाना है।

प्राचीन इस्राएल में, यूसुफ ने पोतीपर के घर के एक प्रबंधक के रूप में इतनी ईमानदारी से काम किया कि उसके मालिक उससे प्रसन्न थे। पोतीपर की पूरी संपत्ति बढ़ गई, और वह बिना किसी बात की परवाह किए घर के बाहर अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम था, क्योंकि यूसुफ ने घर के सभी मामलों का इस तरह ध्यान रखा जो उसके मालिक को प्रसन्न करने के लिए काफी योग्य था। हमें भी, पूरी तरह से परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए, परमेश्वर के अनुकूल तरीके से काम करना चाहिए। यह जानकर कि हमारे मालिक परमेश्वर क्या चाहते हैं, आइए हम सभी काम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार करें।

परमेश्वर की विशेषताओं में से एक, प्रेम


जो लोग पेंटिंग से प्यार करते हैं, वे अपने घरों में दीवारों पर कुछ चित्र डालते हैं, और जो लोग सुलेख से प्यार करते हैं, वे दीवारों पर अपने स्वयं के हस्तनिर्मित सुलेख कार्यों या कुछ सुलेखक के कार्यों को लटकाते हैं। संगीत प्रेमी अपने घरों में पियानो या अन्य संगीत वाद्ययंत्र रखते हैं, और ऑटोमोबाइल उद्योग या कार के शौकीन लोग अपने घरों को लघु कार मॉडल से सजाते हैं। तब, परमेश्वर का घर किससे भरा है?

1यूह 4:7-11 हे प्रियो, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है। जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है। जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है... हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।

1कुर 13:1-11 यदि मैं मनुष्यों और स्वर्गदूतों की बोलियां बोलूं और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं... जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों का सा मन था, बालकों की सी समझ थी; परन्तु जब सियाना हो गया तो बालकों की बातें छोड़ दीं।


हमें एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए। यह इसलिए है क्योंकि हमारे घर के मालिक परमेश्वर हैं जो प्रेम हैं। मेरा मानना है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर कोई जो हमारे घर और हमारे चर्च का दौरा करता है या हमसे मिलता है, वह हमेशा परमेश्वर को महसूस कर सकता है जो प्रेम हैं।

आज के दिन तक, परमेश्वर स्वर्गीय परिवार के सदस्यों की अगुवाई प्रेम से कर रहे हैं। हम पहले छोटे बालकों के समान प्रेम प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन अब हमें परमेश्वर को प्रसन्न करनी वाली संतानों के रूप में एक-दूसरे को प्रेम देने की जरूरत है। हम अब आत्मिक परिपक्वता के उम्र में पहुंच चुके हैं। इसलिए, हमें परिपक्व वयस्कों की तरह सोचना, बोलना और व्यवहार करना चाहिए। पहले, हम बालकों के समान बस प्रेम पाने की चाहत से सोचते, बात करते, और व्यवहार करते थे। उन बालकों के से तरीकों को छोड़कर हमें दूसरों के साथ प्रेम बांटने की भूमिका निभाने की जरूरत है।

परमेश्वर की संतान परमेश्वर द्वारा सिखाई जाती है


परमेश्वर हमारे घर के मालिक हैं, और प्रेम परमेश्वर की विशेषताओं में से एक है। हमें सेवा पाने और ऊंचा होने की चाहत रखने के बजाय दूसरों की सेवा करनी चाहिए, पहले उनसे अभिवादन किए जाने का इंतजार किए बिना उनका अभिवादन करना चाहिए, पहले उनके पास जाना चाहिए और उनसे बात करनी चाहिए। जब हम ऐसा करेंगे तभी सब लोग यह देख पाएंगे कि परमेश्वर हमारे घर के मालिक हैं।

यूह 13:34-35 “मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं कि एक दूसरे से प्रेम रखो; जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो।”

एक नई आज्ञा एक नई वाचा को भी दर्शाती है। नई वाचा के फसह में “एक दूसरे से प्रेम रखने” की आज्ञा शामिल है। यह सिर्फ एक समारोह नहीं है जहां हम रोटी खाते हैं और दाखमधु पीते हैं, बल्कि इसमें परमेश्वर का महान प्रेम शामिल है जिन्होंने अपनी संतानों को जीवन की रोटी, अपना मांस खाने देकर और अपना बहुमूल्य लहू पीने देकर अनंत जीवन दिया। इसलिए परमेश्वर ने कहा, “एक दूसरे से प्रेम रखो, जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है।”

यदि आप उस घर में प्रवेश करते हैं जिसके मालिक प्रेम हैं, तो आप प्रेम की सुगंध महसूस कर सकते हैं जो पूरे घर को भरता है, है न? जब हम अपने घर के मालिक की विशेषताओं को समझते हैं, तो हम यह जान सकते हैं कि हमें अपने बारे में क्या बदलना चाहिए।

मत 11:28-30 “हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं : और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हलका है।”

हमें परमेश्वर के वास्तविक स्वरूप को सही ढंग से समझने और सीखने की आवश्यकता है जो हमारे घर के मालिक हैं। परमेश्वर हमारे साथ सौम्यता और विनम्रता से व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा कहकर हमें दोषी ठहराए बिना, “मुझे तुम्हारी वजह से तकलीफ होती है,” चुपचाप हमारे पापों को उठाया।

हमें उस व्यक्ति से क्या सीखना चाहिए जो मन में नम्र और दीन है? सिय्योन एक ऐसी जगह है, जहां थके हुए और बोझ से दबे हुए लोग आ सकते हैं और अपना सारा भारी बोझ उतारकर शांति में विश्राम कर सकते हैं। सिय्योन को आगंतुकों के लिए सौम्यता, विनम्रता और प्रेम महसूस करने का स्थान होना चाहिए। परमेश्वर के घर में भाइयों और बहनों के साथ कठोर व्यवहार करना और उन्हें चोट पहुंचाना एक ऐसी चीज है जिससे परमेश्वर नफरत करते हैं। सिय्योन जिसके मालिक परमेश्वर हैं, एक ऐसा स्थान बन जाना चाहिए, जहां परमेश्वर की तरह नम्र और दीन लोग एक साथ इकट्ठे होते हैं, आत्माएं जो घायल हो गई हैं और दुनिया में परदेशी होकर भटक रही हैं, वे अपने भारी बोझों को उतारती हैं और आराम पाती हैं, और खुशी, प्रसन्नता और भजन का गीत कभी बंद नहीं होता। सिर्फ तभी हमारे भाई और बहन एक के बाद एक सिय्योन में लौट सकते हैं।

खुशी और आनंद से भरा सिय्योन


सात अरब लोगों को प्रचार करने का आंदोलन तब पूरा हो सकता है जब हम मसीह के मन यानी पिता और माता के मन के साथ सुसमाचार का प्रचार करते हैं(फिलि 2:5)। हमें सबसे पहले सुसमाचार को अपने भीतर से पूरा करने की आवश्यकता है, तब ही वह बाहर से पूरा किया जा सकता है। प्रेम, सौम्यता और विनम्रता जैसी परमेश्वर की विशेषताएं हम में और हमारे घर में और हमारे चर्च में भी होनी चाहिए। जब हम पिता और माता के मन के साथ सुसमाचार का प्रचार करते हैं, तो दुनिया भर में हमारे स्वर्गीय परिवार के सभी सदस्य सिय्योन में वापस आएंगे।

भज 132:13-16 क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को अपनाया है, और उसे अपने निवास के लिये चाहा है: “यह तो युग युग के लिये मेरा विश्रामस्थान है; यहीं मैं रहूंगा, क्योंकि मैंने इसको चाहा है। मैं इस में की भोजनवस्तुओं पर अति आशीष दूंगा; और इसके दरिद्रों को रोटी से तृप्त करूंगा। इसके याजकों को मैं उद्धार का वस्त्र पहिनाऊंगा, और इसके भक्त लोग ऊंचे स्वर से जयजयकार करेंगे।”

सिय्योन परमेश्वर का घर है, जिसे परमेश्वर ने अपने निवास स्थान के रूप में चुना है। सिय्योन को एक ऐसी जगह बनाने के लिए, जिससे सिय्योन के मालिक परमेश्वर प्रसन्न होते हैं, हम सभी को प्रयास करने चाहिए। क्या होगा यदि सिय्योन परमेश्वर की सुगंध को उत्सर्जित नहीं करता, भले ही इसे परमेश्वर का घर कहा जाता है? परमेश्वर की सभी संतान इसे छोड़ देंगी। केवल जब परमेश्वर का घर मसीह की सुगंध से भर जाता है तब परमेश्वर की संतान आकर इसका दौरा कर सकती हैं।

यश 51:3 यहोवा ने सिय्योन को शान्ति दी है, उसने उसके सब खण्डहरों को शान्ति दी है; वह उसके जंगल को अदन के समान और उसके निर्जल देश को यहोवा की वाटिका के समान बनाएगा; उसमें हर्ष और आनन्द और धन्यवाद और भजन गाने का शब्द सुनाई पड़ेगा।

परमेश्वर का घर हमेशा हर्ष, आनन्द, धन्यवाद और भजन गाने के शब्द से भरा रहता है। हर्ष और आनन्द के शब्द का कभी अंत नहीं होता - यह परमेश्वर के घर का माहौल है।

यश 51:11 यहोवा के छुड़ाए हुए लोग लौटकर जयजयकार करते हुए सिय्योन में आएंगे, और उनके सिरों पर अनन्त आनन्द गूंजता रहेगा; वे हर्ष और आनन्द प्राप्त करेंगे, और शोक और सिसकियों का अन्त हो जाएगा।

उपरोक्त वचन में कहा गया है कि परमेश्वर के छुड़ाए हुए लोग सिय्योन में प्रवेश करते हैं, जहां वे अनन्त आनन्द और हर्ष प्राप्त करेंगे, और शोक और सिसकियों का अन्त हो जाएगा। एक डाकू की तरह दुष्ट व्यक्ति के घर में इतना स्नेहपूर्ण, प्यार भरा माहौल कभी नहीं हो सकता है। सिय्योन परमेश्वर का घर है, इसलिए केवल सिय्योन में हर्ष, आनन्द, धन्यवाद, और भजन गाने के शब्द का कभी अंत नहीं होता।

हमने सिय्योन में नई वाचा के सेवकों का मिशन प्राप्त किया है जहां परमेश्वर हमारे मालिक हैं। परमेश्वर के सेवकों के रूप में, हमें कुछ गलत करके अपने घर का माहौल खराब नहीं करना चाहिए। हमें अपनी पसंद या शैली के अनुसार माहौल बनाने के बजाय परमेश्वर के वातावरण को सिय्योन में लाना चाहिए।

जब हम परमेश्वर के ईश्वरीय स्वभाव में भाग लेने के लिए फिर से जन्म लें, तब सुसमाचार कार्य पूरा हो सकता है

संसार में रहते हुए, हम कभी-कभी उन चीजों का सामना करते हैं जो हमारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं होती और हमारी पूर्वधारणा के विपरीत हैं। जब भी ऐसा होता है, तब आइए हम क्रोध की अपनी भावनाओं को व्यक्त न करें, लेकिन प्रेम के महान सिद्धांत के तहत जो परमेश्वर ने हमें दिया है, हमारे स्वभाव को बदलने की कोशिश करें। परमेश्वर हमारे घर के मालिक हैं और हमारी आत्माओं के मालिक हैं। आइए हम इस बारे में सोचें कि परमेश्वर हमारे साथ कैसा व्यवहार करते हैं।

इफ 4:29-32 कोई गन्दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही निकले जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उससे सुननेवालों पर अनुग्रह हो। परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। सब प्रकार की कड़वाहट, और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्दा, सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। एक दूसरे पर कृपालु और करुणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

हमारे मालिक, परमेश्वर ने हमें हमेशा अच्छे शब्द बोलने के लिए कहा। “सब प्रकार की कड़वाहट, और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्दा, सब बैरभाव को दूर करें और हमेशा एक धार्मिक, ईमानदार जीवन जीएं। एक दूसरे पर कृपालु हों।” यह हमारे पिता और माता की शिक्षा है।

परमेश्वर का घर एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहां स्वर्गीय पिता और माता की शिक्षाएं हमारे रोजमर्रा के जीवन में प्रतिबिंबित होती हैं। इसलिए, हमें सौम्यता, विनम्रता और प्रेम को पहनने के लिए फिर से जन्म लेना चाहिए। हमें अपने आपको, अपने घर को और अपने चर्च को परमेश्वर के वातावरण को प्रतिबिंबित करना चाहिए, ताकि हमारे आनंद और भजन के शब्द का उस आशा के साथ जो पिता और माता ने हमें दी है, कभी भी अंत न हो। सिय्योन को हमेशा अनंत जीवन के सत्य से भरी जगह भी होनी चाहिए ताकि जो भी प्यासे हैं वे परमेश्वर के जीवन के जल के वचन स्वतंत्र रूप से प्राप्त कर सकें। इस बात से स्वर्गीय पिता और माता सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं, है न?

परमेश्वर हमारे घर के मालिक हैं। परमेश्वर हमारे चर्च के मालिक हैं। परमेश्वर हमारी आत्माओं के मालिक हैं। आइए हम देखें कि जब हम मानते हैं कि परमेश्वर हमारे मालिक हैं तो हमारे साथ क्या होता है।

अय 22:21-30 “उस से मेलमिलाप कर तब तुझे शान्ति मिलेगी; और इससे तेरी भलाई होगी। उसके मुंह से शिक्षा सुन ले, और उसके वचन अपने मन में रख। यदि तू सर्वशक्तिमान की ओर फिरके समीप जाए, और अपने डेरे से कुटिल काम दूर करे, तो तू बन जाएगा। तू अपनी अनमोल वस्तुओं को धूल पर, वरन् ओपीर का कुन्दन भी नालों के पत्थरों में डाल दे, तब सर्वशक्तिमान आप तेरी अनमोल वस्तु और तेरे लिये चमकीली चांदी होगा। तब तू सर्वशक्तिमान से सुख पाएगा, और परमेश्वर की ओर अपना मुंह बेखटके उठा सकेगा। तू उससे प्रार्थना करेगा, और वह तेरी सुनेगा; और तू अपनी मन्नतों को पूरी करेगा। जो बात तू ठाने वह तुझ से बन भी पड़ेगी, और तेरे मार्गों पर प्रकाश रहेगा...”

यदि हमारे पास अपना खुद का खजाना है तो परमेश्वर का घर आकार नहीं ले सकता। यह इसलिए है क्योंकि हम परमेश्वर के घर को सजाने के लिए गलत खजाने का उपयोग करने की कोशिश करते हैं, जिसे परमेश्वर की गरिमा से भरा होना चाहिए और जिसे परमेश्वर की विशेषताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

जब परमेश्वर हमारे मालिक हैं, तो हमारे चेहरे खुशी से चमक सकते हैं और हमारी आत्माएं हमेशा खुशी से भरी हो सकती हैं। हमारे पास हमारे घर के मालिक के रूप में, हमारे चर्च के मालिक और हमारी आत्माओं के मालिक के रूप में परमेश्वर होने चाहिए। सिर्फ तभी सुसमाचार के लिए हमारी योजनाएं बिना असफल हुए पूरी हो सकती हैं। मुझे विश्वास है कि स्वर्ग का अनंत राज्य तब आएगा, जब सिय्योन में हमारे सभी भाई-बहन, परमेश्वर के घर के रूप में परिपूर्ण होंगे। मुझे आशा है कि जब तक कि सामरिया और पृथ्वी की छोर तक सुसमाचार का प्रचार नहीं किया जाता, हम सभी, स्वर्गीय परिवार के सदस्य, यूसुफ की तुलना में अधिक विश्वासयोग्य नई वाचा के सेवकों के रूप में परमेश्वहर को महिमा दें, और जब हम अपने स्वर्गीय घर वापस जाएं तब परमेश्वर से यह प्रशंसा प्राप्त करें, “शाबाश!”