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फसह वह सत्य है जो जीवन बचाता है

पृथ्वी दुनिया में लोगों के लिए विशाल लग सकती है, लेकिन यह ब्रह्मांड की विशालता में बस एक छोटी सी बिंदु है। बाइबल हमें बताती है कि यह पृथ्वी डोल में की एक बूंद या पलड़ों पर की धूल के तुल्य ठहरी(यश 40:15)।

परमेश्वर ने हम, मनुष्यों के लिए, जो इस छोटी पृथ्वी पर रहते हैं, एक वाचा स्थापित की है। सभी व्यवस्था, नियम और आज्ञाओं में, जो महान ब्रह्मांड का प्रबंधन करने वाले परमेश्वर द्वारा दिए गए हैं, परमेश्वर की ऐसी इच्छा शामिल है कि वह हमें स्वर्ग में सर्वदा अनंत जीवन और आनंद भोगने देंगे।

परमेश्वर ने नई वाचा का फसह पुन:स्थापित किया है और हमें इस युग में इसे मनाने की अनुमति दी है। यह भी परमेश्वर का विशेष प्रयोजन और आशीष है। सिय्योन के लोगों के रूप में, हमें परमेश्वर की इच्छा को महसूस करना चाहिए जो हमसे बेहद प्रेम करते हैं और जीवन के सत्य, नई वाचा का पवित्रता से पालन करना और प्रचार करना चाहिए।

परमेश्वर की आज्ञाओं की आशीष


दुनिया में अमीर लोग और गरीब लोग, स्वस्थ लोग और अस्वस्थ लोग हैं। विभिन्न प्रकार के लोग वैश्विक गांव में एक साथ रहते हैं, और उनके पास पृथ्वी पर रहने के लिए सीमित समय है। हर किसी को जो एक बार जन्म लेता है, किसी दिन मरना पड़ता है।

इब्र 9:27 और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है...

परमेश्वर ने मनुष्यों के लिए अपनी आज्ञाओं और व्यवस्थाओं की स्थापना की है, ताकि जब उनका सांसारिक जीवन समाप्त हो जाए, तो वे अनन्त दुनिया में जा सकें। उन्होंने बाइबल में अपनी सारी शिक्षाओं को समाहित किया है और उन लोगों के लिए स्वर्ग की आशीषों को तैयार किया जो उनकी व्यवस्थाओं के अनुसार जीते हैं।

व्य 8:11-16 “इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे... इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा करके अन्त में तेरा भला ही करे।”

निर्ग 20:4-6 “तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, या पृथ्वी पर, या पृथ्वी के जल में है। तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा... जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हज़ारों पर करुणा किया करता हूं।”


परमेश्वर ने हमें अपनी आज्ञाएं, व्यवस्थाएं और नियम दिए हैं, ताकि वह अंत में हमारा भला ही करें। उन्होंने वादा किया है कि जो उनसे प्रेम रखते हैं और उनकी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करुणा करेंगे। इसका मतलब है कि परमेश्वर उन्हें सदा के लिए आशीष देंगे, है न?

हमें सब्त और फसह सहित परमेश्वर की सभी आज्ञाओं का, उनमें कुछ भी जोड़े या घटाए बिना, पूरी तरह से पालन करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनमें परमेश्वर की प्रतिज्ञा की हुई आशीषें हैं। अब, आइए हम बाइबल के द्वारा देखें कि फसह में क्या-क्या आशीषें शामिल हैं।

जीवन की वाचा, फसह जिसके द्वारा विपत्तियां पार हो जाती हैं

फसह में हमें विपत्तियों से बचाने और अनंत स्वर्ग के राज्य में ले जाने की परमेश्वर की प्रतिज्ञा शामिल है। आइए हम 3,500 साल पहले मूसा के समय में हुई घटना के द्वारा इस तथ्य की पुष्टि करें।

निर्ग 12:11-14 और उसके खाने की यह विधि है : कमर बांधे, पांव में जूती पहिने, और हाथ में लाठी लिए हुए उसे फुर्ती से खाना; वह तो यहोवा का पर्व होगा। क्योंकि उस रात को मैं मिस्र देश के बीच में होकर जाऊंगा, और मिस्र देश के क्या मनुष्य क्या पशु, सब के पहिलौठों को मारूंगा; और मिस्र के सारे देवताओं को भी मैं दण्ड दूंगा; मैं यहोवा हूं। और जिन घरों में तुम रहोगे उन पर वह लहू तुम्हारे लिए चिह्न ठहरेगा; अर्थात् मैं उस लहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊंगा, और जब मैं मिस्र देश के लोगों को मारूंगा, तब वह विपत्ति तुम पर न पड़ेगी और तुम नष्ट न होगे। और वह दिन तुम को स्मरण दिलानेवाला ठहरेगा, और तुम उसको यहोवा के लिये पर्व करके मानना; वह दिन तुम्हारी पीढ़ियों में सदा की विधि जानकर पर्व माना जाए।

जिस दिन, मिस्र में सभी पहिलौठों को मारने की दसवीं विपत्ति आई, तो विपत्ति उन सभी इस्राएलियों पर से पार हो गई जिन्होंने फसह का पर्व मनाया था। लेकिन, मिस्र के हर परिवार ने जिन्होंने फसह का पर्व नहीं मनाया, विपत्ति का सामना किया। अंत में, मिस्र का राजा, फिरौन परमेश्वर की शक्ति के सामने झुका और सभी इस्राएलियों को दासत्व से मुक्त कर दिया। इस अद्भुत कार्य को देखकर, इस्राएलियों ने परमेश्वर को महसूस किया और उन पर विश्वास करने लगे।

इस्राएली जिन्होंने फसह मनाया, बचाए गए, जबकि मिस्री जिन्होंने फसह नहीं मनाया, ने विपत्ति का सामना किया। यह ऐतिहासिक घटना इस पापमय संसार में होनेवाली बातों की एक छाया थी, जिसे मिस्र से दर्शाया गया है। परमेश्वर ने वादा किया, “मैं उस लहू को देखकर तुम को छोड़ जाऊंगा। तब वह विपत्ति तुम पर न पड़ेगी और तुम नष्ट न होगे।” परमेश्वर का यह वादा केवल मूसा के समय में ही लागू नहीं था। इस युग में भी, जब हम फसह मनाते हैं, तब परमेश्वर द्वारा हमारी रक्षा की जा सकती है। 3,500 साल पहले हुई ऐतिहासिक घटना के द्वारा, परमेश्वर ने पहले से हमें दिखाया है कि जो लोग उनके नियमों, व्यवस्थाओं और विधियों का पालन करते हैं, वे विपत्तियों से बचेंगे और इस पापमय संसार से मुक्त किए जाकर स्वर्गीय कनान, स्वर्ग के राज्य में जाएंगे।

भज 91:1-10 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा। मैं यहोवा के विषय कहूंगा, “वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।”... तेरे निकट हज़ार, और तेरी दाहिनी ओर दस हज़ार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा। परन्तु तू अपनी आंखों से दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा। हे यहोवा, तू मेरा शरणस्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है, इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा।


“कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी।” परमेश्वर का यह वादा फसह में निहित है। परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है कि फसह मनाने वालों पर कोई विपत्ति नहीं आएगी, जबकि उनके निकट हजार, और उनकी दाहिनी ओर दस हजार गिरेंगे। हम बहुत खुश और आभारी हैं कि हम परमेश्वर की प्रतिज्ञा में जीते हैं।

परमेश्वर मानवजाति के साथ बांधी अपनी वाचा को कभी नहीं तोड़ते। लेकिन, आज बहुत से लोग परमेश्वर की वाचा का त्याग करते हैं और फसह मनाने से इनकार करते हैं, क्योंकि उनके पास सही विश्वास नहीं है। ऐसे बहुत कम लोग हैं जो परमेश्वर के वचनों का पालन करते हैं। इसलिए यीशु ने सिखाया, “सकेत फाटक से प्रवेश करो”(मत 7:13-14)। हमें केवल इसलिए चौड़ा मार्ग पर आंख मूंदकर नहीं चलना चाहिए क्योंकि बहुत से लोग उस पर चलते हैं, बल्कि जांचना चाहिए कि परमेश्वर किस मार्ग पर हमारी अगुवाई करते हैं और उस मार्ग का पालन करना चाहिए।

छुटकारे का चिन्ह और परमेश्वर की मुहर


निर्गमन के समय, फसह के मेमने का लहू, जिसे इस्राएलियों ने अपने घरों के द्वार के दोनों अलंगों और चौखट के सिरे पर लगाया था, उनके लिए एक चिन्ह बना ताकि विपत्ति उनके ऊपर से पार हो जाए। अंतिम दिनों में भी, परमेश्वर ने फसह मनाने वालों के माथे पर एक चिन्ह लगाया है, ताकि उनके ऊपर से विपत्ति पार हो जाए। यह यहेजकेल की पुस्तक में एक “चिह्न” और प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में एक “मुहर” के रूप में लिखा गया है।

यहेज 9:3-6 ... और उसने उस सन के वस्त्र पहिने हुए पुरुष को जो कमर में दवात बांधे हुए था, पुकारा। और यहोवा ने उससे कहा, “इस यरूशलेम नगर के भीतर इधर उधर जाकर जितने मनुष्य उन सब घृणित कामों के कारण जो उसमें किए जाते हैं, सांसें भरते और दु:ख के मारे चिल्लाते हैं, उनके माथों पर चिह्न लगा दे।” तब उसने मेरे सुनते हुए दूसरों से कहा, “नगर में उनके पीछे पीछे चलकर मारते जाओ; किसी पर दया न करना और न कोमलता से काम करना। बूढ़े, युवा, कुंवारी, बाल-बच्चे, स्त्रियां, सब को मारकर नष्ट करो, परन्तु जिस किसी मनुष्य के माथे पर वह चिह्न हो, उसके निकट न जाना। मेरे पवित्रस्थान ही से आरम्भ करो।” अत: उन्होंने उन पुरनियों से आरम्भ किया जो भवन के सामने थे।

यहेजकेल की भविष्यवाणी दिखाती है कि जब परमेश्वर सभी मानवजाति पर विपत्ति लाते हैं, तो वह परमेश्वर के लोगों के ऊपर से पार हो जाएगी जिनके पास परमेश्वर का चिह्न है। “जिस किसी मनुष्य के माथे पर वह चिह्न हो, उसके निकट न जाना।” परमेश्वर का यह आदेश उस आदेश के समान है जो उन्होंने निर्गमन के समय नाश करने वाले स्वर्गदूत को दिया था; परमेश्वर ने स्वर्गदूतों से कहा था कि इस्राएलियों के पास न जाना जिन्होंने फसह मनाया। प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में भी यही आदेश दिखाई देता है।

प्रक 7:1-3 इसके बाद मैं ने पृथ्वी के चारों कोनों पर चार स्वर्गदूत खड़े देखे। वे पृथ्वी की चारों हवाओं को थामे हुए थे ताकि पृथ्वी या समुद्र या किसी पेड़ पर हवा न चले। फिर मैं ने एक और स्वर्गदूत को जीवते परमेश्वर की मुहर लिये हुए पूरब से ऊपर की ओर आते देखा; उसने उन चारों स्वर्गदूतों से जिन्हें पृथ्वी और समुद्र की हानि करने का अधिकार दिया गया था, ऊंचे शब्द से पुकारकर कहा, “जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें, तब तक पृथ्वी और समुद्र और पेड़ों को हानि न पहुंचाना।”

बाइबल की भविष्यवाणी में, हवा युद्ध को दर्शाती है(यिर्म 25; दान 7)। यहां की चार हवाएं सभी दिशाओं से बहने वाली हवाएं हैं, जो एक विश्व युद्ध को दर्शाती हैं। इस विपत्ति के आने से पहले, परमेश्वर अपनी संतानों के माथे पर अपनी मुहर लगाते हैं। परमेश्वर ने नाश करनेवाले स्वर्गदूतों को पृथ्वी या समुद्र या पेड़ों को हानि न पहुंचाने का आदेश दिया है। परमेश्वर ने विपत्ति को तब तक निलंबित करने का आदेश दिया जब तक कि उनके लोगों पर मुहर नहीं लगाई जाती है, और मुहर लगाने का कार्य समाप्त होने पर उनके अलावा जिन पर मुहर है, सभी को नष्ट करने का आदेश दिया।

प्रक 9:1-4 जब पांचवें स्वर्गदूत ने तुरही फूंकी, तो मैं ने स्वर्ग से पृथ्वी पर एक तारा गिरता हुआ देखा, और उसे अथाह कुण्ड की कुंजी दी गई... उनसे कहा गया कि न पृथ्वी की घास को, न किसी हरियाली को, न किसी पेड़ को हानि पहुंचाएं, केवल उन मनुष्यों को हानि पहुंचाएं जिनके माथे पर परमेश्वर की मुहर नहीं है।

“उनके माथे पर परमेश्वर की मुहर लगाना,” “जिनके माथे पर परमेश्वर की मुहर है,” और “फसह के मेमने का लहू एक चिन्ह बन जाता है।” ये सब विपत्तियों के विरुद्ध परमेश्वर का रोकथाम उपाय हैं। परमेश्व र ने नाश करनेवाले स्वर्गदूतों को आदेश दिया कि अंतिम विपत्ति आने पर जिनके माथे पर मुहर है, उन्हें हानि न पहुंचाना, जैसा कि उन्होंने तब किया था जब मिस्र पर अंतिम विपत्ति आई थी। परमेश्वर अभी भी फसह के द्वारा अपने लोगों के माथे पर अपनी मुहर लगा रहे हैं।

फसह का मेमना, मसीह


फसह वह सत्य है जिसे परमेश्वर ने, जो आदि से अंत देखते हैं, अन्तिम दिनों में मानवजाति के उद्धार के लिए पुन:स्थापित किया है। आइए हम जानें कि जब हम फसह मनाते हैं तो कौन सा सिद्धांत काम करता है जिससे हम विपत्तियों से बचाए जाते हैं।

1कुर 5:7, आईबीपी बाइबल पूराना खमीर निकालकर अपने आप को शुद्ध करो कि ऐसा नया गूंधा अर्थात् अखमीरी आटा बन जाओ जैसा कि तुम वास्तव में हो। क्योंकि हमारे फसह का मेम्ना मसीह भी बलिदान हुआ है।

फसह का मेमना मसीह को दर्शाता है। निर्गमन के समय में जिनके द्वार की चौखट पर फसह के मेमने का लहू था, उन घरों पर से विपत्ति पार हो गई। उसी तरह, जिन लोगों के पास फसह के मेमने की वास्तविकता, मसीह का लहू है, वे नए नियम के समय में विपत्तियों से बचाए जा सकते हैं। इसलिए, यीशु ने प्रेरित पतरस और यूहन्ना को फसह तैयार करने दिया और अपने चेलों के साथ उसे मनाया।

लूक 22:7-15, 19-20 तब अखमीरी रोटी के पर्व का दिन आया, जिसमें फसह का मेम्ना बलि करना आवश्यक था। यीशु ने पतरस और यूहन्ना को यह कहकर भेजा : “जाकर हमारे खाने के लिये फसह तैयार करो।”... उन्होंने जाकर, जैसा उसने उनसे कहा था, वैसा ही पाया और फसह तैयार किया। जब घड़ी आ पहुंची, तो वह प्रेरितों के साथ भोजन करने बैठा। और उसने उनसे कहा, “मुझे बड़ी लालसा थी कि दु:ख भोगने से पहले यह फसह तुम्हारे साथ खाऊं।”... फिर उसने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उनको यह कहते हुए दी, “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिये दी जाती है : मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने भोजन के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है।”

3,500 साल पहले, परमेश्वर ने इस्राएलियों से कहा था कि वे अपने मेमनों को बलि करें और उसमें से कुछ लहू अपने द्वार के दोनों अलंगों और चौखट के सिरे पर लगा दें। लेकिन अब, परमेश्वर ने हम पर फसह का मेमना, मसीह के मांस और लहू से मुहर लगाई है। यीशु ने जो कुछ भी किया, वह हमारे लिए पालन करने का एक नमूना था, ताकि हम बचाए जा सके।

यूह 13:15 क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।

नई वाचा फसह जीवन का सत्य है जिसे यीशु ने मानव जाति के लिए स्थापित किया था। जब हम यीशु के नमूने के अनुसार फसह मनाते हैं, तो हम फसह की रोटी खाते हैं जो यीशु की पवित्र देह को दर्शाता है और फसह का दाखमधु पीते हैं जो उनके बहुमूल्य लहू को दर्शाता है। तो परमेश्वर हम में बसते हैं, और फलस्वरूप हम अपने माथे पर छुटकारे की मुहर के साथ चिह्नित होते हैं। परमेश्वर की संतानों के रूप में जिन्होंने परमेश्वर का मांस और लहू प्राप्त किया है, हमारे पास अनंत जीवन और स्वर्ग में प्रवेश करने का अधिकार हो सकता है(यूह 6:53-57)। फसह वह सत्य है जो विपत्तियों से हमारी रक्षा करता है, स्वर्ग के अनंत आशीषों का मार्ग खोलता है और मानवजाति को बचाता है।

यीशु के आने तक नई वाचा का प्रचार किया जाना चाहिए


यीशु ने फसह का पर्व मनाया, और प्रेरित पतरस और यूहन्ना सहित उनके चेलों ने भी फसह का पर्व मनाया। जैसे बाइबल और चर्च के इतिहास की पुस्तकों में दर्ज है, 100 ईसवी तक जब यीशु द्वारा सीधे सिखाए गए चेले जीवित थे, फसह प्रथम चर्च के सभी विश्वासियों द्वारा मनाया गया था। लेकिन, सत्य की ज्योति धीरे-धीरे मंद होती गई और 325 ईसवी में निकिया की परिषद में फसह मिटा दिया गया। परमेश्वर की व्यवस्था लोगों के द्वारा नष्ट कर दी गई।

क्या यह सही है कि लोग मनमाने ढंग से परमेश्वर द्वारा स्थापित सत्य को मनाने से इनकार करते हैं? किसने हमें इसे मनाने की आज्ञा दी, और किसने आज्ञा मानी? फसह एक ऐसा पर्व है जिसे मनाने की यीशु ने बड़ी लालसा की थी, और वह व्यवस्था है जिसे प्रेरितों ने, जिन्हें यीशु द्वारा सिखाया गया था, मनाया और प्रचार किया। प्रेरित पौलुस ने इस बात पर जोर दिया कि फसह वह सत्य है जिसे कभी नहीं खो जाना चाहिए।

1कुर 11:23-26 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया, रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी और कहा, “यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है : मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया और कहा, “यह कटोरा मेरे लहू में नई वाचा है : जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।” क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।

“जब कभी तुम यह रोटी खाते और इस कटोरे में से पीते हो,” इस वचन का मतलब है कि हमें हर वर्ष फसह का पर्व मनाना चाहिए और इसका प्रचार करना जारी रखना चाहिए। इसलिए, परमेश्वर ने दूसरी बार इस पृथ्वी पर आकर फसह का सत्य पुन:स्थापित किया है। हमें बचाने के लिए परमेश्वर ने हमें इस युग में फसह दिया है। फिर भी, आज बहुत से चर्च यह कहते हुए फसह नहीं मनाते कि बचाए जाने के लिए सिर्फ विश्वास ही काफी है। जो लोग विश्वास करते हैं, उन्हें अपने विश्वास को कार्य में लाना चाहिए।

परमेश्वर की वाचा सदैव आशीषें प्रदान करती है, यह अस्थायी नहीं, पर अनंत आशीषें हैं। मैं आप, हमारे सिय्योन के सदस्यों से आग्रहपूर्वक कहता हूं कि अनन्त चीजों की आशा करते हुए अनंत दुनिया की आशीषों के लिए और अधिक उत्सुकता से प्रार्थना करें, और नई वाचा के फसह के सत्य का अपने परिवार, पड़ोसियों और रिश्तेदारों सहित बहुत से लोगों को जल्द से जल्द प्रचार करें, जिसे परमेश्वर ने हम मनुष्यों को उनकी प्रतिज्ञा की हुई आशीषें देने और हमें बचाने के लिए प्रदान किया है, ताकि सभी लोग जीवन पाने और बचाए जाने के लिए एक साथ फसह के पवित्र भोज में भाग ले सकें।