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संसार का उद्धार परमेश्वर पर निर्भर है

परमेश्वर सुसमाचार के कार्य में सब से प्रथम स्थान पर होकर, हमारा उद्धार करने के कार्य का नेतृत्व करता आया है। वह हमेशा अनदेखे रूप से हमारी अगुवाई करते हुए भी, सभी सफलता का गौरव केवल सन्तान को देता है। पुराने नियम के समय भी, नए नियम के समय भी, और आज भी, पिता और माता की सहायता से सभी महान कार्य पूरे हुए हैं। हमारे परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध रहते हुए भी, परमेश्वर हम से अपनी पीठ कभी नहीं फिरता, बल्कि हमारे सब पापों पर पछताने तक वह धीरज के साथ हमारा इन्तजार करके हमें अनन्त निज देश, स्वर्ग में ले जाता है। हम स्वर्गीय पिता और माता के अनुग्रह के लिए धन्यवाद और स्तुति देते हैं।

संसार चलता रहता और ब्रहमाण्ड चलता रहता है। इसके पीछे परमेश्वर का अस्तित्व होता है। परमेश्वर की सामर्थ्य के बिना, पृथ्वी चक्कर नहीं काटेगी और वह सूरज का चक्कार नहीं लगाएगी। तुरन्त ब्रहमाण्ड की सभी क्रिया रुक जाएगी। इसे मन में रखते हुए कि छोटी सी चीजें भी और साधारण घटना भी पिता और माता के हाथों के द्वारा चलाई जाती है। सिय्योन के सब परिवारो! आइए हम हमेशा धन्यवादी मन से थके बिना स्वर्ग जाने के दिन तक दौड़ते रहें।

परमेश्वर जो सिय्योन की प्रजाओं की सहायता करता है


परमेश्वर ने मूसा की सहायता करके इस्राएलियों की अगुवाई की और पतरस की सहायता करके प्रथम चर्च की अगुवाई की कि चर्च शैतान के हाथ में न छोड़ दिया जाए। आइए बाइबल की शिक्षा और साक्षी देखते हैं कि परमेश्वर आज इस पल भी, हमारी सहायता कर रहा है।

यश 41:10-12 “मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं। इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं। मैं तुझे दृढ़ करूंगा और निश्चय ही तेरी सहायता करूंगा, और अपने धर्ममय दाहिने हाथ से तुझे सम्भाले रहूंगा। ... ”

यश 43:1-3 “ ... मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है! जब तू जल में से होकर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा, और जब तू नदियों में से होकर चले, वे तुझे न डुबाएंगी। जब तू अग्नि में से होकर चले तो वह तुझे न झुलसाएगी, न ही उसकी लौ तुझे जलाने पाएगी। क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, इस्राएल का पवित्र, तेरा उद्धारकर्ता हूं। ... ”


परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की कि वह हमारे साथ है। मनुष्य कमजोर और दुर्बल है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने स्वयं प्रतिज्ञा की, “मैं तुझे दृढ़ करूंगा और निश्चय ही तेरी सहायता करूंगा।”

जब हम आत्मिक लड़ाई करते हैं, हम कभी-कभी इतनी भयभीत दशा में पड़ते हैं कि हमें पता भी नहीं लगता कि इस हताश दशा को पार करने हेतु क्या उपाय है। लेकिन परमेश्वर हमारी सहायता करता है, इसलिए चाहे हमारे आसपास कोई आत्मिक मुक़ाबला होता हो या बाधाएं होती हों, वे सब हम पर कोई प्रभाव नहीं कर सकते।

यश 51:6-7,11 “ ... आकाश धूएं के सदृश लोप हो जाएगा, तथा पृथ्वी वस्त्र के समान पुरानी हो जाएगी, और उसके निवासी उसी प्रकार जाते रहेंगे, परन्तु मेरा उद्धार सर्वदा के लिए होगा और मेरी धार्मिकता का अन्त न होगा। हे धार्मिकता के जाननेवालो, हे मेरे लोगो, जिनके हृदय में मेरी व्यवस्था है, मेरी सुनो: मनुष्य की निन्दा से भयभीत न होओ, न ही उनके ठट्ठों से विस्मित होओ ... अत: यहोवा के छुड़ाए हुए लोग लौटकर जयजयकार करते हुए सिय्योन में आएंगे। उनके सिर पर सर्वदा का आनन्द होगा। वे हर्ष और आनन्द प्राप्त करेंगे, तथा शोक और सन्ताप का अन्त हो जाएगा।”

परमेश्वर ने उन्हें ‘मेरी प्रजा’ कहा जिनके हृदय में परमेश्वर की व्यवस्था है और सिय्योन में लौट आते हैं।(यश 51:6) परमेश्वर उन्हें शान्ति देता है जो पर्वों के नगर, सिय्योन में वास करते हैं और परमेश्वर की व्यवस्था हृदय में रखते हैं।

यश 52:6-8 “अत: मेरी प्रजा मेरा नाम जान लेगी। ... पर्वतों पर उसके पैर क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है; जो शान्ति की बातें सुनाता और भलाई का शुभ सन्देश लाता और उद्धार का सन्देश देता है और सिय्योन से कहता है, “तेरा परमेश्वर राज्य करता है!” सुन! तेरे पहरेदार पुकार रहे हैं, वे एक साथ जयजयकार कर रहे हैं, क्योंकि वे स्वयं अपनी आंखों से यहोवा को सिय्योन की पुन:स्थापना करते हुए देखेंगे।”

परमेश्वर की प्रजाएं परमेश्वर का नाम जानती हैं। वे पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के प्रत्येक युग में कार्य करने वाले पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम जानती हैं, और वे पवित्र आत्मा की दुल्हिन, नई यरूशलेम का नाम भी जानती हैं। परमेश्वर ने उन प्रजाओं से कहा कि कोई भी मुश्किल होने पर भी, मैं तुम्हारी सहायता करूंगा, मत डर! परमेश्वर की ऐसी अनदेखी सहायता के द्वारा हमारा अस्तित्व है, और हम ऐसा विजयी पल देख सकते हैं कि अनेक लोग पिता और माता की बांहों में ले लिए जा रहे हैं।

परमेश्वर के द्वारा युद्ध पर विजय


जब बाइबल के इतिहास पर विचार करते हैं, हम यह तथ्य खोज सकते हैं कि परमेश्वर की सहायता से आश्चर्य कार्य पूरा हुआ, जिसकी कल्पना भी मनुष्य नहीं कर सकता। 3,500 वर्ष पहले, इस्राएलियों ने परमेश्वर की सहायता के द्वारा शत्रु को पछाड़ा। आइए हम इस इतिहास के द्वारा पुष्ट करें कि परमेश्वर हमेशा अपनी प्रजाओं की सहायता करता है और विजयी होने की दिशा देता है।

निर्ग 17:8-16 “ ... तब मूसा ने यहोशू से कहा, “हमारे लिए पुरुषों को चुन ले और जाकर अमालेकियों से लड़। कल मैं परमेश्वर की लाठी लिए हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूंगा।” और जैसा मूसा ने यहोशू से करने को कहा था वैसा ही उसने किया और अमालेकियों से लड़ने लगा तथा मूसा, हारून और हूर, पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए। फिर ऐसा हुआ कि जब तक मूसा अपना हाथ ऊपर उठाए रहता तब तक इस्राएल प्रबल होता, और जब वह अपना हाथ नीचे करता तो अमालेक प्रबल होता था। ... हारून और हूर ने एक एक ओर खड़े होकर उसके हाथों को सहारा दिया। इस प्रकार उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे। अत: यहोशू ने अमालेकियों और उसके लोगों को तलवार की धार से पराजित किया। तब यहोवा ने मूसा से कहा, “इसे स्मरणार्थ एक पुस्तक में लिख और यहोशू को सुना दे कि मैं अमालेक का स्मरण आकाश के नीचे से पूरी रीति से मिटा डालूंगा।” और मूसा ने एक वेदी बनाई और उसका नाम रखा, ‘यहोवा निस्सी’। और उसने कहा, “यहोवा ने शपथ खाई है; यहोवा पीढ़ी से पीढ़ी तक अमालेक के विरुद्ध युद्ध करता रहेगा।” ”

यहोशू मूसा की आज्ञा के अनुसार, युद्धस्थल गया था, लेकिन अमालेक के साथ युद्ध से विजयी होने का कारण न तो मूसा की सामर्थ्य थी और न ही यहोशू की सामर्थ्य थी। वास्तव में उस युद्ध में परमेश्वर ने स्वयं लड़ाई की थी, और इस्राएल परमेश्वर की सहायता के द्वारा विजयी हुआ। परमेश्वर ने विजय दिलाने के लिए उनसे आगे चल कर लड़ाई की थी, इसलिए बाइबल में ऐसा लिखा है, “यहोवा पीढ़ी से पीढ़ी तक अमालेक के विरुद्ध युद्ध करता रहेगा।”

यरीहो शहरपनाह के गिर जाने के समय भी, यहोशू ने उस शहरपनाह को नहीं गिराया। वास्तव में परमेश्वर ने स्वयं गिराया। लोग यहोशू और मूसा के नाम को याद तो करते हैं, पर वे बहुत बार परमेश्वर को भूलते हैं जिन्होंने विजय दिलाने के लिए इस्राएल को दृढ़ किया और उनके पीछे सभी कार्य किए। हमें सिर्फ बाइबल में उन कथा बहादुर से नहीं लिपट जाना है, बल्कि सोचना चाहिए कि किसने उन्हें महान सामर्थ्य देकर बहादुर बनाया।

जिस प्रकार इस्राएलियों ने परमेश्वर की सहायता के द्वारा कनान देश को वंश में कर लिया, उसी प्रकार परमेश्वर के हमारी सहायता करने के कारण, हम स्वर्ग के राज्य में, जो आत्मिक कनान देश है, घटाए बिना, जा सकते हैं। पिता और पुत्र के युग की तरह, आज इस युग मे भी, परमेश्वर सिय्योन के निवासी, शुभ समाचार सुनाने वालों की सहायता करता है।

परमेश्वर ने जंगल में रोटी बरसाई


जब लोग बगीचे में पेड़ को देखते हैं, वे केवल अच्छे से पके हुए स्वादिष्ट फल पर ध्यान देते हैं। लेकिन ऐसे फल लगने तक किसान का परिक्षमी हाथ होता है जो पेड़ पर खाद डालता, शाखा निकालता, पाले से न गिरने के लिए फूल कली की रक्षा करता, और फल को कागज से लपेटता है कि कीड़ा उसे न खा जाए। संसार में कोई भी घटना अपने आप घटित नहीं होती है।

तब आइए हम सोचें, जब इस्राएलियों ने 40 वर्षों तक जंगल में जीवन बिताया, परमेश्वर ने आत्मा की अनदेखी दुनिया में अपनी प्रजाओं के हित में कितना बड़ा परिश्रम किया होगा?

निर्ग 16:4-8 “तब यहोवा ने मूसा से कहा, “देखो, मैं तुम लोगों के लिए आकाश से रोटी बरसाऊंगा और लोग प्रतिदिन बाहर जाकर दिन भर के लिए बटोरें। इस से मैं उनको परखूंगा कि वे मेरी व्यवस्था के अनुसार चलेंगे कि नहीं। ... मूसा ने कहा, “यह तब होगा जब यहोवा तुम्हें सन्ध्या के समय खाने के लिए मांस और प्रात:काल भरपेट रोटी देगा; क्योंकि तुम्हारा कुड़कुड़ाना हमारे विरुद्ध नहीं, परन्तु यहोवा के विरुद्ध है।”

परमेश्वर ने बंजर जंगल में, जहां खाने के लिए एक दाना भी नहीं मिलता, इस्राएलियों को भोजन दिया। उस समय, इस्राएल में 20 की उम्र के ऊपर पुरुषों की संख्या 6 लाख थी। स्त्रियां और बच्चे समेत जनसंख्या लगभग 30 लाख थी। लेकिन परमेश्वर ने 40 वर्षों के जंगल के जीवन में एक बार भी उन्हें भूख के मारे मरने नहीं दिया। उसने हर स्थिति में उनकी सहायता की कि वे जंगल के मुश्किल मार्ग से सुरक्षित रूप से जा सकें, और कनान देश में, जिसमें दूध और मधु की धाराएं बहती थीं, उनके हाथ पकड़ कर अगुवाई की।

परमेश्वर की ऐसी सामर्थ्य देखते हुए भी कि प्रतिदिन आकाश से रोटी बरसाता था और चट्टान को मारकर पानी दिया जिससे लोगों ने प्यास बुझाई, इस्राएलियों ने सिर्फ अपनी तकलीफ़ और दुख का ख्याल किया, न कि हर दिन उन्हें खिलाने वाले परमेश्वर का परिश्रम।

अब स्वर्गीय पिता और माता जो चुपके से पसीना बहाते हैं, उनके परिश्रम को हम सोचेंगे और उनका धन्यवाद करते हुए अनेक आत्माओं के मन को उद्धार की राह पर फिराने के काम में सारा मन और सारी इच्छा लगाएं।

परमेश्वर सुसमाचार का कार्य चलाता और पूरा करता है


जब हम पेड़ देखते हैं, पेड़ की शाखा, पत्ता, फूल और फल हैं। ये सब मूल भूमिका करने वाले नहीं, मात्र अधीन भाग हैं। फिर भी लोग शोभायमान फूल पर या शाखा के छोर पर लगे फलों पर नजर करने के द्वारा, मूर्खतापूर्ण तरीके से पूरे पेड़ का रूप नहीं देख पाते हैं।

उद्धार की मूलवस्तु परमेश्वर है। जब हम प्रचार करके अच्छा फल पैदा करते हैं, हमें यह सोचना चाहिए कि किसने यह फल पैदा करने दिया है। फल ‘मेरे द्वारा’ पैदा नहीं होता, पर परमेश्वर, जो पेड़ है, हम पर, पेड़ की शाखा पर फल लगाता है। यदि हम इसे गहराई से समझकर परमेश्वर को महिमा और स्तुति देते हैं, तो निश्चय सुसमाचार बहुत तेज़ी से सामरिया और पृथ्वी के छोर तक फैलाया जाएगा।

यश 14:24-27 “सेनाओं के यहोवा ने यह शपथ खाई है, “निस्सन्देह जैसा मैंने ठाना है, वैसा ही हो जाएगा और जैसी योजना मैंने बनाई है, वैसी ही वह पूरी हो जाएगी, ... यही योजना समस्त पृथ्वी के लिए ठहराई गई है, और यही वह हाथ है जो सब जातियों के विरुद्ध बढ़ा हुआ है। क्योंकि जिस बात को सेनाओं के यहोवा ने ठाना है उसे कौन रद्द कर सकता है? और उसके उठे हुए हाथ को भला कौन रोक सकता है?” ”

संसार का उद्धार करने के लिए, विश्व में सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य परमेश्वर ही चलाता है। इसलिए हमें परमेश्वर को इस पर धन्यवाद देना चाहिए कि हमें बुला कर उस कार्य में शामिल होने का मौका दिया है। तो यह हमारा काम और दायित्व होगा कि परमेश्वर के लिए उपयोगी पात्र होने के लिए खुद को शुद्ध करें।(2तीम 2:21)

उसे परमेश्वर की आवश्यकता नहीं लगती है, जो खुद को बुद्धिमान और समझदार समझता है। क्योंकि वह आदमी हमेशा अपनी शक्ति से सुसमाचार का कार्य करने की कोशिश करता है, जो निष्फल परिणाम का कारण बनता है। इसके विपरीत, जो अपनी कमी को जान कर ऐसा सोचता है कि परमेश्वर की सामर्थ्य के बिना कुछ भी पूरा नहीं होता, वह हर परिस्थिति में पूरी लगन से परमेश्वर से सहायता मांगते हुए ज़्यादा फल पैदा करता है।

हमें साहस और बहादुरी तो लेना है, लेकिन इसे नहीं भूलना चाहिए कि सभी कार्य परमेश्वर के द्वारा किए जाते हैं। सुसमाचार का महान कार्य तभी पूरा हो जाएगा जब हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर की सामर्थ्य के साथ सामरिया और पृथ्वी के छोर तक संसार का उद्धार करने आगे जाएंगे। इसलिए पौलुस ने खुद को क्रूस पर चढ़ाया, और वह हर दिन अपने में मसीह को सोचते हुए परमेश्वर पर भरोसा करता था।

यदि हम यह विश्वास करते हैं कि जो कार्य परमेश्वर चलाता है, वह अवश्य ही पूरा होता है और वह हमें आशीष देने के लिए है, और हम हर पल परमेश्वर पर भरोसा करते और उसके वचन में आज्ञाकारी रहते हैं, तो हम संसार में सारे लोगों का मन उनके पापों से फिरा सकेंगे। सुसमाचार के बीज तभी जड़ लगाकर फल पैदा करते हैं जब परमेश्वर लोगों के पत्थर सा कठोर मन को कोमल बनाता और सब को तैयार करता है कि वे वचन को ग्रहण कर सकें।

नीत 16:1-3 “मनुष्य अपने दय में युक्तियां बनाता है, परन्तु उनका सफल होना यहोवा की ओर से होता है। ... अपना सब काम यहोवा को सौंप दे, और तेरी योजनाएं सफल होंगी।”

वह काम जिसकी योजना परमेश्वर बनाता है, निश्चय सफल होता है। इसलिए विश्व में सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य भी यदि हम परमेश्वर को सौंपते हैं, तब वह अवश्य ही सफल होगा। यदि कोई परमेश्वर के बिना अपनी शक्ति के द्वारा सफल बनाने की कोशिश करता है, उद्धार का कार्य, जिसकी योजना परमेश्वर ने बनाई, एक कदम भी नहीं बढ़ा सकता। इसलिए हमें प्रार्थना करनी चाहिए। जब पिता और माता की सहायता और हमारे जोश एक साथ मिले रहते हैं, तभी संसार के उद्धार के प्रति परमेश्वर की योजना पूर्ण रूप से पूरी होगी।

परमेश्वर जो सदा-सर्वदा हमारी अगुवाई करता है


हमें पूरी तरह से परमेश्वर की आवश्यकता है। हमें परमेश्वर पर, जो हमारी रक्षा करता और दुष्टता में न फंसने के लिए हमारी अगुवाई करता है, भरोसा करते हुए और परमेश्वर के साथ साथ होते हुए संसार का उद्धार करने के लिए दौड़ लगाना चाहिए।

भज 48:8-14 “ ... हे परमेश्वर, जैसा तेरा नाम है, वैसी ही तेरी स्तुति भी पृथ्वी के छोर तक होती है; तेरा दाहिना हाथ धार्मिकता से परिपूर्ण है ... क्योंकि यह है परमेश्वर जो सदा-सर्वदा हमारा परमेश्वर है। मृत्यु तक वह हमारी अगुवाई करेगा।”

परमेश्वर सदा के लिए हमारा परमेश्वर है। वो परमेश्वर, जो मूसा के साथ था और यहोशू के साथ था, आज भी हमारे साथ है और अन्त तक हमारी अगुवाई करता है। वो परमेश्वर, जिसने प्रेरित पौलुस की सहायता की, पतरस की सहायता की और प्रथम चर्च के सभी संतों की सहायता की, इस युग में भी हमारी सहायता करता है।

भज 23:1-6 “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरे हरे चरागाहों में बैठाता है; वह मुझे सुखदायक जल के सोतों के पास ले चलता है। वह मेरे जी में जी ले आता है, धार्मिकता के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। चाहे मैं मृत्यु के घोर अन्धकार की तराई में होकर चलूं, फिर भी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; ... निश्चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी, और मैं यहोवा के घर में सर्वदा वास करूंगा।”

मेमना दुर्बल है, पर वह चरवाहे की सहायता से सभी खतरों से बच सकता है। वह जिस पर केवल मेमना भरोसा रख सकता है, चरवाहा है। इसी तरह से परमेश्वर हमारा चरवाहा है।

परमेश्वर हमारी सहायता करता है, जिसके द्वारा फिलहाल विश्व के हर प्रांतों में पवित्र आत्मा का आंदोलन बहुत सक्रिय रूप से चलाया जाता है और सुसमाचार बहुत तेजी से फैलाया जा रहा है। इसमें यदि पवित्र आत्मा के आंदोलन पर बाधा डाली जाती है, उसका कारण दूसरा नहीं, पर ‘मैं स्वयं’ है। सुसमाचार का कार्य ‘मेरे जाने से’ या ‘मेरे करने के कारण’ पूरा नहीं होता, लेकिन केवल परमेश्वर के साथ होने के कारण सुसमाचार का सब कार्य पूरा होता है।

संसार उसका इन्तजार करता है जो परमेश्वर के साथ होता है। जो हमेशा परमेश्वर का स्मरण करता है और परमेश्वर की इच्छा पर ध्यान करता है, परमेश्वर उन्हें पवित्र आत्मा का आश्चर्य कार्य दिखाता है। परमेश्वर ने वादा किया कि वह संसार के अन्त तक हमारे साथ होगा। इसलिए जैसे परमेश्वर ने योजना बनाई है, हमें हमारा चरवाहा, एलोहीम परमेश्वर, स्वर्गीय पिता और माता के साथ विश्व में सारे देशों को सुसमाचार का प्रचार करने जाना चाहिए। आप से निवेदन है कि आप अकेले नहीं, पर अपने मन के केंद्र में परमेश्वर के साथ होते हुए, विदेश में या अपने देश में सुसमाचार के अनुग्रहमय फल बहुतायत में पाएं।