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स्वर्गीय विवाह का भोज

बाइबल हमें बताती है कि जो इस पृथ्वी पर है उसकी वास्तविकता स्वर्ग में है।(इब्र 8:5 संदर्भ) जैसे हमारी शारीरिक देह होती है, वैसे ही परमेश्वर की सन्तान के लिए भी, जो उद्धार पाकर स्वर्ग वापस जाएंगी, नए सिरे से जन्मी आत्मिक आकृति होगी। जैसे शारीरिक माता–पिता हैं जिन्होंने हमें जन्म दिया और हमारा पालन–पोषण किया, वैसे ही हमारे लिए आत्मिक माता–पिता हैं जो हमें स्वर्गीय और आत्मिक आकृति में बदल कर नया जन्म देते हैं। हम परमेश्वर की सृष्टि–योजना के द्वारा इस सच्चाई को खोज सकते हैं।

प्रकृति के अनुसार दिया जाता अनन्त जीवन


प्राचीन काल में पूर्वज ऐसा कहा करते थे, ‘यह सहज है, मनुष्य को स्वर्ग की इच्छा समझ कर प्रकृति के अनुसार चलना है।’ और ‘जो भी काम प्रकृति के अनुसार किया जाता है, वह सिद्ध होता है।’ प्रकृति के अनुसार चलने का अर्थ, स्वर्ग की इच्छा के अनुरूप चलना है। परमेश्वर की इच्छा सारी रचनाओं में दिखाई देती है, इसलिए यदि हम प्राकृतिक सिद्धांत के अनुसार चलें, तो हम स्वर्ग की इच्छा के अनुरूप चल सकेंगे।

प्रक 4:9–11 “क्योंकि तू ने ही सब वस्तुओं को सृजा, और उनका अस्तित्व और उनकी सृष्टि तेरी ही इच्छा से हुई।”

जब परमेश्वर ने संसार की सृष्टि की, उसने अपनी इच्छा को रचनाओं के अन्दर लगाया, जिससे कि परमेश्वर की इच्छा रचनाओं के द्वारा ज़ाहिर हो सके। चाहे संसार की रीति उलटती हो, तो भी पुरुष बच्चे को जन्म नहीं दे सकता, और यह हमेशा स्वाभाविक होता है कि जब पुरुष के रूप में जन्मा है, पुरुष का कर्तव्य निभाना है और जब महिला के रूप में जन्मी है, महिला का कर्तव्य निभाना है। अत: प्राकृतिक सिद्धांत के अनुसार पालन करने के द्वारा, मनुष्य परमेश्वर की सृष्टि की इच्छा के अनुसार पालन कर सकते हैं।

परमेश्वर ने अपनी इच्छा के अनुसार आकाश, पृथ्वी और सभी जीवों को बनाया, इसलिए हमें अवश्य ही प्राकृतिक सिद्धांत के अनुरूप सोचना और चलना चाहिए, जिससे कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप चल सकें। परमेश्वर ने अपनी प्रजाओं से, जो प्राकृतिक सिद्धांत का पालन करते हैं, इस प्रकार वादा किया;

1यूह 2:25 “जो प्रतिज्ञा स्वयं उसने हम से की है, वह यह है, अर्थात् अनन्त जीवन।”

परमेश्वर हमें परछाई और प्रतिरूप की सारी रचनाओं के द्वारा, असलियत को समझाता है जो स्वर्ग में है। उनमें से जो सब से खास है वह अनन्त जीवन है। पुराने नियम और नए नियम का मतलब पुरानी प्रतिज्ञा और नई प्रतिज्ञा है। यह तो बढ़ा चढ़ाकर कहना नहीं है कि पुराने और नए नियम के सभी ग्रंथ परमेश्वर की प्रतिज्ञा, ‘अनन्त जीवन’ की साक्षी देने के लिए मौजूद हैं।

तब हम कैसे अनन्त जीवन, जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की, पा सकेंगे? परमेश्वर ने सृष्टि–योजना के द्वारा हमें पहले से इसका उत्तर दिखाया है। जब हम बाइबल के उत्पत्ति ग्रंथ में लिखित परमेश्वर की 6 दिनों की सृष्टि–योजना देखें, तब परमेश्वर ने आख़िरी दिन, छठवें दिन मनुष्य की सृष्टि की। उस दिन, उसने पुरुष आदम को पहले बनाया था, लेकिन उसने सोचा कि आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं है, इसलिए उसके लिए सहायक, हव्वा को बनाया और सारी सृष्टि की रचना को समाप्त किया।

परमेश्वर ने किस मुख्य कारण से, पुरुष के लिए ‘सहायक’ महिला बनाई? वह किसमें सहायता कर सकती है? एक काम है जो पुरुष कभी नहीं कर सकता, वह सन्तान को जीवन देकर पैदा करने की भूमिका है। यह केवल महिला की भूमिका है। संसार में सभी जीव माता के द्वारा जन्म लेते हैं और जीवन पाते हैं। ऐसा प्राकृतिक सिद्धांत दिखाता है कि स्वर्ग में भी वैसे ही माता के द्वारा जीवन दिया जाएगा।

“मेमने का विवाह आ पहुंचा है”


इस धरती पर पिता, भाई और बहन होती है। वे हमें यह दिखाने के लिए मौजूद हैं कि स्वर्ग में भी स्वर्गीय पिता, स्वर्गीय भाई और बहन होती है। इस तरह, इस धरती पर हमारी शारीरिक माता होती है जो हमें जन्म और शारीरिक जीवन देती है। यह भी हमें दिखाता है कि स्वर्ग में हमारी आत्मिक माता होती है जो हमें अनन्त जीवन, जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की, देती है।

शारीरिक तौर पर, विवाह के द्वारा एक परिवार का निर्माण होता है, और उस परिवार में पति और पत्नी के द्वारा सन्तान जन्म लेती है। स्वर्ग में भी वैसा ही है। यीशु ने स्वर्गीय विवाह भोज के बारे में दृष्टान्त में बताया:

मत 22:1–14 “यीशु ने फिर उनसे दृष्टान्तों में कहा, “स्वर्ग के राज्य की तुलना एक राजा से की जा सकती है जिसने अपने पुत्र के विवाह का भोज दिया। उसने भोज में आमन्त्रित लोगों को बुलाने के लिए अपने दास भेजे, परन्तु उन लोगों ने आना नहीं चाहा। ... तब उसने अपने दासों से कहा, ‘विवाह–भोज तो तैयार है, परन्तु वे जो बुलाए गए थे योग्य न निकले। इसलिए मुख्य चौराहों पर जाओ और जितने भी तुम्हें मिलें, विवाह–भोज में बुला लाओ।’ वे दास गलियों में गए और जो भी भला या बुरा उन्हें मिला, सब को एकत्रित किया; और विवाह का घर भोज के अतिथियों से भर गया। पर जब भोज में सम्मिलित अतिथियों को देखने के लिए राजा आया, तो उसने वहां एक मनुष्य को देखा जो विवाह का वस्त्र पहिने हुए न था, और उसने उस से कहा, ‘मित्र, तू यहां विवाह का वस्त्र पहिने बिना कैसे आ गया? और वह कुछ न कह सका। तब राजा ने अपने नौकरों से कहा, ‘उसके हाथ और पैर बांधकर उसे बाहर अन्धकार में डाल दो। वहां रोना और दांत पीसना होगा।’ क्योंकि बुलाए हुए तो बहुत हैं, परन्तु चुने हुए थोड़े हैं।”

दृष्टान्त में जिसने अपने पुत्र के विवाह का भोज दिया, वह राजा परमेश्वर है, और दूल्हा यीशु है, और यहां विवाह के भोज में लोगों को आमन्त्रित करना, अनन्त जीवन के स्वर्गीय विवाह भोज में उद्धार पाने वालों को इकट्ठा करने को दिखाता है। इसलिए वे धन्य हैं जो इस स्वर्गीय विवाह भोज में आमंत्रित हैं।

प्रक 19:9 “फिर उसने मुझ से कहा “लिख, ‘धन्य हैं वे जो मेमने के विवाह के भोज में आमंत्रित हैं’।” ... ”

लेकिन मत्ती ग्रंथ के दृष्टान्त में नायिका दुल्हिन उपस्थित नहीं है। वास्तव में 2 हज़ार वर्ष पहले, जब यीशु आया, यीशु ने विवाह नहीं किया था। इससे हम समझ सकते हैं कि उस समय, स्वर्गीय विवाह भोज का आयोजन नहीं किया गया था। तब मेमने के विवाह भोज का आयोजन कब किया जाएगा?

प्रक 19:6–8 “ ... आओ, हम आनन्दित और हर्षित हों और उसकी स्तुति करें, क्योंकि मेमने का विवाह आ पहुंचा है और उस की दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है। उसे चमकदार, स्वच्छ और महीन मलमल पहिनने को दिया गया है”–यह मलमल तो संतों के धर्मिकता के कार्य हैं–”

मेमने के विवाह के भोज का समय निश्चित है। मत्ती ग्रंथ के दृष्टान्त में दुल्हिन प्रकट नहीं हुई थी, लेकिन प्रकाशन में, जिसे यूहन्ना ने देखा, मेमने की दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है। सन् 96 में प्रेरित यूहन्ना ने भविष्य में होने वाली बातों को प्रकाशन से देखकर प्रकाशितवाक्य में लिखा था। इसलिए जब यीशु दूसरी बार आएगा, भविष्यवाणी के अनुसार मेमने के विवाह का आयोजन किया जाएगा और मेमने की दुल्हिन अपने आप को तैयार कर लेगी।

दुल्हिन, स्वर्गीय माता है


तब आइए हम देखें, दुल्हिन कौन है जो मेमने की पत्नी के रूप में तैयार की गई? यीशु ने कहा, “तुम्हें यह प्रदान किया गया है कि स्वर्ग के राज्य के भेदों को जानो, परन्तु उन्हें नहीं।”(मत 13:10–11)

जिन्होंने दूल्हे और दुल्हिन से निमंत्रण–पत्र लिया है, वे निश्चित रूप से दूल्हे और दुल्हिन को जानते हैं और उनके नाम भी जानते हैं। लेकिन जो आमंत्रित नहीं किए गए हैं, उन्हें सब मालूम नहीं होता। इस तरह, जो मेमने के विवाह भोज में आमंत्रित हैं और बुलाए गए हैं, वे ही इस रहस्य को जानते हैं। जैसा लिखा है, “धन्य हैं वे जो मेमने के विवाह के भोज में आमंत्रित हैं।”, विवाह के भोज में दूल्हे और दुल्हिन को जानने की आशीष केवल उन्हें मिलेगी जो पृथ्वी पर 6 अरब की जनसंख्या में से चुने गए हैं।

प्रक 21:9–10 “फिर जिन सात दूतों के पास सात अंतिम विपत्तियों से भरे सात कटोरे थे, उनमें से एक ने मेरे पास आकर कहा, “यहां आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेमने की पत्नी दिखाऊंगा।” तब वह मुझे आत्मा में एक विशाल और ऊंचे पर्वत पर ले गया और उसने पवित्र नगरी यरूशलेम को स्वर्ग में से परमेश्वर के पास से नीचे उतरते हुए दिखाया।”

गल 4:26 “परन्तु ऊपर की यरूशलेम स्वतन्त्र है, और वह हमारी माता है।”


स्वर्गदूत ने यूहन्ना को कहा, “यहां आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेमने की पत्नी दिखाऊंगा।” और उसने यरूशलेम को दिखाया।”, इससे हम जान सकते हैं कि यरूशलेम मेमने की पत्नी को दर्शाता है।

मेमने की पत्नी, यरूशलेम आत्मिक माता है जो हमें अनन्त जीवन देती है। आत्मिक माता के बिना, नया जीव कभी पैदा नहीं हो सकता। यह सृष्टि की योजना है कि माता के द्वारा जीव पैदा हो सकता है। सृष्टि की ऐसी योजना में अवश्य ही परमेश्वर की इच्छा है।

उद्धार और आशीष जो माता के कारण दी जाती है


परमेश्वर के 6 हज़ार वर्ष के उद्धार–कार्य के दौरान, सब से महत्वपूर्ण प्रतिज्ञा अनन्त जीवन की है जो माता देती है। फिर भी, बहुत सारे विश्वास के पूर्वजों और नबियों ने, जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीते थे, यह प्रतिज्ञा नहीं पाई। क्योंकि इस प्रतिज्ञा की आशिष, अन्तिम युग में यरूशलेम माता के प्रकट होने के द्वारा दी जाती है।

इब्र 11:38–40 “संसार उनके योग्य नहीं था। वे रेगिस्तानों, पर्वतों, गुफाओं और पृथ्वी की दरारों में छिपते फिरे। यद्यपि विश्वास ही के कारण इन सब की अच्छी गवाही दी गई, फिर भी उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तु को प्राप्त न किया। क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिए पहिले ही से एक उत्तम बात ठहराई थी कि वे हमारे बिना सिद्धता प्राप्त न करें।”

परमेश्वर की प्रतिज्ञा, अनन्त जीवन आत्मिक माता के आने के द्वारा दिया जाता है। हम इतने अधिक महत्वपूर्ण युग में जी रहे हैं कि परमेश्वर की प्रतिज्ञा हमें दी जा रही है। परमेश्वर हमें, जो 6 हज़ार वर्ष के उद्धार–कार्य के दौरान सब से खरे चरित्र के लोग हैं, चुन कर स्वर्ग की ओर अगुवाई करना चाहता है। इसलिए परमेश्वर ने हमें बाइबल की 66 पुस्तकों में मुख्य बिन्दु को समझाया, और वह हमें, जो माता पर विश्वास करके उसका पालन करते हैं, श्रेष्ठ मानता है।

माता के प्रकट हुए बिना, कोई भी अनन्त जीवन की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। यीशु ने यह कहने के बाद, “जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, अनन्त जीवन उसका है।”(यूह 6:53–56 संदर्भ) फसह को स्थापित किया। हमें फसह के प्रति परमेश्वर की पूर्व योजना को समझना जरूरी है। प्रथम बार आए यीशु के समय, यदि नई वाचा के फसह के द्वारा, जो यीशु ने स्थापित किया, उद्धार पूरा हो सका होता, तो पवित्र आत्मा के युग की आवश्यकता नहीं हुई होती। फसह की रोटी और दाखमधु के द्वारा अनन्त जीवन की प्रतिज्ञा तभी मिल सकती है जब स्वर्गीय माता प्रकट होगी।

परमेश्वर ने 6 हज़ार वर्ष के उद्धार की अवधि को पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के युग, यानी तीन युगों में, बांटा। और परमेश्वर ने हर युग में हमारा उद्धार करने की योजना बनाई। जैसे 6 दिनों की सृष्टि की अन्तिम क्रिया में, परमेश्वर ने हव्वा को बना कर सृष्टि का कार्य पूरा किया, वैसे ही उद्धार का कार्य भी अन्तिम दिन में माता के प्रकट होने के द्वारा पूरा होता है। इसलिए यूहन्ना अध्याय 6 में यीशु ने चार बार यह दुहराया, “मैं अन्तिम दिन में उसे जिला उठाऊँगा।”

हव्वा, यानी महिला से जीव पैदा हो सकता है। ऐसे बहुमूल्य अनन्त जीवन का रहस्य, इस युग में हमें प्रदान किया गया है। परमेश्वर ने हमें ऐसी सर्वोत्तम आशीष, जो हम संसार में किसी से भी नहीं बदल सकते, बिना मूल्य देने की प्रतिज्ञा की है। इसलिए हमें इस उद्धार को तुच्छ न समझना है।

परमेश्वर ने जगत की सृष्टि के समय से, उस स्वर्गीय माता के अस्तित्व की भविष्यवाणी की जो हमें आत्मिक आकृति में नया जन्म देती है।

उत 3:20 “तब आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा, क्योंकि पृथ्वी पर जीवित सब मनुष्यों की आदिमाता वही हुई।”

बाइबल कहती है कि आदम आने वाले, यानी मसीह को दर्शाता है।(रो 5:14 संदर्भ) यदि आदम यीशु को दर्शाता है, तो हम आसानी से समझ सकते हैं कि आदम की पत्नी, हव्वा अवश्य ही यीशु, मेमने की पत्नी को दर्शाती है। आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा। यदि उत 3:20 की टिप्पणी को देखें, हव्वा का अर्थ जीवन है। आदम, यानी यीशु के अपनी पत्नी का नाम ‘जीवन’ रखने का तात्पर्य हमें यह दिखाने के लिए है कि उसकी पत्नी के द्वारा जीव पैदा होंगे। 6 हज़ार वर्ष के उद्धार–कार्य का फल अनन्त जीवन है। अनन्त जीवन देने के लिए, जो निश्चय ही आवश्यक है, वह मेमने की पत्नी, माता है जो हव्वा से दर्शाई गई।

जीवन का जल देने वाले पवित्र आत्मा और दुल्हिन


जहां माता नहीं है, वहां जीवन नहीं है। जहां माता नहीं है, वहां सत्य भी नहीं है। और जो माता पर विश्वास नहीं करता, उसका स्वर्ग जाना और अनन्त जीवन पाना निश्चित नहीं है।

बाइबल के अन्तिम अध्याय में, हम देख सकते हैं कि जीवन का जल उन्हें दिया जा रहा है जो स्वर्गीय विवाह के भोज में दूल्हे और दुल्हिन, स्वर्गीय पिता और स्वर्गीय माता को महसूस करते हैं और विवाह के भोज में शामिल हैं।

प्रक 22:17–19 “आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुनने वाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो, वह आए। जो चाहता है, वह जीवन का जल बिना मूल्य ले। मैं प्रत्येक को जो इस पुस्तक की नबूवत के वचनों को सुनता है गवाही देता हूं: यदि कोई इनमें कुछ बढ़ाएगा तो परमेश्वर इस पुस्तक में लिखी विपत्तियों को उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस नबूवत की पुस्तक के वचनों को घटाएगा तो परमेश्वर इस पुस्तक में लिखित जीवन के वृक्ष और पवित्र नगरी से उसका भाग छीन लेगा।”

पवित्र आत्मा हमारा पिता है, और दुल्हिन हमारी माता है, क्योंकि वह पिता की दुल्हिन है। जीवन का जल पिता और माता, दोनों दे रहे हैं। फिर भी बाइबल परमेश्वर को एकमात्र बता रहा है, क्योंकि पिता परमेश्वर प्रतिनिधि है। यदि उत्पत्ति ग्रंथ को देखें, आदम के साथ हव्वा ने भी पाप किया था, तो भी रोमियों ग्रंथ में ऐसा लिखा है, “एक मनुष्य के द्वारा पाप ने जगत में प्रवेश किया।”(रो 5:12) इसका कारण है कि बाइबल हव्वा को आदम के एक अंग के रूप में मानती है, इसलिए प्रतिनिधि के रूप से केवल आदम का ही नाम लिखा है। परमेश्वर ने नर की पसली से नारी को बनाया, इस कारण से बाइबल कहती है, “वे एक ही तन बने रहेंगे।”(उत 2:21–24) और लोग सहज बुद्धि से यह सोच सकते हैं कि पति और पत्नी एक हैं। मनुष्य की ऐसी दृष्टिकोण मूल रूप से, परमेश्वर की सृष्टि की इच्छा से है, और परमेश्वर ने लोगों को यह मन दिया है।

लेकिन नए नियम में माता का अस्तित्व अलग से लिखा गया है। क्योंकि पिता और माता दोनों के प्रकट होने के द्वारा अन्तिम युग में अनन्त जीवन मिल सकता है। इस तरह से, जीवन का जल देने वाले पवित्र आत्मा और दुल्हिन स्पष्ट रूप से लिखे गए, फिर भी लोग ऐसा आग्रह करते हैं कि माता नहीं है। उनके बारे में बाइबल ने आख़िरी वाक्य में भविष्यवाणी की है कि वे अनन्त स्वर्ग में कभी प्रवेश नहीं करेंगे।

आज, समुद्र की बालू जैसे असंख्य चर्च हैं, लेकिन वे न तो स्वर्गीय माता को जानते हैं और न उसे पुकारते और न उस पर विश्वास करते हैं। क्योंकि अनन्त जीवन देने वाले स्वर्गीय पिता और स्वर्गीय माता उनके परमेश्वर नहीं हैं, और उन्हें यह ज्ञान जानने का अधिकार नहीं दिया गया है।

हम इस वचन के द्वारा, “धन्य हैं वे जो मेमने के विवाह के भोज में आमंत्रित हैं” जान सकते हैं कि जो पिता और माता के सत्य को महसूस करके पूरा विश्वास करते हैं, वे स्वर्गीय विवाह के भोज में आमंत्रित किए गए धन्य लोग हैं। आशा है कि आप, परमेश्वर के पुत्र और पुत्रियां, पवित्र आत्मा और दुल्हिन पर, जो ‘जीवन का जल पाने के लिए आओ’ कह कर हमें बुला रहे हैं, अन्त तक विश्वास करें और स्वर्गीय आकृति में नया जन्म पाएं।