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संसार की ओर जाग उठने की पुकार

हम बाइबल में देख सकते हैं कि जब बहुत सी आत्माओं को योना की पुकार और पतरस के प्रचार जैसी जाग उठने की पुकार लगाई गई तो उन्हें उद्धार की ओर ले आया गया।

जैसे मुर्गा भोर के आगमन की पूर्व सूचना देने और लोगों को जगाने के लिए बांग देता है, वैसे ही परमेश्वर के लोगों को इस अंधकारमय और धुंधले संसार को सुसमाचार के प्रचार की पुकार से जगाना चाहिए। आत्मिक रूप से यह अव्यवस्था और अंधकार का युग है। जब तक हम संसार के प्रति जाग उठने की पुकार नहीं लगाएंगे, कोई भी आत्मिक रूप से इस वर्तमान समय को नहीं पहचान पाएगा। हमें एक ऊंची और साफ आवाज के साथ, आत्मिक रूप से गहरी नींद में सो रही आत्माओं को जगाना चाहिए, और उन्हें उस नरक से जहां वे जाने को विवश हैं, बचाकर स्वर्ग की ओर उनकी अगुआई करनी चाहिए।

“अब से चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा”
– योना के प्रचार ने नीनवे के लोगों को जगा दिया



योना 1:1–17 यहोवा का यह वचन अमित्तै के पुत्र योना के पास पहुंचा: “उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है।” परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और याफा नगर को जाकर तर्शीश जानेवाला एक जहाज़ पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए। तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था... तब उन्होंने योना को उठाकर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें थम गईं... योना उस महामच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।

परमेश्वर ने योना को अश्शूर की राजधानी नीनवे में भेजा, और उसे नीनवे के लोगों को जगाने के लिए उच्च स्वर में चेतावनी देने के लिए कहा।

नीनवे के लोग परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते थे और वे इस्राएलियों पर अत्याचार करते थे। योना ने सोचा कि यदि वह नीनवे जाए और वहां के लोगों को परमेश्वर के संदेश का प्रचार करे, तो वे उसके जीवन को जोखिम में डाल देंगे। इसलिए वह वहां से भागकर तर्शीश के लिए निकल पड़ा। हालांकि, वह एक बहुत ही कटु अनुभव से गुजरा, क्योंकि नबी होने के नाते जिसे संसार को जगाने का मिशन सौंपा गया था, उसने अपना कर्त्तव्य पूरा नहीं किया। अंत में, उसने पश्चाताप किया और नीनवे जाकर परमेश्वर के संदेश का प्रचार किया।

योना 3:1–10 तब यहोवा का यह वचन दूसरी बार योना के पास पहुंचा: “उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और जो बात मैं तुझ से कहूंगा, उसका उस में प्रचार कर।” तब योना यहोवा के वचन के अनुसार नीनवे को गया... योना ने नगर में प्रवेश करके एक दिन की यात्रा पूरी की, और यह प्रचार करता गया, “अब से चालीस दिन के बीतने पर नीनवे उलट दिया जाएगा।” तब नीनवे के मनुष्यों ने परमेश्वर के वचन की प्रतीति की; और उपवास का प्रचार किया गया और बड़े से लेकर छोटे तक सभों ने टाट ओढ़ा... जब परमेश्वर ने उनके कामों को देखा, कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, तब परमेश्वर ने अपनी इच्छा बदल दी, और उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया।

जब योना ने संसार के प्रति जाग उठने की पुकार, यानी परमेश्वर के संदेश की घोषणा की, तो राजा समेत नीनवे के सभी 1,20,000 लोगों ने और यहां तक कि जानवरों ने भी टाट ओढ़ा और उपवास किया। योना की पुकार ने नीनवे के लोगों की आत्मिक संवेदना को जगा दिया और उन्हें पश्चाताप करवाया। इस कारण से वे नाश होने से बच सके।

“मन फिराओ और मसीह के नाम से बपतिस्मा लो”
– पतरस का प्रचार पूरे यरूशलेम में फैल गया



बाइबल कहती है कि जब तक हम संसार के प्रति जाग उठने की पुकार नहीं लगाते, तब तक संसार हमेशा के लिए नींद में रहेगा। हालांकि, यदि हम चेतावनी की पुकार लगाएं, तो संसार के सभी लोग मृत्यु की गहरी नींद से जाग उठेंगे। जैसे योना ने बहुतों को पश्चाताप करवाया था, वैसे ही पतरस ने एक ही दिन में, 3,000 लोगों की पश्चाताप करने और अपने पापों का परमेश्वर के सामने अंगीकार करने में अगुआई की।

प्रे 2:14–36 तब पतरस उन ग्यारह के साथ खड़ा हुआ और ऊंचे शब्द से कहने लगा, “हे यहूदियो, और हे यरूशलेम के सब रहनेवालो यह जान लो, और कान लगाकर मेरी बातें सुनो... अत: अब इस्राएल का सारा घराना निश्चित रूप से जान ले कि परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।”

प्रे 2:37–41 तब सुननेवालों के हृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, “हे भाइयो, हम क्या करें?” पतरस ने उनसे कहा, “मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले... अपने आप को इस टेढ़ी जाति से बचाओ। अत: जिन्होंने उसका वचन ग्रहण किया उन्होंने बपतिस्मा लिया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्यों के लगभग उनमें मिल गए।


पतरस पवित्र आत्मा से प्रेरित हो गया था, और उसने निडरतापूर्वक परमेश्वर के वचनों की घोषणा की। तब 3,000 से ज्यादा आत्माएं, जो सच्ची ज्योति, यानी मसीह को न जानते हुए अंधेरे में भटकती थीं, उसके उपदेश से जाग उठीं और मसीह को ग्रहण किया।

जैसा परमेश्वर ने योना और पतरस को संसार को जाग उठने की पुकार लगाने का कार्य सौंपा था, उन्होंने हमें भी वैसा ही कार्य सौंपा है। जैसे परमेश्वर ने भोर के आगमन की पूर्व सूचना देने के लिए मुर्गे को बांग देने की आवाज दी है, वैसे ही उन्होंने संसार को जगाने के लिए अपने लोगों को एक विशेष गुण दिया है। हमें परमेश्वर के विश्वासयोग्य लोगों के तौर पर चुप नहीं रहना चाहिए, लेकिन जाकर संसार को जगाना चाहिए।

यदि पतरस ने परमेश्वर के वचनों की घोषणा न की होती और चुप रहा होता, तो क्या वह एक दिन में 3,000 लोगों की पश्ताचाप की ओर अगुआई कर सकता? यदि हम संसार को जाग उठने की पुकार नहीं लगाते, तो लोग अपनी गहरी आत्मिक नींद से नहीं जागेंगे।

आत्मिक पहरेदार परमेश्वर की आवाज से संसार को जगाते हैं



यहेज 3:17–21 “हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिए पहरुआ नियुक्त किया है; तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना। जब मैं दुष्ट से कहूं ‘तू निश्चय मरेगा,’ और यदि तू उसको न चिताए, और न दुष्ट से ऐसी बात कहे जिस से कि वह सचेत हो और अपना दुष्ट मार्ग छोड़कर जीवित रहे, तो वह दुष्ट अपने अधर्म में फंसा हुआ मरेगा, परन्तु उसके खून का लेखा मैं तुझी से लूंगा। पर यदि तू दुष्ट को चिताए, और वह अपनी दुष्टता और दुष्ट मार्ग से न फिरे, तो वह तो अपने अधर्म में फंसा हुआ मर जाएगा; परन्तु तू अपने प्राणों को बचाएगा...”

यहेज 3:7–11 “... इसलिये तू उन से न डरना, और न उनके मुंह देखकर तेरा मन कच्चा हो; क्योंकि वे विद्रोही घराने के हैं।” फिर उसने मुझ से कहा, “हे मनुष्य के सन्तान, कितने वचन मैं तुझ से कहूं, वे सब हृदय में रख और कानों से सुन। और उन बन्दियों के पास जाकर, जो तेरे जाति भाई हैं, उन से बातें करना और कहना, ‘प्रभु यहोवा यों कहता है;’ चाहे वे सुनें, या न सुनें।”


ये वचन केवल यहेजकेल नबी को नहीं, परन्तु उन सभी लोगों को दिए गए हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करते हैं।
जब हम पहरेदार के कर्त्तव्य का पालन करते हुए, परमेश्वर के वचनों का प्रचार करते हैं, तो हमें परमेश्वर के वचनों में न कुछ जोड़ना चाहिए और उनमें से न कुछ निकालना चाहिए, ताकि हम संसार की पश्चाताप और उद्धार की ओर अगुआई कर सकें।

प्रक 22:18–19 मैं हर एक को, जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं: यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए तो परमेश्वर उन विपत्तियों को, जो इस पुस्तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के वृक्ष और पवित्र नगर में से, जिसका वर्णन इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा।

ऊपर के वचन हमें एक बार फिर याद दिलाते हैं कि जैसा परमेश्वर का वचन है, ठीक वैसा ही प्रचार करना ही हमारा मिशन है। यह संसार शैतान की जंजीर से बंधकर, अंधकार से भरपूर है, इसलिए लोग परमेश्वर की सच्ची इच्छा को नहीं समझ पाते। परमेश्वर के लोगों को इस अंधेरे संसार को अनदेखा नहीं करना चाहिए, लेकिन परमेश्वर के वचनों के द्वारा संसार को लगातार जगाना चाहिए।

परमेश्वर का रहस्य, मसीह



जब हम सामरिया और पृथ्वी की छोर तक सुसमाचार का प्रचार करते हैं, तब यह सुसमाचार संसार को जगाने के लिए एक तुरही नाद के समान कार्य करता है। इस सुसमाचार का सबसे महान रहस्य मसीह है।

कुल 1:23–27 यदि तुम विश्वास की नींव पर दृढ़ बने रहो और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिसका प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्टि में किया गया, और जिसका मैं, पौलुस, सेवक बना... अर्थात् उस भेद को जो समयों और पीढ़ियों से गुप्त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है, और वह यह है कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है।

परमेश्वर ने हमें, जो इस अंतिम युग में जी रहे हैं, उद्धार के मार्ग की ओर मार्गदर्शित करने के लिए रहस्यों के रहस्य, यानी मसीह को जानने दिया है। बाइबल वह पुस्तक है जो मसीह की गवाही देती है।(यूह 5:39) इसलिए हमें बाइबल के वचनों में मनुष्यों के विचारों और तत्त्वज्ञान को नहीं जोड़ना चाहिए, लेकिन केवल बाइबल के द्वारा ही मानव जाति के उद्धार के लिए परमेश्वर के पूर्व विचार को समझना चाहिए।

बाइबल मसीह की, यानी उस रहस्य की, जो समयों और पीढ़ियों से गुप्त रखा गया था, इस प्रकार गवाही देती है।

रो 5:12–14 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया... तौभी आदम से लेकर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्होंने उस आदम, जो उस आनेवाले का चिन्ह है, के अपराध के समान पाप न किया।

यहां, “आनेवाला” यीशु की ओर इशारा करता है। बाइबल कहती है कि आदम मसीह का एक चिन्ह था। उसमें एक महत्वपूर्ण अर्थ समाया हुआ है। परमेश्वर ने पहले पुरुष आदम को बनाया और उसकी पसली से हव्वा को बनाया। इसलिए जब लोग आदम के बारे में बात करते हैं, उसके साथ–साथ उसकी पत्नी हव्वा का उल्लेख भी जरूरी लगता है।

यदि आदम मसीह को दर्शाता है, तो उसकी पत्नी हव्वा किसको दर्शाती है? बाइबल में वर्णित मसीह, यानी परमेश्वर के रहस्य के बारे में जानने के लिए, हमें बाइबल के द्वारा इन प्रश्नों का उत्तर खोजना चाहिए: परमेश्वर ने आदम और हव्वा को क्यों बनाया? उन्होंने आदम को मसीह का चिन्ह क्यों बनाया? और आदम की पत्नी हव्वा और मसीह के बीच में क्या संबंध है?

मेमने की दुल्हिन, माता परमेश्वर



आइए हम देखें कि रोमियों की पुस्तक में आदम के रूप में दर्शाए गए मसीह का वर्णन प्रेरित यूहन्ना ने किस प्रकार किया है।

प्रक 19:6–8 फिर मैंने बड़ी भीड़ का सा और बहुत जल का सा शब्द, और गर्जन का सा बड़ा शब्द सुना: “हल्लिलूय्याह! क्योंकि प्रभु हमारा परमेश्वर सर्वशक्तिमान राज्य करता है। आओ, हम आनन्दित और मगन हों, और उसकी स्तुति करें, क्योंकि मेम्ने का विवाह आ पहुंचा है, और उसकी दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है। उसको शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहिनने का अधिकार दिया गया” क्योंकि उस महीन मलमल का अर्थ पवित्र लोगों के धर्म के काम है।

प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में “मेमना” शब्द यीशु की ओर इशारा करता है। प्रेरित यूहन्ना ने प्रकाशन के द्वारा मेमने के साथ–साथ, मेमने की पत्नी, यानी दुल्हिन को भी देखा था। प्रकाशितवाक्य का 21वां अध्याय मेमने की पत्नी का इस प्रकार वर्णन करता है:

प्रक 21:9–10 फिर जिन सात स्वर्गदूतों के पास सात अंतिम विपत्तियों से भरे हुए सात कटोरे थे, उनमें से एक मेरे पास आया, और मेरे साथ बातें करके कहा, “इधर आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेम्ने की पत्नी दिखाऊंगा।” तब वह मुझे आत्मा में एक बड़े और ऊंचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते दिखाया।

स्वर्गदूत ने यूहन्ना से कहा कि वह उसे मेमने की पत्नी दिखाएगा, और उसने उसे स्वर्ग से नीचे उतरने वाली यरूशलेम को दिखाया। आइए हम देखें कि इस स्वर्गीय यरूशलेम और हमारे बीच में क्या संबंध है।

गल 4:26 पर ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है।

ऊपर की यरूशलेम का अर्थ है, स्वर्ग में विराजमान यरूशलेम। त्रिएक के अनुसार, मसीह, जो मेमना है, हमारे पिता हैं। इसलिए हमारे पिता की दुल्हिन आत्मिक रूप से हमारी माता हैं।

उत्पत्ति के लेखों के द्वारा जहां परमेश्वर ने मानव जाति के उद्धार के कार्य का प्रारंभ किया, हम एक बार फिर स्वर्गीय पिता और माता के अस्तित्व की पुष्टि कर सकते हैं।

उत 1:26–27 फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।” तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।

मनुष्य को बनाने वाले परमेश्वर एक नहीं थे, लेकिन दो, यानी “हम” शब्द के बहुवचन रूप में थे। बाइबल कहती है कि, “तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।” इन शब्दों के द्वारा हम पुष्टि कर सकते हैं कि परमेश्वर के पास नर और नारी दोनों के स्वरूप हैं।

हजारों सालों से परमेश्वर के नर स्वरूप को “पिता” बुलाया जाता है। मत्ती की पुस्तक में यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि कैसे प्रार्थना करें: “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है...”(मत 6:9) तब परमेश्वर के नारी स्वरूप को हमें क्या बुलाना चाहिए? गलातियों की पुस्तक में उन्हें “हमारी माता” कहा गया है। बाइबल केवल “हमारे पिता” नहीं, बल्कि “हमारी माता” के बारे में भी स्पष्ट रूप से गवाही देती है।

बाइबल की शुरुआत आदम और हव्वा से होती है, और उसका अंत आत्मा और दुल्हिन के साथ होता है



बाइबल कहती है कि मसीह का रहस्य समयों और पीढ़ियों से गुप्त रखा गया था। “गुप्त रखा गया था” इन शब्दों का अर्थ है कि कुछ चीज जो पहले से मौजूद थी, छिपा दी गई है। परमेश्वर के रहस्य को समझने का अर्थ है, उन परमेश्वर के अस्तित्व को समझना जो संसार की सृष्टि से गुप्त रखे गए हैं।

हमारा शारीरिक जीवन हमारी शारीरिक माताओं के द्वारा हमें दिया जाता है। उसी तरह से, हमारा आत्मिक जीवन, यानी अनन्त जीवन हमें हमारी आत्मिक माता के द्वारा दिया जाना चाहिए। इसलिए अनन्त जीवन पाने के लिए हमें पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर दोनों पर विश्वास करना चाहिए।

आज बहुत से लोग, जो परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा करते हैं, माता के विषय में लिखे बाइबल के सभी वचनों को छोड़ देते हैं और हठ करते हैं कि पिता परमेश्वर ने अकेले ही आकाश और पृथ्वी को बनाया और मनुष्यों की सृष्टि की। वे परमेश्वर के वचनों को मिटा देने का निरर्थक और मूर्खतापूर्ण प्रयास करते हैं। हालांकि, परमेश्वर ने कहा है कि यदि कोई बाइबल के वचनों में से कुछ निकाल दे, तो परमेश्वर पवित्र नगर, यानी परमेश्वर के राज्य में से उसका भाग निकाल देंगे।(प्रक 22:19) उद्धार केवल उन्हें दिया जाता है जो मनुष्यों की नहीं, पर परमेश्वर की बात सुनते हैं, और बाइबल के वचनों पर विश्वास करते हैं।
प्रकाशितवाक्य में, मसीह, जो अंतिम आदम हैं, अपनी पत्नी के साथ प्रकट होते हैं। एलोहीम परमेश्वर, जो बाइबल की शुरुआत में प्रकट होते हैं, बाइबल के अंत में एक बार फिर अपने अस्तित्व को हम पर प्रकट करते हैं और युगों और पीढ़ियों से गुप्त रखे गए सभी रहस्यों को हमें जानने देते हैं। जब हम उत्पत्ति से प्रकाशितवाक्य तक परस्पर संबंधित होकर लिखे गए सभी सत्यों को सही ढंग से समझते हैं, तो हम अपने पिता परमेश्वर को स्तुति और माता परमेश्वर को महिमा दे सकते हैं।

प्रक 22:17 आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।

प्रकाशितवाक्य के 19वें अध्याय का मेमना और उसकी दुल्हिन और प्रकाशितवाक्य के 21वें अध्याय का मेमना और उसकी पत्नी प्रकाशितवाक्य के 22वें अध्याय में पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में दिखाए गए हैं। पवित्र आत्मा मसीह, यानी पिता परमेश्वर हैं, तो हम समझ सकते हैं कि दुल्हिन मसीह की पत्नी, यानी माता परमेश्वर हैं जो उत्पत्ति के पहले अध्याय में प्रकट होती हैं।

बाइबल 66 पुस्तकों से बनी है। उत्पत्ति का पहला अध्याय बाइबल का सबसे पहला अध्याय है, और प्रकाशितवाक्य का 22वां अध्याय बाइबल का सबसे अंतिम अध्याय है। उत्पत्ति के पहले अध्याय में, पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर ने ऐसा कहकर कि, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं,” नर और नारी को बनाया। वे एलोहीम परमेश्वर प्रकाशितवाक्य के 22वें अध्याय में पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में प्रकट होते हैं और कहते हैं कि, “जीवन का जल लेने के लिए आओ,” और वे हमें चेतावनी देते हैं कि हम उनके शब्दों में न कुछ जोड़ें और न कुछ उनमें से घटाएं।

आत्मा और दुल्हिन की आवाज से संसार को जगाओ



हमें बाइबल का जो शब्द जैसा है उसे ठीक वैसा ही देखना चाहिए, ताकि हम उद्धार पा सकें। होशे नबी ने विलाप किया कि, “मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नष्ट हो गई।” (हो 4:6) हमें सिय्योन के लोग होने के नाते यह देखने के लिए हमेशा बाइबल का अध्ययन करना चाहिए कि क्या यह बाइबल में लिखा है या नहीं, या यह सही है या नहीं, और हमें पिता और माता परमेश्वर की इच्छा का पालन करना चाहिए ताकि हम अनन्त जीवन और उद्धार पा सकें।

“जो कोई बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार जीना चाहता है, उसे पिता परमेश्वर के साथ–साथ माता परमेश्वर पर भी विश्वास करना चाहिए।” इस संदेश के साथ हमें संसार को जगाना चाहिए। युगों और पीढ़ियों से गुप्त रहे परमेश्वर के रहस्य को समझकर, हमें सब लोगों को सुसमाचार का प्रचार करके संसार के प्रति जाग उठने की पुकार लगानी चाहिए।

परमेश्वर हमें संसार को जागृत करने की आवाज दी है। जिस प्रकार मुर्गा भोर के आगमन की पूर्व सूचना देने के लिए बांग देता है, हमें भोर को जागृत करना चाहिए। आइए हम सुसमाचार के प्रचार की आवाज के साथ, इस अंधेरे संसार को जगाएं। “पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर पर विश्वास करो और उनका भय मानो, तो तुम उद्धार पाओगे।” आइए हम योना और पतरस की आवाज से भी ज्यादा जोरदार आवाज के साथ इस संदेश की घोषणा करें।