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दस तोड़े और मनुष्यों के मछुए

हाल ही में परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुनिया भर में दस तोड़ों का आंदोलन सक्रिय रूप से चल रहा है। मैं विश्वास करता हूं कि सिय्योन के सदस्य यह सोचते हुए कि, ‘मुझे सौंपी गई दस आत्माओं को कैसे बचाना चाहिए?’ इस समय भी बहुत प्रार्थनाओं और अनुरोधों के साथ स्वर्गीय पिता और माता पर निर्भर करते हैं।

दस तोड़ों का आंदोलन आत्माओं को बचाने का आंदोलन है, जो परमेश्वर ने हमें सौंपा है और आज्ञा दी है। इसमें परमेश्वर की इच्छा शामिल है कि हमें सोते नहीं रहना चाहिए, बल्कि सावधानी के साथ अपने पर नियन्त्रण रखना चाहिए और मशालें एवं तेल तैयार करके मसीह के आगमन की खुशी से प्रतीक्षा करनी चाहिए।(मत 25:1–13) आइए हम बाइबल के द्वारा उन एलोहीम परमेश्वर की सच्ची इच्छा को समझें, जिन्होंने हमें तोड़े सौंपे हैं।

नूह की तरह जिसने उद्धार के लिए तैयारी की थी



बाइबल कहती है कि जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही परमेश्वर का आना भी होगा।

मत 24:37–39 जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। क्योंकि जैसे जल–प्रलय से पहले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते–पीते थे, और उनमें विवाह होते थे। और जब तक जल–प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उनको कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा।

नूह के दिनों में रहने वाले लोगों को आने वाली विपत्ति का एहसास नहीं था। नूह के समय में परमेश्वर ने पहले से कहा था कि वह जल के द्वारा संसार को नष्ट करेंगे, पर लोगों ने परमेश्वर की चेतावनी पर विश्वास नहीं किया। चूंकि उन्होंने उस पर विश्वास नहीं किया, इसलिए वे खाते–पीते रहे और ब्याह–शादियां रचाते रहे, और वे सिर्फ अपने रोजमर्रा के कार्यों पर एकाग्र रहे। अंत में पूरा संसार पानी से ढक गया और नष्ट हुआ।

इन दिनों में भी ऐसा ही होगा। भले ही बाइबल में अनेक भविष्यवाणियां दिखाती हैं कि परमेश्वर आग से संसार को नष्ट करेंगे, फिर भी लोग विश्वास नहीं करते। हालांकि, बाइबल ने हजारों वर्ष पहले से ही इसके बारे में बार–बार चेतावनी दी है।

2पत 3:6–14 इसी के कारण उस युग का जगत जल में डूब कर नष्ट हो गया। पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे गए हैं कि जलाए जाएं; और ये भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नष्ट होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे... परन्तु प्रभु का दिन चोर के समान आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा और तत्व बहुत ही तप्त होकर पिघल जाएंगे और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाएंगे। जबकि ये सब वस्तुएं इस रीति से पिघलनेवाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल–चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए, और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्न करना चाहिए, जिसके कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्त होकर गल जाएंगे। पर उसकी प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिनमें धार्मिकता वास करेगी। इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो, तो यत्न करो कि तुम शान्ति से उसके सामने निष्कलंक और निर्दोष ठहरो।

बाइबल हमसे कहती है कि हमें किस तरह के लोग होने चाहिए। फिर आइए हम नूह के दिनों की स्थिति के द्वारा देखें कि हम कैसे शान्ति से परमेश्वर के सामने निष्कलंक और निर्दोष ठहर सकते हैं।

उत 6:9–22 ... परमेश्वर ने पृथ्वी पर जो दृष्टि की तो क्या देखा कि वह बिगड़ी हुई है; क्योंकि सब प्राणियों ने पृथ्वी पर अपना अपना चाल–चलन बिगाड़ लिया था। तब परमेश्वर ने नूह से कहा... इसलिये तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले, उसमें कोठरियां बनाना, और भीतर–बाहर उस पर राल लगाना। इस ढंग से तू उसको बनाना: जहाज की लम्बाई तीन सौ हाथ, चौड़ाई पचास हाथ, और ऊंचाई तीस हाथ की हो। जहाज में एक खिड़की बनाना, और उसके एक हाथ ऊपर से इसकी छत बनाना, और जहाज की एक ओर एक द्वार रखना; और जहाज में पहला, दूसरा, तीसरा खण्ड बनाना। और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जल–प्रलय करके सब प्राणियों को, जिनमें जीवन का प्राण है, आकाश के नीचे से नष्ट करने पर हूं: और सब जो पृथ्वी पर हैं मर जाएंगे। परन्तु तेरे संग मैं वाचा बांधता हूं: इसलिये तू अपने पुत्रों, स्त्री, और बहुओं समेत जहाज में प्रवेश करना। और सब जीवित प्राणियों में से तू एक एक जाति के दो दो, अर्थात् एक नर और एक मादा जहाज में ले जाकर, अपने साथ जीवित रखना। एक एक जाति के पक्षी, और एक एक जाति के पशु, और एक एक जाति के भूमि पर रेंगनेवाले, सब में से दो दो तेरे पास आएंगे, कि तू उनको जीवित रखे... परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।

नूह अपने समय में धर्मी पुरुष था, और उसने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार सब कुछ किया; उसने जहाज बनाया और अपने परिवार और हर प्रकार के प्राणी को जहाज में ले गया। इस तरह, जिन्होंने परमेश्वर की इच्छा को महसूस किया, उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार सब कुछ किया और उद्धार के लिए तैयारी की। लेकिन जिन्होंने महसूस नहीं किया, उन्होंने कुछ भी तैयार नहीं किया, और उन्हें तब तक कुछ पता नहीं चला जब तक जलप्रलय न आ गया और उन सब को बहा नहीं ले गया।

परमेश्वर ने कहा कि मनुष्य के पुत्र का आना भी ऐसा ही होगा। नूह ने परमेश्वर के आदेश का पालन किया और सब कुछ तैयार किया। जब उसने जहाज बनाया, तब परमेश्वर के आदेश के अनुसार उसने गोपेर वृक्ष की लकड़ी तैयार की, और जैसे परमेश्वर ने उसे आज्ञा दी, उसने भीतर–बाहर जहाज पर राल लगाई, और जहाज में खिड़की एवं दरवाजा बनाया और तीन मंजिलें बनाईं। चूंकि परमेश्वर ने उसे मस्तूल, पाल या पतवार बनाने का आदेश नहीं दिया था, इसलिए उसने जहाज चलाने के लिए कोई मस्तूल, पाल या पतवार नहीं बनाई। नूह ने वह सब कुछ किया जो परमेश्वर ने उसे आज्ञा दी थी, इसलिए वह उद्धार पा सका।

अभी हम उस युग में जी रहे हैं जब मसीह के आने और न्याय करने का समय बहुत निकट है। हम भी परमेश्वर के वचन पर निर्भर होकर, बहुत सारी चीजों की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि परमेश्वर ने सिय्योन को पुन:स्थापित किया और हमें सत्य का वचन दिया जो जीवन की ओर ले जाता है, इसलिए हम परमेश्वर के वचन के द्वारा धार्मिक जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे नूह ने न्याय का दिन आने से पहले लोगों को और प्राणियों को जहाज में ले जाने की कोशिश की, वैसे ही हम भी दुनिया भर में सामरिया और पृथ्वी की छोर तक जाकर चिल्ला रहे हैं, “सिय्योन में आओ!” और बहुत आत्माओं को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

जिसे इसका एहसास हुआ है, वह परमेश्वर के वचन के अनुसार जीता है। यह इसलिए है कि परमेश्वर के वचन में वह ज्ञान है जो उद्धार की ओर ले जाता है। जैसे नूह ने वह सब कुछ किया जो परमेश्वर ने उससे करने के लिए कहा, वैसे ही परमेश्वर के लोग, जो इस युग में भविष्यवाणी के मुख्य पात्र हैं, वह सब कुछ करते हैं जो परमेश्वर उनसे करने के लिए कहते हैं; जैसा कि लिखा है, “जहां कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं,” स्वर्ग में उनके लिए ऐसा दर्ज किया जाएगा – “उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार सब कुछ किया।”(प्रक 14:4)

जो दस तोड़े और कमाते हैं



नूह ने परमेश्वर के आदेशों के अनुसार जहाज बनाने के लिए लकड़ी, राल और बहुत चीजों की तैयारी की। तो हमें क्या करना चाहिए? परमेश्वर के वचन के अनुसार उद्धार के लिए तैयारी करने के लिए, हमें आत्माओं को बचाने के दस तोड़ों के आंदोलन में अपने आपको समर्पित करना चाहिए। परमेश्वर के वचन के अनुसार हम में से हर एक को कम से कम दस आत्माओं को(जितना ज्यादा हो उतना अच्छा) बचाना चाहिए और स्वर्ग के राज्य की ओर उनकी अगुवाई करनी चाहिए।

मत 25:12–30 “... इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम न उस दिन को जानते हो, न उस घड़ी को। क्योंकि यह उस मनुष्य की सी दशा है जिसने परदेश जाते समय अपने दासों को बुलाकर अपनी संपत्ति उनको सौंप दी। उसने एक को पांच तोड़े, दूसरे को दो, और तीसरे को एक; अर्थात् हर एक को उसकी सामथ्र्य के अनुसार दिया, और तब परदेश चला गया। तब, जिसको पांच तोड़े मिले थे, उसने तुरन्त जाकर उनसे लेन–देन किया, और पांच तोड़े और कमाए। इसी रीति से जिसको दो मिले थे, उसने भी दो और कमाए। परन्तु जिसको एक मिला था, उसने जाकर मिट्टी खोदी, और अपने स्वामी के रुपये छिपा दिए। बहुत दिनों के बाद उन दासों का स्वामी आकर उनसे लेखा लेने लगा। जिसको पांच तोड़े मिले थे, उसने पांच तोड़े और लाकर कहा, ‘हे स्वामी, तू ने मुझे पांच तोड़े सौंपे थे, देख, मैं ने पांच तोड़े और कमाए हैं।’ उसके स्वामी ने उससे कहा, ‘धन्य, हे अच्छे और विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा; मैं तुझे बहुत वस्तुओं का अधिकारी बनाऊंगा। अपने स्वामी के आनन्द में सहभागी हो।’...”

ऊपर के दृष्टांत में स्वामी ने अपने दासों को उनकी सामथ्र्य के अनुसार कुछ तोड़े दिए और उनसे तोड़ों से कोई व्यापार करने के लिए कहा। जिस मनुष्य को पांच तोड़े मिले थे, उसने पांच तोड़े और कमाए और इससे वह अपने स्वामी को दस तोड़े दे सका। तब स्वामी ने उससे यह कहा, “शाबाश! तुम अच्छे और विश्वासयोग्य दास हो।”

इस प्रकार, जब हम सुसमाचार के लिए अपने तोड़ों का इस्तेमाल करेंगे और ज्यादा तोड़े कमाएंगे, तब परमेश्वर हमारी तारीफ करेंगे। इस दुनिया में रहते समय हम बहुत सारी चीजें करते हैं। उनमें से वह जो परमेश्वर की दृष्टि में सुखदायक और प्रशंसनीय है, वह दस तोड़े कमाने का आंदोलन है। मैं आशा करता हूं कि आप सभी दस तोड़ों के आंदोलन में अपना पूरा मन और शक्ति लगाएं और परमेश्वर से “शाबाश!” इस तरह की तारीफ सुनें।

“मैं तुम को मनुष्यों के पकड़नेवाले बनाऊंगा।”



2,000 वर्ष पहले जब यीशु इस पृथ्वी पर आए, उन्होंने अपने चेलों को बुलाया और उनसे वादा किया कि वह उन्हें “मनुष्यों के मछुए” बनाएंगे।

मत 4:19 यीशु ने उन से कहा, “मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़नेवाले बनाऊंगा।”

परमेश्वर हमें “मनुष्यों के मछुए” बनाना चाहते हैं। फिर, मछुए का मतलब क्या है? मछुआ क्या करता है? अगर कोई व्यक्ति मछली को तैरते हुए देखकर भी वहां से गुजरता है, तो वह मछुआ नहीं, पर एक दर्शक है। जो व्यक्ति सिर्फ यह अध्ययन करता रहता है कि बहुत सारी मछलियों को कैसे पकड़ा जाए, वह मछुआ नहीं, पर एक शोधकर्ता है। जो व्यक्ति मछलियों को पकड़ने के औजार बनाता है, वह भी मछुआ नहीं है। जो मछली पकड़ता है, सिर्फ उसे “मछुआ” कहा जा सकता है।

“मछुए” की परिभाषा के बारे में सोचते हुए, आइए हम खुद का अवलोकन करें और पता लगाएं कि क्या हम मनुष्यों के मछुए हैं या हम वो हैं जो सिर्फ मछली पकड़ने के औजार बनाते हैं या वो हैं जो सिर्फ अध्ययन करते हैं कि कैसे मछली पकड़ें। यीशु ने ऐसा नहीं कहा कि वह हमें शोधकर्ता बनाएंगे जो सिर्फ लोगों को पकड़ने के तरीकों का अध्ययन करते हैं, लेकिन कहा कि वह हमें मनुष्यों के मछुए बनाएंगे। परमेश्वर के वचन को देखा जाए, तो जो व्यक्ति आत्माओं को पापों से बचाता है, वही आत्मिक मछुआ हो सकता है। इसलिए अगर हम आत्माओं को बचाने में सहभाग नहीं लेंगे, हमें कभी भी “मनुष्यों के मछुए” नहीं कहा जा सकता।

दस तोड़ों का आंदोलन वह कार्य है, जिसे हम सिर्फ तभी पूरा कर सकते हैं जब हम पूरी तरह से मसीह की शिक्षाओं और प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करेंगे। अगर हम ने अभी तक सिर्फ मछली–घर में मछली को देखा, तो हमें अभी से मछली पकड़ने के कार्य में शामिल होना चाहिए।

जहाज बनाने के कार्य की तुलना में यह कार्य बहुत ही आसान है। ऐसा माना जाता है कि नूह का जहाज इतना विशाल था कि उसकी लंबाई 135 मीटर, चौड़ाई 23 मीटर, और ऊंचाई 14 मीटर थी। कल्पना भी हम नहीं कर सकते कि नूह ने तीन मंजिलों का विशाल जहाज बनाने के लिए कितनी गोपेर वृक्ष की लकड़ियों और राल को तैयार किया होगा; नूह के लिए वह बनाना बहुत बड़ी चुनौती थी। इस युग में जहाज के निर्माण की विकसित तकनीक के साथ भी इतने बड़े जहाज को बनाना आसान नहीं है। तो फिर उन दिनों में जब निर्माण के लिए कोई तकनीक नहीं थी, वह जहाज बनाना कितना ज्यादा मुश्किल था? इतना ही नहीं, हिंसक पशुओं समेत सब जाति के जीवित प्राणियों को जहाज में ले जाना भी उसके लिए बहुत मुश्किल रहा होगा।

हालांकि यह कार्य आसान नहीं था, लेकिन नूह ने उसे करने के लिए हर संभव प्रयास किया क्योंकि वह परमेश्वर की आज्ञा थी। जो कार्य परमेश्वर ने हमें सौंपा है, वह उस कार्य से बहुत ही ज्यादा आसान है, जो नूह को सौंपा गया था। हम सभी को मसीह की शिक्षा के अनुसार सच्चे “मनुष्यों के मछुए” के रूप में दस तोड़ों का मिशन पूरा करना चाहिए।

सुसमाचार पहुंचाने वाले का मिशन



बहुत पहले एक देश में किसी डाकिया ने एक हजार से ज्यादा पत्र रद्दी वाले को बेच दिए। इससे वह काफी आलोचनाओं का शिकार हो गया। डाकिया को न्यायालय में पेश किया गया और आखिर में वह जेल गया।

एक हजार पत्रों में कई बहुमूल्य पत्र हो सकते थे। उनमें महत्वपूर्ण अनुबंध पत्र हो सकता था, या ऐसा पत्र भी हो सकता था जो समय पर न पहुंचने से किसी का जीवन खतरे में पड़ सकता था। लेकिन डाकिया ने पत्रों को, जो रुपयों–पैसों से नहीं आंके जा सकते थे, रद्दी वाले को बेच दिया, क्योंकि उसे पत्र पहुंचाने में परेशानी हुई थी।

परमेश्वर ने हमें सुसमाचार का कार्य सौंपा है।(1थिस 2:4) बाइबल की 66 पुस्तकों में लिखे सत्य के वचन परमेश्वर के पत्र हैं, जिन्हें परमेश्वर ने अपने नबियों से लिखवाया और दुनिया भर के सभी लोगों के पास भेजा। “सुसमाचार पहुंचाने वाले डाकिया” के रूप में हमें इस बहुमूल्य संदेश को पहुंचाना चाहिए। हमें सब जातियों के लोगों को चेला बनाने का, उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा देने का और उन्हें सब बातें जो परमेश्वर ने आज्ञा दी है, मानना सिखाने का मिशन सौंपा गया है।(मत 28:18–20)

क्या हम इन बहुमूल्य पत्रों को रद्दी के ढेर में तो नहीं फेंक रहे हैं? सिर्फ इसलिए कि हमें पत्र पहुंचाने में परेशानी या कष्ट महसूस होता है या फिर हम डरते हैं कि लोग बुरी प्रतिक्रिया देंगे। परमेश्वर ने उस मनुष्य से, जिसने एक तोड़ा पाया और उसे मिट्टी में छिपा दिया, यह कहा, “हे दुष्ट और आलसी दास!” जैसे डाकिया पत्र पहुंचाने के मिशन की उपेक्षा करने के कारण सरकार से दण्डित किया गया, वैसे अगर हम सुसमाचार न सुनाएं तो हमारे लिए यह कितना बुरा होगा।(1कुर 9:16)

यहेज 3:19–20 पर यदि तू दुष्ट को चिताए, और वह अपनी दुष्टता और दुष्ट मार्ग से न फिरे, तो वह तो अपने अधर्म में फंसा हुआ मर जाएगा; परन्तु तू अपने प्राणों को बचाएगा। फिर जब धर्मी जन अपने धर्म से फिरकर कुटिल काम करने लगे, और मैं उसके सामने ठोकर रखूं, तो वह मर जाएगा, क्योंकि तूने जो उसको नहीं चिताया, इसलिये वह अपने पाप में फंसा हुआ मरेगा; और जो धर्म के कर्म उस ने किए हों, उनकी सुधि न ली जाएगी, पर उसके खून का लेखा मैं तुझी से लूंगा।

डाकिया का मिशन है कि हर पत्र को ठीक उसी पते पर पहुंचाना जो पत्र पर लिखा है। तो क्या होगा अगर वह पत्र नहीं पहुंचाता, और यह उस व्यक्ति के लिए नुकसान का कारण बनता है जिसके पास वह पत्र पहुंचना चाहिए? उसे कार्यभार की अवहेलना करने के लिए दण्ड दिया जाएगा, है न? क्या होगा अगर हम वह पत्र नहीं पहुंचाएंगे जिसमें वह संदेश शामिल है, जो अनेक आत्माओं को बचा सकता है और नरक की ओर जाने वाले लोगों को स्वर्ग की ओर मोड़कर ले सकता है? हम इसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे।

परमेश्वर ने हमें बहुत बहुमूल्य पत्र सौंपा है, जिसे हमें दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाना है। हम में से हर एक को परमेश्वर का पत्र कम से कम दस लोगों तक पहुंचाना है। यही दस तोड़ों का आंदोलन है। कुछ सोचते हैं कि सिर्फ दस लोगों को प्रचार करना पर्याप्त नहीं है, और कुछ लोगों को लगता है कि दस उनके लिए बहुत ज्यादा हैं। अगर आप सोचते हैं कि यह पर्याप्त नहीं है, तो आप दस तोड़ों से अधिक कमा सकते हैं। आइए हम कम से कम दस लोगों को सही तरीके से प्रचार करें और परमेश्वर की सही इच्छा को समझने में मदद करें और सिय्योन में वापस लाएं।

उनकी आशीष जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं



जब तक सुसमाचार का प्रचार नहीं होता, कोई भी स्वर्ग के राज्य में नहीं पहुंच सकता। इसलिए प्रचार करने का हमारा मिशन सचमुच बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर उन आत्मिक डाकियों को सुहावना मानते हैं, जो चारों ओर सुसमाचार का प्रचार करने के लिए जाते हैं।

रो 10:13–15 क्योंकि, “जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।” फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम कैसे लें? और जिसके विषय सुना नहीं उस पर कैसे विश्वास करें? और प्रचारक बिना कैसे सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो कैसे प्रचार करें? जैसा लिखा है, “उनके पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं!”

लोग उन मसीह पर कैसे विश्वास कर सकते हैं जिनके विषय में उन्होंने कभी नहीं सुना? वे कैसे नया नाम और नई यरूशलेम समझ सकते हैं जिसके बारे में उन्होंने नहीं सुना? और किसी के प्रचार किए बिना वे कैसे सिय्योन खोज सकते हैं? हमें अच्छे से वह पत्र पहुंचाना चाहिए, जिसमें ये सारी चीजें लिखी हैं। पत्र के प्राप्तकर्ता दुनिया भर के सभी लोग हैं। भले ही कोई घाटी में रहता हो या जंगल में रहता हो, हमें वहां पर भी यह पत्र देने के लिए जाना चाहिए।

अभी भी ऐसी बहुत सारी जगहें हैं जहां हमने पत्र नहीं पहुंचाया। आइए हम जल्दी उसे दुनिया भर में पहुंचाएं। एक बार जब हम जाकर पत्र पहुंचाएं, तो जो व्यक्ति उसे प्राप्त करता है, वह एलोहीम परमेश्वर को ग्रहण करने के लिए सिय्योन में आएगा और उद्धार की ओर आगे बढ़ेगा। तब सिय्योन के लोग परमेश्वर से इन शब्दों के बदले, “उसके खून का लेखा मैं तुझी से लूंगा,” प्रशंसा के शब्द सुन सकेंगे, “शाबाश! अपने स्वामी के आनन्द में सहभागी हो; जो सभी प्रयास तुमने आत्माओं को बचाने के लिए किए, मैं तुम्हें उनका प्रतिफल दूंगा।”

नूह की तरह, हम सिय्योन के लोगों को परमेश्वर की सभी आज्ञाओं का पालन करना चाहिए, ताकि हम सभी इस युग में परमेश्वर के द्वारा सौंपे गए दस तोड़ों के आंदोलन को पूरा कर सकें और दुनिया भर के सभी लोगों के साथ उद्धार की आशीष और आनंद ले सकें। यदि हम ऐसा करें, तब हम सिर्फ मछली देखने वाला दर्शक नहीं, पर मनुष्यों के मछुए बन सकेंगे।

चूंकि परमेश्वर ने हमें मनुष्यों के मछुए कहा है, इसलिए आइए हम मनुष्यों के मछुए का मिशन पूरा करें। हमारे पिता और माता ने हमारे लिए इसका उदाहरण दिखाया है, और यह वह कार्य है, जिसे हम सभी को करना है। चाहे हम कितने ही व्यस्त क्यों न हों, हम तभी मनुष्यों के मछुए बन सकते हैं जब हम मछली पकड़ते हैं। मैं आशा करता हूं कि हम सभी मनुष्यों के मछुए बनें, ताकि हम पिता और माता से बड़ी आशीष पा सकें और स्वर्ग के महिमामय भोज में भाग ले सकें।