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बड़ा पात्र बन जाओ

पूर्व दिशा से शुरू हुआ परमेश्वर का मुहर लगाने का कार्य, अब बहुतायत से फल उत्पन्न कर रहा है। बहुत सी जातियां और लोग सिय्योन से निकलते सत्य के वचनों को सुनने के लिए, सिय्योन की ओर आ रहे हैं।

पूरे संसार में सुसमाचार का सक्रिय रूप से प्रचार हो रहा है। सत्य की ज्योति जो यीशु के प्रथम आगमन के समय चमकी ज्योति से भी सात गुना अधिक प्रकाशमान है, अब शीघ्रता से सभी महाद्वीपों और महासागरों में फैल रही है। दुनिया के सभी कोनों में सुसमाचार को पहुंचते देखकर, हमें महसूस होता है कि यह भविष्यवाणी पूरी हो रही है कि “पृथ्वी की छोर तक तुम मेरे गवाह होगे।”

मत 24:14 और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा।

प्रे 1:6–8 ... परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।


हमारे बहुत से भाई और बहनें पूरी दुनिया से यरूशलेम की ओर उड़ चले आते हैं। वे सत्य को समझते हैं और परमेश्वर के रहस्य को समझने की उत्सुकता से आशा रखते हैं। हम उनमें आनन्दित होते हैं, और उनके लिए कृपा महसूस करते हैं और उनके लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं। यदि वे अपने देश वापस जाएंगे, तो वे परमेश्वर के वचन का प्रचार करने का भविष्यवाणी किया हुआ कार्य करेंगे।

हम खुश समाचार सुनते हैं कि हमारे भाई और बहनें जो अपने घर वापस गए हैं, उत्सुकता से सुसमाचार का प्रचार कर रहे हैं और बहुत सी आत्माओं को परमेश्वर की ओर ले आ रहे हैं। अफ्रीका जैसे दूर महाद्वीप में भी सुसमाचार का प्रचार किया जा रहा है। इसे देखते हुए, हम पक्का कह सकते हैं कि सुसमाचार शीघ्रता से पृथ्वी की छोर तक प्रचार किया जाएगा। हमारे स्वर्गीय भाई और बहनें कबूतर के समान माता के पास उड़ चले आते हैं। परमेश्वर और सत्य के लिए उनका प्रबल उत्साह और अथाह जोश हमारे हृदयों को छू रहा है।

जब हम सुसमाचार को तेज़ी से फैलते देखते हैं, हम समझ सकते हैं कि हम भविष्यवाणियों के पूरे होने के युग में जी रहे हैं। यहां तक कि अमेरीका में भी, जहां सुसमाचार के बीज बोना मुश्किल था, आज सुसमाचार फल–फूल रहा है और बहुत से फल पैदा कर रहा है। हम सुनिश्चित करते हैं कि बाइबल में लिखी सभी भविष्यवाणियां जल्दी से पूरी हो जाएंगी।

गौशाला के बारे में न सोचो, लेकिन खेत को जोतने पर ध्यान केन्द्रित करो



जबकि सुसमाचार बहुत ही शीघ्रता से फैल रहा है, ज्यादा भाई और बहनें बादल और कबूतर की तरह सिय्योन की ओर उड़ चले आ रहे हैं। उन सबको ग्रहण करने के लिए, सबसे पहले हमें एक गर्म घोंसला तैयार करना चाहिए और उन सबके लिए बड़ा पात्र बनना चाहिए। बाइबल हमें बड़ा पात्र बनने के बारे में एक मूलभूत शिक्षा देती है कि छोटी बातों को जकड़े मत रहो।

नीत 14:4 जहां बैल नहीं, वहां गौशाला स्वच्छ तो रहती है, परन्तु बैल के बल से अनाज की बढ़ती हाती है।

बैल न होने से, गौशाला खाली होती है और उसे साफ करने की आवश्यकता नहीं होती। सुसमाचार का प्रचार करने वालों को बाइबल में बैल कहा गया है। प्रचारकों के न होने पर, चर्च में कोई घर्षण या परेशानी नहीं होगी। हालांकि, सिय्योन में एक लाख चवालीस हजार बहुत से सदस्य हैं। कोरिया में एक कहावत है, “ज्यादा सन्तान वाले परिवार के लिए आराम करने का समय नहीं होता।” चूंकि बहुत ज्यादा भाई और बहनें हैं, इसलिए चर्च में बड़ी या छोटी, बहुत सी परेशानियां आएंगी।

बैल के न होने पर, गौशाला साफ–सुथरी रहती है; लेकिन उसके लिए हमें बैल के द्वारा होने वाली ज्यादा उपजों को छोड़ देना पडे.गा। क्या ज्यादा अच्छा है, बैलों की शक्ति से बहुतायत से फसल पैदा करना या गौशाला को साफ रखना?

यदि सुसमाचार में हम छोटी बातों में उलझे रहें और ज्यादा महत्वपूर्ण बातों को अनदेखा करें, तो हम बहुतायत से फसल पैदा नहीं कर सकते। बड़ा पात्र बनने के लिए, जब कभी भी हम किसी समस्या का सामना करें, तो हमें सोचना चाहिए कि इस समस्या को सुलझाने का रास्ता सुसमाचार के लिए है या हमारे खुद के लिए।
यीशु ने कहा कि हमें एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

यूह 13:34–35 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं कि एक दूसरे से प्रेम रखो; जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे, तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।

यदि सिय्योन के सभी 1,44,000 सदस्यों के पास संपूर्ण स्वभाव होता, तो यीशु ने हमें एक दूसरे से प्रेम करने और क्षमा देने के लिए न कहा होता। परमेश्वर ने हमें, जो कमजोर और असंपूर्ण हैं, चुना है। यदि हम एक दूसरे की गलतियों को बर्दाश्त न करें, तो कैसे सुसमाचार पूरे संसार में शीघ्रता से फैल सकता है?

इफ 5:1–2 इसलिये प्रिय, बालकों के समान परमेश्वर का अनुकरण करो, और प्रेम में चलो जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया, और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट करके बलिदान कर दिया।

चूंकि हमारे सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, ऐसा बहुत कुछ है जो हमें करना है। जब हम साथ मिलकर कार्य करते हैं, सुसमाचार का कार्य शीघ्रता से पूरा हो जाएगा। हमें एक दूसरे की गलतियों को क्षमा करते हुए, एक दूसरे को सहन करना चाहिए, ताकि हम धीरे धीरे स्वर्गीय स्वभाव पहनें, एक नई सृष्टि में बदल जा सकें, और अंतिम क्षण में संपूर्ण रूप से प्रेम में एक हो जाएं। यह परमेश्वर की उद्धार की योजना है।

अब, हमें इस पर विचार करना चाहिए कि हमने बैलों पर ध्यान केन्द्रित करके सिर्फ उनसे गंदी होती गौशाला की देखभाल की है या नहीं। यदि हम दूसरों की खूबियों को देखने के बजाय उनकी गलतियों को खोजें, तो हम एक दूसरे को अपकारी बातें कहकर, एक दूसरे के साथ झगड़ा करेंगे, जिससे सिय्योन का प्रेम ठण्डा पड़ जाएगा। संसार के बहुत से लोग एक दूसरे से वाद विवाद करते हुए, सिर्फ गंदी गौशाला को देखते हैं। हम परमेश्वर की सन्तान हैं, जिन्हें खास तौर पर परमेश्वर की सेवा करने के लिए चुना गया है। हमें इसके बारे में ध्यान न रखते हुए कि गौशाला साफ है या नहीं, बैलों की शक्ति से उत्पन्न हुईं फसलों पर ध्यान देना चाहिए, और उनका ख्याल रखना चाहिए ताकि वे अच्छे से कार्य कर सकें।

“खाली नाव” से अपने मनों को खाली करना सीखो



क्या आपने कभी “खाली नाव” पुस्तक पढ़ी है? एक आदमी एक बड़ी नाव से एक नदी पार कर रहा था। जब वह नदी के मध्य में पहुंचा, तो वह दूसरी ओर से आ रही एक नाव से जा टकराया। उसने दूसरी नाव में झांक कर देखा, लेकिन वहां कोई नहीं था जिस पर वह अपना गुस्सा उतारता। उसने अपने आपको शांत किया और अपनी पतवार को चलाना जारी रखा।

कुछ देर बाद, वह एक और नाव से जा टकराया, और उस नाव पर एक व्यक्ति था। वे झगड़ पड़े, और एक दूसरे के लिए उग्र भाषा का प्रयोग करते हुए लड़ाई भी करने लगे। उसका परिणाम रक्तबहाव आया।
यदि उसने उस नाव को खाली समझा होता, तो कुछ भी न हुआ होता। हम, 1,44,000 लोगों को एक बड़ा पात्र बनने के लिए और प्रेम में एक परमेश्वर की सुंदर सन्तानों के रूप में उन्हें प्रसन्न करने के लिए, जैसे हमने एक खाली नाव को देखा हो वैसे रवैये के साथ, अपना मन खाली करना चाहिए।

जैसा कि अब तक हमने सीखा है, हमें सिर्फ गौशाला पर ध्यान केन्द्रित नहीं करना चाहिए, लेकिन इस बात पर वृहत् दृष्टिकोण रखना चाहिए कि गौशाला किसलिए होती है; क्या वह बैलों के लिए नहीं होती? तब हमें इस पर विचार करना चाहिए कि बैल क्यों होते हैं; बैल की शक्ति से बहुत ज्यादा फसलें पैदा होती हैं।

हमारे बहुत से भाई और बहनें सिय्योन की ओर उमड़ रहे हैं। हमें, जो सीधे परमेश्वर से सिखाए गए हैं, खाली नाव देखने के रवैये के साथ, बैल की देखभाल करने के रवैये के साथ, उनके प्रति विचारशील होना चाहिए। यदि हम ऐसा न करें, तो वे यहां, अपने आत्मिक घोंसले में भी शान्ति और खुशी महसूस नहीं करेंगे।

1यूह 4:7–11 हे प्रियो, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है। जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है। जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है... हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।

जो अपने भाई से प्रेम नहीं करता वह परमेश्वर से प्रेम नहीं करता; वह ऐसा व्यक्ति है जो परमेश्वर को नहीं जानता। हमारे खोए हुए भाइयों और बहनों को ढूंढ़ने के लिए, हमारे पास खुद से बढ़कर हमारे भाइयों और बहनों की देखभाल करने का रवैया होना चाहिए।

क्या ही मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें!



सिय्योन में हमारे भाइयों और बहनों में से ज्यादातर ने पापी दुनिया के अनुकूल होकर, सांसारिक रास्तों और आदतों का पालन करते हुए, सत्य को ग्रहण किया है। उनके पापमय स्वभाव और उनका पिछला बोलने का तरीका और रवैया धीरे धीरे बदल रहा है। वास्तव में, जब हम भी अपने चर्च में पहली बार आए थे, तो हमारी स्थिति भी वैसी ही थी। आइए हम अपने भाइयों की गलतियों को ढंकते हुए, उनकी सेवा करें, ताकि हम एक बड़ा पात्र बन सकें।

“देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें!”(भज 133:1) यह वचन हमें दिखाता है कि परमेश्वर हम से क्या चाहते हैं। आइए हम सेवा पाने की चाह रखते हुए और घमण्डी बनते हुए परमेश्वर की शिक्षा के विरुद्ध न जाएं। आइए हम ईमानदारी से एक दूसरे से प्रेम करते हुए, सुसमाचार और सत्य का प्रचार करन में ज्यादा ध्यान लगाएं, ताकि परमेश्वर का प्रचुर प्रेम और आशीर्वाद हम पर उमड़ पड़ें।

यूह 8:47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो।

“एक दूसरे से प्रेम रखो,” यह परमेश्वर ने स्वयं कहा है। हमें परमेश्वर के सभी वचनों का पालन करना चाहिए, लेकिन कभी–कभी हम पूर्ण रूप से उनका पालन नहीं कर सकते क्योंकि हमने अपनी सांसारिक आदतों का पूर्ण रूप से त्याग नहीं किया है। हमें इस बात को मन में रखना चाहिए कि जब हम परमेश्वर की शिक्षाओं का पूरे मन से पालन नहीं कर सकते तो हम परमेश्वर की ओर से नहीं हैं।
बाइबल कहती है कि जो परमेश्वर की ओर से होता है वह परमेश्वर की बात मानता है। परमेश्वर कहते हैं, “एक दूसरे से प्रेम रखो।” आइए हम एक दूसरे के प्रति भाईचारे की प्रीति में और एकता में निष्ठावान हो जाएं, ताकि हमारे सभी खोए हुए भाई और बहनें शीघ्रता से प्रेम से भरपूर घोंसले में वापस आ सकें। हम सब के सब ज्यादा और कम तौर पर असंपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं। आइए हम हमें बदल देने वाली परमेश्वर की शिक्षाओं का पूर्ण रूप से पालन करें। आइए हम सब प्रकार के पापमय स्वभाव को और अपने आचरण की सभी त्रुटियों को निकाल दें, और परमेश्वर की शिक्षाओं के अनुसार जीवन जीते हुए, अपने हृदय को उनके वचन और प्रेम से भर लें।

हम बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार जीवन जीने की कोशिश करते आ रहे हैं। हालांकि, शायद हमने उनमें से कुछ को अनदेखा किया हो सकता है। आइए हम परमेश्वर की सभी शिक्षाओं को अभ्यास में लाएं, ताकि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार एक बड़ा पात्र बन सकें।

मेरे प्रिय भाइयो और बहनो! आइए हम, परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले एक बड़े पात्र के तौर पर, एक होकर और स्वयं का बलिदान करते हुए, संसार के सभी लोगों को नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार करें।