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प्रार्थना

प्रार्थना मसीही विश्वास का एक अनिवार्य अंग है। उत्सुक प्रार्थना के बिना, हम कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते। अदृश्य होने पर भी, प्रार्थना के पास असम्भव को संभव करने की चमत्कारी सामर्थ्य है।

प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर के साथ बात करना



मैं आपको एक अमेरिकी परिवार की कहानी बताता हूं। उसके घर के टेलीफोन कनेक्शन में समस्या थी। परिवार का टेलीफोन दिन के समय में अच्छे से काम करता था, लेकिन रात के समय में वह बंद हो जाता था।
ऐसी परिस्थिति कई दिनों तक चली, और उन्हें उसे ठीक करने के लिए मरम्मत करने वाले को बुलाया। जब मरम्मत करने वाले को इसके कारण का पता चला, तो उसके पास बोलने के लिए शब्द ही नहीं थे, क्योंकि वह इतना आश्चर्यजनक कारण था। जब उसने टेलीफोन को खोला, तो उसने देखा कि चाहे एक तार बिना किसी दरार के लगता था, वह थोड़ा सा कटा हुआ था। इसलिए दिन के समय में, जब गरमी बढ़ती थी, तो वे टेलीफोन का उपयोग कर सकते थे क्योंकि गरमी की वजह से तार फैल कर दरार को भर देते थे। हालांकि, रात के समय में जब तापमान गिर जाता था, तो तार के बीच की दरार तारों के सिकुड़ने की वजह से वापस आ जाती थी। इसके कारण, वे रात के समय में टेलीफोन का उपयोग नहीं कर सकते थे।

जैसे वह परिवार तारों के जुड़ने से दूसरों के साथ बातचीत कर सकता था, वैसे ही हम भी परमेश्वर के साथ तभी बातचीत कर सकते हैं जब परमेश्वर और हम प्रार्थना के द्वारा जुड़े हुए हों। हमारी इच्छा और आशा परमेश्वर तक पहुंचाने के लिए, प्रार्थना अत्यावश्यक है।
अमेरिका का प्रथम राष्ट्रपति, जॉर्ज वॉशिंग्टन, अमेरिका की स्वतंत्रता के लिए दिन रात परमेश्वर से प्रार्थना करता था। प्रतिभाशाली आविष्कारक, थोमस एडिसन ने भी हर एक आविष्कार के लिए हजारों प्रार्थनाएं की थीं। इसी कारण परमेश्वर ने उसे ऐसे बहुत से ज्ञान दिए जो मनुष्य के विचार से परे थे, और वह मानव समाज के लिए बहुत सा योगदान दे सका। अंधेरे में जल उठने वाला बिजली का बल्ब उसकी प्रार्थनाओं के परिणामों में से ही एक है।

जब हम बाइबल के इतिहासों को देखते हैं, तो हम ऐसे बहुत से लोगों को देख सकते हैं जिन्होंने प्रार्थनाओं के द्वारा बहुत से महान कार्य किए हैं। इस्राएल ने राजा दाऊद के शासन काल में राष्ट्रीय समृद्धि को भोगा क्योंकि उसने हमेशा परमेश्वर से उत्सुकता से प्रार्थना की थी।(2शम 7:18–29) दाऊद के पुत्र, राजा सुलैमान ने भी बहुत से आशीर्वाद पाए क्योंकि उसने एक हजार होमबलि चढ़ाए थे।(1रा 3:4–13) अपने नष्ट हुए देश के लिए उत्सुकता से परमेश्वर की सहायता मांगने से नहेम्याह यरूशलेम को फिर से बांध सका।(नहे 1:1–11) अपनी परमेश्वर के प्रति ईमानदार प्रार्थना के द्वारा बेबीलोन के राजा के स्वप्न का अर्थ बताकर, दानिय्येल ने न सिर्फ अपना जीवन बचाया, लेकिन राजा को पश्चाताप करवाया जो अन्य देवताओं की पूजा करता था।(दान 2:17–19)
जब हम प्रार्थना के बारे में बात करें, तो हम यीशु को छोड़ नहीं सकते। उन्होंने सुसमाचार के कार्य की पूर्ति के लिए और हमारे उद्धार के लिए दिन और रात प्रार्थना करने का उदाहरण दिया था। उनके पास प्रार्थना किए बिना ही हमारा उद्धार पूर्ण करने की सामर्थ्य थी, लेकिन हमें एक उदाहरण देने के लिए, उन्होंने ऐसा कहते हुए कि परमेश्वर ईमानदार प्रार्थनाओं को सुनते हैं, परमेश्वर से उत्सुकता से प्रार्थना की।(लूक 11:9–13)

जब हम बाइबल की सभी 66 पुस्तकें पढ़ें, तो हम ऐसी एक भी पुस्तक नहीं पाएंगे जो प्रार्थना करने के बारे में बात न करती हो; बाइबल की सभी कहानियों में प्रार्थना समाई हुई है। यह दिखाता है कि हमारे विश्वास में प्रार्थना कितनी आवश्यक है।

ऊंची इच्छाओं के लिए ऊंची प्रार्थनाएं



यद्यपि हम निरंतर प्रार्थनाओं की आवश्यकता महसूस करते हैं, फिर भी कभी–कभी हम जितनी करनी चाहिए उतनी प्रार्थना नहीं करते। ऐसा तब होता है जब हम अनन्त स्वर्ग को पाने की प्रक्रिया में एक ऊंचा मापदण्ड या आशा का एक ऊंचा स्तर नहीं बनाते।
आइए हम गणित के बारे में सोचें जिसे हम अपने स्कूल के दिनों में मुश्किल मानते थे। उन दिनों में, आपने ऐसा सवाल किया होगा कि केवल चार अंकगणितीय क्रियाएं, यानी जोड़ना, घटाना, भागाकार करना और गुणाकार करना ही रोजाना के जीवन के लिए काफी हैं, तो फिर मुझे अवकलन, समाकलन, क्रमचय और संचय क्यों सीखना पड़ता है। हालांकि, ऐसा उच्च स्तरीय गणित उन लोगों के लिए आवश्यक है जिनके पास उच्च स्तरीय ध्येय है और अन्वेषण करने का मन है। सामान्य लोगों को सिर्फ साधारण गणित की आवश्यकता है। रॉकेट प्रक्षेपण के लिए, अंतरिक्ष केन्द्र बनाने के लिए, या बाहरी अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह का प्रक्षेपण करके पृथ्वी की तस्वीर लेने के लिए, उच्च स्तरीय गणित अनिवार्य है।
उच्च उद्देश्य रखने वाले व्यक्ति को उच्च स्तर का गणित चाहिए। उसी तरह से, यदि हमारे पास आत्मिक जीवन में उच्च स्तर की आशा है, तो हमें रोज का खाना देने के लिए धन्यवाद की या बिना किसी परेशानी के चर्च आने की अनुमति देने के लिए धन्यवाद की प्रार्थनाओं जैसी औपचारिक प्रार्थनाओं के स्तर तक ही नहीं रहना चाहिए। बल्कि, हमें और विविध और ऊंचे स्तर की प्रार्थनाएं चढ़ानी चाहिए।
जब मैं ने शुरुआत में सत्य को ग्रहण किया था, तो मैं केवल इसलिए प्रार्थना करता था कि बाइबल ऐसा करने के लिए कहती है; मैंने पर्वों की प्रार्थना की अवधियों में प्रार्थनाएं कीं; मैं जब सुबह में उठता था, तो मैं केवल औपचारिक प्रार्थना करता था; और सोने से पहले, पूरे दिन में मुझे संभालने के लिए, मैं परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए प्रार्थना करता था। शुरुआत में सब के लिए ऐसा ही होगा। अब, हमें प्रार्थना के इसी स्तर पर नहीं रहना चाहिए। जैसे जैसे हमारा विश्वास बढ़ता है, हमें एक ऊंचा उद्देश्य बनाना चाहिए और उसके लिए अंतहीन प्रार्थना करनी चाहिए।
हम केवल चार अंकगणितीय क्रियाओं के द्वारा कृत्रिम उपग्रह का प्रक्षेपण नहीं कर सकते या किसी नदी के ऊपर पुल नहीं बना सकते। उसी तरह से, जिस किसी के पास एक ऊंचा उद्देश्य होता है और जो अपने आपको सुसमाचार के महान कार्य के लिए समर्पित करने की कोशिश करता है, उसके लिए समरूपी प्रार्थना आवश्यक है। चूंकि हम विश्वव्यापी धर्म सुधार को पूर्ण करने की योजना बना रहे हैं, इसलिए हमें विविध और ऊंचे स्तर की प्रार्थनाओं के साथ लगातार परमेश्वर से विनती करनी चाहिए।

नित्य और निरन्तर प्रार्थना करते रहो



एक कहावत है कि, “बहुत ज्यादा बहुत थोड़े के जैसे ही अयोग्य है।” उसी तरह से, इस संसार में किसी वस्तु के लिए अतिशय हो जाना अच्छा नहीं है। हालांकि, प्रार्थना करना इसमें एक अपवाद है। बाइबल हमें “नित्य प्रार्थना करते रहो,” और “निरन्तर प्रार्थना करते रहो,” कहते हुए प्रार्थना का महत्व समझाती है।

लूक 18:1–7 फिर उसने इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए, उनसे यह दृष्टान्त कहा: “किसी नगर में एक न्यायी रहता था, जो न परमेश्वर से डरता था और न किसी मनुष्य की परवाह करता था। उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी, जो उसके पास आ–आकर कहा करती थी, ‘मेरा न्याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा।’ कुछ समय तक तो वह न माना परन्तु अन्त में मन में विचारकर कहा, ‘यद्यपि मैं न परमेश्वर से डरता, और न मनुष्यों की कुछ परवाह करता हूं; तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्याय चुकाऊंगा, कहीं ऐसा न हो कि घड़ी–घड़ी आकर अन्त को मेरी नाक में दम करे’।” प्रभु ने कहा, “सुनो, यह अधर्मी न्यायी क्या कहता है? इसलिये क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात–दिन उसकी दुहाई देते रहते हैं?...

यीशु ने हम से कहा कि एक या दो बार प्रार्थना करने के बाद उत्तर न पाने पर आसानी से निराश न हो जाओ। यीशु ने कहा कि, “इसलिये क्या परमेश्वर अपनी प्रिय संतानों का न्याय न चुकाएंगे जो रात–दिन उसकी दुहाई देते रहती हैं, जबकि उस ढीठ अधर्मी न्यायी ने भी निरन्तर विनतियों के कारण उस विधवा की दशा को सुना था? एक दुष्ट व्यक्ति भी उत्सुक विनती को ठुकरा नहीं सकता बल्कि सुनता है। तब परमेश्वर अपनी सन्तानों की प्रार्थनाओं को कितना ज्यादा सुनेंगे जो धार्मिक वस्तुओं के लिए उनकी सहायता मांगती हैं?”
यदि हम जब तक हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं आता, तब तक पूरे हृदय से निरन्तर प्रार्थना करें, तो परमेश्वर निश्चय ही हमारी प्रार्थनाओं को सुनेंगे। यदि आपको लगता है कि परमेश्वर ने अब तक आपकी प्रार्थना को नहीं सुना, तो इसी समय एक और बार प्रार्थना कीजिए। ऐसा कभी भी न सोचिए कि आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं दिया जाएगा। यदि आप सब बातों के लिए प्रार्थना करते हैं और दृढ़ता से विश्वास करते हैं कि परमेश्वर आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर देंगे, तो आप दानिय्येल, शद्रक, मेशक और अबेदनगो के समान आश्चर्यजनक चमत्कार का अनुभव करेंगे।
जब कभी भी हम प्रार्थना करें, तो हमें इन शब्दों को याद करना चाहिए कि, “बिना रुके निरन्तर प्रार्थना करो।” परमेश्वर अपनी सन्तानों के लिए न्याय ले आ रहे हैं, और वह बिना रुके सुसमाचार को पृथ्वी के छोर तक फैला रहे हैं। इसलिए जब तक पूरे संसार में खोए हुए हमारे स्वर्गीय परिवार के सभी सदस्य मिल न जाएं, तब तक आइए हम निरन्तर प्रार्थना करें कि, ‘कृपया हमें अपने सभी खोए हुए भाइयों और बहनों को ढूंढ़ने के लिए सहायता कीजिए।’

1थिस 5:16–25 सदा आनन्दित रहो। निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो। हर बात में धन्यवाद करो; क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है... हे भाइयो, हमारे लिये प्रार्थना करो।

सदा आनन्दित रहो; बिना रुके प्रार्थना करो; हर बात में धन्यवाद दो। यही हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा है। हमारे लिए उनकी इच्छा है कि हम बिना रुके निरन्तर प्रार्थना करें, चाहे एक या दो बार प्रार्थना करने के बाद भी हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर न दिया गया हो। जब तक हम सभी 1,44,000 को न ढूंढ़ लें, तब तक हमें निरन्तर प्रार्थना करते रहना चाहिए।

हमारे खोए हुए भाइयों और बहनों के लिए प्रार्थना



सिय्योन में किसी भाई के लिए सबसे अच्छा उपहार उसके लिए प्रार्थना करना है। यदि आप किसी असभ्य स्वभाव वाले भाई को देखें, तो कृपया उसके लिए प्रार्थना कीजिए।
पिछले 20 सालों में, मैं ने निरन्तर परमेश्वर से प्रार्थना की है कि वह हमें अपने स्वर्गीय परिवार के सभी सदस्यों को ढूंढ़ने के लिए सहायता करें। मुझे विश्वास है कि आप भी वैसा ही करते होंगे। प्रार्थनाओं के परिणाम स्वरूप, अलग–अलग देशों से बहुत से लोग अब सिय्योन की ओर आ रहे हैं।
चूंकि एक ही प्रार्थना को 20 साल तक दोहराया गया है, इसलिए मुझे एहसास होता है कि सच में परमेश्वर मेरी प्रार्थनाओं का उत्तर दे रहे हैं: वह बहुत से दूर के देशों में हमें अपने चर्च स्थापित करने के लिए सहायता कर रहे हैं; लोग जो सिय्योन की महिमा को न जानते हुए मरे हुए थे, अब परमेश्वर के वचन को ग्रहण करते ही वे जीवन की ओर आते हैं; जहां कहीं भी नई वाचा का सुसमाचार और नया नाम सुनाया जाता है, सब कुछ जीवित हो जाता है।
हमारी प्रार्थनाओं के परिणाम स्वरूप, परमेश्वर ने हमें एक छोटे से समय–अंतराल में अपने बहुत से खोए हुए भाइयों और बहनों को ढूंढ़ने दिया है। यदि हमने एक या दो बार प्रार्थना करने के बाद प्रार्थना न की होती, तो परमेश्वर ने ऐसा सोचते हुए कि हमारी इच्छा कमजोर है और अभी भी हम जो मांग रहे हैं उसे पाने के लिए लायक नहीं हैं, हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर न दिया होता। हमने लगातार प्रार्थना की है, और परमेश्वर ने हमारी एक मन से की गईं प्रार्थनाओं का उत्तर दिया है; वह लगातार हमारे आत्मिक परिवार वालों को हमारे पास भेज रहे हैं। हमें हमेशा प्रार्थना करनी चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए।
यदि हम कुछ भी करने से पहले प्रार्थना करें, तो परमेश्वर हमें अच्छे मार्ग की ओर ले जाएंगे और सब बुरी परिस्थितियों को लाभकारक परिस्थितियों में बदल देंगे। चूंकि पूरे मन से निरन्तर प्रार्थना करते रहना हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा है, इसलिए जब तक हमारे पिता वापस न आते, तब तक हमें प्रार्थना करना बन्द नहीं करना चाहिए; हमें परमेश्वर से विनती करनी चाहिए कि वह पृथ्वी के छोर तक प्रचार करने के लिए और अपने सभी खोए हुओं को ढूंढ़ने के लिए हमारी सहायता करें।
आइए हम उत्सुकता से हमारे पिता से प्रार्थना करें। उस अधर्मी न्यायी ने उस विधवा की विनती सुनी थी क्योंकि उसने उससे प्रतिदिन विनती की थी। तब, यदि हम में से हर एक दिन और रात उनसे प्रार्थना करें, तो क्या हमारे स्वर्गीय पिता हमारी विनती नहीं सुनेंगे? वह अपनी सन्तानों की सभी प्रार्थनाएं सुनेंगे, फिर चाहे उन्हें उसके लिए ब्रह्माण्डीय संरचना को भी थोड़ा सा क्यों न बदलना पड़े।

परमेश्वर अपनी सन्तानों की प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं



यह कहना मेरे लिए शर्म की बात है, लेकिन जब मैं छोटा था, उस समय मैं अपने माता–पिता पर दबाव डालता था। जब मैं उन्हें परेशान करता था, तो वे मेरी हर एक बात को मानते थे। जब मैं स्वर्गीय पिता से प्रार्थना करता हूं, तो मैं अक्सर आग्रही रूप से मांगता हूं कि, “कृपया इस बात को इसी साल में पूरा कर दीजिए।” इस तरह से परमेश्वर पर दबाव डालने से, उन्होंने मेरी सभी प्रार्थनाओं को उनके नियत समय से भी पहले पूरा कर दिया है।
ऐसा बिल्कुल नहीं था कि वह विधवा बोलने में माहिर या सम्मान के पात्र थी कि उस न्यायी ने उसे कानूनी सुरक्षा दी थी, लेकिन इसलिए था क्योंकि वह प्रतिदिन उसे परेशान करती थी। कोई भी उस व्यक्ति से नहीं जीत सकता जो प्रतिदिन उसे परेशान करता हो।

लूक 11:5–13 ... अत: जब तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा।

माता–पिता के लिए अपनी सन्तानों के प्रति नम्र होना स्वाभाविक है जब वे उनसे आग्रह करते हैं। उन सन्तानों को जो लगातार उनसे पवित्र आत्मा मांगती हैं, परमेश्वर वह क्यों न देंगे? परमेश्वर से उत्साह से विनती कीजिए। तब आपकी सभी प्रार्थनाओं का उत्तर स्वर्गीय पिता और माता के प्रेम और कृपा के द्वारा दिया जाएगा।
आइए हम बहुत छोटी सी चीज भी करने से पहले प्रार्थना करने की आदत बनाएं। जब हम वाहन चलाते हैं, आइए हम शुरू करने से पहले प्रार्थना करें। जब हम सुसमाचार का प्रचार करें, तो आइए हम सबसे पहले प्रार्थना करें। तब हम अच्छा परिणाम पा सकेंगे।
जो प्रार्थना नहीं करते, वे खुद की सामर्थ्य से कार्य करते हैं। हालांकि, जो निरन्तर प्रार्थना करते हैं, वे हमेशा परमेश्वर की सहायता पर निर्भर रहते हैं। भले ही आज बहुत से प्रभावशाली यंत्र खोजे गए हैं और काम के लिए उनका इस्तेमाल किया जाता है, फिर भी एक किसान खेती करने के लिए हल का प्रयोग करे, तो क्या होगा? उसे हल के द्वारा काम पूरा करने में एक सप्ताह या दस दिन से भी ज्यादा समय लगेगा। हालांकि, यदि वह एक यंत्र का प्रयोग करे, तो वह एक ही दिन में कार्य को पूरा कर सकेगा।
सुसमाचार को पूरा करने का सबसे प्रभावशाली तरीका प्रार्थना करना है। प्रार्थना के द्वारा हम स्वर्गीय पिता और माता से सामर्थ्य पा सकते हैं ताकि हम कार्य को और कारगर व प्रभावशाली ढंग से पूरा कर सकें।
प्रथम चर्च के समय में, प्रार्थना के द्वारा एक महान प्रचार का कार्य किया गया था। उस समय के संत खुद पर निर्भर नहीं थे, लेकिन वे प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की सामर्थ्य को पाते थे। हमें 2,000 साल पहले के संतों ने जिसका प्रयोग किया था उस कारगर पद्धति को सीखना चाहिए।
आइए हम लूका के 18 वें अध्याय में यीशु के कहे शब्दों को याद करें। यदि परमेश्वर ने हमारी प्रार्थनाओं का अभी तक उत्तर नहीं दिया है, तो इसका मतलब है कि हमने ज्यादा प्रार्थना नहीं की है। आइए हम इस तथ्य के बारे में एक और बार सोचें और उत्सुक प्रार्थनाओं के द्वारा आत्मिक सामर्थ्य को जमा करने की कोशिश करें। उस अधर्मी न्यायी ने भी उस विधवा की विनती सुनी थी। तो फिर हमारे परमेश्वर जिन्होंने हमारे कान बनाए, हमारी प्रार्थनाओं पर कितना ज्यादा कान लगाएंगे, और जब हम संकट में हों, तो हमारी देखभाल करेंगे। वे सच में हमारी सभी प्रार्थनाओं को सुन रहे हैं और हम सब की हमेशा देखभाल कर रहे हैं।
हम निरन्तर प्रार्थना करें, यह हमारे पिता की इच्छा है। आइए हम उत्सुकता से प्रार्थना करें, खासकर विश्व प्रचार के लिए प्रार्थना करें, ताकि सुसमाचार संसार में प्रचार किया जा सके। जब हम एक मन से प्रार्थना करें और संसार में जाएं, तब इन अंतिम दिनों में परमेश्वर सुसमाचार के कार्य को निश्चित रूप से और शीघ्रता से पूरा कर देंगे। मैं आशा करता हूं कि सिय्योन के सभी सदस्य लगातार प्रार्थना करें और हमेशा स्वर्गीय पिता और माता से हमारे सभी खोए हुए भाइयों और बहनों को खोजने की विनती करें।