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एलोहीम परमेश्वर

अपने माता–पिता का पालन करना यह हर एक सन्तान का कर्तव्य होता है। उसी तरह से, मनुष्य का मूलभूत कर्तव्य परमेश्वर को जानना और उनकी आज्ञाओं का पालन करना है। सभी लोगों को इस संसार में ज्योति के रूप में आए परमेश्वर को पहचानना चाहिए। हालांकि, उनके लिए उन्हें पहचानना आसान नहीं है, क्योंकि, शैतान ने, जो “इस संसार का प्रभु” कहलाता है, लोगों के मनों को अंधा कर दिया है, ताकि वे मसीह के महिमा की ज्योति को देख न सकें।(2कुर 4:4)

होशे 6:1–3 ... आओ, हम ज्ञान ढूंढ़ें, वरन् यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिये यत्न भी करें; क्योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का निश्चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन् बरसात के अन्त की वर्षा के समान जिस से भूमि सिंचती है।

यहां बाइबल हमें कहती है कि पिछली वर्षा का पवित्र आत्मा पाने के लिए परमेश्वर का ज्ञान होना एक पूर्व शर्त है। हमारे पास परमेश्वर का सही ज्ञान होना चाहिए, ताकि हम उस भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए कि, छोटे से छोटा एक हजार बन जाएगा और सबसे दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा, पवित्र आत्मा को पूर्ण रूप से धारण कर सकें।
इसलिए बाइबल हमें परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिए और हमारा विश्वास एक मजबूत पत्थर पर बनाने के लिए सलाह देती है।

नर स्वरूप के परमेश्वर और नारी स्वरूप के परमेश्वर



परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करते हुए, आइए हम यह देखें कि परमेश्वर के पास दो लिंग हैं।

उत 1:26–27 फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।” तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।

हम अपने सृजनहार को “सर्वशक्तिमान परमेश्वर” कहते हैं, और सोचते हैं कि वह एक ही है। हालांकि, हम उत्पत्ति में देख सकते हैं कि बहुवचन परमेश्वर ने सब वस्तुओं को सृजा, यहां तक कि “हम मनुष्य को बनाएं,” कहते हुए मनुष्य को भी बनाया।
यदि कोई कलाकार किसी नर मॉडल का चित्र बनाए, तो एक पुरुष की तस्वीर बनेगी; और यदि वह किसी नारी मॉडल का चित्र बनाए, तो एक स्त्री की तस्वीर बनेगी। हमारे सृजनहार परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार बनाया, और नर और नारी सृजे गए। यह दिखाता है कि परमेश्वर में नर और नारी दोनों स्वरूप हैं।
अब तक बहुत से बाइबल विद्वानों ने परमेश्वर को ‘पिता’ कहते हुए, केवल नर के स्वरूप में ही चित्रण किया है। उन्होंने परमेश्वर के नारी स्वरूप के बारे में नहीं बताया था। बाइबल परमेश्वर का नर और नारी दोनों स्वरूप में चित्रण करती है, जो उनके दस्तूर और सिद्धांत के विरोधाभास में है। इसलिए उन्होंने पिता परमेश्वर के साथ माता परमेश्वर के अस्तित्व पर भी विश्वास करने वालों को विधर्म कह दिया, और वे जान बूझ कर इसकी उपेक्षा करते हैं।
हालांकि, सत्य के प्रकट होने का सच में एक समय होता है। याद कीजिए कि परमेश्वर ने बताया था कि पवित्र आत्मा को पाने की पूर्व शर्त परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करना है। संसार में हर कोई उन परमेश्वर को जानता है जिन्होंने लाल समुद्र को विभाजित किया था। यहां तक कि गैर–ईसाई लोग भी उन परमेश्वर को जानते हैं जिन्होंने आदम और हव्वा को बनाया था और छह दिन में सब कुछ सृजन किया था।
तब हमें परमेश्वर के बारे में कौन सा ज्ञान प्राप्त करने के लिए यत्न करना चाहिए? हमें जानना चाहिए कि पिता के रूप में नर परमेश्वर के साथ माता के रूप में नारी परमेश्वर भी है। यदि हम इस बात को अच्छे से समझ लें, तो हम बाइबल की 66 पुस्तकों में जिसका वर्णन किया गया है, उस जीवन और बुद्धि के सिद्धांतों को अच्छे से जान लेंगे।
आदम और हव्वा परमेश्वर के स्वरूप में सृजे गए थे। सबसे पहले परमेश्वर ने आदम को बनाया, और बाद में उसके लिए एक सहायक का निर्माण करने का निर्णय किया। उन्होंने आदम को गहरी नींद में डाल दिया और उसकी एक पसली निकालकर उससे हव्वा को बनाया।(उत्पत्ति का दूसरा अध्याय)
आदम को हव्वा के रूप में एक सहायक की आवश्यकता क्यों थी? पुरुष सन्तानों को जन्म नहीं दे सकता और न ही उन्हें दूध पिला सकता। जब परमेश्वर ने मनुष्यों की सृष्टि की थी, तो उन्होंने ये सब कार्य स्त्री को सौंप दिए।
जब परमेश्वर ने आदम और हव्वा को बनाया, आदम के लिए कार्य और हव्वा के लिए कार्य अलग होते थे। आदम आने वाले का चिन्ह था।(रो 5:14) इस तरह से उसकी पत्नी हव्वा, मेमने, यानी दूसरी बार आने वाले मसीह की पत्नी को दर्शाती है। उत्पत्ति में इतना बड़ा सत्य छिपा हुआ है।
हमें यह समझना चाहिए कि नर परमेश्वर का कार्य क्या है और नारी परमेश्वर का कार्य क्या है। यही हमारे लिए परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने की शुरुआत होगी।

जीवन देना माता का कार्य है



आइए हम परमेश्वर के मनुष्यों को अपने स्वरूप के अनुसार बनाने की इच्छा के द्वारा परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ोतरी करें।

उत 2:4–24 तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया... परन्तु आदम के लिये कोई ऐसा सहायक न मिला जो उस से मेल खा सके। तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नींद में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उसने उसकी एक पसली निकालकर उसकी जगह मांस भर दिया। और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया। तब आदम ने कहा, “अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस है; इसलिए इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।” इस कारण पुरुष अपने माता–पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे।

उत 3:20 आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा(अक्षरश: जीवन) रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई।

उत्पत्ति में लिखे इस परमेश्वर के कार्य के द्वारा, हम समझ सकते हैं कि आदम मसीह का एक स्वरूप था, हव्वा उसकी पत्नी को दर्शाती है और उनकी सन्तान पृथ्वी की सारी मानवजाति को दर्शाती है: हाबिल उन लोगों को दर्शाता है जो उद्धार पाने वाले हैं, और कैन उन लोगों को दर्शाता है जो उद्धार नहीं पाने वाले हैं।
इन सभी वचनों के द्वारा बाइबल साक्षी देती है कि परमेश्वर के दो लिंग हैं। यदि आप को पूर्वविचार था कि परमेश्वर नर है और वह एकमात्र है, तब अब से आप को बाइबल के अनुशासन पर चलना है, क्योंकि हम परमेश्वर की इच्छासुसार चलने से उद्धार पा सकते हैं।

एलोहीम परमेश्वर के द्वारा नियंत्रित किया गया मनुष्यजाति का इतिहास



आइए हम देखें कि एलोहीम परमेश्वर, “आइए हम...,” कहते हुए साथ में कार्य करते हैं।

उत 11:1–9 सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा, और एक ही बोली थी। उस समय लोग... तब वे आपस में कहने लगे, “आओ, हम ईटें बना बना के भली भांति आग में पकाएं।” और उन्होंने पत्थर के स्थान पर ईंट से, और चूने के स्थान पर मिट्टी के गारे से काम लिया। फिर उन्होंने कहा, “आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बातें करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें, ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े।” जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे, तब उन्हें देखने के लिये यहोवा उतर आया। और यहोवा ने कहा... इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।” इस प्रकार यहोवा ने उनको वहां से सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया; और उन्होंने उस नगर का बनाना छोड़ दिया। इस कारण उस नगर का नाम बेबीलोन पड़ा...

उत्पत्ति के पहले अध्याय में परमेश्वर ने, “हम मनुष्य को बनाएं...” कहते हुए, नर और नारी को बनाया, और उत्पत्ति के 11 वें अध्याय में हम एलोहीम परमेश्वर को, “आओ हम...,” कहते हुए साथ में काम करते हुए देख सकते हैं; हम नर और नारी दोनों परमेश्वर को मनुष्य का अहंकार तोड़ते हुए और उन्हें दुष्ट कार्य करने से रोकते हुए देख सकते हैं।

यश 6:7–10 ... तब मैंने प्रभु का यह वचन सुना, “मैं किस को भेजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा?” तब मैं ने कहा, “मैं यहां हूं! मुझे भेज।”...

यशायाह की पुस्तक में परमेश्वर ने ऐसा न कहते हुए, “मेरी ओर से कौन जाएगा?” ऐसा कहा, “हमारी ओर से कौन जाएगा?” यहां पर भी हम देख सकते हैं कि पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर दोनों एक साथ कार्य करते हैं और हमारे उद्धार के लिए सुसमाचार के कार्य की अगुआई करते हैं।
बाइबल की बहुत सी आयतों में हम परमेश्वर को, “आओ हम...” कहते हुए एक साथ कार्य करते हुए देख सकते हैं। इब्रानी भाषा में, परमेश्वर के लिए एकवचन का शब्द ऐल या ऐलोहा होता है, और उसके बहुवचन का शब्द एलोहीम होता है जिसका अर्थ बहुवचन के परमेश्वर होता है।
एलोहीम ने सब वस्तुओं को सृजा है, यहां तक कि ऐसा कहते हुए, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं,” मनुष्य को भी सृजा है। आदि से ही पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर एक साथ कार्य करते आ रहे हैं; उन्होंने मनुष्य का अहंकार तोड़ने के लिए और उन्हें बेबीलोन के गुम्मट को बनाने से रोकने के लिए, “आओ, हम उतर के...” कहते हुए साथ में कार्य किया, और उन्होंने “हमारी ओर से कौन जाएगा?” कहते हुए नबी यशायाह को बुलाने के लिए भी एक साथ कार्य किया। इस तरह से, एलोहीम परमेश्वर, पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर ने साथ मिलकर कार्य किया है।

परमेश्वर उचित समय पर आत्मा और दुल्हिन के रूप में प्रकट होने वाले हैं



अब, आइए हम देखें कि एलोहीम जो आत्मा में हैं, शरीर में कब प्रकट होते हैं। एलोहीम परमेश्वर ने संसार की सृष्टि के कार्य में एक साथ कार्य किया था, और वे एक साथ ही इस सृष्टि को संपूर्ण बनाएंगे।

1तीम 6:15–16 जिसे वह ठीक समय पर दिखाएगा, जो परमधन्य और एकमात्र अधिपति और राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु है, और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा, और न कभी देख सकता है: उस की प्रतिष्ठा और राज्य युगानुयुग रहेगा। आमीन।

बाइबल कहती है कि परमेश्वर हमें अपना प्रकट होना नियत समय पर दिखाएंगे। यदि वे हमारी आंखों के लिए प्रत्यक्ष रूप में प्रकट होंगे, तो इसका अर्थ है कि वे शरीर में आएंगे। परमेश्वर के लिए, स्वर्गदूतों से भी निचले रूप में होकर, मनुष्यों की समानता में, यानी नर और नारी की समानता में, इस पृथ्वी पर आने की भविष्यवाणी है। हालांकि वे वो ही परमेश्वर हैं जो आदम से लेकर 6,000 सालों की हमारे उद्धार की योजना पूरी कर रहे हैं।
प्रत्येक युग में उद्धारकर्ता का एक नाम होता है, लेकिन परमेश्वर का नारी के रूप में नाम प्रकट नहीं होता। क्योंकि पिता परमेश्वर एक प्रतिनिधि के रूप में हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे किसी घर में माता के होने के बावजूद दरवाजे की नाम–पट्टी पर सिर्फ पिता का नाम ही होता है।
रोमियों की पुस्तक में ऐसा लिखा हुआ है कि एक मनुष्य, आदम के द्वारा पाप जगत में आया। वास्तव में, वह हव्वा थी जिसने पहले पाप किया था, लेकिन प्रतिनिधिक रूप से सिर्फ आदम का ही नाम लिखा गया। प्रत्येक युग के उद्धारकर्ता के नाम के लिए भी वैसा ही है; सिर्फ पिता परमेश्वर के नाम का ही प्रतिनिधि के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
केवल परमेश्वर ही हमें अनन्त जीवन दे सकते हैं, क्योंकि सिर्फ उन ही के पास अमरता है। आइए हम देखें कि परमेश्वर जो अकेले चिरस्थायी हैं, वह नियत समय पर कैसे प्रकट होंगे।

प्रक 22:17 आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।

यहां हम देख सकते हैं कि आत्मा और दुल्हिन नियत समय पर हमें जीवन का जल देने के लिए प्रकट हुए हैं।

प्रक 19:6–8 फिर मैं ने बड़ी भीड़ का सा और बहुत जल का सा शब्द, और गर्जन का सा बड़ा शब्द सुना, “हल्लिलूय्याह! क्योंकि प्रभु हमारा परमेश्वर सर्वशक्तिमान राज्य करता है। आओ, हम आनन्दित और मगन हों, और उसकी स्तुति करें, क्योंकि मेम्ने का विवाह आ पहुंचा है, और उसकी दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है। और उसको शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहिनने का अधिकार दिया गया”– क्योंकि उस महीन मलमल का अर्थ पवित्र लोगों के धर्म के काम है।

प्रक 21:9–10 फिर जिन सात स्वर्गदूतों के पास सात अंतिम विपत्तियों से भरे हुए सात कटोरे थे, उनमें से एक मेरे पास आया, और मेरे साथ बातें करके कहा, “इधर आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेम्ने की पत्नी दिखाऊंगा।” और वह मुझे आत्मा में, एक बड़े और ऊंचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते दिखाया।


मेमना और उसकी दुल्हिन पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर हैं, जो नियत समय पर प्रकट हुए हैं। हमारे पिता और माता अपनी सन्तानों को जीवन देने के लिए अन्तिम दिनों में प्रकट हुए हैं।
“परमेश्वर का रहस्य और जीवन के जल का स्रोत” नामक पुस्तक के अध्याय 24 में लिखा है कि आत्मा और दुल्हिन प्रकट होंगे और सभी गैरयहूदियों की उद्धार की ओर अगुआई करेंगे। परमेश्वर ने भविष्यवाणी की थी कि वह अपना प्रकट होना दिखाएंगे, और यह भविष्यवाणी पूरी हो चूकी है। केवल परमेश्वर ही हमें जीवन दे सकते हैं, और आत्मा और दुल्हिन अब हमें जीवन का जल दे रहे हैं। वे ही एलोहीम परमेश्वर हैं जो हम पर प्रकट हुए हैं।

सर्प(शैतान) स्त्री(माता) का शत्रु है



बाइबल कहती है कि हमारा एक शत्रु है जो हमें एलोहीम का, यानी पिता परमेश्वर का और माता परमेश्वर का, ज्ञान पाने से रोकता है, ताकि हम अनन्त जीवन का आशीर्वाद न पा सकें। वह शत्रु शैतान है जो हमें अनन्त जीवन देनेवाले परमेश्वर के ज्ञान से दूर रखकर हमारी मृत्यु के मार्ग पर अगुआई करता है।

उत 3:14–15 तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, “तू ने जो यह किया है इसलिये तू सब घरेलू पशुओं, और सब बनैले पशुओं से अधिक शापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा: और मै तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करूंगा; वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।”

यह भविष्यवाणी यीशु के द्वारा उनके प्रथम आगमन के समय आंशिक रूप से पूरी हुई थी। शैतान हमारा भी शत्रु है क्योंकि वह एलोहीम परमेश्वर का, खास तौर पर माता परमेश्वर का शत्रु बन गया है।
सर्प(शैतान) तो हमेशा से स्त्री का शत्रु है। स्त्री, यानी हमारी माता हमें जीवन की ओर अगुआई करती हैं, लेकिन सर्प, यानी शैतान हमें मृत्यु की ओर अगुआई करने की कोशिश करता है। आदि से ही उनके बीच में शत्रुता है, और युग के अन्त तक यह शत्रुता जारी रहेगी। वह लगातार विभिन्न तरीकों से माता के सत्य का विरोध करता है। हमें जीवन देने वाली माता को जानने से रोकने के लिए, वह हर प्रकार के कपटी वचनों और युक्तियों के द्वारा बाइबल में लिखे एक साथ कार्य करते एलोहीम परमेश्वर की गवाहियों को झूठलाता है। इस तरह से, वह हमारी आत्माओं को निगल जाने के लिए और हमें मृत्यु की ओर ले जाने के लिए अधिकतम कोशिशें करता है।
जितना ज्यादा शैतान हमारा विरोध करता है, उतना ही ज्यादा हमें सतर्क रहना और आत्मसंयमी होना चाहिए, ताकि हम परमेश्वर के सही ज्ञान के द्वारा शैतान का सामना कर सकें।

नई वाचा माता परमेश्वर को प्रकट करती है



नई वाचा के द्वारा हम परमेश्वर का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। बाइबल कहती है कि व्यवस्था हमें मसीह की ओर अगुआई करने के लिए एक शिक्षक बनी है।(गल 3:24) इसलिए आइए हम नई वाचा के द्वारा एलोहीम परमेश्वर के पास आएं।

यिर्म 31:21–22(आइ.बी.पी.) ... यहोवा ने पृथ्वी पर एक नई वस्तु सृजी है अर्थात् नारी पुरुष को घेर लेगी।

यिर्म 31:31–34 फिर यहोवा की यह भी वाणी है, सुन, ऐसे दिन आनेवाले हैं जब मैं इस्राएल और यहूदा के घरानों से नई वाचा बांधूंगा... परन्तु जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने से बांधूंगा, वह यह है: मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊंगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूंगा; और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यह वाणी है। तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है, छोटे से लेकर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा।”


यिर्मयाह 31:22 बताता है कि स्त्री का पुरुष को घेर लेना नई बात है। और पद 31 में, नई वस्तु को नई वाचा की स्थापना के रूप में वर्णित किया गया है।
यदि शारीरिक रूप से व्याख्या करें, तो किसी स्त्री का पुरुष को घेर लेना कोई नई बात नहीं है। लेकिन आत्मिक रूप से विचार करते हुए, हम देख सकते हैं कि उसमें बहुत गहरा अर्थ है। स्त्री(हव्वा) पुरुष(आदम) का एक अंग थी, क्योंकि वह उसकी पसली में से बनाई गई थी। यदि परमेश्वर ने पुरुष में से पसली बाहर न निकाली होती और उससे स्त्री न बनाई होती, तो स्त्री पुरुष के अन्दर ही रहते हुए कैसे उसे घेर सकती है? इसलिए नई बात जिसके विषय में परमेश्वर ने भविष्यवाणी की है, वह एक अभूतपूर्व बात है; वह माता का प्रकट होना है जो अब तक पिता के अन्दर रहती थीं।
संसार में नई वस्तु परमेश्वर के नई वाचा की स्थापना करने से बनाई जाएगी। परमेश्वर ने कहा कि नई वाचा के द्वारा वह हमारे हृदयों पर अपना नियम लिखेंगे। उन्होंने ऐसा भी कहा, “मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे। और तब उन्हें एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि छोटे से लेकर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे।”
“मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा...” यहां मूल इब्रानी भाषा में, इस वचन में परमेश्वर को “एलोहीम” कहा गया है। जब हम नई वाचा के द्वारा एलोहीम परमेश्वर को जानेंगे, तो जैसे कि परमेश्वर ने कहा है, हम सब, छोटे से लेकर बड़े तक, परमेश्वर का ज्ञान रखेंगे।
गलातियों की पुस्तक में हम देख सकते हैं कि सारा नई वाचा को, यानी हमारी माता को दर्शाती है।

गल 4:21–26 इन बातों में दृष्टान्त है: ये स्त्रियां(हाजिरा, सारा) मानो दो वाचाएं(पुरानी वाचा और नई वाचा) हैं... और हाजिरा मानो अरब का सीनै पहाड़ है, और आधुनिक यरूशलेम उसके तुल्य है, क्योंकि वह अपने बालकों समेत दासत्व में है।

इस तरह से, सारा नई वाचा और ऊपर की यरूशलेम, हमारी माता को दर्शाती है। नई वाचा के द्वारा हमने हमारी माता के अस्तित्व के बारे में जाना है। होशे ने कहा था, “आओ, हम ज्ञान ढूंढें., वरन् यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए यत्न भी करें।” हमने नई वाचा के द्वारा, एलोहीम, पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर को जानकर, इन वचनों को पूरा किया है, ताकि हम सब, छोटे से लेकर बड़े तक, परमेश्वर को जान सकें।

स्त्री की शेष सन्तान अन्त में विजयी होती है



यहां तक कि परमेश्वर के चुने हुए लोग भी, यदि उनके पास परमेश्वर का ज्ञान नहीं है, तो नष्ट हो जाते हैं।(हो 4:6) इस बात को जानते हुए, शैतान माता के शत्रु के रूप में अन्त तक माता के सत्य को रोकने की कोशिश करता रहता है और चुने हुओं को भी निगल लेता है। यूहन्ना ने प्रकाशन देखा था कि स्त्री का शत्रु, अजगर स्त्री की शेष सन्तानों के विरुद्ध युद्ध करने के लिए समुद्र के बालू पर खड़ा रहता है। और यह भविष्यवाणी अब हमारी आंखों के सामने पूरी हो रही है: अजगर, जो पुराना सर्प और शैतान है, समुद्र के बालू के समान असंख्य ईसाइयों को माता का और हमारा जो उनका पालन करते हैं, विरोध करने के लिए एकत्रित कर रहा है।(प्रक 12:17)
हम संख्या में बहुत कम हैं। हालांकि, हमें उन सब से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि परमेश्वर ने अन्त में हमारी विजय होना आदि ही से तय किया है। बाइबल शैतान की और स्त्री की शेष सन्तानों की अन्तिम नियति का इस प्रकार वर्णन करती है: शैतान न बुझने वाली आग की झील में पीड़ा पाएगा, और स्त्री की शेष सन्तान ‘जीतने वाले’ बनकर जीवन का मुकुट पाएंगी और सदा काल के लिए स्वर्गीय मीरास को भोगेंगी।
वह एलोहीम परमेश्वर थे, जिन्होंने “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार बनाएं,” कहते हुए मनुष्यों की सृष्टि की थी, बेबीलोन का गुम्मट बनाने का दुष्ट कार्य करने वालों को “आओ, हम उतर के...” कहते हुए सजा दी थी, और “हमारी ओर से कौन जाएगा?” कहकर यशायाह को नबी के रूप में बुलाया था। इस तरह से, नर और नारी, एलोहीम परमेश्वर ने साथ मिल कर कार्य किया है। वे प्रतिज्ञा के अनुसार, हमें जीवन देने के लिए, नियत समय पर, इन अन्तिम दिनों में आत्मा और दुल्हिन बन कर आए हैं। अब हम एलोहीम परमेश्वर के नियम के अधीन जीते हैं, और खुशी मनाते हुए और आनन्दित होते हुए, उन्हें महिमा चढ़ाते हैं।
अब, आइए हम अपनी आत्मिक आंखों को खोलें। हमारी माता, स्वर्गीय यरूशलेम हमें अनन्त जीवन देने के लिए इस पृथ्वी पर आई हैं। उनकी सन्तान के तौर पर, हमें उनके साथ खुश होना चाहिए और उनके लिए दु:खी होना चाहिए।(यश 66:10–14) स्वर्गीय माता–पिता की सन्तान के तौर पर, जो हम पर शासन करते हैं और हमारी अगुआई करते हैं, हमें हमेशा जहां कहीं भी आत्मा और दुल्हिन जाते हैं, वहां उनका पालन करना चाहिए।