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कल के दिन के विषय में डींग मत मार

जब हम अपने आसपास देखते हैं, ऐसे बहुत से लोग हैं जो परमेश्वर पर विश्वास करने की जरूरतों को स्वीकार करते हुए भी, परमेश्वर के पास आने में हमेशा देरी करते हैं। वे अक्सर कहते हैं कि, “फिलहाल मैं अपने जीवन को पूर्ण रूप से जीना चाहता हूं। मैं बूढ़ा हो जाने के बाद विश्वास करूंगा,” या कहते हैं कि, “मुझे अभी इस समय में किसी चीज के बारे में ध्यान रखना है। मैं जब कार्यमुक्त हो जाऊंगा तो विश्वास करूंगा।” हालांकि, उनमें से कोई भी इस बात की गारंटी नहीं दे सकता कि वह कल का दिन जिसके विषय में वे योजनाएं बना रहे हैं और सपने देख रहे हैं, वह पक्का आएगा। यही जीवन है।

एक बार इंडोनेशिया में एक बड़ा भूकम्प आया था, जिससे 5,000 से अधिक लोगों को मार डाला गया था और लाखों लोग घायल हुए थे। चूंकि भूकम्प भोर के समय में हुआ था जब सब लोग सो रहे थे, उसने बहुत ज्यादा नुकसान किया और बहुत सी जानें लीं।

यह देखते हुए कि एक ही रात में ऐसी भयानक विपत्ति आई और एक पूरा क्षेत्र नष्ट हो गया, यदि हम ऐसा सोचें कि ‘मैं यह कल सुबह उठकर करूंगा,’ या ‘चूंकि आज मैं ने यह कार्य समाप्त नहीं किया है, मैं इसे कल समाप्त करूंगा,’ और कल के दिन के लिए कुछ बाकी रखें तो यह मूर्खता होगी। जिन्होंने भूकम्प में अपना जीवन खोया, वे भी अगले दिन के लिए बहुत सी योजनाएं बनाकर गहरी नींद में सो गए होंगे। हालांकि, वह कल का दिन जिसका वे सपना देखते थे, वह उनके लिए कभी नहीं आया।

कोई भी कल के दिन के विषय में डींग नहीं मार सकता



यदि आपको कोई ऐसा कार्य करना हो जो सही और अच्छा है, तो अच्छा यही होगा कि आप दूसरे दिन के लिए उसे स्थगित न करके उसी क्षण पूरा करें जब आपने उसे करने का निर्णय किया था। क्योंकि कोई भी कल के दिन के विषय में डींग नहीं मार सकता।

नीत 27:1 कल के दिन के विषय में डींग मत मार, क्योंकि तू नहीं जानता कि दिन भर में क्या होगा।

ऐसे बहुत से कारण हैं जिनकी वजह से मनुष्य कल के दिन के विषय में वादा नहीं कर सकता, जैसे कि पलभर में होने वाली दुर्घटनाएं और प्राकृतिक आपदाएं, अनपेक्षित बीमारियां इत्यादि। एक दृष्टांत के द्वारा, यीशु ने भी हमें सिखाया है कि वह मनुष्य कितना ही मूर्ख है जो परमेश्वर को खोजने के बजाय अपने भविष्य के लिए अपनी सम्पत्तियों पर निर्भर रहता है।

लूक 12:16–21 उसने उनसे एक दृष्टान्त कहा: “किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। तब वह अपने मन में विचार करने लगा, ‘मैं क्या करूं? क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं।’ और उसने कहा, ‘मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उनसे बड़ी बनाऊंगा; और वहां अपना सब अन्न और सम्पत्ति रखूंगा; और अपने प्राण से कहूंगा कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत सम्पत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह।’ परन्तु परमेश्वर ने उससे कहा, ‘हे मूर्ख! इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा; तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है वह किसका होगा?’ ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं।”

यदि हम यह भूल जाएं कि परमेश्वर, जिनके पास जीवन और मृत्यु का सारा अधिकार है, आज रात ही हम से हमारा प्राण ले जा सकते हैं, तो हम भी इस धनी मनुष्य के समान मूर्खता करेंगे। मनुष्य का जीवनकाल सीमित है। जरा इसके बारे में सोचिए कि, वे सभी मशहूर लोग, जिन्होंने इस पृथ्वी पर बहुत बड़ी सफलता पाई थी या किसी एक समय में पूरी दुनिया पर राज किया था, आज मुट्ठीभर धूल के समान गायब हो गए हैं। जैसे एक नाटक के खत्म हो जाने पर उसका अभिनेता मंच से गायब हो जाता है, वैसे ही वे भी इस युग में नहीं रहते जिसमें हम रहते हैं।

कोई भी नहीं जानता कि उसके जीवन में और कितने दिन बाकी हैं। जिस प्रकार परमेश्वर ने पूर्व निर्धारित किया है, वैसे जब इस पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति का कार्य समाप्त होता है, तो उन्हें यह दुनिया छोड़नी पड़ती है। उसके बाद, वे सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के सामने खड़े रहेंगे।(2कुर 5:10) उस समय यदि परमेश्वर आपसे पूछेंगे कि, “पृथ्वी पर रहते समय तुमने मेरे लिए क्या किया है?” तो आप क्या उत्तर देंगे? उस समय यदि आप इस प्रकार से उत्तर दें कि, “मैं ने यह निश्चय किया था कि मैं कल से आपको स्तुति और महिमा चढ़ाऊंगा। मैं कल बपतिस्मा लेकर अपना विश्वास का जीवन शुरू करने के लिए सोच रहा था। मैं केवल आज के दिन तक जीवन का पूरा आनन्द लेकर कल के दिन से कुछ शुरू करने के लिए प्रयास कर रहा था,” तो परमेश्वर क्या कहेंगे?

ऐसे व्यक्ति को जो सब कुछ कल पर टालता हो और केवल कल के लिए ही योजनाएं बनाता हो, कल का समय नहीं दिया जाता। इससे पहले कि हमें दिया गया समय समाप्त हो जाए, हमें यह समझ लेना चाहिए कि हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या है, और यदि हमें उसके लिए कुछ करने की आवश्यकता हो, तो हमें उसे आज ही से करना शुरू कर देना चाहिए।

मनुष्यों के लिए जो कल के दिन के विषय में भी शेखी नहीं मार सकते, सबसे ज्यादा आवश्यक चीज क्या होगी? वह उद्धार है। परमेश्वर अपनी उन सन्तानों के लिए, जो यह न जानते हुए कि ऐसी अनन्त दुनिया है जहां वे लौटने वाली हैं, केवल इस दुनिया की चीजों के लिए जीवन जीती हैं, उद्धार और अनन्त जीवन का सुसमाचार लेकर इस पृथ्वी पर आए हैं। परमेश्वर ने हम मनुष्यों पर दया की जिनके लिए एक खाली और अर्थहीन जीवन जीने के बाद मरना नियुक्त किया गया था, और हमें एक सही समझ देने के लिए वह स्वयं आए हैं।

परमेश्वर के लोग परमेश्वर का भय मानते हैं और उनकी आज्ञाओं का पालन करते हैं



इस पृथ्वी पर जीते समय हम मनुष्यों को क्या समझना और करना चाहिए? हम पापी थे जिन्होंने स्वर्ग में पाप किया था और अनन्त मृत्यु पाई थी। अब हम इस शरण नगर पृथ्वी में आ गए हैं, और हमें दिए गए क्षणिक समय तक पश्चाताप का जीवन जीते हैं। इसलिए हमें अपना एकमात्र जीवन, जो सीमित समय के लिए होता है, सिर्फ अपनी पापमय इच्छाओं के लिए नहीं गंवाना चाहिए, लेकिन हमारा कर्त्तव्य क्या है, यह समझते हुए ईमानदारी से जीना चाहिए।

सभ 12:13 सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है कि परमेश्वर का भय मान और उसकी आज्ञाओं का पालन कर; क्योंकि मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य यही है।

बाइबल कहती है कि परमेश्वर का भय मानना और उनकी आज्ञाओं का पालन करना ही मनुष्य का सम्पूर्ण कर्त्तव्य है। हमें इसके बारे में हमेशा सोचना चाहिए कि कैसे हम वाकई परमेश्वर का भय मान सकते हैं और कैसे उनकी आज्ञाओं का पूरी तरह पालन कर सकते हैं, और हमें आज अपने जीवन को परमेश्वर के वचनों के अनुसार और ज्यादा ईमानदारी से जीने के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

परमेश्वर ने प्रेरित यूहन्ना को पहले से वे लोग दिखाए थे जो अंतिम दिनों में उद्धार पाएंगे। इस प्रकाशन के द्वारा आइए हम सोचें कि आज हमें कैसा जीवन जीना चाहिए।

प्रक 14:1–4 फिर मैं ने दृष्टि की, और देखो, वह मेम्ना सिय्योन पहाड़ पर खड़ा है, और उसके साथ एक लाख चौवालीस हजार जन हैं, जिनके माथे पर उसका और उसके पिता का नाम लिखा हुआ है... वे सिंहासन के सामने और चारों प्राणियों और प्राचीनों के सामने एक नया गीत गा रहे थे। उन एक लाख चौवालीस हजार जनों को छोड़, जो पृथ्वी पर से मोल लिए गए थे, कोई वह गीत न सीख सकता था। ये वे हैं जो स्त्रियों के साथ अशुद्ध नहीं हुए, पर कुंवारे हैं; ये वे ही हैं कि जहां कहीं मेम्ना जाता है, वे उसके पीछे हो लेते हैं; ये तो परमेश्वर के निमित्त पहले फल होने के लिए मनुष्यों में से मोल लिए गए हैं।

सिय्योन पहाड़ पर मेमने के साथ खड़े 1,44,000 संत! वे परमेश्वर के लोग हैं जो संसार की रीति पर नहीं, लेकिन केवल परमेश्वर की इच्छा पर चलते हैं, और वे परमेश्वर की इच्छा की खोज करते हुए परमेश्वर को प्रसन्न करने योग्य जीवन जीते हैं। उनके विषय में भजन संहिता के लेखक ने इस प्रकार लिखा है:

भज 24:3–4 यहोवा के पर्वत पर कौन चढ़ सकता है? और उसके पवित्रस्थान में कौन खड़ा हो सकता है? जिसके काम निर्दोष और हृदय शुद्ध है, जिसने अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाया, और न कपट से शपथ खाई है।

ऊपर का वचन कहता है कि जो अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाते, वे यहोवा के पर्वत पर चढ़ सकेंगे। ये वही 1,44,000 संत हैं जो सिय्योन पहाड़ पर खड़े हैं। परमेश्वर के लोग अपना मन सांसारिक चीजों पर नहीं लगाते; वे शरीर की सांसारिक अभिलाषाओं के पीछे नहीं चलते।

हम सब, जो परमेश्वर की नई वाचा के पर्व मनाते हैं, अभी आत्मिक सिय्योन पहाड़ पर खड़े हैं।(यश 33:20; इब्र 12:22) इसलिए हमें अपने मन को व्यर्थ बात की ओर नहीं लगाना चाहिए, लेकिन जैसा परमेश्वर चाहते हैं, स्वर्ग के नागरिकों के रूप में आत्माओं के उद्धार के लिए जीना चाहिए।

हमारे जीवन का उद्देश्य इस संसार के लोगों के उद्देश्य से पूर्ण रूप से अलग है। चूंकि इस संसार के लोगों के पास पृथ्वी की नागरिकता है, इसलिए वे केवल पृथ्वी की आशाओं और अभिलाषाओं के साथ जीते हैं। वे चाहते हैं कि वे दूसरों से ऊंचा पद पाएं और दूसरों से और अधिक शक्तिशाली और धनवान बन जाएं ताकि उनका आदर किया जाए, और लोग उनकी सेवा करें। हालांकि, हमारे पास स्वर्ग की नागरिकता है, इसलिए हम उस अनन्त महिमा के लिए जिसे हम स्वर्ग के राज्य में पाएंगे, यह बात मन में रखते हैं कि परमेश्वर का भय मानना और उनकी आज्ञाओं का पालन करना ही हमारा एकमात्र कर्त्तव्य है, और हम स्वर्ग की चीजों के लिए जीवन जीते हैं। हमारे लिए, जो इस बात को अभ्यास में लाते हैं, सबसे महत्वपूर्ण समय कल नहीं, लेकिन आज और अभी है।

“कल शुरुआत करना,” यह शैतान का एक धोखा है



एक ब्यूटी पार्लर के दरवाजे पर एक बार ऐसी सूचना टंगी हुई थी।
“कल से 50 प्रतिशत की छूट!”

जब ऐसी सूचना लगाई गई, तब उन लोगों ने भी जिन्होंने उस दिन उस ब्यूटी पार्लर में जाने की योजना की थी, अगले दिन तक वहां जाने में विलंब किया। अगले दिन, जो ब्यूटी पार्लर गए उन सब ने बालों की कटिंग या पर्म करवाने के बाद, दुकान की मालकिन को सामान्य दाम का आधा दाम दिया। हालांकि, दुकान की मालकिन ने कहा कि उन्हें सामान्य दाम ही देना चाहिए। यह सुनकर, सभी ग्राहक शिकायत करने लगे।

“क्या तुमने ऐसा विज्ञापन नहीं लगाया था कि तुम आज से दाम आधा कर दोगी? इसी वजह से आज हम यहां आए हैं।”
“मुझे लगता है कि आप सब ने विज्ञापन को ध्यान से नहीं पढ़ा है। कृपया उसे एकबार फिर ध्यान से पढ़िए। वहां क्या लिखा है; कब से?”
“कल से।”
“ठीक, आज से नहीं, कल से।”
अंत में ग्राहकों को पूरा दाम चुकाना पड़ा।

यह एक छोटी सी बात लगती है, लेकिन इस कहानी के द्वारा हम शैतान की योजनाओं को देख सकते हैं जो हमें “कल से करना” जैसे शब्दों से लुभाता है। जो हमें आज करना चाहिए, शैतान उसे कल तक स्थगित करने के लिए कहता है, और जब कल आता है, तो वह फुसफुसाते हुए हमें लुभाता है कि, “मैंने कब कहा था, ‘आज से’? मैंने तो कहा था, ‘कल से’!” इस तरह से हमें भरमाते हुए, शैतान हमें अपनी बेड़ियों में और कसकर बांध देना चाहता है, ताकि हम कुछ भी न कर सकें।
वह व्यक्ति जो केवल कल के लिए ही योजनाएं बनाता है वह एक बालकथा के उस लड़के के समान कुछ भी नहीं पा सकता, जो अपने पूरे जीवन भर इन्द्रधनुष का पीछा करता रहा था; इन्द्रधनुष को पकड़ने के लिए वह लड़का एक पहाड़ पर चढ़ गया, लेकिन इन्द्रधनुष दूर था, और वह जब तक बूढ़ा न हो गया तब तक उसे पकड़ने के लिए वह बार बार पहाड़ियों पर चढ़ता रहा।

हमें कल से नहीं, लेकिन आज से, अभी से परमेश्वर के वचनों को अभ्यास में लाना शुरू कर देना चाहिए। चूंकि परमेश्वर हमारे अविलम्बित कार्यों से प्रसन्न होते हैं, वह चाहते हैं कि हम सत्य को महसूस करने के तुरंत बाद ही बपतिस्मा लें जो उद्धार की ओर बढ़ने का सबसे पहला कदम है। अपने रोजमर्रा के जीवन में, हमें कल के दिन के विषय में डींग न मारते हुए और मूल्यहीन वस्तुओं पर अपना मन न लगाते हुए, परमेश्वर की परिश्रमी और बुद्धिमान सन्तान के रूप में परमेश्वर की इच्छा का निरंतर पालन करना चाहिए।

“क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? यदि हां, तो मेरी भेड़ों को चरा”



ऐसी बहुत सी चीजों में से जो परमेश्वर ने हमें करने के लिए कही है, ऐसा कुछ है जो आज ही, अभी किए जाने के योग्य है।

यूह 21:15–17 ... यीशु ने शमौन पतरस से कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हां, प्रभु; तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं।” उसने उससे कहा, “मेरे मेमनों को चरा।” उसने फिर दूसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है?” उसने उससे कहा, “हां, प्रभु; तू जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं।” उसने उससे कहा, “मेरी भेड़ों की रखवाली कर।” उसने तीसरी बार उससे कहा, “हे शमौन, यूहन्ना के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?” पतरस उदास हुआ कि उसने उससे तीसरी बार ऐसा कहा, “क्या तू मुझ से प्रीति रखता है?” और उससे कहा, “हे प्रभु, तू तो सब कुछ जानता है; तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं।” यीशु ने उससे कहा, “मेरी भेड़ों को चरा।”

सबसे पहली बात जो यीशु ने पतरस से करने के लिए कही, वह परमेश्वर के खोए हुए मेमनों को खोजना और उन्हें सत्य का भोजन कराना था। उनकी दूसरी और तीसरी विनती भी परमेश्वर की भेड़ों को चराना और उन्हें सही ढंग से सिखाना ही था, ताकि वे स्वर्ग के राज्य तक पहुंच सकें। यह परमेश्वर की उत्साही विनती है जो केवल पतरस से नहीं, लेकिन परमेश्वर से सच में प्रेम रखनेवाले उनके सभी चेलों से की गई है।

यदि हम सच में परमेश्वर से प्रेम रखते हैं जिन्होंने मृत्यु तक हमसे प्रेम किया है, तो हमें उनके छोटे मेमनों की देखभाल करने की उनकी उत्साही विनती को कभी नहीं भूलना चाहिए। जिस प्रकार अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए सबसे पहले एक माता को पर्याप्त मात्रा में भोजन खाना पड़ता है, उस प्रकार परमेश्वर के कहे अनुसार परमेश्वर की भेड़ों को चराने के लिए हमें अपने आपको आत्मिक भोजन, यानी सत्य के वचनों से भर देना चाहिए। और हमें अपने भाइयों और बहनों की अच्छी तरह देखभाल करते हुए परमेश्वर के प्रति अपना प्रेम प्रकट करना और दिखाना चाहिए।

हमें, जो इस पवित्र आत्मा के युग में जी रहे हैं, पृथ्वी के सब लोगों के साथ सत्य को बांटना चाहिए और उन्हें परमेश्वर के वचन खिलाने चाहिए। ऐसा करने के लिए, हमें पर्याप्त आत्मिक भोजन तैयार करना चाहिए और परमेश्वर से ऐसे बहुत से सुसमाचार के प्रचारक भेजने के लिए प्रार्थनाओं में उत्सुकता से विनती करनी चाहिए जो पांच महासागरों और छह महाद्वीपों में जाकर लोगों तक आत्मिक भोजन, यानी सत्य पहुंचा सकेंगे। यदि हम सच में परमेश्वर की इच्छा का पालन करना चाहते हैं और परमेश्वर से सहायता मांगते हैं, तो परमेश्वर निश्चय ही हमारी इच्छाओं को पूरा करेंगे।

मत 28:18–20 यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।”

पूरे संसार के लोगों को परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने के कार्य में, लोग जो कल के दिन के बारे में डींग मारते हैं, वे कभी भी अपनी योजनाओं को पूरा करने का मौका नहीं पा सकेंगे। यदि एक व्यक्ति जिसने एक तोड़ा पाया है, अपना तोड़ा जमीन में छिपा दे और कल के लिए योजनाएं बनाए, तो वह और ज्यादा तोड़े कैसे कमा सकेगा? जो अपना तोड़ा गाड़ देते हैं या फिर छिपा देते हैं वे कभी भी ज्यादा तोड़े नहीं कमा सकते।

यीशु ने कहा कि, “कोई दीया जला के बरतन से नही ढांकता, और न खाट के नीचे रखता है, परन्तु दीवट पर रखता है कि भीतर आनेवाले प्रकाश पाएं।”(लूक 8:16) यदि ज्योति फैले नहीं लेकिन एक छोटी सी जगह में सीमित रहे, तो ज्योति होने पर भी उसका कुछ मतलब नहीं। परमेश्वर की सन्तानों को “ज्योति की सन्तान” के रूप में, सुसमाचार की ज्योति को हर जगह चमकाना चाहिए, और परमेश्वर की बांहों में बहुत से लोगों की अगुआई करनी चाहिए जो अंधेरे में चल रहे हैं।(इफ 5:8)

समय हमारे लिए इंतजार नहीं करता। उम्र, जाति या परिस्थितियों पर ध्यान न देते हुए, हम सब को उन आत्माओं को उद्धार देने के कार्य में सहभागी होना चाहिए जो नहीं जानतीं कि एक दिन में क्या होने वाला है। आइए हम इसके बारे में ध्यानपूर्वक सोचें कि कैसे उन आत्माओं की अगुआई सत्य और उद्धार की ओर करें और कैसे उन्हें बेबीलोन से सिय्योन तक ले आएं। इस कार्य के लिए, हमें परमेश्वर से उत्सुकतापूर्वक प्रार्थना करते हुए अपने मनों को एक करना चाहिए और एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए। चाहे हम बहुत सी बातों में कमी हैं, आइए हम हमें दी गई परिस्थितियों में परमेश्वर के सहकमिर्यों के रूप में कार्य करते हुए, आत्माओं को बचाने के लिए एक साथ जुड़ जाएं।

अब से लेकर, हमें अपने आसपास के लोगों को केवल उदासीनता से न देखते हुए उन्हें उद्धार के मार्ग की ओर ले आने के लिए मेहनत से प्रयास करने चाहिए, ताकि वे शैतान से धोखा न खाएं और नष्ट न हो जाएं। हमें इस विचार को त्याग देना चाहिए कि, “मैं यह कार्य कल से शुरू करूंगा।” कोई भी नहीं जानता कि उसका जीवन आधे घंटे बाद समाप्त हो जाएगा या फिर दस मिनट के बाद समाप्त हो जाएगा। आइए हम एक बार फिर अपने विश्वास को जांचें, ताकि आज हम अपने जीवन को बिना किसी खेद के जी सकें और चाहे हमारा इस पृथ्वी पर जीवन इसी क्षण समाप्त हो जाए, हम परमेश्वर के सामने निष्कलंक और निर्दोष ठहर सकें। मैं उत्सुकता से आशा करता हूं कि आप सब परमेश्वर को महिमा चढ़ाते हुए और अपने पड़ोसियों और पूरी दुनिया में परमेश्वर के गुण प्रकट करते हुए बिना किसी पछतावे के जीवन जीएं।