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मत कुड़कुड़ाओ पर धन्यवाद दो

मैंने सुना है कि लोग अपने जीवन भर में शिकायतों के शब्दों को सबसे अधिक बार बोलते हैं। हालांकि, जब तक हमें विश्वास है कि परमेश्वर हमारे साथ हैं और हमसे पे्रम करते हैं, कुड़कुड़ाने के लिए कुछ भी नहीं है। इस समय, आइए हम बाइबल में कुड़कुड़ाने वालों के अंत को देखकर, हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा को जानें।

हर बात में धन्यवाद करो


1थिस 5:16–18 सदा आनन्दित रहो। निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो। हर बात में धन्यवाद करो; क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।

हम सभी ऊपर के वचन को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, यह परमेश्वर की एक बहुत ही बहुमूल्य शिक्षा है। हमें अनन्त स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने के लिए परमेश्वर की इच्छा का पालन करना चाहिए।
जब तक हम सदा आनन्दित नहीं रहेंगे, निरन्तर प्रार्थना नहीं करेंगे और हर बात में धन्यवाद नहीं देंगे, हमारे हृदय में शिकायतें बनती रहेंगी। यह शिकायत आनन्द और धन्यवाद से ज्यादा तेजी से बनती है और बहुत लोगों की नाश की ओर अगुवाई करती है।

1कुर 10:1–11 हे भाइयो, मैं नहीं चाहता कि तुम इस बात से अनजान रहो कि हमारे सब बापदादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए। और सब ने बादल में और समुद्र में, मूसा का बपतिस्मा लिया; और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया; और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे जो उनके साथ–साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था। परन्तु परमेश्वर उनमें से बहुतों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए। ये बातें हमारे लिये दृष्टान्त ठहरीं, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्तुओं का लालच न करें... और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उनमें से कितने कुड़कुड़ाए, और नष्ट करनेवाले के द्वारा नष्ट किए गए। परन्तु ये सब बातें, जो उन पर पड़ीं, दृष्टान्त की रीति पर थीं; और वे हमारी चेतावनी के लिये जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।

फसह के पर्व के द्वारा प्रदर्शित की गई परमेश्वर की महान शक्ति के कारण, इस्राएली मिस्र से बाहर निकल आए थे, परन्तु बहुत से इस्राएली अपने लक्ष्य, यानी कनान देश तक नहीं पहुंच पाए; लगभग छ: लाख पुरुष जंगल में नष्ट हो गए। परमेश्वर ने ये घटनाएं हमारे लिए, जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं, चेतावनी के रूप में घटित होने दीं; और उन्होंने कहा, “न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उनमें से कितने कुड़कुड़ाए।”
जंगल में इस्राएलियों के साथ जो हुआ वह उन बातों का उदाहरण एवं छाया है, जो विश्वास के आत्मिक जंगल में हमारे साथ घटित होंगी। यह देखकर कि उनके साथ क्या हुआ, हमें उनकी तरह कुड़कुड़ाना नहीं चाहिए, पर हर बात में आनन्दित रहते हुए परमेश्वर को धन्यवाद और महिमा देनी चाहिए।

शिकायत विनाश की ओर ले जाती है


निर्ग 15:22–26 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला। फिर मारा नामक एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा। तब वे यह कहकर मूसा के विरुद्ध बकबक करने लगे, “हम क्या पीएं?” तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उसने यह कहकर उनकी परीक्षा की, “यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजे हैं उनमें से एक भी तुझ पर न भेजूंगा...

जैसे ही इस्राएलियों ने लाल समुद्र को पार करके जंगल में प्रवेश किया, उन्होंने कुड़कुड़ाना शुरू किया। वे मूसा के विरुद्ध कुड़कुड़ाए जब वे पानी नहीं पी सके क्योंकि वह खारा था। इसका मतलब है कि उनका कुड़कुड़ाना परमेश्वर के विरुद्ध था जिन्होंने उन्हें मूसा के द्वारा मिस्र से बाहर निकाला था। परमेश्वर ने उन लोगों को जिनके पास धीरज था, कुड़कुड़ाने वाले लोगों से अलग किया; और फिर उन्होंने मूसा को पानी मीठा बनाने का तरीका बताया।
अगर उनके पानी पीने से पहले ही परमेश्वर ने पानी को मीठा बनाया होता, तो कोई भी नहीं कुड़कुड़ाता। इस्राएलियों के चालिस वर्ष तक जंगल में भटकने के इतिहास को याद करें, तो हम देख सकते हैं कि परमेश्वर ने पहले उन्हें प्रतिकूल स्थिति में रखा और उन्हें कुड़कुड़ाने के लिए छोड़ दिया; और जब इस्राएलियों का कुड़कुड़ाना चरम पर पहुंच गया, उन्होंने उनकी शिकायतें सुनीं। जब भी इस्राएली प्रतिकूल स्थिति में होते थे, वे शिकायत करते थे।

निर्ग 16:1–4 फिर एलीम से कूच करके इस्राएलियों की सारी मण्डली, मिस्र देश से निकलने के बाद दूसरे महीने के पंद्रहवें दिन को, सीन नामक जंगल में, जो एलीम और सीनै पर्वत के बीच में है, आ पहुंची। जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरुद्ध बकबक करने लगी। इस्राएली उनसे कहने लगे, “जब हम मिस्र देश में मांस की हांडियों के पास बैठकर मनमाना भोजन करते थे, तब यदि हम यहोवा के हाथ से मार डाले भी जाते तो उत्तम वही था; पर तुम हम को इस जंगल में इसलिये निकाल ले आए हो कि इस सारे समाज को भूखों मार डालो।” तब यहोवा ने मूसा से कहा, “देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊंगा; और ये लोग प्रतिदिन बाहर जाकर प्रतिदिन का भोजन इकट्ठा करेंगे, इससे मैं उनकी परीक्षा करूंगा कि ये मेरी व्यवस्था पर चलेंगे कि नहीं।

गिन 11:1–7 फिर वे लोग बुड़बुड़ाने और यहोवा के सुनते बुरा कहने लगे; अत: यहोवा ने सुना, और उसका कोप भड़क उठा, और यहोवा की आग उनके मध्य में जल उठी, और छावनी के एक किनारे से भस्म करने लगी। तब लोग मूसा के पास आकर चिल्लाए; और मूसा ने यहोवा से प्रार्थना की, तब वह आग बुझ गई... फिर जो मिली– जुली भीड़ उनके साथ थी वह कामुकता करने लगी; और इस्राएली भी फिर रोने और कहने लगे, “हमें मांस खाने को कौन देगा। हमें वे मछलियां स्मरण हैं जो हम मिस्र में सेंतमेंत खाया करते थे, और वे खीरे, और खरबूजे, और गन्दने, और प्याज, और लहसुन भी; परन्तु अब हमारा जी घबरा गया है, यहां पर इस मन्ना को छोड़ और कुछ भी देख नहीं पड़ता।”...

गिन 21:4–6 फिर उन्होंने होर पहाड़ से कूच करके लाल समुद्र का मार्ग लिया कि एदोम देश से बाहर बाहर घूमकर जाएं; और लोगों का मन मार्ग के कारण बहुत व्याकुल हो गया। इसलिए वे परमेश्वर के विरुद्ध बात करने लगे, और मूसा से कहा, “तुम लोग हम को मिस्र से जंगल में मरने के लिए क्यों ले आए हो? यहां न तो रोटी है, और न पानी, और हमारे प्राण इस निकम्मी रोटी से दुखित हैं।” अत: यहोवा ने उन लोगों में तेज विषवाले सांप भेजे, जो उनको डसने लगे, और बहुत से इस्राएली मर गए।

इस्राएली जंगल में रहने के दौरान परमेश्वर के विरुद्ध कितने लगातार कुड़कुड़ाए! भले ही उन्होंने मिस्र से निकलने के समय परमेश्वर की महान शक्ति को अपनी आंखों से देखा, वे जंगल में प्रवेश करते ही कुड़कुड़ाने लगे; वे पहले पानी के लिए कुड़कुड़ाए; एक महिने के बाद वे रोटी के लिए कुड़कुड़ाए; और जब परमेश्वर ने उन्हें मन्ना दिया, वे मांस खाने के लिए कुड़कुड़ाए। वे लगातार छोटी सी असुविधा के लिए कुड़कुड़ाते थे।
लोगों का मन मार्ग के कारण बहुत व्याकुल हो गया, और वे फिर से यह कहकर कुड़कुड़ाए, “यहां न तो रोटी है! और हमारे प्राण इस निकम्मी रोटी से दुखित हैं!” तब परमेश्वर ने उन लोगों में तेज विषवाले सांप भेजे, और सांप उनको डसने लगे, और बहुत से लोग मर गए। इस प्रकार से परमेश्वर ने कुड़कुड़ाने वाले लोगों को सजा दी।

धन्यवाद देने वालों को कुड़कुड़ाने वालों से अलग करना


परमेश्वर हमेशा धीरज के साथ धन्यवाद देने वालों को कुड़कुड़ाने वालों से अलग करते हैं। परमेश्वर हमें विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों में डालते हैं; कभी कभी वह हमें मुसीबत और कठिनाइयां देते हैं। ऐसा करके परमेश्वर धन्यवाद देने वालों को कुड़कुड़ाने वालों से अलग करते हैं।
इस्राएलियों के जंगल के जीवन के द्वारा, हम देख सकते हैं कि परमेश्वर दोनों को अलग करते हैं। कितना डरावना है! क्या होगा अगर हम परमेश्वर का वचन –“मत कुड़कुड़ाओ”– भूल जाएंगे और कुड़कुड़ाते रहेंगे? हम अंत में उद्धार पानेवालों से बाहर कर दिए जाएंगे।
बारह जासूसों के बारे में सोचिए। उन्होंने कनान देश की छानबीन की, और उनमें से बहुतों ने उस देश के बारे में बुरी खबर फैलाई, और उसके कारण सब लोग कुड़कुड़ाए। इसके परिणाम में, यहोशू और कालेब को छोड़कर जिन्होंने कुड़कुड़ाया नहीं पर हमेशा धन्यवाद दिया, बीस वर्ष के या उससे अधिक आयु के इस्राएलियों में से कोई भी कनान देश में प्रवेश नहीं कर सका।(गिन 13:1–14:38)
अगर इस्राएलियों ने पूरे हृदय से परमेश्वर का पालन किया होता, तो वे कुड़कुड़ाने के बदले धीरज से सब कुछ सहते। भले ही वे असुविधाजनक स्थिति में थे, अगर उन्होंने परमेश्वर की इच्छा समझी होती, तो वे परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए कुछ कारण पाते।
हालांकि, वे अधीर थे; वे जल्दबाजी में निर्णय करते थे और मुख से जल्दबाजी में शब्द निकालते थे। उनका कुड़कुड़ाना बहुत लोगों में फैल गया; इसके परिणाम में, लगभग छ: लाख पुरुष नष्ट हो गए।

परमेश्वर अपने लोगों को शिक्षित करते हैं ताकि वे हमेशा धन्यवाद दें


क्या आपको लगता है कि परमेश्वर पानी व रोटी रहित जंगल में अपने लोगों को लापरवाही से निकाल ले आए थे? उनका कुड़कुड़ाना दिखाता है कि उनका परमेश्वर में दृढ़ विश्वास नहीं था। अगर उन्होंने दृढ़ विश्वास किया होता कि परमेश्वर उनके साथ कार्य कर रहे हैं, तो वे पानी या रोटी के लिए नहीं कुड़कुड़ाते।
कभी कभी हमें भी, ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में रखा जाता है। परमेश्वर चाहते हैं कि हम किसी भी परिस्थिति में न कुड़कुड़ाएं।
जब वहां पानी या रोटी नहीं थी, एक ने उस पर शिकायत की होगी, और उसके बगल में दूसरे ने सहमति प्रकट की होगी; और उनका कुड़कुड़ाना एक के बाद एक दूसरे सब लोगों तक पहुंचा होगा। क्या वे शिकायत करते अगर परमेश्वर उन्हें शुरुआत से सब कुछ बहुतायत से प्रदान करते?
कभी कभी परमेश्वर अपने लोगों को यह जानने के लिए मुश्किल परिस्थितियों में रखते थे कि क्या वे परमेश्वर की शिक्षा –“मत कुड़कुड़ाओ”– का पालन करते हैं या नहीं। जब वे परमेश्वर का पालन नहीं करते थे, तब परमेश्वर उन्हें लंबे समय तक जंगल में भटकने देते थे। हालांकि, जब वे परमेश्वर का पालन करते थे, तब परमेश्वर उन्हें उसी प्रकार की चीज से फिर गुजरने नहीं देते थे। इस तरह से, परमेश्वर अपने लोगों को शिक्षित करते हैं कि उनका विश्वास मजबूत रहे। धन्यवाद देनेवालों का परमेश्वर में निश्चित विश्वास है, इसलिए वे हर बात में धन्यवाद दे सकते हैं। कुड़कुड़ाने वालों के बारे में क्या? वे अपने विश्वास के तेल को खो देते हैं, और धन्यवाद देने के बदले वे सारी शिकायतों से भरे होते हैं; अंत में, वे परमेश्वर का इन्कार करते हैं।

कुड़कुड़ाने वाले परमेश्वर का इन्कार करने वाले हैं


यहूद 1:16 ये तो असंतुष्ट, कुड़कुड़ानेवाले, और अपनी अभिलाषाओं के अनुसार चलनेवाले हैं; और अपने मुंह से घमण्ड की बातें बोलते हैं, और वे लाभ के लिये मुंह देखी बड़ाई किया करते हैं।

कुड़कुड़ानेवाले लोग दोष ढूंढ़ने वाले हैं, अहंकारपूर्ण बातें बोलते हैं और दूसरों की चापलूसी करते हैं। आइए हम आगे वाली आयत से देखें कि ये कुड़कुड़ानेवाले कौन हैं।

यहूद 1:10–11 पर ये लोग जिन बातों को नहीं जानते उन को बुरा–भला कहते हैं, पर जिन बातों को अचेतन पशुओं के समान स्वभाव ही से जानते हैं, उनमें अपने आप को नष्ट करते हैं। उन पर हाय! क्योंकि वे कैन की सी चाल चले, और मजदूरी के लिये बिलाम के समान भ्रष्ट हो गए हैं, और कोरह के समान विरोध करके नष्ट हुए हैं।

यहूद 1:4 क्योंकि कितने ऐसे मनुष्य चुपके से हम में आ मिले हैं, जिनके इस दण्ड का वर्णन पुराने समय में पहले ही से लिखा गया था: ये भक्तिहीन हैं, और हमारे परमेश्वर के अनुग्रह को लुचपन में बदल डालते हैं, और हमारे एकमात्र स्वामी और प्रभु यीशु मसीह का इन्कार करते हैं।

जो कैन की सी चाल चलते हैं, और जो कोरह के समान विरोध करते हैं, और जो मजदूरी के लिए बिलाम के समान भ्रष्ट होते हैं, वे सभी कुड़कुड़ानेवाले और दोष ढूंढ़नेवाले हैं। वे परमेश्वर पर निश्चित विश्वास नहीं करते और अंत में उनका इन्कार करते हैं; वे हमेशा कुड़कुड़ाते हैं और दूसरों पर दोष लगाते हैं; वे अपनी अभिलाषाओं के अनुसार चलते हैं; वे अपने मुंह से घमण्ड की बातें बोलते हैं; वे अचेतन पशुओं के समान परमेश्वर के प्रभुत्व को तुच्छ समझते हैं और ऊंचे पदवालों को बुरा भला कहते हैं।
कुड़कुड़ानेवाले यीशु मसीह का इन्कार करते हैं। कुड़कुड़ाना कितनी भयानक बात है! अगर हमारे पास अभी कोई शिकायत है, हमें उसका पछतावा बहुत ही जल्द होगा, ‘मैं ऐसी छोटी बात के लिए क्यों कुड़कुड़ाया?’ परमेश्वर की इच्छा का पालन करते हुए हमें हमेशा आनन्दित रहना चाहिए, निरंतर प्रार्थना करनी चाहिए, और हर बात में धन्यवाद देना चाहिए।

कनान धन्यवाद देने वाले लोगों के लिए है


जब हम कुड़कुड़ाना जारी रखते हैं, हम विश्वास में कमजोर बनते हैं। जब हमारा विश्वास कमजोर होता है, हम परमेश्वर को त्याग देते हैं और बचने में नाकाम होते हैं। अगर हमारे पूरे हृदय आनन्द और धन्यवाद से भरे रहेंगे, तो हमारे बीच में झगड़े और दर्द नहीं होंगे; हम एक साथ सिर्फ हर्ष और खुशी को बाटेंगे।
कभी कभी, हम अपने भाई की नम्र सलाह पर क्रोध करते हैं। हमें उस पर असंतुष्ट होने के बदले धीरज रखने की जरूरत है; हमें जल्द ही महसूस होगा कि वह सलाह हमारे विश्वास के लिए उपयोगी है।
मान लीजिए कि कोई हमारे अपमान और दर्द का कारण है। इसके बारे में शिकायत करने का कोई कारण नहीं है; क्योंकि हम अभी उनमें से एक समान चीज का अनुभव कर रहे हैं, जो इस्राएलियों के साथ जंगल में हुए थे। हर परिस्थिति में हमें परमेश्वर की इच्छा को खोजना चाहिए। परमेश्वर चाहते हैं कि सभी चीजों का अनुभव करने के द्वारा हम धन्यवाद करना और संतुष्ट रहना और खुशी महसूस करना सीखें। अगर यह परमेश्वर की इच्छा है, तो हमें इसका पालन करना चाहिए, है न?
कभी कभी परमेश्वर हमें मुश्किल परिस्थितियां देते हैं ताकि वह जान सकें कि हमारे मन में क्या है; वह चाहते हैं कि हम विश्वासियों के रूप में सही मार्ग का अनुसरण करते हुए, ऐसी परिस्थितियों में धन्यवादित रहें। परमेश्वर चाहते हैं कि सभी 1,44,000 संतान कुड़कुड़ाने वाला हृदय रखने के बजाय धन्यवाद देने का हृदय रखें।
सभी कुड़कुड़ानेवाले इस्राएली जंगल में नष्ट हो गए थे। इस ऐतिहासिक घटना के द्वारा, परमेश्वर हम से कहते हैं कि हमें इस विश्वास के जंगल में अपनी सभी शिकायतों को निकाल देना चाहिए। उस समय में, सिर्फ धन्यवाद देनेवाले कनान में प्रवेश कर सके। इस युग में भी, जो हमेशा धन्यवाद देते हैं, सिर्फ वही स्वर्ग के अनन्त राज्य में प्रवेश कर सकते हैं।

इफ 4:22–24 तुम पिछले चालचलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो। और अपने मन के आत्मिक स्वभाव में नये बनते जाओ, और नये मनुष्यत्व को पहिन लो जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धार्मिकता और पवित्रता में सृजा गया है।

आइए हम पुराने मनुष्यत्व को उतार कर, नए मनुष्यत्व को पहिन लें। चाहे कोई भी परिस्थिति हो, हमें बिना शिकायत किए या कुड़कुड़ाए संतुष्ट रहना चाहिए, और हर बात में हमेशा आनन्दित रहना और धन्यवाद देना चाहिए, जैसे कि आत्मा और दुल्हिन चाहते हैं। मैं आशा करता हूं कि सिय्योन के सभी भाई और बहनें सुरक्षित रूप से आत्मिक जंगल को पार करने के बाद स्वर्गीय कनान में प्रवेश करें।