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ज्ञान से युक्त विश्वास और कार्यों से युक्त विश्वास

आज, इस संसार में बहुत से चर्च हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर उस नई वाचा के सुसमाचार का पालन नहीं करते, जिसे यीशु ने सिखाया और जिसका पालन करने का उदाहरण उन्होंने हमारे लिए दिया। ज्यादातर सभी तथाकथित ईसाई हठ करते हैं कि वे केवल यीशु पर विश्वास करने से बचाए जा सकते हैं। वे बाइबल पढ़ने का दावा करते हैं, लेकिन वे वास्तव में बाइबल में लिखी मसीह की इस शिक्षा को अनदेखा करते हैं कि हमारे पास कार्यों से युक्त विश्वास होना चाहिए। यही ईसाई धर्म की वास्तविकता है।

यद्यपि वे परमेश्वर के वचनों को जानते हैं, यदि वे उन्हें अभ्यास में न लाएं, तो वे परमेश्वर की आज्ञाओं और नियमों में समाई परमेश्वर की इच्छा को नहीं समझ सकते, और परमेश्वर के उद्धार के कार्य में भी सहभागी नहीं हो सकते। जानकारी को सिद्धांत के रूप में, और कार्य को व्यवहार के रूप में समझा जा सकता है। इस संसार की प्रणालियों के द्वारा भी, हम देख सकते हैं कि जब तक सिद्धांत और व्यवहार साथ न हों, तब तक कुछ भी सिद्ध नहीं हो सकता।

हमारे विश्वास के लिए भी वैसा ही है। जानकारी लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके अनुसार कार्य करना इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है। परमेश्वर हमें सिखाते हैं कि हमारा विश्वास केवल ज्ञान पर निर्भर न हो, लेकिन उसके साथ हम कार्य भी करें। अब आइए हम बाइबल के द्वारा परमेश्वर की इस इच्छा की पुष्टि करें।

धन्य हैं वे जो नई वाचा के मार्ग का पालन करते हैं



याक 2:14–26 हे मेरे भाइयो, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो इससे क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है? यदि कोई भाई या बहिन नंगे–उघाड़े हो और उन्हें प्रतिदिन भोजन की घटी हो, और तुम में से कोई उनसे कहे, “कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्त रहो,” पर जो वस्तुएं देह के लिये आवश्यक हैं वह उन्हें न दे तो क्या लाभ? वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है... पर हे निकम्मे मनुष्य, क्या तू यह भी नहीं जानता कि कर्म बिना विश्वास व्यर्थ है? जब हमारे पिता अब्राहम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्या वह कर्मों से धार्मिक न ठहरा था? अत: तू ने देख लिया कि विश्वास ने उसके कामों के साथ मिलकर प्रभाव डाला है, और कर्मों से विश्वास सिद्ध हुआ... अत: जैसे देह आत्मा बिना मरी हुई है, वैसा ही विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है।

केवल परमेश्वर के वचनों की जानकारी हमें उद्धार तक नहीं ले जा सकती। परमेश्वर ने हम से कहा है कि अनन्त जीवन पाने के लिए हमें नई वाचा का पालन करना चाहिए। यदि हम परमेश्वर के इन वचनों को केवल जानकारी बनाएं और उनका पालन न करें, तो क्या महज हमारा ज्ञान हमारी आत्माओं को उद्धार दे सकता है? अकेला विश्वास हमें उद्धार नहीं दे सकता; वह पूर्ण रूप से हमें तभी उद्धार दे सकता है जब उसके साथ कार्य किया जाए।
जो परमेश्वर चाहते हैं कि हम धारण करें, वह “कार्यों से युक्त विश्वास है।” नई वाचा का मार्ग केवल उन पर ही आशीर्वाद लाता है जो उसका पालन करते हैं।

याक 1:22–25 परन्तु वचन पर चलनेवाले बनो, और केवल सुननेवाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। क्योंकि जो कोई वचन का सुननेवाला हो और उस पर चलनेवाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। पर जो व्यक्ति स्वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर भूलता नहीं पर वैसा ही काम करता है।

जब हम नई वाचा के मार्ग, यानी उसकी विधियों का, और प्रार्थना करने, प्रचार करने, भाइयों और बहनों के प्रति प्रेम रखने इत्यादि की शिक्षाओं का पालन करें, तो हम उसके अर्थ को सही ढंग से समझ सकेंगे। इसलिए उन दोनों के विश्वास में बहुत बड़ा अंतर होता है, जो वाचा के वचनों को केवल सुनते हैं और जो उन्हें अभ्यास में लाते हैं।

चाहे कोई व्यक्ति हजारों सिद्धांतों से परिचित हो और बाइबल के वचनों को बहुत ही तेजी से खोज सकता हो, यदि वह वचन को अभ्यास में न लाए, तो वे सभी सिद्धांत उसकी आत्मा के लिए किसी काम के नहीं हैं। यदि वह जानता है कि परमेश्वर ने किस विषय में आज्ञा दी है, लेकिन उसे अभ्यास में न लाता, तो उसके लिए यही भला होता कि उसने उसे न जाना होता।(लूका 12:47–48)

धर्मी लोग परमेश्वर के मार्ग पर चलते हैं



हमें न केवल परमेश्वर के वचनों को सुनना चाहिए, लेकिन जो भी परमेश्वर कहते हैं, हमें उसे अभ्यास में लाना चाहिए, फिर चाहे कोई छोटी सी बात क्यों न हो। जब हमारे पास विश्वास का ऐसा रवैया हो और हम परमेश्वर के वचनों का खुशी के साथ पालन करें, तो हम परमेश्वर के लोग कहलाए जाने के लिए योग्य होंगे।

हो 14:9 जो बुद्धिमान हो, वही इन बातों को समझेगा; जो प्रवीण हो, वही इन्हें बूझ सकेगा; क्योंकि यहोवा के मार्ग सीधे हैं, और धर्मी उन में चलते रहेंगे, परन्तु अपराधी उन में ठोकर खाकर गिरेंगे।

पापियों के लिए परमेश्वर के मार्गों पर चलना एक भारी बोझ बनता है, और अंत में वे उनमें ठोकर खाकर गिरते हैं। लेकिन धर्मी, जिन्होंने पापों की क्षमा का आशीर्वाद पाया है, परमेश्वर के मार्गों पर चलने में आनन्द पाते हैं। जैसे जैसे हम सब्त का दिन मनाना जारी रखते हैं, हम उन आशीर्वादों को महसूस कर सकते हैं जो परमेश्वर सब्त के द्वारा हमें देते हैं। इसलिए हम उसे खुशी के साथ मना सकते हैं। प्रचार भी वैसा ही है। प्रचार के द्वारा, हम हर एक आत्मा को परमेश्वर की सन्तान के रूप में बढ़ते हुए देखकर, एक अवर्णनीय खुशी का स्वाद चखते हैं, और हम प्रचार के कार्य में भाग लेने के लिए और भी ज्यादा इच्छुक होते हैं। प्रचार किए बिना, हम कभी भी ऐसी खुशी और संतोष का अनुभव नहीं कर सकते।

नई वाचा के सभी नियम, जिनका परमेश्वर ने हमें पालन करने की आज्ञा दी है, वे मनुष्य की क्षमताओं के परे नहीं हैं; हर एक व्यक्ति उन्हें अभ्यास में ला सकता है। महत्व की बात यह है कि हमारे पास ऐसा करने की इच्छा है या नहीं; हमारे पास परमेश्वर के वचनों को अभ्यास में लाने की इच्छा है या नहीं, इसके आधार पर हम आशीर्वाद पा सकते हैं या नहीं पा सकते। यदि हम उम्र, लिंग या फिर परिस्थिति का बहाना बनाकर, परमेश्वर के वचनों को अभ्यास में लाने से हिचकिचाएं, हम न तो उन परमेश्वर की सच्ची इच्छा को समझ सकेंगे जिन्होंने हमें नई वाचा का मार्ग दिया है, और न ही उसका मूल्य महसूस कर सकेंगे। इसके दौरान हम निष्फल और निरर्थक चीजों का पीछा करते हुए अपना जीवन व्यर्थ गंवा देंगे।

यदि आपको तेंदू के पेड़ से फल खाना है, तो आपको तेंदू के फल तोड़ने के लिए एक लंबा डंडा या सीढ़ी बनाने का सक्रिय प्रयास करना चाहिए। यदि आप पेड़ के नीचे केवल इंतजार करें, तो फल आपके लिए कभी भी नीचे नहीं गिरेगा।

सुसमाचार के पथ पर चलने की पूरी प्रक्रिया में, चाहे आपकी परिस्थिति कितनी भी कठिन हो, यदि आपके पास परमेश्वर की इच्छा का पालन करने का मन है, तो निश्चय ही आपके लिए रास्ते खोले जाएंगे। परमेश्वर से प्रार्थना कीजिए और विनती कीजिए। प्रार्थना करना शैतान की सभी रुकावटों से जीतने का और परमेश्वर की इच्छा का पालन करने के लिए पवित्र आत्मा धारण करने का रास्ता है।(मर 9:28–29) यदि आप लगातार अपने आपको प्रार्थना करने में लगाएं, तो आपका विश्वास धीरे–धीरे मजबूत होता है, जिससे आप किसी कठिनाई से जीत सकते हैं और अंत में बहुतायत से आशीर्वाद पा सकते हैं।

सारी जातियों में जाओ और उन्हें राज्य का सुसमाचार सुनाओ



यदि हम सच्चे ईसाई हैं, तो हमें न केवल उस बलिदान के मार्ग को जानना चाहिए जिस पर परमेश्वर मनुष्यजाति को उद्धार देने के लिए इस पृथ्वी पर चले थे, लेकिन हमें परमेश्वर के उस बलिदान के मार्ग का पालन भी करना चाहिए। यीशु ने स्वयं हमें उदाहरण दिखाया है कि जैसा उन्होंने हमारे लिए किया है वैसा ही हम भी करें, और एलोहीम परमेश्वर भी जो स्वयं आत्मा और दुल्हिन के रूप में आए हैं, हमारे लिए उदाहरण दिखा रहे हैं कि हम उसका पालन करें।

अब हम भविष्यवाणी के उस युग में जी रहे हैं जिसमें हमें पूरे संसार को बचाना चाहिए। भविष्यवाणी के नायक के रूप में, हम जानते हैं कि कौन सी भविष्यवाणियां पूरी होने वाली हैं। हालांकि, यदि हम प्रयास न करें और परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुसार कार्य न करें, तो विश्व प्रचार का कार्य कैसे पूरा होगा?

हमारे पास, जो इस युग में जी रहे हैं, परमेश्वर के द्वारा दिया गया एक खास कार्य है।

मत 28:18–20 यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।”

यह भी परमेश्वर की एक आज्ञा है, जिसका हमें पालन करना चाहिए। परमेश्वर की इच्छा को अभ्यास में लाने के लिए, हमें किसी प्रकार की इच्छा या योजना या प्रयास करने के बिना केवल परमेश्वर के आगमन का इंतजार नहीं करना चाहिए। इसके बदले, हमें भविष्यवाणियों के पूर्ण होने में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, ताकि जितना हो सके उतना जल्दी उद्धार का दिन आ सके।

परमेश्वर हमें ऐसा कुछ करने के लिए नहीं कहते जो असम्भव है या फिर हमारी क्षमताओं से बाहर है। परमेश्वर ने सामरिया और पृथ्वी की छोर तक सुसमाचार के प्रचार का मार्ग पहले से तैयार किया है, और बाद में हमें आज्ञा दी है कि, “जाओ!”
1950 और 1960 के दशक में, कोरिया दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक था, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था ने संसार को चौंकाते हुए शीघ्रता से विकास किया, और आज कोरिया एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर कर आया है। यह विश्व सुसमाचार के प्रचार को पूरा करने की परमेश्वर की योजना के अनुसार हुआ है। परमेश्वर सामरिया और पृथ्वी की छोर तक जाकर नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार करने के लिए सभी द्वार हमारे लिए खोल रहे हैं। इसलिए जब परमेश्वर हमें आज्ञा देते हैं कि “जाओ” तो हमें परमेश्वर की सामर्थ्य पर निर्भर रहते हुए जाना ही चाहिए। तब सब बातें बिना किसी समस्या के पूरी होंगी।

मत 24:14 और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा।

2,000 हजार साल पहले, यीशु ने भविष्यवाणी की थी कि राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो। जैसे खेती करने का एक नियत समय होता है, ठीक वैसे ही भविष्यवाणी के भी पूर्ण होने का एक नियत समय है। अब वह समय है जब भविष्यवाणियां पूरी हो रही हैं। आइए हम इस मौके को न गंवाएं, और बिना किसी हिचकिचाहट के कार्य करें।

यदि हम विश्वास करें कि वो सब कुछ जो यीशु ने कहा है, निश्चय ही पूरा हो जाएगा और हम पर आशीष लाएगा, तो हमें अपनी परिस्थितियों के बारे में शिकायत किए बिना विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जरा उन सदस्यों के मामलों को देखिए जो परमेश्वर की सामर्थ्य पर निर्भर होकर विदेश गए थे। परमेश्वर उनके आगे गए और उनके लिए मार्ग को समतल किया, ताकि वे पूरी तरह से नई वाचा के सुसमाचार का प्रचार करने में ध्यान लगा सकें। इसके परिणामस्वरूप, आत्मिक रूप से अंधकार में पड़े महाद्वीपों पर और यहां तक कि अनजानी जगहों पर भी जीवन का प्रकाश चमका और शीघ्रता से फैलता गया, और घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहनेवाले लोग अब ज्योति को देख रहे हैं और परमेश्वर को, जो सच्ची ज्योति हैं, खुशी के साथ ग्रहण कर रहे हैं। यदि उन्होंने केवल परमेश्वर के वचनों को सुना ही होता कि, “संसार में जाओ और सुसमाचार के संदेश का सब लोगों को प्रचार करो,” और उनमें से किसी ने भी कार्य न किया होता, तो ऐसे कृपालु परिणाम पैदा न हुए होते।

संसार को परमेश्वर की ओर से चेतावनी दो



हम जानते हैं कि हम सब को संसार को बचाने के सुसमाचार के कार्य में सहभागी होना ही चाहिए। अब से, आइए हम उसे सिर्फ जानकारी के रूप से मानने के बजाय अभ्यास में लाएं। इसके लिए, हमें अपने आपको लगातार प्रार्थना में लगाना चाहिए, ताकि हम परमेश्वर की इच्छा का पूर्ण रूप से पालन करने के लिए अपनी आत्मिक शक्तियों को इकट्ठा कर सकें।

यहेज 3:10–27 फिर उसने मुझ से कहा, “हे मनुष्य के सन्तान, जितने वचन मैं तुझ से कहूं, वे सब हृदय में रख और कानों से सुन। और उन बन्दियों के पास जाकर, जो तेरे जाति भाई हैं, उन से बातें करना और कहना, ‘प्रभु यहोवा यों कहता है;’ चाहे वे सुनें, या न सुनें।”... “हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिए पहरुआ नियुक्त किया है; तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना...।” परन्तु जब जब मैं तुझ से बातें करूं, तब तब तेरे मुंह को खोलूंगा, और तू उन से ऐसा कहना, ‘प्रभु यहोवा यों कहता है,’ जो सुनता है वह सुन ले और जो नहीं सुनता वह न सुने, वे तो विद्रोही घराने के हैं ही।

हमें संसार को परमेश्वर की ओर से चेतावनी देने का कार्य सौंपा गया है। हमें इसके बारे में चिन्ता नहीं करनी चाहिए कि लोग अपने हठीले मनों के कारण वचन को नहीं सुनेंगे। जहां तक उद्धार की बात है, इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिए हम कुछ न्याय या अनुमान कर सकते हैं।

हमें केवल सभी लोगों को सुसमाचार सुनाना चाहिए, फिर चाहे वे सुनें या न सुनें। उनमें से निश्चय ही कुछ परमेश्वर की सन्तान हैं। इसलिए यदि हम प्रचार करना जारी रखें, तो वे परमेश्वर के वचन को सुनेंगे और परमेश्वर की ओर वापस फिरेंगे। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा। जब हम सुसमाचार का प्रचार करते हैं, तो कभी–कभी ऐसे लोग जो परमेश्वर के वचनों को अच्छे से सुनने वाले लगते हैं, सुनने से इनकार करते हैं, और उसके विपरीत ऐसे लोग जो परमेश्वर के वचनों को अच्छे से सुनने वाले नहीं लगते, वे वचन सुनते हैं और परमेश्वर के पास आते हैं। और उस एक व्यक्ति के द्वारा बहुत सी आत्माएं परमेश्वर के पास आती हैं।

जब परमेश्वर हमें सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य सौंपते हैं, तो उनकी इच्छा यह नहीं होती कि हम केवल उन्हें ही प्रचार करें जो सुनना चाहते हैं, और ऐसी इच्छा भी नहीं थी कि हम ऐसा सोचते हुए पहले से न्याय करें कि, ‘क्या यह व्यक्ति परमेश्वर की सन्तान है? या क्या वह व्यक्ति परमेश्वर की सन्तान है?’ हमें परिणाम परमेश्वर को सौंपते हुए सब को केवल वचन का प्रचार करना चाहिए। यदि हम जैसा परमेश्वर ने कहा है वैसा ही करते जाएं, तो बहुत सी आत्माएं सुसमाचार को सुनेंगी, उसे समझेंगी और परमेश्वर के पास आएंगी, जिससे परमेश्वर महिमान्वित होंगे और हम भी आशीषित किए जाएंगे।

यहेज 11:19–20 मैं उनका हृदय एक कर दूंगा, और उनके भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूंगा, और उनकी देह में से पत्थर का सा हृदय निकालकर उन्हें मांस का हृदय दूंगा, जिससे वे मेरी विधियों पर नित चला करें और मेरे नियमों को मानें; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा।

परमेश्वर ने कहा है कि जब भविष्यवाणी का समय आएगा तब वह अपनी सभी सन्तानों का हृदय एक कर देंगे, ताकि सुसमाचार का कार्य तेजी से हो सके। एक किए हुए हृदय का अर्थ है, जहां कहीं परमेश्वर जाते हैं वहां उनके पीछे जाना, यानी परमेश्वर के जैसे मन से कार्य करना।

अब समय है जब भविष्यवाणी पूरी होगी। चूंकि बाइबल कहती है कि आकाश के नीचे हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक कार्य का एक समय होता है, इससे पहले कि सभी भविष्यवाणियां पूरी हो जाएं, और बहुत देर हो जाए, हम सब को विश्व सुसमाचार के इस कार्य में सहभागी होना चाहिए। एकी हृदय के साथ, यानी परमेश्वर के समान मन के साथ जो सारी दुनिया को बचाने की इच्छा करते हैं, आइए हम सभी लोगों को स्वर्ग के राज्य का सुसमाचार सुनाएं, ताकि हम उन परमेश्वर से बहुत से इनाम और आशीर्वाद पा सकें जो हमारे कार्यों के अनुसार हमें बदला देते हैं।