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अपने सारे मन और अपनी सारी बुद्धि के साथ

एक कहावत है कि “यदि कोई दृढ़ निश्चय के साथ एकाग्र होकर काम करे तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है।” इसका मतलब है कि यदि हम अपना मन केन्द्रित करें, तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो हम न कर सकें।
जब नया साल आता है, तब लोग अलग–अलग योजनाएं बनाते हैं, लेकिन उन में से ज्यादातर साल के अंत तक अपनी सारी योजनाओं को पूरा नहीं करते। जो एक ही समय में बहुत से काम करने की कोशिश करते हैं वे कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। लेकिन लोग जो एक ही उद्देश्य के लिए लगातार संघर्ष करते रहते हैं, वे आज नहीं तो कल, अंत में अपना उद्देश्य हासिल करते हैं।

जो अपने पूरे मन से काम करता है उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है



चाहे समुद्री केंचुओं का पूरा शरीर नरम है और उनका कोई भी अंग इतना कड़ा नहीं है कि किसी औजार के रूप में उसका इस्तेमाल किया जा सके, फिर भी वे अच्छे से बिल खोद सकते हैं। हालांकि, केकड़े समुद्री केंचुओं से शारीरिक तौर पर ज्यादा हथियारों से लैस हैं, फिर भी वे अपने लिए घर बनाने की कोशिश नहीं करते, लेकिन दूसरों के द्वारा निर्मित बिल में रहते हैं।
यह उनकी भिन्न जीवनशैलियों के कारण होता है: समुद्री केंचुए एक ही चीज पर ध्यान केन्द्रित करते हैं जबकि केकड़े एक ही चीज पर ध्यान केन्द्रित न करते हुए, एक ही समय में बहुत सी चीजें करते हैं। केकड़ों के पास मजबूत कवच और पंजे होते हैं जो अच्छे हथियार का काम करते हैं; वे खाना खाते समय स्वयं को शत्रुओं से सुरक्षित रखते हैं; जब वे रेंगते हैं तब वे बहुत सी दूसरी चीजें करने में व्यस्त रहते हैं। इसलिए वे अपने लिए घर नहीं बना सकते।
एक प्राचीन चीन कहावत है, “中石沒鏃,” जिसकी शुरुआत चीन के हान राजवंश के समय में सेनापति ली ग्वांग के द्वारा हुई थी। इस कहावत का अर्थ भी यही है कि यदि कोई अपना मन एक लक्ष्य पर केन्द्रित करे तो इसे हासिल करना असंभव बिल्कुल नहीं है।
ली ग्वांग एक वीर सैनिक और धनुर्विद्या और घुड़सवारी में निपुण था। एक धुंधली शाम को, वह चीड़ के जंगल से गुजर रहा था। तब उसने थोड़ी दूरी पर एक झाड़ी के पीछे एक शेर को घूरते हुए देखा। संकट का आभास होते ही उसने तुरन्त ही एक तीर निकालकर उसे चलाया। तीर सीधे शेर के माथे में घूस गया। हालांकि, तीर लगने के बावजूद, वह शेर वहां से बिल्कुल भी नहीं हिला।
वह संभलकर वहां पहुंचा, और उसने पाया कि वह कोई शेर नहीं लेकिन शेर के आकार का एक बड़ा सा पत्थर था। यह देखकर कि उसका तीर एक पत्थर में घूस गया था, वह बहुत ही आश्चर्यचकित हो गया। थोड़ी दूरी पर पीछे हटकर उसने फिर से एक बार तीर चलाया। उसने बार–बार अपने तीर चलाए, लेकिन हर बार तीर पत्थर से टकराकर नीचे गिर जाते थे।
यदि कोई धनुर्विद्या में निपुण व्यक्ति तीर चलाए, तो तीर लक्ष्य के बिल्कुल बीच में जा लगेगा। हालांकि, सामान्य बुद्धि से यह असंभव लगता है कि तीर पत्थर को भेद दे। एक अत्यंत भयानक परिस्थिति में, ली ग्वांग ने लक्ष्य को मार गिराने के लिए 100 प्रतिशत ध्यान केन्द्रित किया था, इसलिए उसका तीर पत्थर को भी भेद सका था।

अपने सारे मन से परमेश्वर से प्रेम कर



इस तरह से, यदि हम अपने सारे मन से कुछ करें तो हमारे लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यदि हम अपना मन किसी चीज पर केन्द्रित करें तो हम सब कुछ हासिल कर सकते हैं।
यीशु ने हम से परमेश्वर से अपने सारे मन से प्रेम करने को कहा है।

मत 22:34–38 ... “हे गुरु, व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” उसने उससे कहा, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है।”

“अपने सारे मन से परमेश्वर से प्रेम कर” का अर्थ है कि, “100 प्रतिशत संपूर्ण प्रेम से परमेश्वर से प्रेम कर।” यदि यह परमेश्वर की इच्छा है, तो हमें अपने हृदयों को परमेश्वर की इस इच्छा से भर देना चाहिए। तब हम कह सकते हैं कि हम परमेश्वर से अपने सारे मन से प्रेम करते हैं।
बाइबल कहती है कि शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है।(रो 8:5–6) और वह इस पर भी जोर देती है कि हम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।(लूक 16:13) हालांकि, कभी–कभी हम अपना हृदय और मन पूर्ण रूप से परमेश्वर को नहीं देते; कभी–कभी हम परमेश्वर की इच्छा से ज्यादा इस जीवन की सांसारिक चीजों पर ध्यान देते हैं।
परमेश्वर से पूर्ण रूप से प्रेम करने के लिए, हमें सबसे पहले यह समझना चाहिए कि क्यों हमें परमेश्वर से अपने पूर्ण हृदय से प्रेम करना चाहिए। इसका कारण है कि परमेश्वर ने पहले हमसे अपने पूरे हृदय के साथ प्रेम किया है। परमेश्वर ने हमें सब कुछ दिया है; अपना पूरा हृदय, अपना पूरा जीवन और अपना पूरा मन दिया है। हालांकि, हम अभी भी परमेश्वर के प्रेम को पूरी तरह से नहीं समझते और उसे अमल में नहीं लाते। इसलिए यीशु ने कहा कि, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है।”

परमेश्वर के अपने सारे मन और अपने सारे प्राण से प्रेम करने का उदाहरण



परमेश्वर ने अपना सारा मन और प्राण केवल अपनी खोई हुई सन्तानों को उद्धार देने के लिए लगाया था।(लूक 19:10) हमारे उद्धार के लिए परमेश्वर ने अपनी सारी सामर्थ्य, महिमा और वैभव छोड़ दिया; वह इस पृथ्वी पर मनुष्य का रूप धारण करके आए और क्रूस की अत्यंत पीड़ा और अपमान को सहन किया।

इब्र 2:14–15 इसलिये जब कि लड़के मांस और लहू के भागी हैं, तो वह आप भी उनके समान उनका सहभागी हो गया, ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात् शैतान को निकम्मा कर दे; और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले।

परमेश्वर स्वर्गदूतों से भी निचले रूप में होकर एक दीन मनुष्य के रूप में आए थे।(इब्र 2:5–9) यह हमारे उद्धार के लिए था। क्योंकि सन्तान मांस और लहू युक्त थी, इसलिए उन्होंने भी मनुष्यत्व धारण किया। सन्तानों को बचाने के लिए वह एक दीन दास के समान होकर आए और स्वेच्छा से लोगों के ठट्ठों को सहन किया।

यश 53:1–5 ... लोग उससे मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और हम ने उसका मूल्य न जाना। निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा–कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी, कि उसके कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जाएं।

परमेश्वर अपने सृजे हुए लोगों के द्वारा तुच्छ समझे गए; उन्होंने सब प्रकार के दु:खों और पीड़ाओं का अनुभव किया। उन्होंने सब प्रकार की पीड़ाओं को केवल हमारे छुटकारे के लिए सहन किया। इन सब के बावजूद, उन्होंने कभी भी अपना मन नहीं बदला और एक क्षण के लिए भी हमें अकेला नहीं छोड़ा। परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हम मसीह के मांस और लहू में सहभागी होते हैं, इससे हम परमेश्वर में बने रहते हैं और परमेश्वर हम में, और हम परमेश्वर के साथ एक मन हो जाते हैं। इस कारण से, परमेश्वर ने नई वाचा की स्थापना की है, ताकि हम उसी मार्ग पर चलते हुए जिस पर परमेश्वर चले थे, उद्धार पा सकें।
जब हम उस पूरी आत्मिक प्रक्रिया के बारे में सोचें जिससे परमेश्वर हमारे उद्धार के लिए गुजरे थे, तब हम उस प्रक्रिया में निहित परमेश्वर का प्रेम देख सकते हैं जिन्होंने हमसे अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपने पूरे मन से प्रेम किया है। परमेश्वर ने स्वर्ग की महिमा को छोड़ा और हमारे बदले दु:ख उठाया; उन्होंने हमारे उद्धार के लिए अपने सभी प्रयास लगा दिए। इसके बारे में सोचते हुए हम पूरी तरह से समझ सकते हैं कि क्यों यीशु ने कहा होगा कि सब से बड़ी और मुख्य आज्ञा परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम करना है।
ऐसा नहीं है कि हमने पहले परमेश्वर से प्रेम किया और इससे हमने उद्धार पाया है, लेकिन परमेश्वर ने पहले हम से प्रेम किया और उद्धार के मार्ग की ओर हमारी अगुआई की है। छ: हजार सालों के लंबे समय तक, हमारे स्वर्गीय पिता और माता ने लगातार हमारी देखभाल की है और हमारा मार्गदर्शन किया है। स्वर्गीय पिता और माता के हृदय को समझकर, हमें एक क्षण के लिए भी उनके अनुग्रह को नहीं भूलना चाहिए।

उद्धार पर केन्द्रित होकर प्रार्थना और प्रचार करना



परमेश्वर इस पृथ्वी पर अपनी सन्तानों को बचाने के लिए आए थे। उन्होंने हमारी आत्माओं के उद्धार के लिए, कभी भी प्रार्थना करना और प्रचार करना बंद नहीं किया। उन्होंने अपनी सन्तानों के उद्धार के लिए अपना सम्पूर्ण मन और आत्मा लगा दी; वह भोर को जल्दी उठ गए और अपनी पापी सन्तानों के लिए प्रार्थना की कि उनके भीतर आत्मिक जागृति हो, और वे सम्पूर्ण पश्चाताप करें और सुरक्षित रूप से स्वर्ग वापस जाएं; और उन्होंने लगातार उद्धार के सुसमाचार का प्रचार किया।

मर 1:35–38 भोर को दिन निकलने से बहुत पहले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। तब शमौन और उसके साथी उसकी खोज में गए। जब वह मिला, तो उससे कहा, “सब लोग तुझे ढूंढ़ रहे हैं।” उसने उनसे कहा, “आओ; हम और कहीं आसपास की बस्तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं।”

मत 4:17–23 उस समय से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, “मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है।”... यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन के आराधनालयों में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा।

परमेश्वर हमेशा ऐसी चिन्ता में लीन हैं कि हम थक जाएंगे और उद्धार के मार्ग से गिर जाएंगे, और आज भी अपनी सन्तानों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उनकी ऐसी लगातार प्रार्थनाएं और प्रचार हमारा उद्धार करने की उनकी एकमात्र इच्छा से पैदा होते हैं।
मसीह ने हमें बचाने के लिए सब कुछ दे दिया; उन्होंने अपना पूरा हृदय, प्राण और मन दे दिया। स्वर्ग में उठा लिए जाने के दिन तक, उन्होंने अपना पूरा मन अपनी शेष सन्तानों के उद्धार पर लगाया और हमें प्रचार करने को कहा।

मत 28:18–20 ... इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।

मर 16:15 और उसने उनसे कहा, “तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।”

हमारे आसपास अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने अभी तक उद्धार का सुसमाचार ग्रहण नहीं किया है। जरा परमेश्वर के बारे में सोचिए! उन्होंने हमारे उद्धार के लिए अपनी लज्जा की कोई परवाह नहीं की और सब कुछ करने को तैयार थे। हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम को याद करते हुए, हमें संसार की सभी जातियों और लोगों को साहस के साथ नई वाचा के सुसमाचार की घोषणा करनी चाहिए।

आइए हम पूरा मन लगाकर संसार को बचाएं



परमेश्वर ने हमें अपना पूरा मन दिया है। हमें भी परमेश्वर को अपना पूरा मन देना चाहिए। आइए हम अपने मन से स्वार्थ को निकाल दें और अपने आप को परमेश्वर के प्रेम से भर दें। जब तक केवल मसीह हम में जीवित न हों, तब तक हमें लगातार सच्चे मन से परमेश्वर से प्रेम करने के लिए और हमेशा उनमें बने रहने के लिए ज्यादा कोशिश करनी चाहिए।
जैसे परमेश्वर ने हम से प्रेम किया है, वैसे ही हमें संसार के सभी लोगों से प्रेम करना चाहिए। परमेश्वर ने कहा है कि जो भी हम अपने भाइयों में से किसी एक के साथ करते हैं वह परमेश्वर के साथ करते हैं, और यह भी कि यदि कोई अपने भाई से जिसे उसने देखा है प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा प्रेम नहीं रख सकता।(मत 25:40; 1यूह 4:20) जब हम अपने पूरे मन को अपने भाइयों और बहनों के उद्धार के लिए लगाते हैं, हम परमेश्वर की इस आज्ञा का पूर्ण रूप से पालन कर सकते हैं कि, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख।”
प्रेरित पौलुस ने इस वचन को मन में रखते हुए, अपना पूरा मन और शक्ति संसार में जाकर सभी लोगों को सुसमाचार का प्रचार करने में लगा दी। चूंकि उसने आत्माओं को बचाने में अपना पूरा हृदय लगाया था, इसलिए जहां कहीं भी वह गया, वह मुश्किल और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी बहुत से लोगों को पश्चाताप करने में सहायता करते हुए परमेश्वर की बांहों में ले आ सका।

प्रे 20:23–27 ... परन्तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता कि उसे प्रिय जानूं, वरन् यह कि मैं अपनी दौड़ को और उस सेवा को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है... इसलिये मैं आज के दिन तुम से गवाही देकर कहता हूं, कि मैं सब के लहू से निर्दोष हूं। क्योंकि मैं परमेश्वर के सारे अभिप्राय को तुम्हें पूरी रीति से बनाने से न झिझका।

2तीम 4:7–8 मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूं, मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा...

पौलुस ने कहा कि वह अपने प्राण को कुछ नहीं समझता। इसका अर्थ है कि उसने अपना पूरा मन और प्राण परमेश्वर को दे दिया था। जैसे उसने कहा कि उसने अपनी दौड़ पूरी कर ली है और विश्वास की रखवाली की है, उसने अपने आपको पूर्ण रूप से परमेश्वर के लिए अर्पण किया।
जब हम पौलुस के जीवन के बारे में सोचते हैं जिसने सम्पूर्ण मन और सम्पूर्ण आत्मा से परमेश्वर से प्रेम किया था, हमारे पास भी इतना बड़ा विश्वास होना चाहिए। परमेश्वर ने पौलुस के जीवन और कार्यों को बाइबल में लिखा है, क्योंकि वह चाहते हैं कि हम उसके विश्वास और कार्यों का अनुसरण करें।

2तीम 4:1–5 ... तू वचन का प्रचार कर, समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता और शिक्षा के साथ उलाहना दे और डांट और समझा... तू सब बातों में सावधान रह, दु:ख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर, और अपनी सेवा को पूरा कर।

अब, हमारे लिए जो बचा हुआ है वह प्रचारक का कार्य है, यानी सब लोगों को बचाने के लिए उन्हें सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य है। आइए हम पौलुस के समान अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ संसार की सभी जातियों को उद्धार की घोषणा करें। हमें उन्हें परमेश्वर के वचन सिखाने चाहिए और वह प्रेम देना चाहिए जिसे परमेश्वर ने हमें दिखाया है। मैं विश्वास करता हूं कि यदि हम उन्हें अपने दिन–प्रतिदिन के कार्यों के द्वारा परमेश्वर का भला और सुंदर प्रेम दिखाएं, तो वे भी परमेश्वर से जीवन का उपहार पाने की खुशी में दूसरों को परमेश्वर का प्रेम देंगे।

इस युग के पहरेदार और नेता बनो



जब हम अपना पूरा हृदय और आत्मा देते हैं, तब हमें अनुग्रहपूर्ण परिणाम मिलता है। प्रेरित पौलुस ने अपना पूरा हृदय प्रचार में लगाया था, और एक व्यक्ति पौलुस के द्वारा सुसमाचार सामरिया और पृथ्वी की छोर तक फैलना शुरू हो गया।
पौलुस के जैसे रवैये के साथ, आइए हम भी पूरे संसार को जगाएं। हम इस युग के पहरेदार हैं; और हमारा कत्र्तव्य संसार को परमेश्वर की ओर से चेतावनी देना है।(यहेज 3:17) इसलिए हमें लोगों को जागृत करने के कार्य में अपना पूरा हृदय और मन लगा देना चाहिए। इस कार्य में अपना पूरा मन लगाए बिना, हम उनके हृदय को स्पर्श नहीं कर सकते; हम शायद उन्हें अपना ज्ञान दे सकते हैं लेकिन हम उन्हें वह सामर्थ्य और प्रेरणा नहीं दे सकते जो परमेश्वर की ओर से है।
ज्यादातर सभी मशहूर अभिनेता अपने पात्र में पूरी तरह से डूब जाते हैं। वे कहते हैं कि जब तक वे पूरी तरह से अपने अभिनय में डूब नहीं जाते तब तक उस पात्र के अंदर की भावना और अनुभूति को बयान नहीं कर सकते।
आइए हम बाइबल के द्वारा अपने कार्य और कत्र्तव्य को ध्यान से सोचें और अपने आपको पूर्ण रूप से उसके लिए समर्पित करें। हम जो प्रतिज्ञा की सन्तान हैं जिनकी भविष्यवाणी की गई है, इस युग के नेता हैं। परमेश्वर ने हमें पूरे संसार में जाकर सभी लोगों को सुसमाचार का प्रचार करने को कहा है। आइए हम परमेश्वर के वचनों को अपने हृदयों पर अंकित करें और अपना पूरा मन और प्राण अपने खोए हुए भाइयों और बहनों को बचाने के कार्य में लगाएं।
जब हम परमेश्वर को अपना पूरा मन देते हैं, तब हम परमेश्वर के द्वारा जो हमें सामर्थ्य देते हैं, सब कुछ कर सकते हैं।(फिलि 4:13) सिय्योन के प्रेमी भाइयो और बहनो! आइए हम परमेश्वर से सम्पूर्ण मन से और सम्पूर्ण आत्मा से प्रेम करें और बहुत सी आत्माओं को उद्धार की ओर ले आएं, ताकि हम सब साथ में मिलकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकें।