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परमेश्वर के बुलाए लोग

बाइबल के इतिहास के द्वारा हम जान सकते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने अपनी सन्तानों को बुलाया था और उनके द्वारा अपने महान कार्य संपन्न किए थे। प्रत्येक युग में, परमेश्वर ने जो सब वस्तुओं के सृजनहार हैं यहोशू, शमूएल, दाऊद, पतरस और यूहन्ना जैसे विश्वास के पूर्वर्जों को बुलाया और उन्हें उन्नत किया ताकि परमेश्वर के वचन की ज्योति ठंडी न जाए परन्तु लगातार चमकती रहे।
इस अंतिम युग में, परमेश्वर ने हमें अपने महान कार्य के लिए बुलाया है। आइए हम बाइबल के इतिहास के द्वारा यह जानें कि परमेश्वर के बुलावे के योग्य होने के लिए हमें किस प्रकार का रवैया रखना चाहिए।

सारी सामर्थ्य परमेश्वर से है


जब परमेश्वर अपने काम करने वालों को बुलाते हैं, तो वह उनके बाहरी दिखावे या सामर्थ्य के बारे में परवाह नहीं करते। क्या परमेश्वर अपने काम करने वालों को इसलिए बुलाते हैं, क्योंकि उन्हें उनसे कुछ चाहिए? बेशक नहीं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने उस जंगल में जहां पानी की एक बूंद भी नहीं थी, पत्थर से पानी निकाला था। उन्होंने अपने प्रेमी लोगों को मिस्री सेना से बचाने के लिए लाल समुद्र को विभाजित किया था।
उन्होंने यरीहो की मजबूत शहरपनाह को सिर्फ सात मेढ़ों के सींगों से बनी तुरहियों की आवाज से गिरा दिया था, और जो उनके विरुद्ध लड़ाई कर रहे थे उन्हें पाले या ओस के समान अदृश्य कर दिया था। उनके लिए, इस बात का बिल्कुल महत्व नहीं कि हमारे पास ज्यादा सामर्थ्य है या नहीं।
यदि किसी व्यक्ति को परमेश्वर ने बुलाया है, तो उसे चिन्ता करने की कोई भी आवश्यकता नहीं है। जब वह इस सत्य पर विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे बुलाया है, और आगे बढ़े, तो वह विजय का झंडा लहराते हुए महिमा का गीत गाएगा।
परमेश्वर के द्वारा निश्चित रूप से बुलावा पाने के बाद भी, कभी–कभी हम दिखाई देने वाली रुकावटों और बाधाओं के बारे में चिन्ता करते हैं और उनसे डरते हैं। जब कभी भी हम भयभीत होते हैं, परमेश्वर के महान कार्यों का इतिहास जो इस्राएलियों के साथ हुआ था, हमें विश्वास में दृढ़ता से खडे. होने के लिए शक्ति और हिम्मत देते हैं। बाइबल में, हम प्रत्येक युग में ऐसे जीवित गवाहों से मिल सकते हैं जिन्होंने परमेश्वर के महान कार्यों को पूरा होते हुए अपनी आंखों से देखा था।

यहोशू का विश्वास जो परमेश्वर की सामर्थ्य पर निर्भर रहा


परमेश्वर की असाधारण सामर्थ्य इस्राएलियों के इतिहास में साफ दिखाई देती है। जब यहोशू ने इस्राएल के लोगों की यरीहो की ओर अगुआई की, तब परमेश्वर की महान सामर्थ्य साफ दिखाई पड़ी।
पूरे कटनी के समय के दौरान यरदन नदी बाढ़ की स्थिति में रहती थी। और जब यहोशू को लोगों के साथ यरदन नदी पार करनी थी, वह भी कटनी का समय था। नदी दोनों किनारों के ऊपर से बह रही थी; नदी का प्रवाह बहुत तेज़ था और वहां एक बड़ी भंवर भी थी। वे अपनी सामर्थ्य से उस नदी को कभी भी पार नहीं कर सकते थे।
हालांकि, वे परमेश्वर पर विश्वास से भरपूर थे जिनके पराक्रमी हाथ उनकी सहायता कर सकते थे, और उन्होंने परमेश्वर के निर्देशों का पालन किया। परिणाम स्वरूप, वे वाचा के संदूक को उठाए हुए एक कतार बनाकर नदी को पार कर सके।

यहो 3:14–17 इसलिए जब प्रजा के लोगों ने अपने डेरों से यरदन पार जाने को कूच किया, और याजक वाचा का सन्दूक उठाए हुए प्रजा के आगे आगे चले, और सन्दूक के उठानेवाले यरदन पर पहुंचे, और सन्दूक के उठानेवाले याजकों के पांव यरदन तीर के जल में डूब गए(यरदन का जल तो कटनी के समय के सब दिन अपने तट के ऊपर ऊपर बहा करता है), तब जो जल ऊपर की ओर से बहा आता था वह बहुत दूर, अर्थात् आदाम नगर के पास जो सारतान के निकट है रुककर एक ढेर हो गया, और दीवार–सा उठा रहा, और जो जल अराबा का ताल जो खारा ताल भी कहलाता है, उसकी ओर बहा जाता था, वह पूरी रीति से सूख गया; और प्रजा के लोग यरीहो के सामने पार उतर गए। और याजक यहोवा की वाचा का सन्दूक उठाए हुए यरदन के बीचोंबीच पहुंचकर स्थल पर स्थिर खड़े रहे, और सब इस्राएली स्थल ही स्थल पार उतरते रहे, अंत में उस सारी जाति के लोग यरदन पार हो गए।

यदि उन्होंने उस दृश्यमान परिस्थिति के सामने घुटने टेक दिए होते और बहादुरी के साथ आगे कदम न रखा होता, यदि बहाव में खिंच जाने के डर से उन्होंने परमेश्वर के आदेश का पालन न किया होता, तो वे सब उस दूध और मधु भरपूर कनान देश में न जा सके होते, और जंगल में ही मर गए होते।
ज्यों ही परमेश्वर ने उन्हें आगे बढ़कर यरदन पार करने के लिए कहा, उन्होंने बिना डरे अपने पांव उसमें रखे। तब उन्होंने परमेश्वर की महान सामर्थ्य को देखा जिसके कारण यरदन नदी का पानी रुक गया कि वे सूखी भूमि पर चलते हुए यरदन को पार कर सकें।
जब वे यरीहो के पास पहुंचे, तो उन्होंने तलवार या भालों से नगर पर आक्रमण नहीं किया, लेकिन परमेश्वर के आदेश के अनुसार दिन में एक बार ऐसे छह दिनों तक नगर के चारों ओर घूमे। जब वे नगर के चारों ओर सात बार चक्कर लगाए, तब उन्होंने जाना कि परमेश्वर ने सातवें दिन, यरीहो नगर को नष्ट करने की योजना बनाई है।

यहो 6:1–20 यहोशू सबेरे उठा, और याजकों ने यहोवा का सन्दूक उठा लिया। और उन सात याजकों ने मेढ़ों के सींगों के सात नरसिंगे लिए और यहोवा के सन्दूक के आगे आगे फूंकते हुए चले; और उनके आगे हथियारबन्द पुरुष चले, और पीछेवाले यहोवा के सन्दूक के पीछे पीछे चले, और याजक नरसिंगे फूंकते चले गए। इस प्रकार वे दूसरे दिन भी एक बार नगर के चारों ओर घूमकर छावनी में लौट आए। और इसी प्रकार उन्होंने छ: दिन तक किया। फिर सातवें दिन वे बड़े तड़के उठकर उसी रीति से नगर के चारों ओर सात बार घूम आए; केवल उसी दिन वे सात बार घूमे... तब लोगों ने जयजयकार किया, और याजक नरसिंगे फूंकते रहे। और जब लोगों ने नरसिंगे का शब्द सुना तो फिर बड़ी ही ध्वनि से उन्होंने जयजयकार किया, तब शहरपनाह नींव से गिर पड़ी, और लोग अपने अपने सामने से उस नगर में चढ़ गए, और नगर को ले लिया।

परमेश्वर ने उनसे तुरही फूंकने और जयजयकार करने के लिए कहा, और उन्होंने वैसा ही किया जैसा परमेश्वर ने कहा था। तब यरीहो की शहरपनाह जिसे बहुत मजबूत माना जाता था गिर पड़ी। यह सिर्फ इस्राएलियों के बड़े जयजयकार के शब्द के कारण नहीं हुआ था। जैसा परमेश्वर ने उन्हें ‘चक्कर’ लगाने को कहा, उन्होंने सिर्फ चक्कर लगाया; और जैसा परमेश्वर ने उन्हें ‘जयजयकार’ करने को कहा, उन्होंने जयजयकार किया। उनके पास ऐसा आज्ञाकारी विश्वास था, इसलिए वे उनकी महान सामर्थ्य का अनुभव कर सके।
क्या हुआ होता, जब परमेश्वर ने उन्हें कहा कि ‘जयजयकार’ करो, यदि सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों ने जयजयकार किया होता, और बाकी चुप रहे होते? क्या उन्होंने ऐसा अविश्वसनीय परिणाम पाया होता? कभी नहीं! यदि उनमें से सब ने जयजयकार न किया होता, तो परमेश्वर के पराक्रमी हाथ ने काम न किया होता।
जब परमेश्वर ने उन सब को जयजयकार करने के लिए कहा, तो क्या उस समय जयजयकार करने वालों की क्षमता या सामर्थ्य कुछ मतलब का था? बिल्कुल नहीं। परमेश्वर के लिए कुछ भी असंभव नहीं। जो भी परमेश्वर ने उन्हें कहा है उसका पालन करना ही विजय प्राप्त करने का रास्ता था।
अब, परमेश्वर द्वारा हमें ‘जयजयकार’ करने के लिए बुलाया गया है। जब हम महा नगरी बेबीलोन की ओर जोर से तुरही बजाएंगे, तो हम परमेश्वर की महान सामर्थ्य को काम करते हुए देख सकते हैं।
परमेश्वर सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, और सर्वव्यापी हैं। क्या वह इस युग में शान्त रहेंगे? सभी भविष्यवाणियां अब पूरी हो रही हैं। इस वर्तमान युग में, परमेश्वर हमारी पिछले किसी भी युग से और ज्यादा सहायता कर रहे हैं। हालांकि, जब तक हम परमेश्वर के बुलावे का जवाब नहीं देते और अपना कार्य नहीं करते, हम परमेश्वर की पराक्रमी सामर्थ्य और सहायता को महसूस नहीं कर सकते।

गिदोन का विश्वास जो परमेश्वर की सामर्थ्य पर निर्भर रहा


आइए हम गिदोन के इतिहास के द्वारा परमेश्वर की सर्वशक्तिमान सामर्थ्य को फिर एक बार देखें। जब मिद्यानियों की सेना ने इस्राएलियों पर आक्रमण करने के लिए पहाड़ी के पास तराई में छावनी लगाई थी, तब 1,35,000 मिद्यानियों की सेना के सामने लड़ने के लिए सिर्फ 32,000 इस्राएली पुरुष थे। हालांकि, जब परमेश्वर ने युद्ध में लड़ने के लिए जाने वाले योद्धाओं को चुना, तो कहा कि 32,000 बहुत ज्यादा हैं। परमेश्वर ने उनमें से सिर्फ 300 को चुना और उन्हें खुद से 400 गुना तक बड़ी मिद्यानियों की सेना के सामने लड़ने की आज्ञा दी।

न्या 7:1–23 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, “जो लोग तेरे संग हैं वे इतने हैं कि मैं मिद्यानियों को उनके हाथ नहीं कर सकता, नहीं तो इस्राएल यह कहकर मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई मारने लगेंगे कि हम अपने ही भुजबल के द्वारा बचे हैं। इसलिये तू जाकर लोगों में यह प्रचार करके सुना दे, ‘जो कोई डर के मारे थरथराता हो, वह गिलाद पहाड़ से लौटकर चला जाए’।” तब बाइस हजार लोग लौट गए, और केवल दस हजार रह गए। फिर यहोवा ने गिदोन से कहा, “अब भी लोग अधिक हैं; उन्हें सोते के पास नीचे ले चल, वहां मैं उन्हें तेरे लिये परखूंगा... तब यहोवा ने गिदोन से कहा, “इन तीन सौ चपड़ चपड़ करके पीनेवालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और अन्य सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं।” तब उन तीन सौ लोगों ने अपने साथ भोजन सामग्री ली और अपने अपने नरसिंगे लिए; और उस ने इस्राएल के अन्य सब पुरुषों को अपने अपने डेरे की ओर भेज दिया, परन्तु उन तीन सौ पुरुषों को अपने पास रख छोड़ा; और मिद्यान की छावनी उसके नीचे तराई में पड़ी थी। तब तीनों झुण्डों ने नरसिंगों को फूंका और घड़ों को तोड़ डाला; और अपने अपने बाएं हाथ में मशाल और दाहिने हाथ में फूंकने को नरसिंगा लिए हुए चिल्ला उठे, ‘यहोवा की तलवार और गिदोन की तलवार।’ तब वे छावनी के चारों ओर अपने अपने स्थान पर खड़े रहे, और सब सेना के लोग दौड़ने लगे; और उन्होंने चिल्ला चिल्लाकर उन्हें भगा दिया। और उन्होंने तीन सौ नरसिंगों को फूंका, और यहोवा ने एक एक पुरुष की तलवार उसके संगी पर और सब सेना पर चलवाई...

गिदोन के 300 लोगों ने अपने हाथों में जो पकड़ा था वह कोई तलवार या भालों जैसे हथियार नहीं थे, लेकिन मशालें, नरसिंगे और घड़े थे। हालांकि, उनके हृदय परमेश्वर के प्रति विश्वास से भरपूर थे। कौन कल्पना कर सकता था कि सिर्फ 300 लोग 1,35,000 शत्रु सेना को हरा सकेंगे। हालांकि, परमेश्वर ने पहले से मिद्यानियों को पराजित करने के उपाय की योजना और तैयारी कर दी थी। लोग जिन्हें बुलाया गया था, उन्होंने जीवित गवाह के रूप में विश्वास के साथ परमेश्वर के सामर्थी कार्य में हिस्सा लिया।
जब परमेश्वर हमें बुलाते हैं और हमें कुछ कार्य करने के लिए देते हैं, वह कमजोर और प्रतिकूल परिस्थितियों में हम पर अपनी सामर्थ्य प्रकट करते हैं ताकि हम जान सकें कि वह हमारे साथ हैं, और हम उन पर निर्भर रहें।
यदि हम ऐसा सोचें कि जिस कार्य के लिए हमें बुलाया गया है वह करना असम्भव है, तो हम उन लोगों के समान हैं जिन्होंने बाइबल का एक भी पन्ना नहीं पढ़ा। जिन्हें परमेश्वर ने बुलाया है उनके लिए सब कुछ सम्भव है। वह संकीर्ण विचारों वाले मनुष्य को असम्भव लगता है। हालांकि, परमेश्वर के लिए तो सब कुछ सम्भव है।

परमेश्वर के बुलावे के योग्य विश्वास


परमेश्वर ने शून्यता से इस पृथ्वी पर सब जीवों की सृष्टि की। उन्होंने ज्योति से अंधकार को अलग किया और अंतर के ऊपर के पानी को अंतर के नीचे के पानी से अलग किया। उन्होंने घरेलू पशुओं, आकाश के पक्षियों, सभी जीवित प्राणियों और समुद्र की मछलियों को अपनी अपनी जाति के अनुसार बनाया; उन्होंने सब प्रकार के पेड़ और पौधे बनाए, और दिन पर प्रभुता करने के लिए बड़ी ज्योति(सूर्य) को और रात पर प्रभुता करने के लिए छोटी ज्योति(चंद्र), इस प्रकार दो बड़ी ज्योतियों को बनाया।
अब, क्या हम ऐसा सोचते हुए परमेश्वर के बुलावे का जवाब देने से हिचकिचा सकते हैं, ‘मैं उससे भी ज्यादा मुश्किल परिस्थिति में हूं जब परमेश्वर ने शून्यता में से सब कुछ बनाया था।’? कभी नहीं! सब कुछ सम्भव है। चाहे हम कैसी परिस्थिति का सामना क्यों न करें, हम परमेश्वर की सहायता से उस से पार हो सकते हैं जिन्होंने आकाश और पृथ्वी को रचा है।
विश्वास में हमारे पूर्वजों को जब परमेश्वर के द्वारा बुलाया गया, तो उन्होंने थोड़ा साहस प्राप्त करने के बजाय हिचकिचाने, डरने या हार मान लेने का काम नहीं किया। दाऊद ने नवयुवक होने पर भी विशाल गोलियत को गोफन फेंक कर अपनी वीरता दिखाई। पतरस ने एक अनपढ़ मछुआ होने पर भी बिना हिचकिचाहट के परमेश्वर के बुलावे का पालन किया, और परिणाम स्वरूप उसने स्वर्ग के राज्य की कुंजियां पाईं।
इस तरह से, परमेश्वर ने उन्हें बुलाया जिनके पास कम सामर्थ्य थी और महान लोगों को उनके अधीन कर दिया; उन्होंने कमजोरों को बुलाया और उनके द्वारा शक्तिशाली जातियों और देशों को नष्ट किया। परमेश्वर ने अब हमें बुलाया है। हमें अपनी परिस्थितियों और अपनी योग्यता की कमी की वजह से हिचकिचाहट और शिकायत नहीं करनी चाहिए, पर ऐसा मजबूत विश्वास करते हुए कि हम परमेश्वर की सामर्थ्य के साथ सब कुछ कर सकते हैं, परमेश्वर के बुलावे का प्रत्युत्तर देना चाहिए। यदि हम परमेश्वर के बुलावे का पालन करें, तो हम विजय को दोहराते जाएंगे।
प्रेमी भाइयो और बहनो! हमें परमेश्वर पर सिर्फ शब्दश: विश्वास नहीं करना चाहिए। यदि कोई कहता है कि वह परमेश्वर की सामर्थ्य पर विश्वास करता है जिसके विषय में बाइबल गवाही देती है और असंभव लगने वाली परिस्थितियों का सामना होते ही परमेश्वर के बुलावे का इनकार करता है, तो वह ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसके पास सच्चा विश्वास है। बाइबल में लिखित हमारे पूर्वजों के विश्वास के द्वारा, हमें परमेश्वर के बुलावे का खुशी से प्रत्युत्तर देने के लिए हिम्मत और साहस लेना चाहिए।
यहोशू, शमूएल, गिदोन और दाऊद के समान, परमेश्वर के बुलाए हुए लोगों के पास पहले से विजय की प्रतिज्ञा है। परमेश्वर ने 300 मनुष्यों को मिद्यानियों की विशाल सेना से लड़ने को कहा, क्योंकि युद्ध को जीतना पहले से तय किया गया था; उन्होंने इस्राएलियों से यरदन नदी पार करने को कहा, क्योंकि वह स्वयं उनके लिए उसे पार करना मुमकिन करने वाले थे; उन्होंने उन्हें यरीहो के नगर के चारों ओर घूमने के लिए कहा, क्योंकि वह उन्हें उस नगर को नष्ट करने के लिए सामर्थ्य देने वाले थे।
इस तरह से, परमेश्वर अपने बुलाए हुए लोगों को एक पक्की विजय की प्रतिज्ञा देते हैं। यदि हम ऐसा सोचें, “मैं कमी हूं...” हम कभी भी परमेश्वर की सर्वशक्तिमान सामर्थ्य को नहीं देख पाएंगे। जब हम अपनी खुद की निपुणता या योग्यता को ध्यान में लेते हैं, तो हम मूर्खता से परमेश्वर के बुलावे की उपेक्षा करते हैं।
अब हम परमेश्वर द्वारा एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य के लिए बुलाए गए हैं। उन्होंने यहोशू को बुलाया और उसे सभी इस्राएलियों की यरदन पार दूध और मधु से भरपूर कनान देश तक अगुआई करने दी। उन्होंने गिदोन को बुलाया और उसे इस्राएलियों को मिद्यानियों के आक्रमण से बचाने दिया। अब, परमेश्वर हमें इन अंतिम दिनों में सुसमाचार का कार्य पूरा करने के लिए बुलाते हैं। हमें परमेश्वर की महान योजना को समझना चाहिए और उनके कार्य में सहभागी होना चाहिए।
जब परमेश्वर हमें बुलाते हैं, तो हमें विजय देने का भरोसा दिलाते हैं। अब, परमेश्वर की बुलाहट हमारे दिलों को द्रवित कर रही है। परमेश्वर ने अपने महान कार्य को समाप्त करने के लिए कमजोरों और शक्तिहीनों को चुना था। इन अंतिम दिनों में भी, परमेश्वर ने हमें बुलाया है जिनके पास बहुत थोड़ा बल है, और सारी जातियों को पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा देने और जो जो आज्ञाएं उन्होंने हमें दी हैं उनका पालन करना सिखाने का महान कार्य सौंपा है।

मत 28:18–20 यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।”

ऐसा कहना बिल्कुल अतिश्योक्ति नहीं होगा कि जो फल पैदा नहीं करते, वे आत्मिक रूप से भयानक स्थिति में हैं। बाइबल के द्वारा हम अच्छे से जानते हैं कि पतझड़ के पेड़ जिनमें फल नहीं होते, स्वर्ग के राज्य में नहीं जा सकते। हमें अपनी परिस्थितियों और उपाधियों को ध्यान में लेते हुए परमेश्वर के बुलावे को भूल नहीं जाना चाहिए। यहां तक कि मसीह भी इस पृथ्वी पर शरीर में आए और एक आत्मा को बचाने के लिए अपमान और दु:खों को सहा। इस बात को याद करते हुए, हमें मसीह के उदाहरण के अनुसार विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
चाहे हम शक्तिहीन और असमर्थ हों, यदि हम गिदोन और दाऊद को दी गई परमेश्वर की सामर्थ्य पर विश्वास रखते हुए परमेश्वर के बुलावे का पालन करें, तो परमेश्वर आत्माओं को द्रवित कर देंगे कि हम फल पैदा कर सकें। हम एक ही देह के अंग हैं। जब प्रत्येक सदस्य सुसमाचार के लिए मेहनत करे; कोई सुसमाचार का बीज बोए और कोई उन्हें पानी पिलाए, तो वे ऐसा करते हुए फल पैदा करेंगे।
भाइयो और बहनो! इस बात को न भूल जाइए कि परमेश्वर ने हमें इस युग में सुसमाचार का कार्य समाप्त करने के लिए बुलाया है। मैं आशा करता हूं कि विश्वास में सभी भाई और बहनें, जब अंतिम दिन में परमेश्वर सुसमाचार का कार्य समाप्त करेंगे, तो “हल्लिलूयाह!” पुकारते हुए स्वर्ग में वापस जाएंगे।