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एक दूसरे की सहायता करते हुए मिलकर प्रचार करना

हमारे पिता ने कहा था कि‚ “सेना तुरही की आवाज पर आगे बढ़ती है‚ और परमेश्वर के लोग भविष्यवाणी की आवाज पर आगे बढ़ते हैं।”

तो अब‚ हमें कौन सी भविष्यवाणी की आवाज पर ध्यान देना चाहिए? यह परमेश्वर का वचन है कि‚ “एक दूसरे की सहायता करते हुए सुसमाचार का कार्य पूरा करो।” आइए हम बाइबल का अध्ययन करते हुए इस भविष्यवाणी में छिपी परमेश्वर की इच्छा को समझें।

मसीह के उदाहरण का पालन करो



परमेश्वर चाहते हैं कि हम यीशु मसीह के उदाहरण के अनुसार एक मन हो जाएं।

रो 15:5–6 धीरज और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। ताकि तुम एक मन और एक स्वर में हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की स्तुति करो।

हमारे शिक्षक यीशु ने ऐसा कहते हुए कि, “मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो,” हमेशा हमारे लिए उदाहरण दिया है। मसीह के बहुत से उदाहरणों में से, आइए हम प्रचार करने के उदाहरण को ध्यान से देखें: भोर से लेकर देर रात तक यीशु लगातार प्रचार करते थे।(मर 1:35–39)

मसीह उन आत्माओं को बचाने के लिए आए थे जो पाप की वजह से मरने वाली थीं; उन्होंने अपना पूरा जीवन सुसमाचार का प्रचार करते हुए बिताया। और जब यीशु इस पृथ्वी पर अपना कार्य समाप्त करके स्वर्ग में चले गए, तब भी उनकी अंतिम इच्छा यही थी कि, “सारी जातियों को सुसमाचार का प्रचार करो।”

यदि हम मसीह के समान बनना चाहते हैं, तो हम सब को एक मन होकर सुसमाचार का प्रचार करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। प्रचार करना परमेश्वर की इच्छा की घोषणा करते हुए परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को दर्शाना है और वह संसार को बचाने का रास्ता भी है। अब समय है कि हम एक मन बनें और संसार को बचाने के महान कार्य को पूरा करें। आइए हम भविष्यवाणी की तुरही को सुनते हुए और एक दूसरे की सहायता करते हुए आपस में मिलकर सुसमाचार का प्रचार करें।

दाख की बारी में मजदूरों का दृष्टान्त



परमेश्वर के दिए गए नीचे के दृष्टान्त में भी हमारी एकता के विषय में परमेश्वर की इच्छा जाहिर होती है।

मत 20:1–16(आइ.बी.पी. बाइबल) “स्वर्ग का राज्य उस स्वामी के समान है जो सुबह इसलिए निकला कि मजदूरों को अपनी दाख की बारी में काम करने के लिए लगाए। उसने प्रति मजदूर एक रुपया प्रतिदिन ठहराकर उन्हें अपनी दाख की बारी में भेजा। फिर सुबह लगभग नौ बजे जब वह बाहर आया तो दूसरों को बाजार में बेकार खड़े देखा, और उनसे कहा, ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ। जो ठीक है वही मैं तुम्हें दूंगा।’ और वे चले गए। फिर बारह बजे और तीन बजे के लगभग उसने बाहर निकलकर वैसा ही किया। लगभग पांच बजे फिर बाहर निकलकर... ‘तुम भी दाख की बारी में जाओ।’ सन्ध्या होने पर दाख की बारी के स्वामी ने प्रबंधक को बुलाकर कहा, ‘मजदूरों को बुला और अन्त में आने वालों से आरम्भ करके पहिले आने वालों तक सब को मजदूरी दे दे।’ लगभग पांच बजे सन्ध्या समय जो मजदूरी पर लगाए गए थे, जब वे आए तो उन्हें एक एक रुपया मिला। जब पहले लगाए गए मजदूर आए... तो वे यह कहकर स्वामी से बुड़बुड़ाने लगे, ‘ये जो बाद में आए, इन्होंने तो एक ही घंटा काम किया और तू ने उन्हें हमारे ही बराबर कर दिया जिन्होंने दिन भर का भार उठाया और कड़ी धूप सही।’ पर उसने उनमें से एकको उत्तर दिया, ‘मित्र, मैं तेरे साथ कोई अन्याय नहीं कर रहा हूं। क्या तू ने मेरे साथ एक रुपया मजदूरी तय नहीं की थी? जो तेरा है उसे ले और चला जा। यह मेरी इच्छा है कि जितना तुझे दिया है उतना ही इस बाद में आने वाले को भी दूं।’...”

इस दृष्टान्त में दाख की बारी के स्वामी ने उन सब को जो बाहर कुछ भी काम न करते हुए बेकार खड़े थे, अपनी दाख की बारी में काम करने का मौका दिया। वे दिन के अलग अलग समय में मजदूरी पर लगाए गए थे; कुछ भोर के समय लगाए गए थे, और कुछ सुबह 9 बजे, कुछ दोपहर 12 बजे, कुछ दोपहर 3 बजे, तो कुछ शाम 5 बजे मजदूरी पर लगाए गए थे।

हालांकि, उन सब ने एक समान वेतन पाया। मनुष्य के विचार में यह स्वाभाविक लगता है कि जिन्होंने लम्बे समय तक काम किया है उन्हें ज्यादा वेतन मिलना चाहिए, हालांकि, दाख की बारी के स्वामी, यानी परमेश्वर ने सब से आखिर में काम पर लिए गए मजदूर से लेकर सबसे पहले काम पर लिए गए मजदूर तक सबको एक समान वेतन दिया।

परमेश्वर न्यायी हैं।(व्य 32:4) वह हर एक को उसके कार्यों के अनुसार बदला देते हैं।(प्रक 22:12) परमेश्वर ने जो न्यायी हैं, सभी मजदूरों को एक समान वेतन दिया, फिर चाहे उन्होंने एक घंटे के लिए काम किया हो या पूरे दिन के लिए। यह हमें इस निष्कर्ष पर ले आता है कि चाहे उन्होंने दिन के अलग अलग समय पर काम शुरू किया हो, अंत में तो उनके कार्यों की मात्रा एक समान थी।

एकता में नई यरूशलेम मंदिर का निर्माण पूरा करो



दाख की बारी के मजदूरों के दृष्टान्त के द्वारा, परमेश्वर हमें सिखाते हैं कि हमें इस बात को लेकर घमण्ड नहीं करना चाहिए कि हमें दूसरों से जल्दी बुलाया गया है। नेता होने के नाते हमें इस बात पर अहंकार नहीं करना चाहिए कि हमने सत्य को पहले ग्रहण किया था, लेकिन हमें बाद में बुलाए गए सदस्यों को चर्च में अच्छे से काम करने के लिए सहायता देनी चाहिए। ऐसा करते हुए हम सब स्वर्ग के राज्य में आशीर्वाद और इनाम पाएंगे। यही हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा है।

हम सब यरूशलेम के आत्मिक मंदिर की सामग्रियों के रूप में, एक साथ मिलकर परमेश्वर में बनाए जा रहे हैं।(इफ 2:20–22) जिन्होंने भोर को दाख की बारी में प्रवेश किया था, वे नई यरूशलेम मंदिर में स्तंभ हैं, और जिन्होंने शाम 5 बजे प्रवेश किया था, वे वो सामग्रियां हैं जिनका उपयोग निर्माण की समाप्ति की प्रक्रिया में किया जाता है।

एक मकान बनाते समय बुनियादी निर्माण के लिए सामग्रियां और निर्माण की समाप्ति के लिए सामग्रियां हैं, और उन दोनों के कार्यों के बीच मूलभूत अंतर होता है। जो स्तंभ का कार्य करते हैं, वे उसी समय निर्माण की समाप्ति के लिए सामग्रियों का कार्य नहीं कर सकते। स्वर्गीय यरूशलेम मन्दिर की सामग्रियों के रूप में हम में से प्रत्येक के पास अपनी अपनी भूमिका और कार्य हैं। किसी एक व्यक्ति के लिए अपनी मूल भूमिका के अलावा बाकी सब काम करना असम्भव है।

हमें, जिन्हें पहले बुलाया गया है, बाद में आने वालों की सहायता करनी चाहिए, ताकि वे हमारे पिता और माता की इच्छा का विश्वास के साथ पालन कर सकें। यह हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा है कि हम एक दूसरे की सहायता करते हुए सुसमाचार का कार्य ईमानदारी से पूरा करें।

दाख की बारी के मजदूरों के दृष्टान्त में, देर से आने वालों ने थोड़े ही समय में बहुत ज्यादा काम किया था, इसलिए वे एक रुपया पा सके। संभवत: उन साथी मजदूरों ने जो दाख की बारी में पहले से काम कर रहे थे, उनकी सहायता की होगी। पहले आने वालों ने शायद उनके साथ अपने अनुभव और हुनर बांटते हुए उनकी सहायता की होगी। उसी तरह से, सिय्योन में हमारे परिवार के सदस्य भी एक साथ मिलकर मेलजोल से सुसमाचार का कार्य कर रहे हैं। इससे पिता और माता प्रसन्न होते हैं और वे हम सब को एक समान आशीर्वाद, यानी स्वर्ग के राज्य की प्रतिज्ञा देते हैं।

अवश्य ही, जो पहले आए थे और दूसरों से ज्यादा समय तक मेहनत की है, वे अपनी सहनशीलता और धीरज बनाए रखने के लिए आशीषित किए जाएंगे। जब हमारे स्वामी हम से आत्मिक लेखा लेंगे, तो हम में से कुछ प्रेम बांटने के लिए, कुछ दूसरों की सहायता करने के लिए, और कुछ बहुत से फल उत्पन्न करने के लिए इनाम पाएंगे। तब परमेश्वर ऐसा कहते हुए हमारी बड़ी सराहना करेंगे कि, “तुम सच में मेरी सन्तान बनने के लायक हो।”

हम एक परिवार के सदस्य हैं



हम स्वर्गीय परिवार के सदस्य हैं। हालांकि, हम कभी–कभी परिवार के गहरे और प्रेममय संबंध को नहीं समझ पाते या महसूस नहीं कर पाते। यह ज्यादातर इस कारण से होता है क्योंकि हमने अभी तक शरीर पहन रखा है।

क्या कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य से घर का काम उत्सुकता से करने के कारण घृणा करता है? कदापि नहीं। हालांकि, जल्दी से अपने खोए हुए भाइयों और बहनों को खोजने के बाद स्वर्गीय घर में अनन्तकाल तक आनन्द भोगने की आत्मिक आशा रखने के बजाय, यदि हम सिर्फ अपनी स्वार्थी इच्छाओं का पीछा करें, तो हम उन भाइयों और बहनों के प्रति ईष्र्यालु हो सकते हैं जो हम से अधिक प्रतिभाशाली हैं।

यदि हम सिर्फ अपने आपकी, अपने समूह की, या अपने चर्च की परवाह करें, तो हम स्वर्गीय परिवार के सदस्य होने के लायक नहीं हैं। हमारे पास, जो पहले आए हैं, एक परिपक्व विश्वास होना चाहिए और अपने छोटे भाइयों और बहनों को सुसमाचार के लिए ज्यादा मेहनत करने में मदद करनी चाहिए। कभी–कभी छोटे भाई और बहनें अविचारपूर्वक व्यवहार कर सकते हैं, फिर भी हमें उन्हें अपने अविवेकी व्यवहार सुधारकर पिता और माता की इच्छाओं का पालन करने में सहायता करनी चाहिए। एक विश्वासपात्र सहायक के रूप में, हमें अच्छे कार्य करने में उनकी सहायता करनी चाहिए। और यदि वे सही मार्ग से भटक जाएं, तो उन्हें वापस लाने के लिए उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। हमारे स्वर्ग तक के सफर में, हमें एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए, ताकि हमारे आत्मिक परिवार के सभी सदस्य एक साथ स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करें।

फसह की रोटी और दाखमधु से हम मसीह के मांस और लहू में सहभागी हो गए हैं, इसलिए हम सब एक हैं।(1कुर 10:16–17) तल्मूड में, एक दो सिर वाले मनुष्य की कहानी है। यह कहानी हमें इसे जानने के लिए बुद्धि–भरी सलाह देती है कि दो सिर वाले मनुष्य को क्या एक व्यक्ति माना जाएगा या दो व्यक्ति। यदि एक सिर के ऊपर गर्म पानी डाला जाए और दूसरा सिर पीड़ा से चिल्लाए, तो यह साबित करता है कि दो सिर एक ही मनुष्य के अंग हैं। हालांकि, यदि दूसरे सिर को बिल्कुल भी पीड़ा न हो, तो यह साफ है कि वे एक मनुष्य के नहीं हैं।
जैसे कि परमेश्वर ने कहा है कि, “यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं,” हम जो बहुत सारे हैं, एक शरीर है।

1कुर 12:12–27 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। क्योंकि हम सब ने... एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं परन्तु बहुत से हैं। यदि पांव कहे, “मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं,” तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?... यदि सारी देह आंख की होती तो सुनना कहां होता? यदि सारी देह कान ही होती, तो सूंघना कहां होता? परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है...

चाहे हाथ, आंखें, और पांव का कार्य अलग अलग हैं, वे एक ही शरीर के अंग हैं। सिय्योन के परिवार के सभी सदस्य एक शरीर के हैं, इसलिए शरीर में कोई फूट नहीं होनी चाहिए, लेकिन हम सब को एक दूसरे की बराबर चिन्ता करनी चाहिए।

एकता में सुसमाचार का फल उत्पन्न करो



जब तक हम एक दूसरे की सहायता करते हुए मिलकर प्रचार न करें, तब तक राज्य के सुसमाचार का कार्य पूरा नहीं हो सकता। यदि हम एक होकर कार्य न करें, तो हम परमेश्वर के सैनिक नहीं बन सकते जो भविष्यवाणी के तुरही नाद पर आगे बढ़ते हैं।

भज 126:3–6 ... हे यहोवा, दक्खिन देश के नालों के समान, हमारे बन्दियों को लौटा ले आ। जो आंसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएंगे। चाहे बोनेवाला बीज लेकर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियां लिए जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा।

अब, सिय्योन के परिवार के सदस्य तकलीफों में भी परमेश्वर के वचन का बीज बो रहे हैं कि वे आनन्द का फल काट सकें। सिय्योन में प्रत्येक भाई और बहन पीड़ाओं के द्वारा काटा गया फल है, और वे हमारे परिवार के बहुमूल्य सदस्य हैं जिन्हें हमने एक–एक करके बेबीलोन से खोज निकाला है। इसलिए चाहे भोर को काम करना शुरू किया हो या शाम 5 बजे शुरू किया हो, हम में से किसी को भी कुड़कुड़ाना नहीं चाहिए। यह कुछ महत्व नहीं रखता कि हमने परमेश्वर की दाख की बारी में कब प्रवेश किया था, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सब स्वर्गीय परिवार के सदस्य हैं।

हमें, जिन्हें परमेश्वर की दाख की बारी में काम करने का मौका दिया गया है, एक दूसरे की सहायता करते हुए साथ मिलजुलकर काम करना है, ताकि हम बहुत से फल उत्पन्न कर सकें। जब हम अपने आत्मिक रूप से छोटे भाई–बहनों के कार्यों को और आगे बढ़ाने के लिए समर्थन देंगे, तो सुसमाचार का कार्य और भी शीघ्रता से पूरा हो जाएगा। यदि एक बड़ा भाई जिसने भोर को काम करना शुरू किया था, थोड़ा सा थक जाए, तो वह भाई जिसने दोपहर 12 बजे दाख की बारी में प्रवेश किया था, ज्यादा मेहनत कर सकता है। यदि किसी वजह से वह भी थक जाए, तो वह भाई जिसने दोपहर 3 बजे प्रवेश किया था, ज्यादा प्रयत्न कर सकता है। यदि वह भी थक जाए, तो सबसे छोटा भाई जिसने शाम 5 बजे प्रवेश किया था, कार्य को पूरा कर सकता है।

जब हम एक दूसरे की सहायता करते हैं, तब हम पिता और माता को प्रसन्न करने वाले अच्छे फल पैदा करने के लिए दाख की बारी को विकसित कर सकते हैं।

प्रेम से एक दूसरे के दास बनो



परमेश्वर ने हमें, जो अनन्त स्वर्ग के राज्य की आशा करते हैं, स्वयं को ऊंचा उठाने के बजाय प्रेम से एक दूसरे के दास बनने के लिए कहा है।

गल 5:13 हे भाइयो, तुम स्वतंत्र होने के लिये बुलाए गए हो; परन्तु ऐसा न हो कि यह स्वतंत्रता शारीरिक कामों के लिये अवसर बने, वरन् प्रेम से एक दूसरे के दास बनो।

माता–पिता चाहते हैं कि लोग उनकी सन्तानों का आदर करें। उसी तरह से परमेश्वर चाहते हैं कि उनकी सन्तान भी स्वर्ग के राज्य में राजाओं की तरह आदर पाएं। हालांकि, इस पृथ्वी पर वे चाहते हैं कि हम एक दूसरे के दास बनें।

जिन्हें पहले बुलाया गया है, वे परिवार में बड़े भाई का कार्य करते हैं। जब पहला बच्चा पैदा होता है, माता–पिता अपने पहले बच्चे पर अपना प्रेम उण्डेल देते हैं। हालांकि, जब उन्हें दूसरी सन्तान होती है, तब उनकी पूरी शक्ति उसकी ओर केन्द्रित हो जाती है। माता–पिता के लिए तो उनकी दोनों सन्तान बहुमूल्य हैं; हालांकि, आम तौर पर छोटे बच्चे पर बड़े बच्चे से ज्यादा ध्यान रखे जाने की आवश्यकता होती है। इसी वजह से, सब से छोटा बच्चा अपने माता–पिता से ज्यादा देखभाल पाता है। इसके अलावा, उसके सभी भाई–बहनें भी बड़े ही ध्यान के साथ उसकी देखभाल करते हैं।

यदि हम जिन्हें पहले बुलाया गया है, अपने सिय्योन के परिवार के सदस्यों की सहायता करने के बजाय अभी भी उनसे सेवा प्राप्त करना चाहते हैं, तो हम ऐसे बड़े भाई से बिल्कुल भी अलग नहीं हैं जो अपने छोटे भाई से सेवा पाने की आशा करता है। एक छोटा सा बच्चा अपने बड़े भाई की सेवा कैसे कर सकता है? हमें अपने छोटे भाइयों और बहनों के प्रति विचारशील होते हुए उनकी अच्छे से देखभाल करनी चाहिए। यह पिता और माता की इच्छा है, और इसी वजह से बाइबल कहती है कि, “बड़े को छोटे के दास बनना चाहिए।”

फिलि 1:27–28 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल–चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त होकर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो, और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते। यह उनके लिये विनाश का स्पष्ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का और यह परमेश्वर की ओर से है।

जब हम एक दूसरे की सहायता और सेवा करते हैं, हम एक हो जाते हैं। यदि सिय्योन के परिवार के सभी सदस्य मन से एक हो जाएं और एक दूसरे की सेवा करें, तो यह हमारे शत्रु शैतान के लिए विनाश का स्पष्ट चिन्ह बनता है, परन्तु हमारे लिए उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है।

जैसे कि भजनसंहिता में लिखा है कि, “यह क्या ही भली और मनोहर बात है कि भाई लोग आपस में मिले रहें!”(भज 133:1–3) परमेश्वर चाहते हैं कि सिय्योन में उनकी सन्तान एक चित्त और एक मन की हो। परमेश्वर के लोगों को भविष्यवाणी की आवाज पर आगे बढ़ना चाहिए। इसलिए चर्च ऑफ गॉड के सभी भाइयों और बहनों को, जो परमेश्वर के शासन में हैं, सुंदर एकता को बनाए रखना चाहिए।

एक शरीर के अंगों के रूप में और नई यरूशलेम मंदिर की सामग्रियों के रूप में, आइए हम अपना कार्य ईमानदारी से करें। चाहे हमारे चरित्र एक दूसरे से विपरीत और भिन्न हों, हमें इस भिन्नता को एक शरीर के भिन्न अंगों की तरह समझना चाहिए और हमें एक दूसरे के पूरक होने चाहिए, ताकि हम सब एक साथ स्वर्ग जा सकें।

आइए हम अपने परिवार के सदस्यों को, खास तौर पर उन्हें जिन्होंने शाम 5 बजे दाख की बारी में प्रवेश किया है, सहायता दें, ताकि वे भी परमेश्वर को प्रसन्न करने योग्य विश्वास धारण कर सकें। आइए हम उन्हें प्रोत्साहित करें और फल उत्पन्न करने में सहायता करें। तब यह सुसमाचार सामरिया और पृथ्वी की छोर तक शीघ्रता से फैल जाएगा। जब तक सभी भविष्यवाणियां पूरी न हो जाएं, हमें सभी परिश्रमों को सहन करते हुए अपने प्रयासों में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहिए। सिय्योन के प्रेमी भाइयो और बहनो! सेवा करवाने की आशा रखने के बजाय, आइए हम एक दूसरे की सेवा करें। तब परमेश्वर हमारी आशाओं को पूरा करेंगे और हमें सुसमाचार के फल बहुतायत से उत्पन्न करने देंगे।