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आइए हम परमेश्वर की बड़ाई करो

प्रकाशितवाक्य के 22वें अध्याय में, जो बाइबल का आखिरी अध्याय है, हम वह दृश्य देख सकते हैं जहां परमेश्वर पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में इस पृथ्वी पर प्रकट होते हैं और सारी मानवजाति की अगुवाई उद्धार की ओर करते हैं। यह स्पष्ट प्रकाशन है जो प्रेरित यूहन्ना ने देखा, और यह एक भविष्यवाणी है जो जरूर पूरी होनी चाहिए। और फिर बाइबल ने कहा कि हमें न तो कुछ इस भविष्यवाणी की बातों में बढ़ाना है और न ही उन में से कुछ घटाना है।(प्रक 22:17–19)

भविष्यवाणी के अनुसार पिता परमेश्वर जो पवित्र आत्मा हैं, और माता परमेश्वर जो दुल्हिन हैं, मनुष्यों को, जिनके लिए सदा मरना नियुक्त किया गया था, जीवन का जल दे रहे हैं, और जहां कहीं भी इस शुभ संदेश का प्रचार होता है, बहुत आत्माएं पुनर्जीवित होती हैं।

विश्वास के पूर्वजों ने हमेशा परमेश्वर की बड़ाई की। पिता के युग में उन्होंने यहोवा की बड़ाई की, और पुत्र के युग में यीशु मसीह की बड़ाई की। आज पवित्र आत्मा के युग में सिय्योन के लोगों को पवित्र आत्मा और दुल्हिन की गवाही देने का और उनकी बड़ाई करने का मिशन दिया गया है। जितना ज्यादा हम लोगों के सामने अपने उद्धारकर्ता एलोहीम परमेश्वर की बड़ाई करेंगे, उतने ज्यादा परमेश्वर प्रसन्न होकर हमें सुसमाचार के बहुत से फल प्रदान करेंगे। दरअसल यह विश्व सुसमाचार के कार्य की वर्तमान स्थिति के द्वारा साबित हुआ है।

पृथ्वी परमेश्वर की महिमा के ज्ञान से भर जाएगी



अभी सिय्योन के सभी सदस्य परमेश्वर की महिमा प्रदर्शित कर रहे हैं और परमेश्वर की अधिक बड़ाई कर रहे हैं। खास कर अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रचार यात्रा टीम परमेश्वर की बड़ाई करने में ज्यादा समर्पित हैं।

अल्पकालिक प्रचार यात्रा टीम के सदस्य जिस देश में जाते हैं वहां की भाषा और संस्कृति से परिचित नहीं होते। फिर भी, वे सिर्फ कुछ सप्ताहों में उससे कहीं ज्यादा फलों को हासिल करते हैं जितना स्थानीय सदस्य जो स्थानीय भाषा धाराप्रवाह बोल सकते हैं, एक वर्ष में हासिल करते हैं। यह देखकर स्थानीय चर्च के सदस्य बहुत ज्यादा चकित हो जाते हैं, और वे अल्पकालिक प्रचार यात्रा टीम के सदस्यों के पास जैसा जोश और विश्वास है, वैसा पाने के लिए परमेश्वर से विनती करते हैं। वे कहते हैं कि वे भी सुसमाचार का प्रचार करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, पर कुछ आश्चर्यजनक और अकल्पनीय घटना घटित होती है जब अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक प्रचार यात्रा टीम के सदस्य आकर प्रचार करते हैं।

प्रचार यात्रा टीम के सदस्य कहते हैं कि उन्होंने विदेश में सिर्फ यरूशलेम माता की सच्चाई के बारे में प्रचार किया। भले ही उनकी भाषा टूटी–फूटी थी, उन्होंने माता परमेश्वर का उत्सुकता से प्रचार किया और उद्धार की घोषणा की। यही वह रहस्य है। “स्वर्गीय माता इस पृथ्वी पर आ चुकी हैं, इसलिए कृपया माता के पंखों के नीचे उद्धार और आशीष पाइए।” यही उनके प्रचार का विषय है। इसी कारण थोड़े समय के दौरान भी, बहुत सी आत्माएं एक–एक करके सिय्योन में लौट आईं।

महाद्वीप और देश या दुनिया का कोई भी कोना हो, हर जगह जहां सदस्य परमेश्वर की अधिक बड़ाई करते हैं, वहां पवित्र आत्मा की आग तेजी से जल रही है। सत्य के योद्धा जहां कहीं भी जाते हैं, पूरे साहस के साथ प्रचार करते हैं कि एलोहीम परमेश्वर के नाम को छोड़ और कोई दूसरा उद्धारकर्ता का नाम नहीं है। उनकी आवाज पवित्र आत्मा की आग को भड़काने वाला तेल बना, जिससे पवित्र आत्मा की आग नहीं बुझती और जलती रहती है।

हब 2:14 क्योंकि पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भर जाता है।

हब 3:3 ईश्वर तेमान से आया, पवित्र ईश्वर परान पर्वत से आ रहा है। उसका तेज आकाश पर छाया हुआ है, और पृथ्वी उसकी स्तुति से परिपूर्ण हो गई है।

जब तक परमेश्वर की सारी भविष्यवाणियां पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उन में से एक छोटा अक्षर भी या एक छोटा शब्द भी गायब नहीं होगा। जैसे भविष्यवाणी की गई है, वह समय अवश्य आएगा जब पृथ्वी परमेश्वर की स्तुति से परिपूर्ण हो जाएगी और पृथ्वी परमेश्वर की महिमा के ज्ञान से भर जाएगी। तब संसार की सारी जातियों में ऐसा कोई नहीं होगा जो पवित्र एलोहीम परमेश्वर को न जानता हो। अभी ये सारी भविष्यवाणियां सच हो रही हैं क्योंकि सिय्योन के लोग भविष्यवाणी पर विश्वास करते हैं और संसार में जाकर एलोहीम परमेश्वर की बड़ाई करते हैं।

परमेश्वर की बड़ाई करो



जितना ज्यादा हम परमेश्वर की बड़ाई करेंगे, हम उतनी ज्यादा आत्माओं की अगुवाई उद्धार की ओर कर सकेंगे, क्योंकि दुष्ट आत्माएं नष्ट होती हैं। हमें अपनी बुद्धि, शक्ति और धन जैसी सांसारिक चीजों पर घमण्ड नहीं करना चाहिए। परन्तु हमें सिर्फ परमेश्वर पर, जो परमप्रधान हैं, घमण्ड करना चाहिए।

यिर्म 9:12–24 जो बुद्धिमान पुरुष हो वह इसका भेद समझ ले, और जिसने यहोवा के मुख से इसका कारण सुना हो वह बता दे... यहोवा यों कहता है: “बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूं जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूं।

यह हम पापियों के लिए अनुचित है कि हम अपने आपकी बड़ाई करें। हालांकि, अगर हम दुर्बल होंठों से भी परमेश्वर की बड़ाई करें, तो परमेश्वर हम से प्रसन्न होते हैं। क्योंकि हमारे परमेश्वर की बड़ाई करने से थकी हुई आत्माएं पुनर्जीवित होकर उद्धार पा सकती हैं।

भज 44:6–8 क्योंकि मैं अपने धनुष पर भरोसा न रखूंगा, और न अपनी तलवार के बल से बचूंगा। परन्तु तू ही ने हम को द्रोहियों से बचाया है, और हमारे बैरियों को निराश और लज्जित किया है। हम परमेश्वर की बड़ाई दिन भर करते रहते हैं, और सदैव तेरे नाम का धन्यवाद करते रहेंगे।

भजन संहिता की पुस्तक उन उद्धारकर्ता परमेश्वर के प्रति स्तुति और धन्यवाद से भरी हुई है, जो विपत्ति और कष्ट के समय हमारी ढाल और शरणस्थान बनते हैं और हमारे अंधकार में चलते समय हमारी ज्योति बनते हैं। इस प्रकार, भजन संहिता की पुस्तक के सारे विषयों में परमेश्वर की बड़ाई करने का वर्णन है।

भज 20:5–7 तब हम तेरे उद्धार के कारण ऊंचे स्वर से हर्षित होकर गाएंगे, और अपने परमेश्वर के नाम से झण्डे खड़े करेंगे... किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे।

हमें सबसे बड़ा घमण्ड है कि हम परमेश्वर की संतान हैं और हम राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु की सेवा करते हैं, है न? इससे बड़ा कोई घमण्ड नहीं हो सकता। हमें इस बात का घमण्ड नहीं है कि हमारे चर्च बड़े आकार के हैं, लेकिन हम इस तथ्य पर घमण्ड करते हैं कि सृष्टिकर्ता एलोहीम परमेश्वर हमारे साथ हैं, और हमें पाप और विपत्तियों से बचाते हैं।

भजन संहिता के लेखक, दाऊद ने यहोवा के नाम पर भरोसा और घमण्ड किया। जिन्होंने दाऊद की तरह अपना पूरा जीवन परमेश्वर की महिमा और बड़ाई करने में समर्पित किया, वे परमेश्वर के द्वारा आशीषित हुए और परमेश्वर के नबियों के रूप में बहुत आत्माओं का मृत्यु की छाया से अनन्त जीवन के मार्ग की ओर मार्गदर्शन किया और संसार को शुद्ध किया।

विश्वास के पूर्वज जिन्होंने परमेश्वर की बड़ाई की


पिता के युग में, परमेश्वर ने यहोवा के नाम से कार्य किया। इसलिए जब दाऊद ने पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर बाइबल लिखी, उसने यहोवा की बड़ाई की और उसकी प्रशंसा की। दाऊद हमेशा इस प्रकार यहोवा की बड़ाई करता था, “सृष्टिकर्ता यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।” इसलिए परमेश्वर ने उससे कहा, “वह मेरे मन के अनुसार मिल गया है।”

यिर्मयाह नबी ने भी गवाही दी कि उसे इस पर सबसे बड़ा घमण्ड है कि वह परमेश्वर को जानता और समझता है? उसने एक बार लोगों के उत्पीड़न और अत्याचार के डर से निर्णय लिया था कि वह यहोवा की चर्चा नहीं करेगा या उसके नाम से नहीं बोलेगा। लेकिन जब भी वह ऐसा करने का निर्णय लेता था, परमेश्वर का वचन उसके हृदय में भड़कती ज्वाला सी होती थी, और वह अपने भीतर परमेश्वर के वचन को रोकने में असमर्थ होता था।(यिर्म 20:9) इसलिए वह फिर से बहुत से लोगों को यह प्रचार करना जारी रखता था कि यहोवा पर विश्वास करें और उज्ज्वल भविष्य और उद्धार पाएं। परमेश्वर यिर्मयाह से प्रेम करते थे और संकट के समय में उसकी रक्षा करते थे।

सिर्फ दाऊद और यिर्मयाह ही नहीं, बल्कि पिता के युग के सभी दूसरे नबियों ने भी यहोवा की बड़ाई की। उनके लिए परमेश्वर की बड़ाई और महिमा करना उनके जीवन का ध्येय था और सबसे बड़ी खुशी थी; यह उनके विश्वास के जीवन का अहम हिस्सा था।

पुत्र के युग की स्थिति कैसी थी जब परमेश्वर ने उद्धार का कार्य यीशु के नाम से किया? पतरस, यूहन्ना और पौलुस जैसे सभी प्रेरितों ने और सभी संतों ने यीशु की बड़ाई की और मानव जाति को जगाया। जैसे ही वे जागे, उन्होंने यीशु की बड़ाई करना शुरू किया। हर दिन वे साहस के साथ बहुत लोगों को प्रचार करते थे, “प्रभु यीशु पर विश्वास करो, तो तुम्हारे सभी पाप क्षमा किए जाएंगे और तुम उद्धार पाओगे।”

पुराने नियम में यीशु के नाम का कहीं भी वर्णन नहीं था; यीशु के स्वर्गारोहण के 30 वर्ष बाद प्रेरितों ने नया नियम लिखना शुरू किया। हालांकि, उन्होंने यीशु के शारीरिक रूप को नहीं देखा, पर उनके ईश्वरीय स्वभाव को देखा, और पूर्ण विश्वास किया कि यीशु उद्धारकर्ता हैं जो इस पृथ्वी पर आए हैं, इसलिए जहां कहीं भी वे गए, उन्होंने यीशु की बड़ाई की।

इस युग में हमें किसकी बड़ाई करनी चाहिए? पवित्र आत्मा के युग में कोई भी बचाया नहीं जा सकता जब तक वह पवित्र आत्मा और दुल्हिन के पास नहीं आता, जो हमें पापों की क्षमा देते हैं और सारी मानव जाति की अगुवाई उद्धार की ओर करते हैं। पुत्र के युग में, प्रेरितों ने कहा, “प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।”(प्रे 16:31) हालांकि, वह समय आ गया है जब हमें लोगों से कहना है, “पवित्र आत्मा मसीह आन सांग होंग और माता परमेश्वर पर विश्वास करो, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।” किसी भी समय, कहीं भी हमें पिता परमेश्वर पर, जो पवित्र आत्मा हैं, और नई यरूशलेम स्वर्गीय माता पर, जो दुल्हिन हैं, घमण्ड करना चाहिए। इस युग में हमें यह मिशन दिया गया है।

आज इस संसार के लोग पूरी तरह से परमेश्वर के बारे में अनजान हैं। भले ही आदम से लेकर आज तक 6,000 वर्ष का लंबा भविष्यवाणी का समय बीत चुका है, फिर भी लोग यह भी नहीं जानते कि बाइबल स्वर्गीय माता की गवाही देती है। तो परमेश्वर कितने व्यथित होते हैं! इसी कारण वह इससे प्रसन्न होते हैं कि हम उन्हें जानते हैं।

प्रथम चर्च के समय में, तीन या पांच हजार लोगों ने सिर्फ एक दिन में मसीह को स्वीकार किया और बपतिस्मा लिया। पवित्र आत्मा का यह आश्चर्यजनक कार्य इसलिए संभव हुआ, क्योंकि प्रेरितों और सुसमाचार के नबियों ने उद्धारकर्ता के रूप में आए यीशु पर पूरी तरह विश्वास किया और हमेशा लोगों के सामने यीशु की बड़ाई की। उनकी
तरह हमें भी पूरे विश्वास के साथ दुनिया भर में पवित्र एलोहीम परमेश्वर का प्रचार करना चाहिए और उनकी बड़ाई करनी चाहिए।

आत्माएं पुनर्जीवित होती हैं जब हम परमेश्वर की बड़ाई करते हैं



आज दस तोड़ों का आंदोलन चल रहा है। यह आंदोलन उन स्वर्गीय पिता और माता के अनुग्रह का प्रतिदान देने का मकसद लेकर चल रहा है, जिन्होंने हमारे पाप क्षमा किए और हमें बचाया है। इसलिए हम में से हर एक को कम से कम दस अच्छे फल परमेश्वर को अर्पण करने चाहिए। हमें यह विश्वास करना चाहिए कि जब परमेश्वर ने हमें यह मिशन सौंपा है, तो उन्होंने अवश्य हमें पहले से उसे हासिल करने की शक्ति भी दी है।

हमें इस मिशन को पूरा करने के लिए क्या करना चाहिए? माता ने हमें सिखाया, “अगर कोई परमेश्वर में बना रहता है और परमेश्वर उसमें, वह बहुत फल फलता है।” परमेश्वर दाखलता है और हम डालियां हैं, इसलिए बहुत फल फलने के लिए हमें परमेश्वर में बने रहना है, और परमेश्वर को हम में बने रहना चाहिए।(यूह 15:1–5)

परमेश्वर में बने रहने का मार्ग है, परमेश्वर की बड़ाई करना। जो परमेश्वर की ज्यादा बड़ाई करते हैं, वे ज्यादा फल फलते हैं। सभी विश्वास के पूर्वजों ने भी, जिन्होंने बड़ी मेहनत से सुसमाचार का प्रचार किया, भली–भांति परमेश्वर की बड़ाई की। पतरस जिसने सिर्फ एक ही दिन में 3,000 लोगों की उद्धार की ओर अगुवाई की, और प्रेरित पौलुस जिसने चर्च स्थापित किया जहां कहीं भी वह गया, उन सब ने हमेशा भली–भांति परमेश्वर की बड़ाई की। जो परमेश्वर की अधिक बड़ाई करते हैं, परमेश्वर उनसे प्रसन्न होते हैं और उनके साथ रहते हैं।

आइए हम हर समय परमेश्वर की बड़ाई करें। हमें दुनिया भर के सभी लोगों को यह बताना चाहिए कि वह हमारे परमेश्वर हैं जो थकी हुई संतानों को शक्ति और निर्बलों को विश्वास की बुद्धि और साहस प्रदान करके सभी संतानों की अगुवाई अनन्त स्वर्ग के राज्य की ओर करते हैं।

भज 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।

बाइबल उन आत्माओं को “नम्र” कहती है, जिन्हें घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में सदा मरना है, और जो बिना किसी आशा और भविष्य के दुख में जी रही हैं। आज इस पूरे संसार में बहुत से नम्र लोग हैं जो लगातार हो रही विपत्तियों के कारण निराश हैं और नहीं जानते कि क्या करना है। बाइबल कहती है कि नम्र लोग उन परमेश्वर का शुभ संदेश सुनकर आनन्दित होंगे, जिनकी हम बड़ाई करते हैं। यीशु के प्रथम आगमन के समय, सबसे ज्यादा खुशी का संदेश यह था कि यीशु इस पृथ्वी पर आए। तो आज इस पृथ्वी पर रहने वाले सब लोगों के लिए सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक और खुशी का संदेश यह है कि स्वर्गीय पिता और माता, जो राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु हैं, हमें बचाने के लिए इस पृथ्वी पर आए हैं। चूंकि वे हमें ऐसी दुनिया की ओर ले जा रहे हैं, जहां पीड़ा न रहेगी, और न शोक, न विलाप रहेगा, इसलिए जो कोई यह शुभ समाचार सुनता है, उसका दिल आशा एवं खुशियों से उमड़–उमड़ आता है।

हब 3:16–19 ... क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़–बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकत्र्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है...

बाइबल कहती है कि भले ही हमारे पास कुछ नहीं है, हम अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहते हैं और शक्ति पाते हैं। अगर हम परमेश्वर की बड़ाई करें, तो जो बिना आशा के निराश हैं, वे अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा खुशी पाएंगे, और हमारे मन भी खुशी से भर जाएंगे। हमें यह शुभ संदेश सभी मनुष्यों तक पहुंचाना चाहिए, है न? तब परमेश्वर अपनी संतानों के प्रति, जो शुभ संदेश का प्रचार करते हैं, ऐसा कहेंगे, “पहाड़ों पर उसके पांव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है!”(यश 52:7)

चुप न रहो और यरूशलेम की महिमा पुकारो


अगर हमने परमेश्वर का प्रचार किया है, पर अभी तक परमेश्वर की ओर किसी भी पड़ोसी की अगुवाई नहीं कर सके हैं, तो हमें खुद को जांचना चाहिए कि हमने परमेश्वर का प्रचार केवल अपने ज्ञान से तो नहीं किया। कभी–कभी हम अनजाने में परमेश्वर के वचन के द्वारा अपनी शेखी बघार सकते हैं। जिसको सभी मनुष्य ढूंढ़ते हैं, वह सिर्फ परमेश्वर है, कोई दूसरा मनुष्य नहीं। मनुष्य को पाप क्षमा करने का और उद्धार देने का अधिकार नहीं है। किसी भी स्थिति में, हमें सिर्फ परमेश्वर की महिमा प्रकट करनी चाहिए। प्रेरित पौलुस ने यह कहते हुए, “मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है, केवल मसीह की बड़ाई की और उनकी महिमा प्रकट की। यही उसके बहुत ज्यादा फल फलने का रहस्यपूर्ण तरीका था।(गल 2:20)

प्रचार करना परमेश्वर की बड़ाई करना है। जो परमेश्वर की ज्यादा बड़ाई करते हैं, वे ज्यादा आशीष पाते हैं; जो परमेश्वर की बहुत ज्यादा बड़ाई करते हैं, वे सुसमाचार के कार्य में सबसे आगे होकर बहुतायत से फल फलते हैं। परमेश्वर ने हमें उद्धार दिया है, सारी चीजें बनाईं और हमारे लिए स्वर्ग का राज्य तैयार किया। आइए हम स्वर्गीय पिता और माता के असीम पे्रम और अनुग्रह को न भूलते हुए, दुनिया भर के सभी लोगों के सामने उनकी बड़ाई करें।

यश 62:6–7 हे यरूशलेम, मैंने तेरी शहरपनाह पर पहरुए बैठाए हैं; वे दिन रात कभी चुप न रहेंगे। हे यहोवा को स्मरण करनेवालो, चुप न रहो, और जब तक वह यरूशलेम को स्थिर करके उसकी प्रशंसा पृथ्वी पर न फैला दे, तब तक उसे भी चैन न लेने दो।

ऊपर के वचन में “पहरुए” वे हैं जो दिन रात यरूशलेम की महिमा की बड़ाई करते हैं। भविष्यवाणी के अनुसार यरूशलेम हमारी माता को दर्शाती है, जो स्वतंत्र हैं।(गल 4:26)

आइए हम यरूशलेम के पहरुओं के रूप में हमेशा स्वर्गीय यरूशलेम माता की महिमा प्रदर्शित करें। हमारे पिता परमेश्वर अपनी संतानों से कहते हैं कि चुप न रहो और यरूशलेम की महिमा पुकारो।

यिर्म 3:17 उस समय यरूशलेम यहोवा का सिंहासन कहलाएगा, और सब जातियां उसी यरूशलेम में मेरे नाम के निमित्त इकट्ठी हुआ करेंगी, और वे फिर अपने बुरे मन के हठ पर न चलेंगी। यह एक निश्चित भविष्यवाणी है कि सभी जातियों के लोग यरूशलेम माता के पास आएंगे।

आइए हम माता परमेश्वर की बड़ाई करें। हमें इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है कि हम कैसे दस तोड़ों का मिशन पूरा करेंगे। जिस समय से हम माता परमेश्वर की बड़ाई करेंगे, इस संसार में नम्र लोग सिय्योन में खुशी से आएंगे।

अल्पकालिक प्रचार यात्रा टीम के सदस्य विदेश में कैसे बहुतायत से सुसमाचार के फल फलते हैं, भले ही वे वहां की भाषा, रीति और संस्कृति से परिचित नहीं हैं? यह इसलिए है कि वे पूरी तरह से माता परमेश्वर पर निर्भर होते हैं और बिना आराम किए उनकी बड़ाई करते हैं। अगर हम परमेश्वर की बड़ाई करेंगे, तो सुसमाचार का फल स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होगा। एक चुंबक का बल अदृश्य है, लेकिन जब वह काम करता है, वह अपने आसपास के सभी धातुओं को आकर्षित करता है। उसी प्रकार जब हम परमेश्वर की बड़ाई करते हैं, तब ऐसी आत्मिक शक्ति उत्पन्न होती है जो लोगों को परमेश्वर की
ओर आकर्षित करती है।

आइए हम भविष्यवाणी पर पूरी तरह से विश्वास करके, दुनिया भर के सभी लोगों के बीच पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर की बड़ाई करें और इस भविष्यवाणी को पूरा करें कि सभी जातियां पिता और माता की महिमा से प्रभावित होकर धारा के समान सिय्योन की ओर उमड़ आएंगी। मुझे आशा है कि आप सब दस तोड़े कमाएं और उससे ज्यादा बहुतायत से फल उत्पन्न करके स्वर्गीय इनाम संग्रहित करें और परमेश्वर को महिमा दें।