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परमेश्वर हमें देखते हैं

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार परमेश्वर का वचन दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है। चूंकि सत्य इतनी जल्दी से प्रचार किया जा रहा है, तो ज्यादा से ज्यादा लोग सिय्योन में इकट्ठा हो रहे हैं। इसलिए, अब भी कुछ सदस्य हैं जिनके पास ऐसी आदतें होती हैं जो उन्होंने संसार से सीखी थीं।

चूंकि हमने सत्य को ग्रहण किया, हम परमेश्वर में खुदको थोड़ा थोड़ा करके संसार की गंदगी को साफ कर रहे हैं, इसलिए हम ईमानदार व्यक्तित्व और व्यवहार के साथ संपूर्ण जीव में बदल सकते हैं जो परमेश्वर चाहते हैं। बाइबल के द्वारा, आइए हम परमेश्वर की उत्सुक इच्छा को जांचें जो अपनी संतान को पूरी तरह फिर से जन्म लेना चाहते हैं।

परमेश्वर हर एक को देखते हैं



सिय्योन में एक बहन ने उसकी सहेली का सत्य में नेतृत्व किया। लेकिन उसकी सहेली हमेशा की तरह स्कूल में बेपरवाह होकर बात और बरताव करती रही, जिससे बहन को चिंता हुई। उसकी सहेली ने बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया, और कहा, “कोई नहीं देखता। तो क्या समस्या है?” तब बहन ने उससे कहा, “परमेश्वर हमारा सीसीटीवी हैं।”

यह एक छोटा शब्द है, लेकिन यह अर्थ सूचक संदेश केवल नए सदस्यों को नहीं बल्कि सिय्योन के सभी सदस्यों को एक चेतावनी देता है जो विश्वास का जीवन जीते हैं।

अतीत में, यदि कोई गवाह न होता तो अपराधी अपने अपराधों को छिपा सकते थे। लेकिन हाल ही में, लोगों की हरकतों को देखने के लिए सीसीटीवी कैमरा व्यापक रूप से लगाए गए हैं। वह सही और गलत का पता लगाने और फैसला करने में और अपराधियों को पकड़ने में एक निर्णायक भूमिका निभाता है। सीसीटीवी कैमरा उन लोगों को परेशान नहीं करता जो ईमानदार जीवन जीते हैं, लेकिन अपराधी उससे डरते हैं।

आत्मिक रूप में भी ऐसा ही है। हमारा हर व्यवहार परमेश्वर के सामने रिकॉर्ड हो रहा है। परमेश्वर हर एक को देखते हैं।

भज 33:11–13 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी। क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो! यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है...

परमेश्वर स्वर्ग से नीचे सभी लोगों को देखते हैं। जो सांसारिक हैं वे संदेह कर सकते हैं कि क्या सचमें परमेश्वर मानवजाति को देखते हैं। इसलिए वे कभी कभी ऐसे विचारों से अपराध करते हैं, जैसे कि ‘अंधेरा है, तो कोई मुझे देख नहीं सकता,’ ‘यहां मेरे अलावा कोई नहीं है।’ लेकिन परमेश्वर हर जगह देखते हैं।

परमेश्वर हमारे मनों की भावनाओं और विचारों को भी जानते हैं



परमेश्वर सभी लोगों को देखते हैं ताकि वह उद्धार के मार्ग पर उनकी अगुवाई कर सकें और उनके गलत विचार और व्यवहारों को सही कर सकें, और साथ ही उन्हें उनके खुदके विचार और कामों के अनुसार बदला दे सकें। इसलिए परमेश्वर मनुष्य के अच्छे और दुष्ट कार्यों और मनों को भी देखते हैं।

भज 53:1–2 मूढ़ ने अपने मन में कहा, “कोई परमेश्वर है ही नहीं।” वे बिगड़ गए, उन्होंने कुटिलता के घिनौने काम किए हैं; कोई सुकर्मी नहीं। परमेश्वर ने स्वर्ग पर से मनुष्यों के ऊपर दृष्टि की ताकि देखे कि कोई बुद्धि से चलनेवाला या परमेश्वर को पूछनेवाला है कि नहीं।

सबसे मूर्ख लोग वे हैं जो सोचते हैं कि परमेश्वर नहीं है क्योंकि वह अदृश्य हैं। उनके मूर्ख विचार के विपरीत, परमेश्वर स्वर्ग से सारी मानवजाति के ऊपर दृष्टि करते हैं ताकि देखें कि क्या कोई परमेश्वर को पूछनेवाला है कि नहीं, और उनकी ईमानदार प्रार्थनाओं को सुनते हैं। सभी मानवजाति के प्रति देखभाल और प्रेम के साथ, परमेश्वर उद्धार का कार्य करते हैं।

इब्र 4:12–13 क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है; और प्राण और आत्मा को, और गांठ–गांठ और गूदे–गूदे को अलग करके आर–पार छेदता है और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। सृष्टि की कोई वस्तु उससे छिपी नहीं है वरन् जिससे हमें काम है, उसकी आंखों के सामने सब वस्तुएं खुली और प्रगट हैं।

स्टारलाईट स्कोप जो सैन्य उपयोग के लिए विकसित किया गया, मंद प्रकाश और अवरक्त किरणों को परिवर्धित करके पूर्ण अंधकार में भी चीजों को पहचान सकता और लोगों की हरकतों का पता लगा सकता है। परमेश्वर के द्वारा सृजे गए मनुष्य भी ऐसे पूर्ण अंधकार में चीजों को देखने में सक्षम हैं। तो सृष्टिकर्ता परमेश्वर कितना अधिक देख सकेंगे? ऐसा कुछ नहीं है जो परमेश्वर के सामने छिपा सकता है।

परमेश्वर हमारे दृश्य कार्यों को देखते हैं और हमारी अदृश्य भावनाओं और विचारों को भी जानते हैं। इसलिए परमेश्वर के सृष्टि जीवों में से कुछ भी परमेश्वर से नहीं छिपा सकता।

कुछ भी परमेश्वर से नहीं छिपा सकता



परमेश्वर चाहते हैं कि हम अपनी परिस्थितियों की परवाह किए बिना, किसी भी समय और कहीं भी उनकी इच्छा के अनुसार अच्छे कार्य करें। चूंकि परमेश्वर हमारे व्यवहार और हमारे गहरे विचारों को भी जानते हैं, इसलिए वह हमारे गलत कार्यों को सही करते हैं और हमारी कमियों को सुधारते हैं। ऐसा करके परमेश्वर हमारी आशीष के मार्ग में अगुवाई करते हैं। उद्धार हमें तब दिया जाता है जब हम परमेश्वर की दृष्टि में सही मानसिकता और व्यवहार के साथ विश्वास के मार्ग का पालन करते हैं।

यिर्म 16:16–18 “देखो, यहोवा की यह वाणी है: मैं बहुत से मछुओं को बुलवा भेजूंगा कि वे इन लोगों को पकड़ लें, और फिर मैं बहुत से बहेलियों को बुलवा भेजूंगा कि वे इनका अहेर करके सब पहाड़ों और पहाड़ियों पर से और चट्टानों की दरारों में से निकालें। क्योंकि उनका पूरा चाल–चलन मेरी आंखों के सामने प्रगट है; वह मेरी दृष्टि से छिपा नहीं है, न उनका अधर्म मेरी आंखों से गुप्त है...”

यिर्म 23:23–24 “यहोवा की यह वाणी है: क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूं, जो दूर नहीं, निकट ही रहता हूं? फिर यहोवा की यह वाणी है: क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?”

परमेश्वर ने कहा कि चूंकि वह हर एक का पूरा चाल–चलन देखते हैं, इसलिए पापी परमेश्वर की दृष्टि से बचकर गुप्त स्थानों में नहीं छिप सकते और न उनका अधर्म परमेश्वर की आंखों से गुप्त है। वे लोगों से छिप सकते हैं, लेकिन परमेश्वर से जिससे स्वर्ग और पृथ्वी परिपूर्ण हैं, कोई भी गुप्त स्थानों में नहीं छिप सकता।

राजा नबूकदनेस्सर के स्वप्न की व्याख्या करने से पहले, नबी दानिय्येल ने भी घोषित किया कि परमेश्वर गूढ़ और गुप्त बातों को प्रगट करते हैं और चाहे कुछ अन्धियारे में हो, वह सब कुछ जानते हैं।

दान 2:17–22 तब दानिय्येल ने अपने घर जाकर, अपने संगी हनन्याह, मीशाएल, और अजर्याह को यह हाल बताकर कहा, इस भेद के विषय में स्वर्ग के परमेश्वर की दया के लिये यह कहकर प्रार्थना करो, कि बेबीलोन के और सब पण्डितों के संग, दानिय्येल और उसके संगी भी नष्ट न किए जाएं। तब वह भेद दानिय्येल को रात के समय दर्शन के द्वारा प्रगट किया गया। तब दानिय्येल ने स्वर्ग के परमेश्वर का यह कहकर धन्यवाद किया, “परमेश्वर का नाम युगानुयुग धन्य है; क्योंकि बुद्धि और पराक्रम उसी के हैं। समयों और ऋतुओं को वही बदलता है; राजाओं का अस्त और उदय भी वही करता है; बुद्धिमानों को बुद्धि और समझवालों को समझ भी वही देता है; वही गूढ़ और गुप्त बातों को प्रगट करता है; वह जानता है कि अन्धियारे में क्या है, और उसके संग सदा प्रकाश बना रहता है।”

अंतरिक्ष में यह पृथ्वी सिर्फ एक अत्यंत छोटा सा बिन्दु है। भले ही पृथ्वी इतनी छोटी है, लेकिन लोग उसे बहुत बड़ा मानते हैं और सोचते हैं कि वे परमेश्वर से अपने पापों को छिपा सकते हैं। लेकिन यह एक बहुत ही मूर्ख विचार है।

क्योंकि मनुष्य सोचते हैं कि वे गुप्त स्थानों में छिप सकते हैं, लेकिन परमेश्वर के सामने सब कुछ प्रगट है। परमेश्वर के पास उन चीजों को भी देखने की शक्ति है जो पूरी तरह से गुप्त है। कोई भी परमेश्वर से छिप नहीं सकता और कुछ भी परमेश्वर से गुप्त नहीं रह सकता।

परमेश्वर हर व्यक्ति को उनके कामों के अनुसार बदला देते हैं



परमेश्वर हमें देखते हैं क्योंकि वह हमसे प्रेम करते हैं। परमेश्वर हमसे इतना अधिक प्रेम करते हैं कि उन्होंने हमारे सिर के सब बाल भी गिने हैं, और वह हमसे अधिक हमारे बारे में जानते हैं(मत 10:30)। परमेश्वर सिर्फ हमारे बारे में चिंतित हैं। परमेश्वर की संतान के रूप में जो परमेश्वर से इतना अधिक प्रेम और देखभाल पाती है, आइए हम हर दिन परमेश्वर के अनन्त वचन के द्वारा फिर से जन्म लेने और बदलने का प्रयास करें।

परमेश्वर कहते हैं कि वह अंतिम न्याय के दिन पर हर व्यक्ति को उनके कामों के अनुसार बदला देंगे–धर्मियों को उनके धर्मी कार्य के लिए और दुष्टों को उनके दुष्ट कार्य के लिए बदला देंगे।

प्रक 2:23 मैं उसके बच्चों को मार डालूंगा; तब सब कलीसियाएं जान लेंगी कि हृदय और मन का परखनेवाला मैं ही हूं, और मैं तुम में से हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला दूंगा।

प्रक 20:11–14 फिर मैं ने एक बड़ा श्वेत सिंहासन और उसको, जो उस पर बैठा हुआ है, देखा; उसके सामने से पृथ्वी और आकाश भाग गए, और उनके लिये जगह न मिली। फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के सामने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गईं; और फिर एक और पुस्तक खोली गई; अर्थात् जीवन की पुस्तक; और जैसा उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, वैसे ही उनके कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया। समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उसमें थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उनमें थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामों के अनुसार उनका न्याय किया गया। मृत्यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए। यह आग की झील में डाले गए; यह आग की झील दूसरी मृत्यु है।

अंतिम दिन पर, पुस्तक में लिखी गई बातों के अनुसार मरे हुओं का न्याय उनके कामों के अनुसार किया जाएगा। दुष्टों को उनके दुष्ट कार्यों के अनुसार अन्त में आग की झील में डाला जाएगा। गुप्त में किए गए सभी कार्य भी परमेश्वर की पुस्तक में दर्ज हैं और परमेश्वर हमारे हर एक काम को देखते हैं। चूंकि परमेश्वर के सामने सब कुछ प्रकट होता है, तो कोई भी परमेश्वर के न्याय के सिंहासन के सामने अपने पापों के लिए कोई बहाना नहीं बना सकता।

इसलिए दुष्टता में फंसकर न्याय और दण्ड पाने के बजाय, धर्मियों की महिमा में प्रवेश करने के लिए क्या हमें अच्छा मन रखकर पवित्र और धार्मिक जीवन नहीं जीना चाहिए?

मत 16: 26–27 “यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा? मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आएगा, और उस समय ‘वह हर एक को उसके कामों के अनुसार प्रतिफल देगा।’”

यीशु ने वादा किया कि जब वह अपने स्वर्गदूतों के साथ महिमा में आएंगे, तब वह हर व्यक्ति को उनके कामों के अनुसार प्रतिफल देंगे। वह उन्हें जिन्होंने सुसमाचार के लिए कड़ी मेहनत की है उनके कार्य के अनुसार आशीष देंगे, और उन पर भी जिन्होंने लगातार प्रार्थना की, आशीष उंडेलेंगे जिसके वे योग्य हैं। बाइबल में लिखा है कि आशीष उन्हें भी दी जाएगी जो एकजुट होने के लिए दूसरों के प्रति विचारशील हुए और अपने आपको बलिदान किया।

पाप तब होता है जब हम भूल जाते हैं कि परमेश्वर हमेशा हमें देख रहे हैं। चूंकि हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, तो हमें निरंतर परमेश्वर के बारे में सोचना चाहिए जो हमें जांचते हैं और हमारे दैनिक जीवन में भी परमेश्वर की संतान कहलाने के लायक अच्छे शब्द और कार्य के साथ जीना चाहिए। सही मायने में बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो समझता है कि परमेश्वर के सामने सब कुछ प्रकट होता है।

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार राज्य का सुसमाचार दुनिया की सभी जातियों को अब प्रचार किया जा रहा है। थोड़े समय की शांति और आराम में लिप्त होने के बजाय, सोचना चाहिए कि हम स्वर्ग में प्रवेश करने के लिए किससे हमारा जीवन को भर देंगे। परमेश्वर की संतानों के रूप में, आइए हम परमेश्वर को प्रसन्न करने में अपना पूरा हृदय और मन लगाएं, ताकि जब हम अनन्त स्वर्ग के राज्य में वापस जाएं तब परमेश्वर से अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकें।

हमारे छोटे जीवनकाल में हमारा मिशन



हमारे पूर्वजों ने कहा, “जीवन भोर की ओस की बूंद के समान है।” इसका मतलब जैसे सूरज उगते ही घास पर ओस गायब हो जाती है, वैसे हमारा जीवन क्षणिक है। जीवन इतना छोटा है, तो हमें इस पृथ्वी की क्षणिक चीजों से विचलित नहीं होना चाहिए, लेकिन स्वर्ग की चीजों पर मन लगाना चाहिए, जैसे कि परमेश्वर ने हमें सिखाया:

मत 28:18–20 यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।”

यीशु ने हमसे कहा कि सब जातियों के लोगों के पास जाओ और उन्हें सब बातें जो मैंने आज्ञा दी है मानना सिखाओ। मानव जीवन क्षणभंगुर है, और इस जीवन के बाद सार दुनिया हमारा इंतजार कर रही है। जो इस तथ्य को सही तरह से समझते हैं वे परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करते हैं। परमेश्वर उन्हें धार्मिकता का अनुभव करने की अनुमति देते हैं जिसके द्वारा लोग पर्याप्त विश्वास रख सकते हैं।

दूसरी ओर, जो सोचते हैं कि उनका जीवन सदा के लिए रहेगा, उनके मनों में स्वर्ग के लिए विश्वास और आशा नहीं हो सकती। वे असहाय होकर सांसारिक चीजों पर अधिक मोहित हो जाएंगे। जिन्होंने परमेश्वर की इच्छा को समझा है और जिन्होंने नहीं, उनके बीच ऐसा बड़ा अंतर है। जब यीशु को क्रूस पर लटकाया गया था, तो उनके दाहिनी ओर और बाईं ओर दो डाकू थे।

जीवन के आखिरी क्षणों में, उन दोनों की समझ के बीच बड़ा अंतर था। बाईं ओर वाले डाकू ने अपने छोटे जीवनकाल के प्रति लगाव रखा और उसने भीड़ का साथ देकर यीशु की निन्दा की। इसके विपरीत, दाहिनी ओर वाले डाकू ने अपने पापों का पश्चाताप किया और उद्धार के लिए यीशु से आग्रहपूर्वक विनती की। यह इसलिए क्योंकि उसने संकट के क्षण से बचने की कोशिश करने के बजाय अनन्त दुनिया को देखा और उसके अनुसार कार्य किया।

सिकंदर महान जिसने दुनिया को पराजित करके इतिहास बदला, चंगेज खान जिसने दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा साम्राज्य स्थापित किया और नेपोलियन जिसने खुदको सम्राट घोषित कर दिया, अब उनका अस्तित्व नहीं है। उनके समय में, उनके पास दुनिया की सभी शक्ति थी, लेकिन सब कुछ जो उनके पास था, वह एक दिन ऐसा गायब हो गया जैसे उसका अस्तित्व ही न था।

जब एक नाटक समाप्त होता है, तब अभिनेता को मंच छोड़ना पड़ता है। उसी तरह, नायक को भी जो अपने युग में राज्य करता था, अन्त में मिट्टी में वापस जाना पड़ता है।

आइए हम खुदको एक बार फिर से स्मरण दिलाएं कि हमारा जीवन बहुत छोटा और सीमित है, और महसूस करें कि परमेश्वर हमारी अगुवाई सत्य के मार्ग में और धार्मिकता के मार्ग में करने के लिए हमें देख रहे हैं जो उद्धार पाने वाले हैं। परमेश्वर की संतानों के रूप में, हमें हमेशा परमेश्वर की महिमा को प्रदर्शित करना चाहिए, जो स्वर्ग के सीसीटीवी कैमरा में दर्ज किया जाएगा।

मैं आशा करता हूं कि उद्धार के मार्ग से जिस पर परमेश्वर हमारी अगुवाई करते हैं, एक भी सदस्य बिना चूके सभी विश्वास की शानदार उपलब्धियां हासिल करें, ताकि आप सभी अनन्त स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकें और परमेश्वर से जो हर व्यक्ति को उनके कामों के अनुसार बदला देते हैं, महान पुरस्कार प्राप्त कर सकें।