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लोग जो आशीषें पहुंचाते हैं


सर्वशक्तिमान परमेश्वर सभी मनुष्यों के जीवन, मृत्यु, सौभाग्य और दुर्भाग्य का नियंत्रण करते हैं। वह उन्हें जो उनके वचनों को मानते हैं, आशीष देते हैं और जो नहीं मानते, उन्हें दण्ड देते हैं।

आशीषों की प्रतिज्ञा उन्हें दी जाती है जो परमेश्वर को अपना खजाना मानते हैं और उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं(व्य 30:15–16; अय 22:21–28)। इसलिए आइए हम स्वर्ग की संतानों के रूप में दृढ़ता से विश्वास करें कि जैसी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने हमसे की है, उसी प्रकार सब कुछ सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा, और आइए हम स्वर्ग के राज्य में बलपूर्वक प्रवेश करने का प्रयास करें ताकि हम उन सभी आशीषों को पा सकें जो परमेश्वर हमें देंगे। चूंकि हम सिय्योन के लोगों के रूप में दूसरों से पहले आशीषित किए गए हैं, इसलिए 7 अरब लोगों को जिन्होंने आशीषों के मार्ग को न जानते हुए अब तक परमेश्वर का अनुग्रह नहीं पाया है, आइए हम शुभ संदेश का प्रचार करें और उनके साथ आशीषें साझा करें।

आशीष परमेश्वर पर निर्भर करती है



बाइबल में बहुत से लोग हैं जिन्हें परमेश्वर की इच्छा का संपूर्ण रूप से पालन करके बड़ी आशीष मिली। उनमें से एक दाऊद है जिसे परमेश्वर ने यह मान्यता दी, “वह मेरे मन के अनुरूप मनुष्य है।” दाऊद ने महसूस किया कि सभी आशीषें जिनका वह आनन्द ले रहा है, परमेश्वर की ओर से हैं, और उसने सारी सभा के सामने परमेश्वर की स्तुति की।

1इत 29:10–16 तब दाऊद ने सारी सभा के सम्मुख यहोवा का धन्यवाद किया, और दाऊद ने कहा, “हे यहोवा! हे हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्वर! अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है। हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान् ठहरा है। धन और महिमा तेरी ओर से मिलती हैं, और तू सभों के ऊपर प्रभुता करता है। सामर्थ्य और पराक्रम तेरे ही हाथ में हैं, और सब लोगों को बढ़ाना और बल देना तेरे हाथ में है...

जैसे दाऊद ने कहा, “महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव परमेश्वर का ही है, और सामर्थ्य और पराक्रम उनके ही हाथ में है, और सब लोगों को बढ़ाना और बल देना उनके हाथ में है।” सब कुछ जो हम करते हैं, वह आखिरकार परमेश्वर पर निर्भर होता है। यदि हम परमेश्वर की आशीष के बिना कुछ करें, तो उससे एक अप्रिय परिणाम निकल सकता है। लेकिन यदि हम परमेश्वर से आशीष पाएं और विश्वास के साथ करें, तो भले ही प्रक्रिया में मुश्किल होती है, लेकिन वह हमेशा अन्त में अच्छा परिणाम लाता है।

दाऊद इस तथ्य को अच्छी तरह जानता था, इसलिए उसने अपनी वसीयत में अपने बेटे सुलैमान से कहा कि वह परमेश्वर के वचनों को माने।

1रा 2:1–3 जब दाऊद के मरने का समय निकट आया, तब उसने अपने पुत्र सुलैमान से कहा, “मैं संसार की रीति पर कूच करनेवाला हूं इसलिये तू हियाव बांधकर पुरुषार्थ दिखा। और जो कुछ तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे सौंपा है, उसकी रक्षा करके उसके मार्गों पर चला करना और जैसा मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसा ही उसकी विधियों तथा आज्ञाओं, और नियमों, और चितौनियों का पालन करते रहना; जिससे जो कुछ तू करे और जहां कहीं तू जाए, उसमें तू सफल होए।

आशीषें तब आती हैं जब हम परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते हैं

दाऊद के समान यदि हम विश्वास करें कि सभी आशीषें परमेश्वर की ओर से आती हैं, और परमेश्वर के वचनों का पालन करें, तब जो कुछ हम करें और जहां कहीं हम जाएं, उसमें हम सफल हो सकेंगे। मूसा ने भी इस्राएलियों से वही बात कही।

व्य 28:1–14 यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाएं, जो मैं आज तुझे सुनाता हूं, चौकसी से पूरी करने को चित्त लगाकर उसकी सुने, तो वह तुझे पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ करेगा। फिर अपने परमेश्वर यहोवा की सुनने के कारण ये सब आशीर्वाद तुझ पर पूरे होंगे... धन्य हो तू भीतर आते समय, और धन्य हो तू बाहर जाते समय। यहोवा ऐसा करेगा कि तेरे शत्रु जो तुझ पर चढ़ाई करेंगे वे तुझ से हार जाएंगे... यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं को मानते हुए उसके मार्गों पर चले, तो वह अपनी शपथ के अनुसार तुझे अपनी पवित्र प्रजा करके स्थिर रखेगा। और पृथ्वी के देश देश के सब लोग यह देखकर, कि तू यहोवा का कहलाता है, तुझ से डर जाएंगे... और यहोवा तुझ को पूंछ नहीं, किन्तु सिर ही ठहराएगा, और तू नीचे नहीं, परन्तु ऊपर ही रहेगा; यदि परमेश्वर यहोवा की आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं, तू उनके मानने में मन लगाकर चौकसी करे; और जिन वचनों की मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं उनमें से किसी से दाहिने या बाएं मुड़के पराये देवताओं के पीछे न हो ले, और न उनकी सेवा करे।

बाइबल कहती है कि जो परमेश्वर के द्वारा आशीषित किए गए हैं, उन्हें परमेश्वर पूंछ नहीं, किन्तु सिर ठहराएंगे और पृथ्वी के देश देश के सब लोग उन्हें देखकर डर जाएंगे। बाइबल में परमेश्वर ने निश्चित रूप से प्रतिज्ञा की है कि वह उन्हें अपने पवित्र लोग बनाएंगे जो उनकी सब आज्ञाओं को चौकसी से पूरी करने को चित्त लगाकर सुनते हैं और उनका पालन करते हैं, और वह उन्हें पृथ्वी की सब जातियों में श्रेष्ठ करेंगे और जो कुछ वे करें, उसे पूरा करने के लिए उन्हें आशीष देंगे।

यदि हम अपने हृदयों पर परमेश्वर की आशीष को अधिक गहराई से अंकित करें और कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के सभी वचनों को हमेशा मानें, तो हम भीतर आते समय और बाहर जाते समय धन्य होंगे। अब तक परमेश्वर ने हमें बड़ी आशीषें दी हैं। मुझे आशा है कि आपमें से हर एक हमेशा परमेश्वर के वचनों का पालन करते हुए सिय्योन में असीम आशीषें प्राप्त करे जो परमेश्वर आगे और भी अधिक प्रचुरता से उण्डेलेंगे।

संसार में सभी लोगों को आशीष के वचन सुनाना



हम परमेश्वर की संतान हैं जिन्होंने बहुत अधिक आशीषों को प्राप्त किया है। परमेश्वर ने हमें अत्याधिक आशीषें दी हैं और हमें सामरिया और पृथ्वी की छोर तक जाने और सभी लोगों को ये आशीषें पहुंचाने के लिए कहा है।


मत 28:18–20 यीशु ने उनके पास आकर कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ; और उन्हें पिता, और पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो, और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे संग हूं।”

मर 16:15–16 और उसने उनसे कहा, तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो। जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।

यीशु ने स्वर्गारोहण से पहले अपने चेलों से कहा, “जाओ, सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ।” मरकुस में भी वही वचन लिखा है, “तुम सारे जगत में जाकर सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।”

यह वचन सिर्फ उन चेलों पर ही नहीं जो यीशु के प्रथम आगमन के समय रहते थे, बल्कि हम लोगों पर और भी अधिक लागू होता है जो पवित्र आत्मा के युग में रहते हैं जब पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दिया जाना चाहिए। यदि हम सारे जगत में जाएं और सारी सृष्टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करें, तो जो उसे स्वीकार करेंगे, वे उद्धार पाएंगे। बाइबल दिखाती है कि जब हम सुसमाचार प्रचार करते हैं, तब जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।

“सुसमाचार” शब्द का मतलब “शुभ समाचार” है। सुसमाचार यह उद्धार का शुभ समाचार है कि पापी पापों की क्षमा पा सकते हैं और अपने स्वर्गीय घर जा सकते हैं। उन मनुष्यों के लिए, जिनके लिए स्वर्ग में पाप करने के कारण मरना नियुक्त किया गया है, उद्धार के शुभ समाचार से बड़ी आशीष की बात और क्या हो सकती है?

इसलिए सुसमाचार का प्रचार करना दूसरों के साथ आशीषों को बांटने का कार्य है। सुसमाचार, जिसका मसीह ने सारे जगत में सभी जातियों को प्रचार करने को कहा, उद्धार का मार्ग प्रदान करता है जो मर रहे लोगों को सदा तक बचा सकता है। सिय्योन के लोग 7 अरब लोगों को इस शुभ समाचार का प्रचार करने के लिए मेहनत और प्रयास कर रहे हैं। सचमुच वे वो लोग हैं जो आशीषें पहुंचाते हैं।

क्या हमारे हृदयों में उस समय बड़ा आनन्द और खुशी महसूस नहीं होती जब हम अपने पड़ोसियों के साथ कुछ अच्छी चीज बांटते हैं? दूसरों के साथ स्वर्गीय आशीषों को बांटना एक ऐसा बड़ा आनन्द लाता है जिसकी तुलना संसार में किसी से भी नहीं की जा सकती। चूंकि हमें संसार में सभी लोगों को आशीषें पहुंचाने का मिशन सौंपा गया है, हमें अपने मिशन पर अधिक गर्व करना चाहिए और परमेश्वर के वचनों का प्रचार करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।


परमेश्वर की ओर से कार्य करने का हमारा मिशन और कर्तव्य



माता ने हमें दुनिया भर में 7 अरब लोगों को सुसमाचार प्रचार करने की पवित्र आज्ञा दी है। हमेशा की तरह आज भी, माता प्रार्थना के द्वारा हम पर आशीष उण्डेलती हैं। आइए हम विश्वास करें कि परमेश्वर के आशीष के वचन निश्चय ही हूबहू पूरे होंगे, और जैसे पतरस ने यीशु के वचन पर विश्वास करके जाल डाला, वैसे ही आइए हम परमेश्वर के वचनों पर निर्भर होकर दूसरों के साथ आशीष बांटने का प्रचार का मिशन पूरा करने के लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास करें।

बाइबल के द्वारा, आइए हम देखें कि परमेश्वर ने हमें किस प्रकार का अधिकार देकर सारे संसार में आशीषें पहुंचाने के लिए कहा।

यहेज 3:17 हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिए पहरुआ नियुक्त किया है; तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना।

परमेश्वर आशीषें पहुंचाने वालों से कहते हैं, “मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना।” दूसरे शब्दों में परमेश्वर कहते हैं कि हम उनकी ओर से लोगों को उनके वचनों का प्रचार करते हुए चिताएं। हमारा कर्तव्य परमेश्वर की ओर से कार्य करना है, तो यह कितना महान कर्तव्य है!

2कुर 5:20 इसलिए, हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा विनती कर रहा है। हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं कि परमेश्वर के साथ मेल–मिलाप कर लो।

बाइबल प्रथम चर्च के सदस्यों को जिन्होंने सुसमाचार का प्रचार करने में अपने जीवन तक की परवाह नहीं की थी, “मसीह के राजदूत” कहती है। एक राजदूत ऐसा सेवक होता है जो किसी एक राज्य या देश की ओर से विदेश में भेजा जाता है। राजदूत दूसरे देश में भेजा जाकर कूटनीतिक कार्य करता है और वह पूरे अधिकार के साथ राजा या राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने राज्य या देश का विचार या राय बताता है। ऐसा बहुमूल्य कर्तव्य हमें दिया गया है।

चूंकि हमने सुसमाचार का प्रचार करने का मिशन पाया है, हम स्वर्ग के राजदूत हैं जो परमेश्वर की इच्छा बताते हैं, और हम सारे संसार को आशीषें पहुंचाने वाले हैं। आशीषें जो हम पहुंचाते हैं, सीधे पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन से जुड़े हैं। इसलिए हमें हर एक को इस बहुमूल्य शुभ समाचार का प्रचार करना चाहिए। हमें ऐसा महत्वपूर्ण कर्तव्य सौंपने के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए दूसरों को आशीषें पहुंचाने में कतई लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

आइए हम अपने–अपने महाद्वीप, देश और प्रान्त के लोगों को जीवन और आशीष के वचनों का पूरी तरह से प्रचार करें, ताकि सारा संसार परमेश्वर से आशीष पा सके। अपने परिवार जनों, पड़ोसियों, सहकर्मियों और परिचितों समेत दुनिया भर के 7 अरब लोगों को प्रचार करते हुए, कृपया परमेश्वर के द्वारा दिया हुआ कर्तव्य वफादारी से पूरा कीजिए और जिस किसी से भी आप मिलें, उसे परमेश्वर की ओर से परमेश्वर की आशीषें पहुंचाइए।

शुभ समाचार सुनाने वालो, यह कहो, “अपने परमेश्वर को देखो!”



परमेश्वर चाहते हैं कि हम उनकी ओर से सभी लोगों को चेतावनी दें। तब हमें परमेश्वर की आशीषें पहुंचाने वालों के रूप में उन्हें किस प्रकार का संदेश देना चाहिए? आइए हम परमेश्वर के द्वारा दिए गए जवाब को खोजें।

यश 40:6–14 बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, “प्रचार कर!” मैं ने कहा, “मैं क्या प्रचार करूं?” सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा। हे सिय्योन को शुभ समाचार सुनानेवाली, ऊंचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनानेवाली, बहुत ऊंचे शब्द से सुना, ऊंचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, “अपने परमेश्वर को देखो!”...

परमेश्वर उनसे कहते हैं जो शुभ समाचार सुनाते हैं, “मत डरो, बहुत ऊंचे शब्द से सुनाओ, ‘अपने परमेश्वर को देखो!’ ” इसलिए परमेश्वर की आशीषें पहुंचाने वाले लोगों को ऊंचे शब्द से जो सुनाना चाहिए, वह जीवन का यह संदेश है, “परमेश्वर के पास आओ और उद्धार पाओ!” परमेश्वर से मिलने के बाद, जिस प्रकार मूसा के चेहरे से किरणें निकली थीं, उसी प्रकार लोग जो परमेश्वर से मिले हैं, उनमें बदलाव आता है(निर्ग 34:29–30 संदर्भ)। जो इस पृथ्वी पर शरीर में आए परमेश्वर, यानी मसीह को ग्रहण करते हैं, वे परमेश्वर की संतानों के रूप में फिर से जन्म लेते हैं और अनन्त जीवन की आशीष पाते हैं(यूह 1:10–14; प्रक 22:17)।

प्रथम चर्च के समय में जब पौलुस और सीलास ने यह कहते हुए कि, “यीशु मसीह पर विश्वास करो, तो तुम और तुम्हारा घराना उद्धार पाएगा,” इस शुभ समाचार का प्रचार किया कि परमेश्वर इस पृथ्वी पर आए हैं, तब दारोगा और उसके पूरे परिवार ने मसीह को ग्रहण किया(प्रे 16:25–34)। इस पवित्र आत्मा के युग में भी, जब हम यह कहते हुए कि, “पवित्र आत्मा और दुल्हिन के पास आइए, तो आप स्वर्ग और उद्धार की आशीष पाएंगे,” सारे संसार को यह समाचार बताएं कि परमेश्वर हमें बचाने के लिए इस पृथ्वी पर फिर से आए हैं, तो बहुत से लोग पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर को स्वीकार करेंगे और उनसे आशीष पाएंगे।

बच्चों की कहानी में, “खुल जा सिम–सिम!” सिर्फ ये शब्द पुकारने पर ही उस गुप्त गुफा का द्वार खुल सकता था जहां खजाने छिपे हुए थे। आइए हम पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर का प्रचार करें जो सुसमाचार की मास्टर चाबी है, और लोगों के हृदयों के मजबूती से बन्द हुए द्वारों को खोलें। और आइए हम हर दिन इस बारे में ध्यान से सोचें कि हम परमेश्वर की आशीषें पहुंचाने वाले लोगों के रूप में कैसे अपने आसपास के लोगों के साथ ये आशीषें बांट सकते हैं। हमें परमेश्वर के वचनों के द्वारा प्राप्त होने वाली आशीषों को इकट्ठा करना चाहिए, ताकि हम किसी भी समय, किसी भी जगह में और किसी भी व्यक्ति के लिए जिससे हम मिलते हैं, उन आशीषों का गुच्छा खोल सकें और उद्धार के संदेश का प्रचार कर सकें।

परमेश्वर ने आशीषें पहुंचाने वाले लोगों के लिए स्वर्गीय राजदूत के पद से भी कहीं बड़ा स्वर्ग के राज–पदधारी याजक का पद तैयार किया है। परमेश्वर के द्वारा तैयार की गई और भी बड़ी आशीष की आशा करते हुए, आइए हम संसार के सभी लोगों के साथ परमेश्वर की अनुग्रहमय आशीषें बांटें, ताकि वे सब उद्धार में भाग ले सकें। अब वह समय है जब हम सब को साथ मिलकर पुकारना चाहिए। मैं आग्रहपूर्वक आपसे निवेदन करता हूं कि आप सब “पवित्र आत्मा और दुल्हिन के पास आओ और अनन्त जीवन की आशीष पाओ,” यह शुभ संदेश सारे लोगों को सुनाते हुए सुसमाचार के फल बहुतायत से पैदा करें और स्वर्ग की बहुत सी आशीषें प्राप्त करें।