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ज्योति और अंधकार

समय बिना रुके चलता रहता है जब हम सोते हैं, काम करते हैं, आराम लेते हैं और खाते हैं; चाहे हम कुछ भी करें, समय बीतता जाता है। चूंकि हम समय को बहता हुआ नहीं देख सकते, इसलिए हमने एक उपकरण का आविष्कार किया है, जिससे हम दिखाई न देने वाले समय को देख सकते हैं। वह घड़ी है।

आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। चूंकि हम दिखाई देनेवाली शारीरिक दुनिया में रहते हैं, इसलिए हम आत्मिक दुनिया की चीजों को देख या महसूस नहीं कर सकते। जैसे दिखाई न देने वाले समय के बहाव को मापने और देखने के लिए एक घड़ी बनाई गई, ठीक वैसे ही हमें उस आत्मिक दुनिया को दिखाने के लिए जिसे हम देख नहीं सकते, परमेश्वर ने एक उपकरण बनाया है। वह बाइबल है।

कौन स्वर्ग जाएगा और कौन स्वर्ग नहीं जा सकेगा? परमेश्वर का कार्य क्या है और शैतान का कार्य क्या है? इस तरह की आत्मिक दुनिया की सभी चीजों को हम सिर्फ बाइबल के द्वारा ही सही तरह से पहचान सकते हैं। अब आइए हम बाइबल के द्वारा यह पहचानने का समय लें कि ज्योति और अंधकार का आत्मिक अर्थ क्या है और किस प्रकार के लोग परमेश्वर के सच्चे लोग हैं।

जो शरीर में आए परमेश्वर पर विश्वास करते हैं



बाइबल इस प्रकार हमें कहती है कि किस प्रकार के लोग उद्धार पाएंगे और किस प्रकार के लोग उद्धार नहीं पाएंगे;

यूह 3:16–18 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा कि जगत पर दंड की आज्ञा दे, परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।

यीशु हमारे उद्धारकर्ता हैं जो परमेश्वर के पुत्र के रूप में शरीर पहनकर इस पृथ्वी पर आए। बाइबल ने कहा कि जो कोई यीशु को ग्रहण नहीं करता, वह पहले से ही दोषी ठहर चुका है। इसका मतलब यह है कि इससे पहले कि लोग स्वर्ग में जाकर परमेश्वर के न्याय के आसन के सामने खड़े हों और उन्हें अपने सही और गलत कामों के आधार पर न्याय मिले, वे इस पृथ्वी पर शरीर में आए परमेश्वर पर विश्वास करते हैं या नहीं, इस तथ्य के आधार पर उनका पहले से इस पृथ्वी पर ही न्याय हो चुका है।

बाइबल स्पष्ट रूप से कहती है कि जो शरीर में इस पृथ्वी पर आए परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, वे उद्धार पाएंगे, जबकि जो विश्वास नहीं करते, वे दोषी ठहराए जाएंगे। इससे हम देख सकते हैं कि वह विश्वास ही जो शरीर में आए परमेश्वर को ग्रहण करता है, सबसे महत्वपूर्ण कारक है जो हमारे उद्धार से सीधे संबंधित है।

तो फिर, वह परमेश्वर जो शरीर में इस पृथ्वी पर आए हैं, उनका क्या महत्व होता है कि बाइबल कहती है कि जो कोई उन पर विश्वास नहीं करता, उसका न्याय हो चुका है? आइए हम बाइबल में वर्णित की गई ज्योति के अर्थ के द्वारा उसका जवाब खोजें।

यूह 3:19–21 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे। क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए। परन्तु जो सत्य पर चलता है, वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।

बाइबल हमसे कहती है कि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति के निकट नहीं आता। वे ज्योति के बजाय अंधकार से प्रेम करते हैं और इस कारण से ज्योति से बैर रखते हैं, क्योंकि वे इससे डरते हैं कि ज्योति के द्वारा उनके बुरे कामों पर दोष लगाया जाएगा।

एक शोध–रिपोर्ट के अनुसार, जहां सार्वजनिक सुरक्षा कमजोर थी, वहां जब स्ट्रीट लाइटों के प्रकाश को दोगुना अधिक तेज किया गया, तब अपराध की दर आधी से कम हो गई। यह उदाहरण साफ–साफ दिखाता है कि ऐसी अंधेरी जगह में जहां ज्योति नहीं है, ज्यादातर अपराध पैदा होते हैं। आत्मिक रूप से भी ऐसा ही है। जिस प्रकार बिना ज्योति की अंधेरी जगह में अपराध तेजी से फैलता है और प्रचलित होता है, उसी प्रकार कुकर्म करनेवालों की यह विशेषता है कि वे ज्योति से बैर रखते हैं और उसके निकट आने से इनकार करते हैं।

परमेश्वर ज्योति हैं



बाइबल गवाही देती है कि परमेश्वर ज्योति हैं।

1यूह 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है कि परमेश्वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अन्धकार नहीं।

परमेश्वर जिन्होंने आदि में सब वस्तुओं की सृष्टि की थी, इस पृथ्वी पर एक ऐसी सच्ची ज्योति के रूप में आए जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है। उन्होंने देहधारी होकर हमारे बीच में डेरा किया, इसलिए जगत ने उन्हें नहीं पहचाना, और उनके अपने ही लोगों ने उन्हें ग्रहण नहीं किया। जो भी हो, यीशु परमेश्वर थे, जो ज्योति हैं(यूह 1:1–14)।

यूह 12:46–48 मैं जगत में ज्योति होकर आया हूं, ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे वह अन्धकार में न रहे। यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।

परमेश्वर शरीर पहनकर इस पृथ्वी पर ज्योति के रूप में इसलिए आए, ताकि जो उन पर विश्वास करें, वे अंधकार में न रहें। लेकिन लोग जो अंधकार के हैं, वे परमेश्वर के पास आने से इनकार करते हैं। 2,000 वर्ष पहले, कुछ लोग ज्योति के रूप में आए यीशु के पास खुशी–खुशी आना चाहते थे, जबकि दूसरे कुछ लोग उनके पास आना नहीं चाहते थे और स्वर्ग के राज्य के शुभ संदेश को नकारते थे जिसका यीशु ने प्रचार किया था, और ऐसे लोग भी थे जिन्होंने जोर से पुकारा, “उसे क्रूस पर चढ़ाओ।” बाइबल के वचनों के अनुसार, वे सभी कुकर्म करनेवाले हैं जो ज्योति को नकारते हैं।

चूंकि परमेश्वर ज्योति हैं, इसलिए शैतान अंधकार है जो ज्योति के विपरीत है। अंतत: परमेश्वर का इनकार करने वाले लोग अंधकार की शक्ति के होते हैं और वे परमेश्वर के न्याय से कभी बच नहीं पाएंगे।

ज्योति में हमारी अगुवाई करने वाला सत्य, नई वाचा का फसह का पर्व



इसके विपरीत, जो सत्य पर चलते हैं, वे ज्योति के निकट आते हैं(यूह 3:21)। वह सत्य क्या है जो ज्योति में हमारी अगुवाई करता है और जिसे परमेश्वर ने सिर्फ स्वर्ग जाने वालों को दिया है?

इब्र 5:6–10 इसी प्रकार वह दूसरी जगह में भी कहता है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर सदा के लिये याजक है।”... पुत्र होने पर भी, उसने दु:ख उठा–उठाकर आज्ञा माननी सीखी, और सिद्ध बनकर, अपने सब आज्ञा माननेवालों के लिये सदा काल के उद्धार का कारण हो गया, और उसे परमेश्वर की ओर से मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक का पद मिला।

बाइबल कहती है कि ज्योति के रूप में आए यीशु मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक का काम करते हैं। आइए हम मलिकिसिदक की रीति के बारे में और अधिक जानें।

उत 14:17–20 जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को जीतकर लौटा आता था तब सदोम का राजा शावे नामक तराई में, जो राजा की तराई भी कहलाती है, उससे भेंट करने के लिये आया। तब शालेम का राजा मलिकिसिदक, जो परमप्रधान ईश्वर का याजक था, रोटी और दाखमधु ले आया। और उसने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो। और धन्य है परमप्रधान ईश्वर, जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है।” तब अब्राम ने उसको सब वस्तुओं का दशमांश दिया।

जब अब्राहम युद्ध जीतकर लौट आया, तब मलिकिसिदक ने रोटी और दाखमधु ले आकर उसे आशीष दी। मलिकिसिदक परमप्रधान ईश्वर का महायाजक था। पुराने नियम के समय में याजक पशुओं को बलि करके उनका लहू बहाते थे और फिर उसे परमेश्वर को चढ़ाते थे। लेकिन विशेषकर मलिकिसिदक ने अब्राहम को आशीष देने के लिए रोटी और दाखमधु का उपयोग किया।

मलिकिसिदक के द्वारा चढ़ाया गया रोटी और दाखमधु का बलिदान नए नियम के समय में कैसे पूरा हुआ, इसे आइए हम यीशु के कार्य के द्वारा देखें जो मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक हैं।

मत 26:17–19, 26–28 अखमीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहां चाहता है कि हम तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें?” उसने कहा, “नगर में अमुक व्यक्ति के पास जाकर उससे कहो, ‘गुरु कहता है कि मेरा समय निकट है। मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा’।” अत: चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी और फसह तैयार किया... जब वे खा रहे थे तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांगकर तोड़ी, और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ; यह मेरी देह है।” फिर उसने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और उन्हें देकर कहा, “तुम सब इसमें से पीओ, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिए पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।”

जैसे मलिकिसिदक ने रोटी और दाखमधु के द्वारा अब्राहम को आशीष प्रदान की, वैसे ही यीशु ने फसह की रोटी और दाखमधु के द्वारा हमें आत्मिक आशीष दी है। यीशु ने कहा, “जो मेरा मांस खाता और मेरा लहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है(यूह 6:53)।” यह दिखाता है कि वह हमें फसह की रोटी और दाखमधु के द्वारा जो उनके मांस और लहू को दर्शाता है, अनन्त जीवन की आशीष प्रदान करते हैं।

वही दृश्य लूका रचित सुसमाचार में भी दर्ज किया गया है, जहां यीशु ने फसह के पर्व को “नई वाचा” कहा।

लूक 22:7–9, 19–20 तब अखमीरी रोटी के पर्व का दिन आया, जिसमें फसह का मेम्ना बलि करना आवश्यक था। यीशु ने पतरस और यूहन्ना को यह कहकर भेजा: “जाकर हमारे खाने के लिये फसह तैयार करो।”... फिर उसने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उनको यह कहते हुए दी, “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।” इसी रीति से उसने भोजन के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, “यह कटोरा मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है।”

यीशु ने मलिकिसिदक की रीति के अनुसार नई वाचा के फसह की रोटी और दाखमधु के द्वारा नई वाचा के नियमों को स्थापित किया। नई वाचा का फसह ही सत्य का मूल तत्व है और हमारी ज्योति की ओर अगुवाई करता है। इस तरह बाइबल में मसीह के बारे में जो ज्योति हैं, और नई वाचा के सत्य के बारे में जो ज्योति में हमारी अगुवाई करता है, स्पष्ट रूप से जिक्र किया गया है।

ज्योति में रहने वालों को दी गई आशीष



इन अन्तिम दिनों में मसीह पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में इस पृथ्वी पर आए हैं, और उन्होंने नई वाचा के सत्य को पुन:स्थापित किया है। इसके परिणाम में शैतान का कुकर्म और भ्रष्टाचार पूरी तरह से प्रकट हुआ है। अब पूरा संसार जानता है कि क्रूस की उपासना परमेश्वर की शिक्षा नहीं है, और रविवार की आराधना और क्रिसमस सूर्य–देवता की उपासना के अवशेष हैं।

परमेश्वर ने जो इस पृथ्वी पर ज्योति के रूप में आए, मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक के रूप में अपना कर्तव्य निभाया। कैन या हाबिल के बलिदानों में से परमेश्वर ने किसको स्वीकार किया? बलिदान जो सूर्य–देवता की आराधना के नियम के अनुसार चढ़ाया जाता है, और बलिदान जो मलिकिसिदक की रीति के अनुसार चढ़ाया जाता है, इन दोनों बलिदानों में से परमेश्वर किससे प्रसन्न होते हैं? निस्संदेह ही, परमेश्वर मलिकिसिदक की रीति के अनुसार चढ़ाए गए बलिदान को स्वीकार करेंगे। हमें यह सत्य जानने देने के लिए, परमेश्वर स्वयं इस पृथ्वी पर आए हैं।

जो अंधकार के हैं, वे सत्य का इनकार करने की कोशिश करते हैं और ज्योति के निकट आना नहीं चाहते हैं, लेकिन जो सत्य से प्रेम करते हैं, वे खुशी–खुशी ज्योति के पास आते हैं। आइए हम खोजें कि परमेश्वर उन्हें क्या आशीष देते हैं जो नई वाचा के सत्य को मनाकर हमेशा ज्योति में रहते हैं।

यिर्म 31:31–34 “फिर यहोवा की यह भी वाणी है, सुन, ऐसे दिन आनेवाले हैं जब मैं इस्राएल और यहूदा के घरानों से नई वाचा बांधूंगा... परन्तु जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने से बांधूंगा, वह यह है: मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊंगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूंगा; और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यह वाणी है। तब उन्हें फिर एक दूसरे से यह न कहना पड़ेगा कि यहोवा को जानो, क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है, छोटे से लेकर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा।”

जिनके हृदयों पर नई वाचा की व्यवस्था लिखी है, उनसे परमेश्वर ने कहा, “मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा, और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे।” क्या इसका मतलब यह नहीं कि परमेश्वर जो ज्योति हैं, उनके लिए ज्योति बनेंगे और वे परमेश्वर के लोग होंगे जो ज्योति में निवास करते हैं? परमेश्वर ने यह भी वादा किया है कि वह उनका अधर्म क्षमा करेंगे जो नई वाचा में रहते हैं, और उनके पाप फिर स्मरण नहीं करेंगे। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर इस बात को मंजूर करते हैं कि वे जो नई वाचा में रहते हैं, वे ज्योति में रहने वाले हैं और उद्धार पाने वाले हैं। फिर परमेश्वर ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने नई वाचा को एक सदा स्थायी और कभी न बदलने वाली प्रतिज्ञा के रूप में ठहराया है, जैसे कि उन्होंने इस नियम को सदा स्थायी ठहराया है कि सूर्य दिन में प्रकाश दे और चंद्रमा और तारे रात में प्रकाश दें(यिर्म 31:35–36)।

ज्योति के पास आओ



परमेश्वर ने जो ज्योति हैं, प्रतिज्ञा की है कि वह हमें बचाने के लिए इस पृथ्वी पर दूसरी बार आएंगे। उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की कि जब वह फिर से आएंगे, तब वह अकेले नहीं होंगे, यानी पवित्र आत्मा और दुल्हिन एक साथ प्रकट होंगे।

प्रक 22:17 आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।

पवित्र आत्मा और दुल्हिन के “आ!” कहने पर लोग जो उनके पास आते हैं, क्या वे ही ज्योति की संतान नहीं हैं जो खुशी से परमेश्वर के पास आते हैं? इसलिए हम जान सकते हैं कि वे जो इस युग में पवित्र आत्मा और दुल्हिन के रूप में आए पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर को ग्रहण करते हैं, वे ही परमेश्वर के पवित्र लोग हैं जिनके पास उद्धार की प्रतिज्ञा है। इसके विपरीत, जो पवित्र आत्मा और दुल्हिन के पास नहीं आते, वे खुद को कुकर्मी साबित करते हैं। जो अंधकार के हैं, वे ज्योति से बैर रखते हैं। इसलिए स्वाभाविक रूप से, वे उस सत्य से बैर रखते हैं और उसका इनकार करते हैं जो पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर की गवाही देता है जो ज्योति हैं।

संसार में बहुत सी अंधेरी जगहें हैं जहां सत्य की ज्योति अब तक नहीं चमकी है। शैतान बहुत लोगों की आंखों, कानों और मनों को अंधकार से ढक देता है। संपूर्ण अंधकार में जहां हमें कुछ भी नहीं दिखाई देता, हम नहीं पहचान सकते कि आगे मार्ग है या फिर खड़ी चट्टान। यदि हमारे पास ज्योति है जो अंधकार में चमकती है, तब हम आगे का मार्ग देख सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।

अब पृथ्वी अंधकार से ढकी हुई है और सब लोगों पर घोर अंधकार छाया हुआ है। परमेश्वर हमसे कहते हैं, “उठ, प्रकाशमान हो!” इस वचन के अनुसार आइए हम “ज्योति की संतान” के रूप में पूरी दुनिया में यरूशलेम की उज्ज्वल ज्योति चमकाएं और परमेश्वर की महिमा को प्रदर्शित करें(यश 60:1–22)। सिर्फ ज्योति ही अंधकार को हरा सकती है। यदि हम यरूशलेम की महिमा की ज्योति को चमकाएंगे, तो अवश्य ही हमारे खोए हुए भाई–बहनें यरूशलेम की ज्योति को देखेंगे और माता की बांहों में वापस आएंगे। मुझे आशा है कि आप सभी परमेश्वर की ऐसी संतान बनें जो इस अंधेरे संसार में ज्योति चमकाकर नबियों के मिशन को पूरी तरह से पूरा करेंगी।