한국어 English 日本語 中文 Deutsch Español Tiếng Việt Português Русский लॉग इनरजिस्टर

लॉग इन

आपका स्वागत है

Thank you for visiting the World Mission Society Church of God website.

You can log on to access the Members Only area of the website.
लॉग इन
आईडी
पासवर्ड

क्या पासवर्ड भूल गए है? / रजिस्टर

टेक्स्ट उपदेशों को प्रिंट करना या उसका प्रेषण करना निषेध है। कृपया जो भी आपने एहसास प्राप्त किया, उसे आपके मन में रखिए और उसकी सिय्योन की सुगंध दूसरों के साथ बांटिए।

सबसे महान कार्य

दुनिया में विभिन्न प्रकार के काम और व्यवसाय हैं। उनमें से ऐसे बहुत से महान काम हैं जो लोगों को लाभ देते हैं और उनमें युग की चेतना जगाते हैं, और जिनका इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रहता है। तब सबसे महान कार्य क्या है?

परमेश्वर वास्तव में महान हैं। वह हर एक काम भी जिसका महान परमेश्वर स्वयं प्रबंधन और नेतृत्व करते हैं, निश्चय ही महान है। परमेश्वर ने अपने महान कार्यों में से एक कार्य हमें सौंपा है। वह यह है, “संसार की सब जातियों में सुसमाचार का प्रचार करना है(मत 24:14)।”

संसार की चीजों का अपना–अपना अर्थ और मूल्य है, लेकिन उनका वैभव कुछ समय के लिए बरकरार रहता है और फिर गायब हो जाता है। लेकिन “सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य” जिसे परमेश्वर ने हमें सौंपा है, एक मूल्यवान मिशन है जो ऐसी महिमा लाएगा जो सदा के लिए चमकेगी(दान 12:3)। स्वर्ग में स्वर्गदूत या आत्मिक प्राणी इस कार्य को करना चाहते हैं, लेकिन यह करने को उन्हें अनुमति नहीं है। यह एक विशेष और बहुमूल्य मिशन है जो सिर्फ परमेश्वर की उन संतानों को दिया गया है जिन्होंने परमेश्वर का मांस और लहू प्राप्त किया है।

प्रचार जो सबसे महान कार्य है



बाइबल के द्वारा आइए हम देखें कि परमेश्वर ने इस पृथ्वी पर आकर क्या काम किया।

लूक 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उनका उद्धार करने आया है।

यीशु स्वर्ग से इस पृथ्वी पर खोए हुओं को ढूंढ़ने और उद्धार देने के लिए आए थे। सबसे महान कार्य जिसे पूरा करने के लिए सबसे श्रेष्ठ और महान परमेश्वर इस कदर उत्सुक थे कि उन्हें शरीर पहनकर इस पृथ्वी पर आना पड़ा, वह यह था, अपनी संतानों को ढूंढ़ना जो पापों के कारण स्वर्ग से खो गई थीं और उन्हें पापों की क्षमा और अनन्त जीवन देना।

यीशु ने स्वयं हमें दिखाया कि हम कैसे इस सबसे महान कार्य को पूरा करें।

मर 1:35–38 भोर को दिन निकलने से बहुत पहले, वह उठकर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। तब शमौन और उसके साथी उसकी खोज में गए। जब वह मिला, तो उससे कहा, “सब लोग तुझे ढूंढ रहे हैं।” उसने उनसे कहा, “आओ; हम और कहीं आसपास की बस्तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं।”

सवेरे अंधेरा रहते ही यीशु उठकर निकले, और फिर उन्होंने प्रार्थना की और एक बस्ती से दूसरी बस्ती में जाकर सुसमाचार का प्रचार किया। और उन्होंने कहा, “मैं प्रचार के लिए निकला हूं।”

लूका रचित सुसमाचार में बताया गया है कि यीशु इस पृथ्वी पर हमें उद्धार देने के लिए आए, और मरकुस रचित सुसमाचार में बताया गया है कि यीशु प्रचार करने के लिए आए। यहां हम देख सकते हैं कि सबसे महान और महत्वपूर्ण कार्य जिसे हमें मानवजाति के उद्धार के लिए करना चाहिए, वह प्रचार का कार्य है। सुसमाचार का प्रचार करने का कार्य जो आज हम कर रहे हैं, वह सबसे महान कार्य है जिसे सबसे महान परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए किया।

प्रचार का कार्य उन्हें सौंपा जाता है जिन्हें परमेश्वर योग्य ठहराते हैं



प्रचार का कार्य हर किसी को नहीं दिया जाता। यदि आप किसी को कोई बहुत मूल्यवान चीज पहुंचाना चाहते हैं, तो उसे पहुंचाने का कार्य आप किस व्यक्ति को सौंपेंगे? आप किसी अनजान व्यक्ति को वह कार्य करने के लिए नहीं कहेंगे। आप वह कार्य सिर्फ अपनी सबसे विश्वसनीय संतान को सौंपेंगे जो हमेशा आपके शब्दों को मानती है।

परमेश्वर ने प्रचार का कार्य हर किसी को नहीं दिया है, बल्कि सिर्फ उन्हें सौंप दिया है जिन्हें वह योग्य ठहराते हैं।

1थिस 2:4 पर परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा...

आत्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो प्रचार सच में एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है, क्योंकि वह नश्वर पापियों की अगुवाई उद्धार की ओर करता है। जैसे एक महत्वपूर्ण कर्तव्य हर किसी को नहीं सौंपा जाता, ठीक वैसे ही सुसमाचार का प्रचार करने का कर्तव्य भी हर किसी को नहीं दिया जाता है, बल्कि सिर्फ उन्हें दिया जाता है जिन्होंने उद्धार के मूल्य को पूरी तरह महसूस किया है। परमेश्वर ने यह बड़ा और महान कार्य किसी और को नहीं बल्कि हमें सौंपा है। यह साबित करता है कि परमेश्वर हम पर बहुत भरोसा करते हैं।

तीत 1:2–3 उस अनन्त जीवन की आशा पर जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने, जो झूठ बोल नहीं सकता सनातन से की है, पर ठीक समय पर अपने वचन को उस प्रचार के द्वारा प्रगट किया, जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार मुझे सौंपा गया।

परमेश्वर जो सबसे महान कार्य करने के लिए इस पृथ्वी पर आए, उन्होंने प्रचार के द्वारा अपने वचन व्यक्त किए और फिर वही प्रचार का कार्य हमें सौंपा है। इस पृथ्वी पर वह कौन हो सकता है जो हमें उद्धार देने आए एलोहीम परमेश्वर की और नई वाचा के अनन्त जीवन के सत्य की घोषणा संसार के सभी लोगों को कर सकता है? यह कुछ ऐसा कार्य है जो सिर्फ हम सिय्योन के लोग ही कर सकते हैं, जिन्हें परमेश्वर से योग्य ठहराए जाकर सुसमाचार सौंपा गया है।

कोरिया के जोसियन राजवंश में राजकुमार और राजकुमारियां सामान्य लोगों की तुलना में विशेष शिक्षण पाते थे। उनमें से विशेष रूप से अगला राजा बनने का इंतजार करने वाले युवराज को बहुत ही सख्त तरीके से शिक्षित किया जाता था। उसे कनफ्यूशियस के ग्रंथ और इतिहास के साथ–साथ शिष्टाचार और बोलने और चलने का ढंग भी सीखना पड़ता था। यदि वह ईमानदारी से शिक्षा–पाठ्यक्रमों में शामिल नहीं होता, तब उसे युवराज होने के लिए अयोग्य ठहराया जाता था। भले ही युवराज के लिए शिक्षा–पाठ्यक्रम कठिनाइयों और दुखों से भरे रहते थे, लेकिन वास्तव में वे सब युवराज को एक महान राजा बनाने के लिए थे।

सुसमाचार का प्रचार जो अब हम कर रहे हैं, उसे हर कोई नहीं कर सकता। प्रचार एक ऐसा मिशन है जिसे परमेश्वर ने हम लोगों को स्वर्ग के राज–पदधारी याजक बनाने के लिए दिया है जो भविष्य में स्वर्गीय उत्तराधिकार को पाएंगे। परमेश्वर ने अपने उत्तराधिकरियों को उनके लायक महान कार्य सौंपा है।

यदि हम प्रचारकों के कर्तव्य को महत्वपूर्ण न मानेंगे, तो हम ऐसा युवराज बनेंगे जो राजा के पद के योग्य बनने में सुस्ती दिखाता है, और हमारी जगह कोई और ले लेगा। यह ठीक ऐसा ही है जैसे एसाव ने अपने पहिलौठे के अधिकार को तुच्छ जाना था और इसी कारण उसके छोटे भाई याकूब ने उससे उसके अधिकार को छीन लिया था।

जो प्रचार के महत्व को महसूस नहीं करते, वे आखिरकार उस मनुष्य से अलग नहीं हैं जिसने अपने तोड़े को मिट्टी में छिपा दिया(मत 25:14–30)। हमें अपने भीतर झांककर देखना चाहिए और अपने आपसे पूछना चाहिए कि ‘प्रचार मेरा कर्तव्य है जिसे मुझे पूरा करना चाहिए, लेकिन क्या मैं पिता और माता के द्वारा सौंपे गए इस महान कार्य को सांसारिक चीजों से ज्यादा छोटा समझ रहा हूं? या फिर क्या मैं उस एसाव के जैसी मानसिकता रख रहा हूं जिसने परमेश्वर की दी हुई आशीष को नजरअंदाज किया?’

परमेश्वर की ओर से प्रचार करो



परमेश्वर ने हमें उनकी ओर से सुसमाचार का प्रचार करने की जिम्मेदारी और अधिकार दिया है।

यहेज 3:16–17 सात दिन के व्यतीत होने पर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, “हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिए पहरुआ नियुक्त किया है; तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चिताना।”

सुसमाचार के प्रचारक का कर्तव्य यह है, लोगों को परमेश्वर की ओर से चेतावनी देना। परमेश्वर की ओर से काम करने का अधिकार और योग्यता किसी और को नहीं, बल्कि सुसमाचार के प्रचारकों को दी गई है।

एक देश का राजा अपनी ओर से काम करने का अधिकार हर किसी को नहीं देता। वह यह अधिकार उस व्यक्ति को प्रदान करता है जिसे उसने लंबे समय तक सोच–विचार करके चुना है। उसी तरह, परमेश्वर ने पूरी दुनिया को अपने वचनों का प्रचार करने के लिए सब जातियों के लोगों में से हमें चुना है।

चूंकि हम प्रचार के माध्यम से परमेश्वर की ओर से लोगों को चेतावनी देते हैं, इसलिए हमें धर्मी, ईमानदार और गरिमापूर्ण आचरण करना चाहिए। जब हम सुसमाचार का प्रचार करते हैं, तब हम विभिन्न प्रकार के लोगों से मिलते हैं, और उनमें से कुछ परमेश्वर के वचन सुनने से इनकार करते हैं और उन्हें ठुकराते हैं और कुछ तो सत्य को तुरन्त ग्रहण नहीं करते हैं। लेकिन यदि हम उनके प्रति असंतुष्टता दिखाएं या बहुत ही चिड़चिड़े अंदाज में बातें करें, तो हम कैसे कह सकते हैं कि हम परमेश्वर की ओर से कार्य कर रहे हैं?

आइए हम सोचें कि यदि परमेश्वर सुसमाचार का प्रचार करें तो वह इस स्थिति में क्या करेंगे। यह शुभ संदेश जिसका परमेश्वर ने हमें प्रचार करने को कहा है, इतना अत्यंत मूल्यवान है कि इसका मूल्य किसी भी प्रकार नापा नहीं जा सकता। इसलिए हमें अधिक मूल्यवान तरीके से इस बहुमूल्य सुसमाचार का प्रचार करने की जरूरत है।

पे्ररित पौलुस ने सुसमाचार का प्रचार करने में अपना जीवन समर्पित किया



प्रेरित पौलुस ने एक ऐसा वांछनीय जीवन जिया जिसे हर एक विश्वासी जीने की कामना करता है। दमिश्क के मार्ग पर मसीह से मिलने के बाद, उसने वैसे ही अपने पूरे हृदय से अपना पूरा जीवन सुसमाचार का प्रचार करने में समर्पित किया, जैसे यीशु ने किया था।

कुल 4:2–3 प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो। और इसके साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो कि परमेश्वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिसके कारण मैं कैद में हूं।

प्रेरित पौलुस ने चर्च के सदस्यों से सबसे बढ़कर यह प्रार्थना करने का अनुरोध किया कि वचन सुनाने का द्वार खोला जाए और मसीह के भेद का वर्णन करने का अवसर दिया जाए। उसने भी लगातार परमेश्वर से प्रार्थना की कि सुसमाचार का प्रचार करने का द्वार खोल दिया जाए। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसने अपने हृदय की गहराई से महसूस किया कि प्रचार परमेश्वर के द्वारा सौंपे गए कार्याें में से सबसे महान कार्य है।

2तीम 4:1–5 परमेश्वर और मसीह यीशु को गवाह करके, जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करेगा, और उसके प्रगट होने और राज्य को सुधि दिलाकर मैं तुझे आदेश देता हूं कि तू वचन का प्रचार कर, समय और असमय तैयार रह... पर तू सब बातों में सावधान रह, दु:ख उठा, सुसमाचार का प्रचार का काम कर, और अपनी सेवा को पूरा कर।

तीमुथियुस को भेजे पत्र में प्रेरित पौलुस ने उसे समझाया कि वह समय और असमय परमेश्वर के वचन का प्रचार करने के लिए तैयार रहे। पौलुस ने तीमुथियुस से आग्रह किया कि वह हर समय सुसमाचार का प्रचार का काम करे और अपनी सेवा को पूरा करे, सिर्फ उस वक्त नहीं जब उसे मौका मिले।

पौलुस ने भी परमेश्वर के वचन का प्रचार करने के लिए अपनी समस्त ताकत और शक्ति झोंक डाली। वह परमेश्वर के सुसमाचार के काम के लिए मरने को भी तैयार था(प्रे 21:13)। उसने पांच बार उन्तालीस उन्तालीस कोड़े खाए और तीन बार बेंतें खाईं, एक बार उस पर पथराव किया गया और तीन बार जहाज जिन पर वह चढ़ा था, टूट गए और एक रात–दिन उसने समुद्र में काटा(2कुर 11:23–27)। उसने सुसमाचार के प्रचार के लिए मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भले ही उसने कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन वह कभी डरा नहीं और न ही उसने किसी भी कठिनाई में हार मानी।

धर्म का मुकुट हमारे लिए तैयार किया गया है



केवल पौलुस ने ऐसा नहीं किया। बाइबल में हमें उद्धार देने आए यीशु, पतरस और यूहन्ना जैसे महान लोगों ने जिनका हमें अनुकरण करना चाहिए, अपना पूरा जीवन सुसमाचार का प्रचार करने में बिता दिया। जैसे ही उन्होंने यह महसूस किया कि उन लाखों कामों में से जो वे इस पृथ्वी पर कर सकते थे, सुसमाचार का प्रचार करना सबसे महान काम है, वे सुसमाचार के प्रचारकों के तौर पर एक क्षण के लिए भी चुप नहीं बैठ सकते थे।

2तीम 4:6–8 क्योंकि अब मैं अर्घ के समान उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है। मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूं, मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैंने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा, और मुझे ही नहीं वरन् उन सब को भी जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।

जब पौलुस ने यह जान लिया कि उसके लिए संसार को छोड़ने का समय आया है, तब उसने पीछे मुड़कर अपना जीवन देखा और उसे इस पर गर्व महसूस हुआ कि उसने एक मूल्यवान जीवन जिया। उसने आत्मविश्वास भरी आवाज में कहा कि क्योंकि उसने लोगों को परमेश्वर की पवित्र इच्छा का प्रचार करने के सबसे महान मिशन की पूर्ति के लिए कड़ी मेहनत करते हुए स्वर्ग के लक्ष्य की ओर जी तोड़कर दौड़ लगाई, इसलिए उसके लिए धर्म का मुकुट रखा हुआ है। उसने बताया कि उसने केवल स्वर्ग की आशा करते हुए बिना किसी अफसोस के अपने मन की पूरी संतुष्टि तक जीवन जिया।

संसार में बहुत सारे काम हैं, लेकिन उन सब की जरूरत सिर्फ यहां इस छोटी सी पृथ्वी पर है। लेकिन प्रचार का काम जो परमेश्वर ने हमें सौंपा है, उनसे अलग है। आंखों से दिखाई देने वाली दुनिया को सब कुछ मानने के बजाय, हमें पौलुस की तरह अनन्त दुनिया के लिए जहां हम जा रहे हैं, पहले से तैयारी करनी चाहिए।

परमेश्वर ने हमें सुसमाचार का प्रचार करने को इसलिए कहा है क्योंकि वह थोड़े समय तक टिकने वाली आशीषें नहीं, बल्कि अनन्त आशीषें देना चाहते हैं। परमेश्वर चाहते हैं कि उनकी संतान स्वर्ग की अनन्त आशीषों को प्राप्त करे। प्रचार के कर्तव्य को पूरा करने का हमारा प्रयास उन पुरस्कारों की तुलना में बहुत छोटा है जो हम स्वर्ग में पाएंगे। इस समय के दुख और क्लेश उस महिमा के सामने जो हम पर प्रगट होनेवाली है, कुछ भी नहीं है(रो 8:18)। चूंकि प्रेरितों ने इसे महसूस किया, इसलिए उन्होंने किसी भी दूसरी चीज से अधिक सुसमाचार का प्रचार करने का भरसक प्रयास किया।

इस युग में हमें सभी सात अरब लोगों को परमेश्वर के वचन का प्रचार करने का मिशन दिया गया है। हमें हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने के बजाय परमेश्वर के द्वारा सौंपे गए सबसे महान कार्य में एक साथ भाग लेना चाहिए, ताकि हम परमेश्वर की संतानों के रूप में धर्म का मुकुट प्राप्त कर सकें।

प्रचार एक महान मिशन है जो सबसे महान लोगों को दिया गया है। आइए हम प्रेरित पौलुस की तरह इस पृथ्वी पर अपने जीवन के अन्त में बड़े आत्मविश्वास के साथ यह कहने के लिए पर्याप्त विश्वास रखें, “अब धर्म का मुकुट मेरा इंतजार कर रहा है।” मैं आप सभी सिय्योन के लोगों से निवेदन करता हूं कि काम करने वाले अपनी नौकरी के स्थान में, विद्यार्थी अपने स्कूलों में, सैनिक अपनी सेनाओं में और गृहिणियां अपने पड़ोस में, यानी जहां कहीं भी आप हों, परमेश्वर के जीवन का शुभ संदेश प्रचार करें।