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मसीह की सुगन्ध और माता की सुगन्ध


आज हर वह सिय्योन जो माता और माता के प्रेम का प्रचार करता है, सुसमाचार का कार्य अनुग्रहपूर्ण और सुचारु रूप से कर रहा है। जितना ज्यादा माता का सत्य प्रसारित किया जाता है, उतनी अधिक आत्माएं सिय्योन की ओर उमड़ आती हैं। ऐसा क्यों होता है?

ऐसा इसलिए होता है कि सिय्योन में माता की सुगन्ध है। बाइबल ने परमेश्वर के लोगों की तुलना आकार की दृष्टि से ज्योति से की है, और स्वाद की दृष्टि से नमक(मत 5:13–16) से की है, और गंध की दृष्टि से “मसीह की सुगन्ध” से की है, जो मसीह के ज्ञान की सुगन्ध पूरे संसार में फैलाती है। पवित्र आत्मा के युग में परमेश्वर के लोग वह सुगन्ध हैं जो हमारे मसीह, पवित्र आत्मा और दुल्हिन, यानी पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर के ज्ञान की सुगन्ध फैलाती है।

संसार के लोगों को स्वर्गीय माता की बांहों में वापस ले आने के लिए, सिय्योन की सभी सन्तानों को जो काम करना चाहिए, वह यह है कि वे माता की सुगन्ध को अधिक से अधिक प्रकट करें। आइए हम उससे संबंधित बाइबल के वचनों को ढूंढ़ें।

माता की सुगन्ध जिसकी शिशु को जरूरत है



शिशु अनुभूति को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता, इसलिए वह केवल रोकर ही अपनी तकलीफों को प्रकट करता है। अगर शिशु रोता है या चिड़चिड़ा हो जाता है, तो यह इसका इशारा है कि उसे भूख लगी है। इसलिए जब माता उसे बॉटल से दूध पिलाए या स्तंनपान कराए, तो वह रोना बन्द कर देता है। इसके अलावा, जब शिशु की नैपी गीली होती है, जब उसे दर्द होता है, जब वह ऊबकर मां के साथ खोलना चाहता है, जब उसे नींद आती है, तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है। तब उसी समय माता को उसके पास होकर उसे अपनी गर्माहट पहुंचानी चाहिए, कभी–कभी उससे आंखें मिलानी चाहिए, और उसके साथ खेलना चाहिए। इससे माता और शिशु के बीच सबसे महत्वपूर्ण अनुभूति या संवेदना का नैसर्गिक आदान–प्रदान हो सकता है।

उसमें माता की सुगन्ध बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माता के दूर होने पर कभी–कभी शिशु, चाहे उसे भूख या दर्द न हो, लगातार रोता रहता और चिड़चिड़ा हो जाता है। उस समय जब हम शिशु के पास माता का कपड़ा रखें, तो शिशु आराम से सो जाता है। कपड़े में माता की गंध जितनी ज्यादा व्याप्त हो, उतना ही अच्छा होता है।

माता की गंध संतान के लिए संसार में किसी भी दूसरी गंध से सबसे ज्यादा जरूरी है। शिशु उस समय से माता की गंध से अभ्यस्त है जब वह माता के गर्भ में था, इसलिए जब वह घबराता है या तनावग्रस्त होता है, वह माता की गंध सूंघ कर शांत और तनावरहित हो जाता है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि शिशु को जन्म लेने के समय से लेकर 36 महीने तक, एक दिन में कम से कम 3 घंटे माता की गंध सूंघनी चाहिए, तब शिशु की मानसिक स्थिरता का विकास हो सकता है। इसी दौरान यदि शिशु पर्याप्त मात्रा में माता की गंध न सूंघे, तो वह बड़ा होने के बाद भी मानसिक अस्थिरता झेलता है।

आत्मिक रूप से बिल्कुल वैसा ही है। यदि शारीरिक बच्चे भी माता की गंध न सूंघें, तो वे तनावग्रस्त होते हैं, और बड़ा होने के बाद भी यह समस्या पैदा करता है, तो फिर ऐसे लोग जो सोचते हैं कि माता परमेश्वर का अस्तित्व नहीं है, उनकी आत्मिक मानसिकता कितनी अधिक अस्थिर होगी? इसी कारण वे बाइबल में वर्णित परमेश्वर की आज्ञाओं की उपेक्षा करते हैं और गलत विश्वास और विचार के साथ गलत व्यवहार करते हैं।

सिय्योन में बहुत से सदस्य कहते हैं कि जब वे सिय्योन आते हैं तो उनका मन शांत हो जाता है। वे सिय्योन में इसलिए मानसिक शांति महसूस करते हैं, क्योंकि सिय्योन में माता की सुगन्ध है। सिय्योन वह स्थान है जहां बहुत सी आत्माएं माता की सुगन्ध सूंघ सकती हैं। इस माता की सुगन्ध के कारण परमेश्वर की संतान सिय्योन की ओर उमड़ आती हैं।

बाइबल माता परमेश्वर की गवाही देती है



बाइबल में, जो परमेश्वर की प्रेरणा से रची गई है, माता की गहरी सुगन्ध व्याप्त रहती है। आइए हम बाइबल के द्वारा इस सुगन्ध की खोज करें।

2तीम 3:15 और बचपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है।

बाइबल हमें उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धि देती है। यदि बाइबल में यह शिक्षा है कि पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर का अस्तित्व है और उनके बेटे और बेटियां हैं, तो हम इस पर विश्वास करना चाहिए, ताकि हम उद्धार प्राप्त कर सकें।
बाइबल इस बात पर भी जोर देती है कि इस पृथ्वी की चीजें स्वर्ग की चीजों की छाया और प्रतिबिम्ब है।(इब्र 8:5) बाइबल के द्वारा हम समझ सकते हैं कि जैसे हमारे पास शारीरिक पिता हैं, वैसे ही हमारे पास आत्मिक पिता हैं।

मत 6:8–9 इसलिए तुम उनके समान न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहले ही जानता है कि तुम्हारी क्या–क्या आवश्यक्ताएं हैं। अत: तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो: ‘हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।’

2कुर 6:17–18 इसलिये प्रभु कहता है, “उनके बीच में से निकलो और अलग रहो; और अशुद्ध वस्तु को मत छूओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूंगा; और मैं तुम्हारा पिता हूंगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियां होगे। यह सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर का वचन है।”

हमारे आत्मिक पिता का पद परमेश्वर है। बाइबल कहती है कि परमेश्वर हमारे लिए पिता हैं, और हम परमेश्वर के लिए बेटे और बेटियां हैं। इस तरह बाइबल की अभिव्यक्तियों में पिता, बेटे और बेटियां हैं, जो स्वर्गीय परिवार के सदस्यों के रूप में अवश्य ही मौजूद होने चाहिए। तब संपूर्ण परिवार बनने के लिए उनमें कौन भी होना चाहिए? माता होनी चाहिए जो संतानों को जीवन देती है।

आत्मिक रूप से क्या ऐसा हो सकता है कि माता न हो? नहीं। माता अवश्य ही होनी चाहिए। जहां माता है, वहां जीवन, प्रेम, खुशी और शांति है। जहां माता नहीं है, वहां झूठ और व्यवस्था का उल्लंघन अधिक होता है, और एक दूसरे से घृणा और झगड़ा करने इत्यादि की समस्याएं पैदा होती हैं। इसलिए स्वर्ग जहां अनन्तकाल तक अनन्त जीवन, प्रेम, खुशी और आनन्द होता है, वहां अवश्य ही माता हैं।

गल 4:26 पर ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है।

यहां, “हमारी माता” वह माता नहीं है जो हमारे शरीर को जन्म देती है, लेकिन हमारी आत्मिक माता हैं जो स्वर्ग में हैं। तब हम जान सकते हैं कि आत्मिक दुनिया में भी पिता और उनकी सन्तान हैं, जो परमेश्वर के बेटे और बेटियां कहलाती हैं, और आत्मिक माता भी हैं।


परमेश्वर के लोग मसीह की सुगन्ध हैं, जो मसीह का ज्ञान फैलाती है



यह परमेश्वर के द्वारा निर्धारित एक सृष्टि का सिद्धांत है कि बच्चे का माता की गोद में पालन–पोषण हो। बाइबल में अवश्य ही माता परमेश्वर हैं। परमेश्वर ने हमें माता के ज्ञान की सुगन्ध के बारे में सिखाया।

2कुर 2:14–16 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो जो मसीह में सदा हम को जय के उत्सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान की सुगन्ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पानेवालों, और नाश होनेवालों, दोनों के लिये मसीह की सुगन्ध हैं। कुछ के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्ध, और कितनों के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्ध। भला इन बातों के योग्य कौन है?

बाइबल हमें “मसीह की सुगन्ध” के रूप में व्यक्त करती है जो मसीह का ज्ञान फैलाती है। इस वचन के अनुसार हमारे पास माता की सुगन्ध को उन आत्माओं तक फैलाने का मिशन है, जो अब तक माता को न जानते हुए इस पापमय संसार में भटकती हैं।

हमें माता की सुगन्ध बननी चाहिए जो माता परमेश्वर का ज्ञान हर जगह फैलाती है, और अपने आसपास की बहुत आत्माओं को प्रायश्चित्त की ओर और उद्धार की ओर ले आने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। जब हम ऐसा करते हैं, तब परमेश्वर की खोई हुई सन्तान माता को महसूस कर सकती हैं और सिय्योन वापस आ सकती हैं।

यश 60:1–5 उठ, प्रकाशमान हो; क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है, और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है। देख, पृथ्वी पर तो अन्धियारा और राज्य राज्य के लोगों पर घोर अन्धकार छाया हुआ है; परन्तु तेरे ऊपर यहोवा उदय होगा, और उसका तेज तुझ पर प्रगट होगा। जाति जाति तेरे पास प्रकाश के लिये और राजा तेरे आरोहण के प्रताप की ओर आएंगे। अपनी आंखें चारों ओर उठाकर देख; वे सब के सब इकट्ठे होकर तेरे पास आ रहे हैं; तेरे पुत्र दूर से आ रहे हैं, और तेरी पुत्रियां हाथों–हाथ पहुंचाई जा रही हैं। तब तू इसे देखेगी और तेरा मुख चमकेगा, और तेरा हृदय थरथराएगा और आनन्द से भर जाएगा...

जब यरूशलेम प्रकाशमान हुई, यानी जब माता की सुगन्ध फैल गई, सारी जातियों से परमेश्वर की सन्तान यरूशलेम की गोद में वापस आती हैं।
संतान वहां इकट्ठी होती हैं जहां माता की सुगन्ध है। सिय्योन में माता की सुगन्ध गायब नहीं होनी चाहिए। संतान जिसके लिए सबसे अधिक तरसती हैं, वह माता की गंध है। यदि हम सिय्योन में भरी हुई माता की गंध को मिटाएं और उसे दूसरी गंध से भरें, तो सिय्योन में चाहे कितनी भी खुशबू क्यों न हो, परमेश्वर की सन्तान कभी इकट्ठी नहीं होतीं। हमें अपनी निजी गंध पर आग्रह नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने आपको माता परमेश्वर की सुगंध से भरकर उसे दूसरों तक पहुंचाना चाहिए।

माता की सुगन्ध फैलने से रोकने के लिए, शैतान सब प्रकार के छल–कपट का प्रयोग करता है। लेकिन शैतान चाहे किसी भी तरह के छलकपट से हमें भरमाता हो, सिय्योन की सन्तान माता की सुगन्ध को पहचानती हैं और जानती हैं कि क्या सत्य है और क्या झूठ है। सब्त का दिन माता की सुगन्धों का एक हिस्सा है, और फसह का पर्व भी माता की सुगन्धों का एक हिस्सा है, और तीन बार में सात पर्व भी माता की सुगन्धों का एक हिस्सा है। यदि हम सही सुगन्ध के सहारे सही विश्वास के मार्ग पर चलें, तो हम माता से मिल सकते हैं।

माता परमेश्वर जिसे मानव जाति को ढूंढ़ना चाहिए



बाइबल हमें उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धि प्रदान करती है। तो आइए हम बाइबल के द्वारा पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर को अच्छी तरह से महसूस करें, जो बाइबल में प्रकट होते हैं, और माता की सुगन्ध को ठीक से पहचानें, ताकि हम अनन्त स्वर्ग के राज्य में सुरक्षित रूप से पहुंच सकें।

प्रक 22:17 आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “आ!” और सुननेवाला भी कहे, “आ!” जो प्यासा हो वह आए, और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।

पवित्र आत्मा त्रिएक के अनुसार पिता परमेश्वर हैं। यहां दुल्हिन पिता परमेश्वर की दुल्हिन है, इसलिए वह हमारी माता हैं। पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर कह रहे हैं, “आ! जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।” इस आवाज को सुनकर, जो कोई पिता और माता को ढूंढ़ता है और उनके पास आता है, वही सच में परमेश्वर की सन्तान है जो परमेश्वर पर विश्वास करती है, और परमेश्वर के लोग हैं जो उद्धार पाकर अनन्त स्वर्ग जा सकते हैं।

बाइबल कहती है, “जो प्यासा हो वह आए।” छोटा बच्चा उस समय सबसे अधिक मानसिक रूप से प्यासा होता है, जब वह माता की गंध के लिए तरसता है। उस समय चाहे हम उसे कितना भी स्वादिष्ट खाना दें या उसे प्यार से सहलाते हुए सांत्वना देने की कोशिश करें, यह सब बेकार है। ऐसा इसलिए नहीं है कि हमारी कोशिश अपर्याप्त है, बल्कि इसलिए है कि बच्चे के लिए सबसे जरूरी चीज माता की गंध है।

यदि इस पृथ्वी का सिद्धांत ऐसा है, तो स्वर्ग का सिद्धांत कैसा होगा? जब हम शारीरिक बातों के द्वारा आत्मिक बातों को समझें, तो हम जान सकते हैं कि आत्मिक संतानों के लिए भी माता की गंध की जरूरत है। जो कोई चाहता है, और जो कोई माता की सुगन्ध की लालसा करता है, वह पिता और माता के पास वापस आएगा।

हम सब पापी स्वर्गदूत हैं जो स्वर्ग में परमेश्वर के खिलाफ पाप करके इस पृथ्वी पर गिरा दिए गए। हमने पिता और माता के अनुग्रह के द्वारा इस पृथ्वी पर पश्चाताप करने का अवसर पाया है, और पिता और माता के मार्गदर्शन के अनुसार और माता की सुगन्ध के द्वारा हम सिय्योन में वापस आए हैं। लेकिन अब भी ऐसे बहुत से भाई और बहनें हैं जो सिय्योन में न आ सके। उन्हें शायद यह धुंधली उम्मीद होती है कि निश्चय माता मुझे ढूंढ़ने के लिए आई होंगी, और वे इस शरण नगर, पृथ्वी में किसी जगह पर माता की सुगन्ध का इंतजार करते हैं। इसी दौरान जब उन पर सिय्योन के सदस्यों के द्वारा माता की सुगन्ध पहुंचती है, तब वे परमेश्वर की गोद में वापस आते हैं और वास्तविक खुशी और राहत पाकर कहते हैं, “आह! मैं माता से मिल गया हूं।”

उत 1:26–27 फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।” तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।

परमेश्वर ने बाइबल के पहले अध्याय में ही हमें यह जानने दिया है कि हमारे पास माता परमेश्वर हैं। परमेश्वर ने अकेले मनुष्य की रचना नहीं की। उन्होंने यह कहकर मनुष्य की रचना की, “हम मनुष्य को बनाएं।” और परमेश्वर के स्वरूप के अनुसार नर और नारी को बनाया गया। इसके द्वारा हम समझ सकते हैं कि परमेश्वर का नर स्वरूप होना चाहिए और परमेश्वर का नारी स्वरूप भी होना चाहिए। हम परमेश्वर के नर स्वरूप को पिता परमेश्वर कहकर बुलाते हैं, तब, हमें परमेश्वर के नारी स्वरूप को क्या कहकर बुलाना चाहिए? माता परमेश्वर!

माता की सुगन्ध का प्रसार करने वाले बनें



वह जगह, जो संतान के लिए सबसे अधिक आरामदायक है, माता की गोद है। बच्चा चाहे एक क्रूर पशु का सामना करता हो, यदि वह मां के आंचल के पीछे छिप जाए, तो वह भयभीत नहीं होता और खुद को सुरक्षित महसूस करता है। परमेश्वर ने माता और संतान के बीच ऐसा संबंध स्थापित किया है।

हम सब माता की सुगन्ध की लालसा करते हुए सिय्योन में आए हैं। संसार में बहुत सारे लोग परमेश्वर पर विश्वास करने का दावा करते हुए भी माता के अस्तित्व को नहीं जानते। मगर हमारे लिए माता परमेश्वर सबसे ज्यादा बहुमूल्य हैं। एक शिशु जन्म लेने के बाद यदि माता की गंध न सूंघे, तो उसका स्थिर ढंग से विकास होना मुश्किल है। उसी प्रकार यदि हमारी आत्मा स्वर्गीय माता को ग्रहण न करे और स्वर्गीय माता के निकट न आए, तो उद्धार पाकर स्वर्ग जाने के लिए बुद्धि प्राप्त नहीं कर सकती।

सुसमाचार के कार्य में भी वैसा ही है। चाहे हमारे पास कितना भी बाइबल का ज्ञान हो, पर यदि हम माता की सुगन्ध का प्रसार न करें, तो हम अपने खोए हुए भाइयों और बहनों को नहीं ढूंढ़ सकते। यदि हम सुसमाचार का अच्छा फल पैदा करना चाहते हैं, तो हमें पहले अपने अन्दर माता की सुगन्ध भरनी चाहिए और माता की सुगन्ध फैलानी चाहिए। यदि पूरे संसार में प्रत्येक सिय्योन माता की सुगन्ध से भरपूर रहेगा, तब परमेश्वर हमारे खोए हुए भाइयों और बहनों को माता की गोद के पास वापस लाएंगे। एक आत्मा को बचाने के लिए उसकी देखभाल और रखवाली करना और उसके लिए अपना बलिदान करना, यह सब माता की सुगन्ध का प्रसार करना है।

सबसे पहले, कृपया अधिक से अधिक माता की बड़ाई कीजिए। यह पिता की इच्छा है। परमेश्वर ने यरूशलेम को इसलिए प्रकट किया है कि वह पृथ्वी पर प्रशंसा और आदर पाएं।(यश 62:6–7) मैं आप सभी सिय्योन के सदस्यों से आशा करता हूं कि जब तक भाई और बहनें जो माता की सुगन्ध न सूंघ सकने के कारण भटक रहे हैं, सिय्योन में वापस न आएं, तब तक आप और भी अधिक लगन और मेहनत से माता के ज्ञान की सुगन्ध फैलाएं।

परमेश्वर के लोगों में नई वाचा का सुसमाचार ग्रहण करने की मूल प्रवृत्ति होती है। इसलिए यह बिल्कुल निश्चित है कि सुसमाचार का कार्य संपन्न होगा। पृथ्वी पर उन्हें बिछुड़ी हुई माता मिल गई हैं, तो क्या वे माता के पास नहीं आएंगे? उनमें माता को ढूंढ़ने और माता के पास आने की मूल प्रवृत्ति होती है। परमेश्वर ने यह पहले से निर्धारित किया है कि यदि हम माता की महिमा को प्रकट करेंगे तो सभी जातियां और सभी लोग सिय्योन की ओर उमड़ आएंगे। परमेश्वर की इस इच्छा के अनुसार, आइए हम मेहनत से माता की सुगन्ध फैलाएं। मुझे आशा है कि आप सब माता की मधुर सुगन्ध बनें और सारी जातियों के लोगों को जीवन के मार्ग पर ले आएं।