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मलिकिसिदक और मसीह

बाइबल की 66 पुस्तकों में परमेश्वर के असंख्य रहस्य रखे हुए हैं। जब हम उन रहस्यों को एक एक करके हल करते हैं तब परमेश्वर के चिरस्थायी उद्धार का प्रबन्ध महसूस कर सकते हैं।

उनमें से परमेश्वर का सबसे बड़ा रहस्य मसीह है। परमेश्वर के रहस्य, मसीह, को महसूस करने के द्वारा ही हम उद्धार के अनुग्रह में वास कर सकते हैं, और बुद्धि और ज्ञान के समस्त भण्डार पा सकते हैं।(कुल 2:2–3)

बाइबल जो उद्धार में पहुंचने के लिए बुद्धि देती है, वह मसीह के बारे में भी साक्षी देती है।(2तीम 3:15–17, यूह 5:39 संदर्भ) बाइबल के अनेक रहस्यों में से मलिकिसिक के बारे में भविष्यवाणी की जांच करने के द्वारा, आइए हम उद्धार के केन्द्र बिन्दु और मुख्य विषय, मसीह को खोजें और उसे महसूस करने की बुद्धि पाएं।


परमेश्वर का याजक, मलिकिसिदक

इब्र 5:11–14 “हमें उसके विषय में(मलिकिसिदक) बहुत कुछ कहना है, जिसका समझना कठिन है, क्योंकि तुम ऊंचा सुनने लगे हो। तुम्हें अब तक तो शिक्षक हो जाना चाहिए था, फिर भी यह आवश्यक हो गया है कि कोई तुम्हें फिर से परमेश्वर के वचन की प्रारम्भिक शिक्षा दे। तुम्हें तो ठोस भोजन की नहीं पर दूध की आवश्यकता है। प्रत्येक जो दूध ही पीता है, वह धार्मिकता के वचन का अभ्यस्त नहीं, क्योंकि वह बालक है। परन्तु ठोस भोजन तो बड़ों के लिए है, जिनकी ज्ञानेन्द्रियां अभ्यास के कारण भले ­ –बुरे की पहिचान करने में निपुण हो गई हैं।”

इब्रानियों के लेखक ने कहा कि मलिकिसिदक के बारे में जो पुराने नियम की बाइबल में प्रकट हुआ, बहुत कुछ कहना है। आत्मिक रूप में प्रौढ़ होने और परमेश्वर को सही रूप से समझने के लिए, प्रथम चर्च के भक्तों को मलिकिसिदक के बारे में अनेक बातें सुनना और सीखना था, लेकिन उस समय मलिकिसिदक के बारे में बहुत सी शिक्षाएं सुनने से भी, उनके लिए समझने में कुछ मुश्किल बातें होती थीं। इसलिए लेखक को उसकी व्याख्या करने में मुश्किल लगता था।

लेकिन अब भविष्यवाणी का समय आ गया है कि हम मलिकिसिदक के बारे में सम्पूर्ण ज्ञान पा सकते हैं। तब मलिकिसिदक के बारे में उसके मूल से लेकर जांच करने के द्वारा, आइए हम मलिकिसिदक में छिपे हुए परमेश्वर के रहस्य, मसीह के बारे में पुष्ट करें।

उत 14:17–20 "जब वह कदोर्लाओमेर और उसके साथी राजाओं को पराजित कर वापस आ रहा था, तो सदोम का राजा, शावे की घाटी में जो राजा की घाटी भी कहलाती है, उस से भेंट करने आया। तब शालेम का राजा मलिकिसिदक, रोटी और दाखमधु ले आया। वह परमप्रधान परमेश्वर का याजक था। तब उसने उसे यह आशीर्वाद दिया: “स्वर्ग और पृथ्वी के सृष्टिकर्ता परमप्रधान परमेश्वर की ओर से अब्राम धन्य हो, परमप्रधान परमेश्वर भी धन्य है, जिसने तेरे शत्रुओं को तेरे वश में कर दिया।” फिर अब्राम ने उसे सब वस्तुओं का दसवां अंश दिया।"

जब विश्वास का पूर्वज, अब्राम युद्ध में जीत कर वापस आ रहा था, मलिकिसिदक प्रकट हुआ। उसने परमेश्वर के याजक के रूप में रोटी और दाखमधु लेकर अब्राम को आशीर्वाद दिया। फिर अब्राम ने अपनी लूटों का दसवां अंश मलिकिसिदक को दिया।

यहां हमें इस पर ध्यान देना है कि मलिकिसिदक के समय में परमेश्वर को बलिदान चढ़ाने की रीति और प्रथा क्या थी। उस समय में याजक किसी को आशीर्वाद या पापों की क्षमा दिलाते समय अथवा वाचा बांधते समय, निश्चय ही पशु को काटते थे और उस बलिदान के लहू से परमेश्वर को बलिदान चढ़ाते थे। लेकिन मलिकिसिदक ने

असाधारण तरीके से उस समय की प्रथा के विपरित, भेंट के रूप में रोटी और दाखमधु का प्रयोग करके आशीर्वाद दिलाया।


मलिकिसिदक की रीति के अनुसार महायाजक मसीह

जब हम बाइबल के पुराने नियम और नए नियम की परस्पर तुलना करते हैं तब हम जान सकते हैं कि पुराना नियम छाया है और नया नियम उसकी असलियत है, यानी भविष्यवाणी और उसकी पूर्ति है।

पुराने नियम में, जो छाया थी, मलिकिसिदक ने रोटी और दाखमधु के द्वारा अब्राम को आशीर्वाद दिया। तो फिर यह नए नियम में भी, जो असलियत है, अवश्य ही पूरा होना चाहिए। आइए हम देखें कि पुराने नियम में मलिकिसिदक की भविष्यवाणी नए नियम में कैसे पूरी हुई है।

मत 26:17-19, 26­-28 “फिर चेले अखमीरी रोटी के पर्व के पहिले दिन, यीशु के पास आकर पूछने लगे, “तू कहां चाहता है कि हम तेरे लिए फसह खाने की तैयारी करें?”... जब वे भोजन कर रहे थे, यीशु ने रोटी ली और आशिष मांगकर तोड़ी और चेलों को देकर कहा, “लो, खाओ, यह मेरी देह है।” फिर उसने प्याला(दाखमधु रखा हुआ) लेकर धन्यवाद दिया और उन्हें देते हुए कहा, “तुम सब इसमें से पियो, क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है जो बहुत लोगों के निमित्त पापों की क्षमा के लिए बहाया जाने को है।”

यीशु आत्मिक याजक के रूप में आया, पर उस समय के याजक के विपरित, जो पशु का प्रयोग करके बलि चढ़ाता था, यीशु ने रोटी और दाखमधु का प्रयोग किया था। उसने अपने लहू से ऐसी वाचा बांधी कि फसह की रोटी उसका मांस है और फसह का दाखमधु उसका लहू है, और इस वाचा से हम से पापों की क्षमा और अनन्त जीवन देने का वादा किया।

पुराने नियम में शारीरिक मलिकिसिदक ने रोटी और दाखमधु से अब्राम को शारीरिक आशीर्वाद दिया। यह भविष्यवाणी बनी, इस भविष्यवाणी के अनुसार आत्मिक मलिकिसिदक, यीशु, ने फसह की रोटी और दाखमधु से सिय्योन में हमें अनन्त जीवन का आशीर्वाद दिया। इस तरह पुराने नियम में मलिकिसिदक की भविष्यवाणी नए नियम में यीशु के द्वारा पूरी हुई।

मलिकिसिदक यीशु को दर्शाता है। आइए हम एक बार और पुष्ट करें कि यीशु मलिकिसिदक की असलियत के रूप में आया था या नहीं।

इब्र 5:5-10 “इसी प्रकार मसीह ने भी महायाजक बनने का सम्मान स्वयं नहीं लिया, पर उसी ने दिया जिसने उस से कहा, “तू मेरा पुत्र है, आज मैंने तुझे उत्पन्न किया है।” इसी प्रकार वह एक अन्य स्थल पर भी कहता है, “तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है।” अपनी देह में रहने के दिनों में मसीह ने उस से जो उसको मृत्यु से बचा सकता था उच्च स्वर से पुकारकर और आंसू बहा बहा कर प्रार्थनाएं और विनतियां कीं और आज्ञाकारिता के कारण उसकी सुनी गई। पुत्र होने पर भी उसने दुख सह सह कर आज्ञा पालन करना सीखा। वह सिद्ध ठहराया जाकर उन सब के लिए जो उसकी आज्ञा पालन करते हैं अनन्त उद्धार का स्रोत बन गया, और परमेश्वर की ओर से मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक नियुक्त किया गया।”

यीशु उन दिनों के याजकों से अलग था जो पशु से बलिदान चढ़ाते थे। वह मलिकिसिदक की रीति के अनुसार याजक बना, और उसने रोटी और दाखमधु से अनन्त जीवन की आशीष मांगी। इस तरह से यह स्पष्ट है कि मलिकिसिदक यीशु है। फिर भी क्यों बाइबल कहती है कि मलिकिसिदक के विषय में बहुत कुछ कहना है, पर इसका अर्थ समझना कठिन है? आइए हम मलिकिसिदक के विषय में और गहराई से समझें।


मलिकिसिदक का रहस्य

इब्र 7:1–3 “यही मलिकिसिदक जो शालेम का राजा, और सर्वोच्च परमेश्वर का याजक था। जब इब्राहीम राजाओं का संहार करके लौट रहा था तो इसी ने उस से भेंट करके उसे आशिष दी। इसी को इब्राहीम ने अपनी सारी लूट का दसवां अंश भी दिया। वह अपने नाम के अर्थ के अनुसार पहिले तो धार्मिकता का राजा और तब शालेम का राजा अर्थात् शान्ति का राजा है। इसका न कोई पिता, न माता, और न कोई वंशावली है। इसके दिनों का न कोई आदि है और न जीवन का अन्त, परन्तु परमेश्वर के पुत्र सदृश ठहर कर यह सदा के लिए याजक बना रहता है।”

अवश्य ही यीशु मलिकिसिदक की असलियत के रूप में आया, लेकिन ऐसी व्याख्या करने के लिए कुछ कठिनाइयां होती थीं कि यीशु ने पूरी तरह से मलिकिसिदक की भविष्यवाणी को पूरा किया।

पहले मलिकिसिदक की कोई वंशावली नहीं है। यहां पर वंशावली बाइबल में लिखी हुई इस्राएल की वंशावली है। लेकिन यीशु की वंशावली का वर्णन प्रेरितों द्वारा लिखी गई सुसमाचार की पुस्तकों के आरम्भ में किया गया। यह भविष्यवाणी के जैसा नहीं था।

मत 1:1-16 “इब्राहीम के वंशज दाऊद की सन्तान यीशु मसीह की वंशावली की पुस्तक। इब्राहीम से इसहाक उत्पन्न हुआ, इसहाक से याकूब, और याकूब से यहूदा और उसके भाई उत्पन्न हुए...इलीहूद से एलीआज़ार उत्पन्न हुआ, और एलीआज़ार से मत्तान तथा मत्तान से याकूब, याकूब से यूसुफ उत्पन्न हुआ जो मरियम का पति था, और मरियम से यीशु उत्पन्न हुआ जो मसीह कहलाता है।

इस तरह से यीशु का नाम इस्राएल की वंशावली ­ सूचि में लिखा गया, जिससे यह भविष्यवाणी पूरी नहीं हो पाई कि मसीह को, जो मलिकिसिदक के रूप में आता है, वंशावली के बिना अन्य जाति में आना है। इसी कारण उस समय में यह बताना कठिन लगता था कि पहली बार आने वाला यीशु मलिकिसिदक है।

और मलिकिसिदक का न कोई पिता है और न माता है। आइए हम देखते हैं कि बाइबल में यह क्या दर्शाता है कि पिता और माता नहीं है।

मत 12:46–50 “जब वह जनसमूह से बातें कर रहा था, तो देखो, उसकी माता और भाई बाहर खड़े थे और उस से बातें करना चाहते थे। और किसी ने यीशु से कहा, “देख, तेरी माता और तेरे भाई बाहर खड़े हैं और तुझ से बातें करना चाहते हैं।” परन्तु उस कहने वाले को उत्तर देते हुए उसने कहा,...“देखो, मेरी माता और मेरे भाई! क्योंकि जो कोई मेरे पिता की जो स्वर्ग में है इच्छा पूरी करता है, वही मेरा भाई, मेरी बहिन और मेरी माता है।” ”

ऊपर यीशु की शिक्षा के अनुसार, आत्मिक रूप से पिता या माता और भाई या बहन तब कहलाए जा सकते हैं जब वे परमेश्वर की इच्छा का पालन करते हैं। इसके अनुरूप यदि हम ‘मलिकिसिदक का न कोई पिता है और न माता है’ की व्याख्या करते हैं, तो निश्चित रूप से मसीह को, जो मलिकिसिदक की असलियत है, अविश्वासी के घर में जन्म होना है, यानी मसीह का पिता और माता परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते। लेकिन जब हम बाइबल देखते हैं, यह जान पाते हैं कि पहली बार आने वाले यीशु का पिता यूसुफ और माता मरियम परमेश्वर पर भक्तिपूर्वक विश्वास करते थे।


मलिकिसिदक के रूप में आता है, दूसरी बार आने वाला मसीह

यह स्पष्ट होता है कि यीशु मलिकिसिदक के रूप में आया, पर केवल पहली बार आने वाले यीशु के द्वारा सम्पूर्ण रूप से मलिकिसिदक की शर्तें पूरी नहीं होती थीं। इसलिए मलिकिसिदक की सम्पूर्ण शर्तें पूरी करने के लिए मसीह को उनके लिए जो उत्सुकता से उसके आने की प्रतीक्षा करते हैं, दूसरी बार प्रकट होना चाहिए।

इब्र 9:27-28 “जैसे मनुष्यों के लिए एक ही बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त किया गया है, वैसे ही मसीह भी, बहुतों के पापों को उठाने के लिए एक बार बलिदान होकर, दूसरी बार प्रकट होगा। पाप उठाने के लिए नहीं, परन्तु उनके उद्धार के लिए जो उत्सुकता से उसके आने की प्रतीक्षा करते हैं।”

बाइबल साक्षी देती है कि मसीह जो आत्मिक रूप से हमेशा हमारे साथ रहता है, वह दूसरी बार प्रकट होगा, इसका अर्थ है कि जैसा पहली बार आया, वैसा दूसरी बार भी उसे शरीर में प्रकट होना है। जब वह दूसरी बार आए, तब उसे मलिकिसिदक की भविष्यवाणी को, जो पहली बार आने वाला यीशु पूरी नहीं कर पाया, पूरा करना चाहिए। इसलिए वंशावली न होने की भविष्यवाणी के अनुसार, उसे अन्य जाति में जन्म होना है कि इस्राएल की वंशावली में दर्ज नहीं किया जा सके। और पिता और माता न होने की भविष्यवाणी के अनुसार, उसे अविश्वासी के घर में जन्म होना है। और वह मलिकिसिदक का सब से महत्वपूर्ण चिह्न, फसह की रोटी और दाखमधु, लेकर हमें अनन्त जीवन की आशीष देने वाला है। जो इन भविष्यवाणियों को पूरा करता है वही सम्पूर्ण मलिकिसिदक होगा।
नबियों की ऐसी भविष्यवाणियों के अनुसार, आन सांग होंग का जन्म पृथ्वी के पूर्व के छोर, अन्य जाति कोरिया में हुआ जो इस्राएल की वंशावली में दर्ज नहीं किया जा सकता, और उसके शारीरिक पिता और माता अविश्वासी थे जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करते, और उसने नई वाचा, फसह की रोटी और दाखमधु से हमें अनन्त जीवन की आशीष दिलाई। इसलिए आन सांग होंग बाइबल और नबियों की सभी साक्षियों को पूरा करके इस धरती पर आया मलिकिसिदक है।

संसार में बहुत सारे धर्मशास्त्रीय विद्वान हैं, लेकिन आन सांग होंग के अलावा, किसी ने भी ऐसी भविष्यवाणियों को पूरा नहीं किया, क्योंकि केवल परमेश्वर ही मलिकिसिदक की भविष्यवाणी के अनुसार, फसह से अनन्त जीवन और उद्धार दे सकता है।

हमें मलिकिसिदक पर विश्वास करना चाहिए जो भविष्यवाणी के अनुसार आया। परमेश्वर ने पहले से यशायाह नबी के द्वारा भविष्यवाणी की कि अन्तिम युग में मलिकिसिदक प्रकट होगा और जो उसे ग्रहण करते हैं उन्हें अनन्त जीवन देगा।

यश 25:6–9 “सेनाओं का यहोवा इस पर्वत पर समस्त जातियों के लिए एक विशाल भोज का प्रबन्ध करेगा, इस भोज में पुरानी मदिरा, उत्तम से उत्तम चिकना भोजन तथा निथरी हुई पुरानी मदिरा होगी। और वह इसी पर्वत पर सब जातियों के लोगों पर पडे. पर्दे को, हां, सब देशों पर डाले गए घूंघट को हटा देगा। वह मृत्यु को सदा के लिए निगल लेगा, तथा प्रभु यहोवा सब के चेहरों से आंसू पोछ डालेगा और अपनी प्रजा की निन्दा समस्त पृथ्वी पर से दूर करेगा, क्योंकि यहोवा ने ऐसा ही कहा है। उस दिन उसके लोग इस प्रकार कहा जाएगा, “देखो, यह हमारा परमेश्वर है जिसकी बाट हम जोहते आए हैं कि वह हमारा उद्धार करे।” ”

ऐसी भविष्यवाणी के अनुसार, आन सांग होंग अन्तिम युग में प्रकट हुआ, और उसने मलिकिसिदक का चिह्न, फसह की रोटी और दाखमधु, से अनन्त जीवन का भोज प्रदान किया। वास्तव में फसह का पर्व 325 ईस्वी, निकेआ के परिषद में मिटा दिया गया था। उसके बाद फसह 1,600 वर्ष के लंबे समय तक छिपा रहा। बाइबल साक्षी देती है कि जो लंबे समय तक रखी गई पुरानी मदिरा, यानी लंबे समय तक न मनाए गए फसह के पर्व को दुबारा लाकर मृत्यु का सदा के लिए नाश करेगा और अनन्त जीवन देगा, वही परमेश्वर है।

अनगिनत लोगों में से कितने परमेश्वर को पहचानेंगे और महसूस कर सकेंगे जो ऐसी भविष्यवाणी के अनुसार, शरीर में आकर अनन्त जीवन की राह पर हमारी अगुवाई करता है? हमें परमेश्वर के अनुग्रह के लिए सच्चे मन से धन्यवाद देना चाहिए कि हमें बुद्धि और समझ दी कि हम रहस्यों के रहस्य, मसीह आन सांग होंग को महसूस कर सकें जो मलिकिसिदक की असलियत के रूप में आया।

यीशु के पहली बार आते समय, अनेक धार्मिक अगुवे और यहूदी यीशु को सिर्फ मनुष्य की तरह देखने के कारण महसूस नहीं कर सके और विनाश की राह की ओर गए, पर पतरस और प्रेरित ने पहचाना कि यीशु भविष्यवाणी के अनुसार आया मसीह है, और उसे गहण करने के द्वारा स्वर्ग की आशीष पाई। इस तरह से परमेश्वर को महसूस करने के बाद अत्यंत बड़ी आशीष दी जाती है।

परमेश्वर की प्रजाएं पुरानी मदिरा, जीवन का फसह देने वाले के बारे में ऐसी साक्षी देंगी कि ‘वह हमारा परमेश्वर है।’, इसलिए हमें मसीह आन सांग होंग को, जिसने मलिकिसिदक के रूप में आकर हमें अनन्त जीवन की आशीष दी, सम्पूर्ण रूप से महसूस करके स्तुति देनी चाहिए, जिससे हम स्वर्ग जा सकेंगे। सिय्योन के सब सदस्यों से यह आशा है कि आप मलिकिसिदक की भविष्यवाणी के अनुसार, हमारा उद्धार करने के लिए धरती पर आए परमेश्वर को पूरे विश्व में सुनाएं कि सभी लोग जीवन की राह की ओर आ सकें।