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क्या आनेवाला तू ही है?

परमेश्वर सर्वज्ञानी और सर्वशक्तिमान है जो सब कुछ जानता है। लेकिन मनुष्य ऐसा नहीं है। जब परमेश्वर मानव के उद्धार के लिए मनुष्य के रूप में धरती पर आता, तब मनुष्य अपनी बुद्धि से परमेश्वर को नहीं समझ सकता। इसलिए, बाइबल कहती है कि परमेश्वर को जानना परमेश्वर का रहस्य है और मसीह में बुद्धि और ज्ञान के समस्त भण्डार छिपे हुए हैं।

परमेश्वर का रहस्य, मसीह, को ग्रहण करना चाहें, तो हमें बाइबल को देखना है, जिसमें परमेश्वर की बुद्धि छिपी है। परमेश्वर के द्वारा, जो सर्वज्ञानी है, लिखी गई बाइबल के वचन पर जो पूर्ण भरोसा रखता है, केवल वही उद्धारकर्ता परमेश्वर को सही तरह से देख कर ग्रहण कर सकता है।


यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले पर सन्देह

2 हज़ार वर्ष पहले परमेश्वर ने देहधारी होकर ‘यीशु’ नाम का प्रयोग किया। लेकिन संसार ने उसे न पहचाना। जब लोगों ने विश्वास के बिना सन्देह करके पूछा, “क्या आनेवाला तू ही है?”, आइए हम देखें कि यीशु ने कौन सा इसका क्या जवाब दिया।

मत 11:2-6 “जब बन्दीगृह में यूहन्ना ने मसीह के कार्य की चर्चा सुनी तो अपने चेलों को उसके पास यह पूछने भेजा, “क्या आनेवाला तू ही है, या हम किसी और की प्रतीक्षा करें?” यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “जो कुछ तुम सुनते और देखते हो जाकर उसका समाचार यूहन्ना को दो: कि अन्धे दृष्टि पाते, लंगड़े चलते, कोढ़ी शुद्ध किए जाते, बहिरे सुनते, मुर्दे जिलाए जाते और कंगालों को सुसमाचार सुनाया जाता है। और धन्य है वह जो मेरे कारण ठोकर खाने से बचा रहता है।”

जब बपतिस्मा देने वाला यूहन्ना बन्दीगृह में बंदी होकर मृत्युदंड का इन्तजार कर रहा था, उसने अपने चेलों को यह पुष्ट करने को भेजा कि, आनेवाला मसीह, जिसके आने की भविष्यवाणी की गई, यीशु है कि नहीं। जब उन्होंने पूछा कि आनेवाला तू ही है? तब यीशु ने यशायाह नबी की भविष्यवाणियों का एक भाग सुनाया।

यश 35:3-10 “निर्बल हाथों को दृढ़ करो और थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करो। धबराए हुओं से कहो, “हियाव बान्धो, डरो मत, देखो, तुम्हारा परमेश्वर पलटा लेने आएगा। परमेश्वर का प्रतिशोध आ पड़ेगा। वह तुम्हारा उद्धार करने आएगा।” तब अन्धों की आंखें खोली जाएंगी, तथा बहिरों के कान भी खोले जाएंगे। लंगड़ा उस समय हिरन के समान चौकड़ियां भरेगा, तथा गूंगा अपनी जीभ से जयजयकार करेगा। क्योंकि जंगल में जल के सोते तथा अराबा में जल ­ धाराएं फूट निकलेंगी...”

बाइबल में भविष्यवाणी की गई थी कि, जब परमेश्वर इस धरती पर आएगा, तब अन्धों की आंखें खोली जाएंगी, तथा बहिरों के कान भी खोले जाएंगे, लंगड़ा उस समय हिरन के समान चौकड़ियां भरेगा, तथा गूंगा अपनी जीभ से जयजयकार करेगा। जिसने यह भविष्यवाणी पूरी की, वह यीशु था। अंत: यीशु ने यह कहने के बजाय कि, मैं परमेश्वर हूं, भविष्यवाणी के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से समझाया कि, यह भविष्यवाणी पूरी करने वाला मैं ही परमेश्वर हूं।

इस तरह परमेश्वर भविष्यवाणी के द्वारा अपने बारे में साक्षी देता था। जब कि लोग बाइबल की अनेक भविष्यवाणियों को आजकल पूरी होते हुए देखते हैं, तो संसार के लोगों को महसूस करना है कि परमेश्वर इस धरती पर आया है, परन्तु लोग महसूस नहीं कर पा रहे हैं। यद्यपि परमेश्वर ने बाइबल से उत्तर दिया, फिर भी लोग नहीं समझते।


एलिय्याह का कार्य और यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला

बाइबल समझा रही है कि यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला नबी है, जो यीशु का मार्ग सुधारने के लिए भेजा गया। यशायाह नबी ने भविष्यवाणी की कि भविष्य में परमेश्वर इस धरती पर आएगा और उसके आगे आगे मार्ग सुधारने के लिए नबी एलिय्याह पहले प्रकट होगा।

मला 3:1 “ “देखो, मैं अपने दूत को भेजता हूं, और वह मेरे आगे आगे मार्ग सुधारेगा। और प्रभु जिसे तुम ढूंढ़ते हो, वह अचानक अपने मन्दिर में आ जाएगा, और वाचा का वह दूत जिस से तुम प्रसन्न होते हो, सुनो वह आता है,” सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।”

मला 4:1-6 “...देखो, यहोवा के उस बड़े और भयानक दिन के आने से पहले मैं तुम्हारे पास एलिय्याह नबी को भेजूंगा। और वह माता ­ पिता के मन को उनके पुत्रों की ओर, और पुत्रों के मन को उनके माता ­ पिता की ओर फेरेगा, ऐसा न हो कि मैं आकर पृथ्वी को शाप के द्वारा नाश करूं।”

यह वचन, “मैं अपने दूत को भेजता हूं, और वह मेरे आगे आगे मार्ग सुधारेगा।”, दिखाता है कि यीशु के सुसमाचार का प्रचार करने से पहले यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला लोगों को मन ­ फिराव का बपतिस्मा देते हुए मसीह का मार्ग सुधारेगा।

परमेश्वर का मार्ग सुधारने के लिए भेजा गया नबी यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला था। यीशु ने भी चेलों को समझाया कि मलाकी पुस्तक में भविष्यवाणी किया गया एलिय्याह यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला है।

मत 17:10-13 “फिर उसके चेलों ने उस से पूछा, “अब शास्त्री क्यों कहते हैं कि एलिय्याह का पहिले आना अवश्य है?” उसने उत्तर दिया, “एलिय्याह का आना अवश्य तो है और वह सब कुछ सुधारेगा। परन्तु मैं तुम से कहता हूं कि एलिय्याह आ चुका है और लोगों ने उसे नहीं पहिचाना। जो कुछ उन्होंने चाहा उसके साथ किया। इसी प्रकार मनुष्य का पुत्र भी उनके हाथों से दुख उठाएगा।” तब वे समझ गए कि उसने हम से यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के विषय में कहा था।”

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला भी जानता था कि वह एलिय्याह के कार्य से इस धरती पर आया है। इसलिए जब उसने पवित्र आत्मा के कार्य की साक्षी दी तब उसने स्पष्ट रूप से यह कह कर कि ‘देखो, परमेश्वर का मेमना जो जगत का पाप उठा ले जाता है’ प्रमाणित करने से यीशु का मार्ग सुधारा।

यूह 1:29-34 “दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देख कर कहा, “देखो, परमेश्वर का मेमना जो जगत का पाप उठा ले जाता है। यह वही है जिसके विषय में मैंने कहा था, ‘मेरे पीछे एक पुरुष आता है जो मुझ से आगे हो गया है, क्योंकि वह मुझे से पहिले था।’ और मैं भी उसे नहीं पहचानता था, परन्तु मैं इसलिए जल से बपतिस्मा देता हुआ आया कि वह इस्राएल पर प्रकट हो जाए।”...जिसने मुझे जल से बपतिस्मा देने भेजा, उसी ने मुझ से कहा, ‘जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे, पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देने वाला यही है।’ और मैंने देखा और साक्षी दी है कि यही परमेश्वर का पुत्र है।” ”

इस तरह से यूहन्ना बार बार साक्षी देता था कि यीशु मसीह है, लेकिन अन्तिम क्षण में उसे थोड़ी सी शंका हुई। ‘क्या वह जो बढ़ई है, सच में परमेश्वर है?’, ‘क्या परमेश्वर का रूप असली में उसके जैसा मनुष्य होता है?” यदि परमेश्वर सिर्फ वचन कहे, तो आकाश व धरती हिलाए जाना या विशेष चीज होना चाहिए है। लेकिन यदि यीशु कहता, कुछ भी विशेष चीजें नहीं होतीं! कैसे भी देखता हो, तो भी यीशु सच में मनुष्य से एक जैसा था, और बिल्कुल परमेश्वर की तरह नहीं लगता था। इसलिए उस समय तक यीशु की साक्षी देकर भी बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना ने फिर से पुष्ट करना चाहा कि यीशु कौन है। इस पर यीशु ने उत्तर दिया, “धन्य है वह जो मेरे कारण ठोकर खाने से बचा रहता है।”

जैसे यीशु की साक्षी देने के लिए भेजे गए यूहन्ना का विश्वास भी हिला गया था, वैसे ही जब परमेश्वर मनुष्य रूप में इस धरती पर आएगा, तब उसे स्वीकार करना आसान नहीं है। भविष्यवाणी पर विश्वास किए बिना हम परमेश्वर को महसूस नहीं कर सकते।


भविष्यवाणी पर विश्वास न करना मूर्खता है और परमेश्वर को जानना समझदारी है

हमें बाइबल पर लिखित भविष्यवाणी पर विश्वास करना है। उस पर, जिसकी साक्षी नबियों ने दी, विश्वास करना परमेश्वर की इच्छा है।

लूक 24:20-27 “हमारे मुख्य याजकों और अधिकारियों ने उसे किस प्रकार पकड़वाकर मृत्यु ­ दण्ड के योग्य ठहराया और उसे क्रूस पर चढ़ाया। परन्तु हम तो यह आशा कर रहे थे कि वही इस्राएल को छुड़ाने वाला व्यक्ति है। वास्तव में, इन सब बातों की अपेक्षा, इन घटनाओं को घटित हुए आज तीसरा दिन हो चुका है। परन्तु हमारे साथ की कुछ स्त्रियों ने भी हमें आश्चर्य में डाल दिया है। जब वे प्रात: काल तड़के क़ब्र पर गईं, और उसके शव को नहीं पाया, तो यह कहते हुए आईं कि हमने स्वर्गदूतों का भी दर्शन पाया जिन्होंने कहा कि वह जीवित है...हे निर्बुद्धियो, नबियों ने जो बातें कहीं उन सब पर विश्वास करने में मतिमन्द लोगो! क्या मसीह के लिए यह आवश्यक न था कि यह सब दुख उठाए और अपनी महिमा में प्रवेश करे?” तब उसने मूसा से प्रारम्भ करके सब नबियों और समस्त पवित्रशास्त्र में से अपने सम्बन्ध की बातों का अर्थ उन्हें समझा दिया।”

यीशु तीसरे दिन में जीवित हुआ था, फिर भी दो चेलों ने, जो इम्माऊस को जा रहे थे, विश्वास नहीं किया। सब बातें बाइबल के अनुसार हो रही थीं, फिर भी महसूस नहीं किया।

मनुष्य को, जो स्वयं देख सकता, सुन सकता और न्याय कर सकता है, उसे विश्वास करने की आदत है। लेकिन मनुष्य की ज्ञानेन्द्रिय या दृष्टिकोण से परमेश्वर को समझना असम्भव है। इसलिए यीशु ने बाइबल की भविष्यवाणी को उन्हें समझाया और सिखाया कि अपनी शारीरिक अवस्था नहीं बल्कि अपने कार्य पर, जो भविष्यवाणी के अनुकूल कर रहा है, ध्यान दे। और उसने उन्हें यह कहा, “हे निर्बुद्धियो, नबियों ने जो बातें कहीं उन सब पर विश्वास करने में मतिमन्द लोगो!”
बाइबल बुद्धि के बारे में इस प्रकार परिभाषा कर रही है।

नीत 9:10 “यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र को जानना ही समझ है।”

बाइबल हमें बता रही है कि जो परमेश्वर को जान सकता है वह अति समझदार और बुद्धिमान है। जब हम समझदार परमेश्वर के वचन पर विश्वास करते हैं तो सभी बुद्धि और ज्ञान का मूल, मसीह को ग्रहण करते हैं, तब हमें बुद्धि मिलती है।

इस धरती पर परमेश्वर शरीर में आकर सही रूप से विश्वास करने वालों और विश्वास न करने वालों के बीच में अन्तर कर रहा है। कभी ­ कभी मनुष्य से अधिक कमज़ोर और कमी रूप में दिखाई देकर वह संसार के सभी लोगों के सामने एक ठोकर का पत्थर, ठेस की चट्टान, और जाल एंव फ़न्दा बनता है।

परमेश्वर अपरिवर्तित है, लेकिन हमारे मन के हालत और विश्वास के अनुसार वह अलग ­ अलग रूप में दिखाई देता है।

जिसे शंका है उसके लिए परमेश्वर वह है जो हमेशा शंका दिलाता है और कमज़ोर है मानो वह कुछ भी नहीं कर सकता, परन्तु जो सम्पूर्ण विश्वास करता है कि वह सृष्टिकर्ता जिसने संसार में सारी वस्तुओं और हमारी आत्मा की सृष्टि की, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर है जो अंतरिक्ष पर प्रभुता करता है उसके लिए परमेश्वर सच्चे परमेश्वर का रूप दिखाता है जो आत्मिक शक्ति और सामर्थ्य से परिपूर्ण है।


प्रेरितों की दृष्टि से मसीह का ईश्वरीय गुण

प्रेरित यूहन्ना और पतरस की दृष्टि में यीशु के प्रकट होने का तरीका, इस्करियोती यहूदा और यहूदियों को प्रकट होने के तरीके से बिल्कुल अलग था। इसलिए बाइबल ने कहा कि यहोवा का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है, और परमपवित्र को जानना ही समझ है।

यूह 1:1, 14 “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था... और वचन(परमेश्वर), जो अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण था, देहधारी हुआ, और हमारे बीच में निवास किया, और हमने उसकी ऐसी महिमा देखी जैसी पिता के एकलौते की महिमा।”

सुसमाचार की पुस्तक यूहन्ना, यीशु के बारह चेलों में से प्रेरित यूहन्ना के द्वारा लिखी गई। इस्करियोती यहूदा भी एक जैसा चेला था, लेकिन यीशु पर विश्वास न कर पाया और चांदी के तीस टुकड़े पाकर यीशु को पकड़वाया। यूहन्ना ने यीशु को आदि से विराजमान परमेश्वर की तरह देखा जो देहधारी होकर हमारे बीच में निवास करता और दिन प्रतिदिन नए सत्य के वचन और अनुग्रह देता था। जिसने हर खुशी के साथ शरीर में आए परमेश्वर को ग्रहण किया, यूहन्ना ने परमेश्वर के वचन को ठीक रूप से समझा, जबकि लोगों ने उसे सिर्फ गर्जन की आवाज़ से सुना। इसलिए उसने परमेश्वर से स्वर्ग की महिमा को, जो भविष्य में आने वाली है, प्रकाशन से देखने की आशीष भी पाई थी और यीशु उसे विशेष रूप से प्रेम करके हमेशा उसके संग जाता था।

यूहन्ना ने यीशु के ईश्वरीय गुण को, जिसे उसने देखा, सुसमाचार की पुस्तक यूहन्ना अध्याय 1 में प्रत्यक्ष रूप से दिखाया। दूसरे सुसमाचार की पुस्तकों में यीशु के शारीरिक जन्म से लेकर वर्णन किया गया है लेकिन अलग प्रकार से यूहन्ना ने शुरू से परमेश्वर के ईश्वरीय गुण को महत्व देते हुए लिखा। यूहन्ना ने आत्मिक रूप से यीशु को महसूस किया, और जो हर एक कार्य यीशु ने किया उसे भविष्यवाणी पूरी करने का कार्य समझा।

कुल 1:26–27 “अर्थात् उस रहस्य को जो युगों और पीढ़ियों से गुप्त रहा पर अब उसके पवित्र लोगों पर प्रकट हुआ है। परमेश्वर ने उन पर यह प्रकट करना चाहा, कि ग़ैरयहूदियों में उस रहस्य की महिमा का धन क्या है, अर्थात् यह कि मसीह तुम में वास करता है और यही महिमा की आशा है।”

कुल 2:2–3 “जिससे कि उनके मन परस्पर प्रेम में बंध कर प्रोत्साहित हों। वे समझ की पूर्ण निश्चयता से उस समस्त धन को प्राप्त करें जिसका परिणाम परमेश्वर का रहस्य अर्थात् मसीह को पहिचानना है। उसमें बुद्धि और ज्ञान के समस्त भण्डार छिपे हुए हैं।”


कुलुस्सियों पुस्तक प्रेरित पौलुस के द्वारा लिखी गई। प्रेरित यूहन्ना के जैसा पौलुस की आंखों में मसीह महिमामय परमेश्वर के रूप में दिखाई देता था, जिसमें बुद्धि और ज्ञान के समस्त भण्डार छिपे हुए थे। लेकिन लोग, जिन्होंने सन्देह करके विश्वास नहीं किया, उन्हें सब कुछ सिर्फ सन्देहशील था।

हम विचार करें कि यदि परमेश्वर शरीर में आएगा, तब हमें किस दृष्टि से परमेश्वर को देखना चाहिए। क्या हमें यूहन्ना या पौलुस के जैसा देखना है? या इस्करियोती यहूदा के जैसा देखना है? वे अभी कहां रहते होंगे?


स्वर्गदूतों से नीचे रूप में आया परमेश्वर

जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने पूछा कि आनेवाला तू ही है, यीशु ने उत्तर दिया, “धन्य है वह जो मेरे कारण ठोकर खाने से बचा रहता है।” इसका अर्थ है कि, वह उसकी शारीरिक अवस्था नहीं बल्कि उसके भीतर ईश्वरीय गुण को देखे। जब उसकी आकृति देखता तब सिर्फ स्वर्गदूतों से नीचे
दिखाई देता था, न कि परमेश्वर के जैसा।

इब्र 2:5–9 “...मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है? अथवा मनुष्य का पुत्र, कि तू उसकी चिन्ता करता है? तू ने थोड़े ही समय के लिए उसे स्वर्गदूतों से कम किया। तू ने उस पर महिमा और आदर का मुकुट रखा, और अपने हाथों के कामों पर उसे अधिकार दिया है। तू ने सब कुछ उसकी अधीनता में उसके पैरों के नीचे कर दिया है... हम उसको, अर्थात् यीशु को, जो थोड़े समय के लिए स्वर्गदूतों से कम किया गया, मृत्यु का दुख उठाने के कारण महिमा और आदर का मुकुट पहिने हुए देखते हैं,...”

भविष्यवाणी के अनुसार, परमेश्वर थोड़े समय के लिए स्वर्गदूतों से भी छोटे रूप में इस धरती पर आया। लेकिन लोग भविष्यवाणी के वचन पर विश्वास नहीं करते थे और अपने पूर्व विचार में तल्लीन होकर यीशु की शारीरिक आकृति पर, जो स्वर्गदूतों से नीचा रूप था, ध्यान देते थे। इसी कारण परमेश्वर ने कहा कि जो बातें नबियों ने कहीं उन पर विश्वास करो।

2 हज़ार वर्ष पहले, प्रथम चर्च के संत कहते थे, “परमेश्वर पर विश्वास करो” यदि इसे आसानी से बताएं तो यह है, “परमेश्वर पर जो शरीर में आया, विश्वास करो”, इस तरह उन्होंने प्रचार किया कि यीशु मसीह पर जो मनुष्य है, विश्वास करो।

तीम 2:5 “क्योंकि परमेश्वर एक ही है और परमेश्वर तथा मनुष्यों के बीच एक ही मध्यस्थ भी है, अर्थात् मसीह यीशु, जो मनुष्य है।”

यह युग पवित्र आत्मा का युग है। पवित्र आत्मा के युग के उद्धारकर्ता, पवित्र आत्मा परमेश्वर आन सांग होंग और पवित्र आत्मा की पत्नी यरूशलेम माता है। हमें इन परमेश्वर का साक्षी होना है और इन परमेश्वर को प्रकट करना है।
यीशु के पहली बार आते समय भी और दूसरी बार आते समय भी लोग आसानी से विश्वास नहीं कर पाते हैं। लेकिन जो हमें उद्धार की राह पर लेकर जाता है, वह मनुष्य का विचार नहीं बल्कि परमेश्वर का विचार है। चाहे हम परमेश्वर की इच्छा को सीधे नहीं समझते हो, यदि भविष्यवाणी पर विश्वास करके आज्ञाकारी रहे, तब उसका परिणाम उद्धार और अनन्त जीवन है।

हमारे लिए परमेश्वर, जो शरीर में आया, बहुमूल्य होना है न कि ठोकर का पत्थर या ठेस की चट्टान। “क्या आनेवाला तू ही है?” ऐसा परमेश्वर को सन्देह से पूछने के बजाय, आइए हम परमेश्वर से पक्के विश्वास के साथ कहें, “आनेवाला सच में तू ही है”। पूरी तरह से विश्वास करने के द्वारा ही हम 144,000 व्यक्ति का सुन्दर विश्वास रख सकतें हैं, जो जहां कहीं भी मेमना जाता है, वहीं यीशु के पीछे हो लेते हैं।

परमेश्वर ने कहा कि मसीह उनके लिए, जो उत्सुकता से उसके आने की प्रतीक्षा करते हैं, दूसरी बार प्रकट होगा।(इब्र 9:28) भविष्यवाणी के अनुसार, वह आया है। यदि हम शारीरिक रीति से उसे देखें, तब हमें वह स्वर्गदूतों से नीचे दिखाई देगा। लेकिन सिय्योन के परिवार, प्रेरित यूहन्ना या पतरस या पौलुस के समान, जिन्होंने मसीह के भीतर ईश्वरीय गुण को देखा, वे अनुग्रहमय विश्वास लेंगे। आइए हम विश्वास करें कि ऐलोहीम परमेश्वर ने, जो वचन देहधारी होकर हमारे साथ निवास करता है, संसार की सारी वस्तुओं को सृजा और जीवन का मूल है। और उसके मार्गदर्शन के अनुसार सब के सब स्वर्ग में पहुंच जाएं।