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पवित्र नगर यरूशलेम

बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार, यरूशलेम की महिमा पूरे विश्व में बहुत तेज रफ्तार से प्रसारित होती जा रही है। यह समाचार जारी हो रहा है कि विश्व के जगह ­ जगह से सिय्योन की सन्तान यरूशलेम की ओर आ रही हैं। जब हम ऐसे चिह्न और लक्षण को देखते हैं, तो हमें लगता है कि यरूशलेम की महिमा सामरिया और पृथ्वी के छोर तक विश्व में सारी जातियों को प्रसारित होने का दिन निकट है, जैसे परमेश्वर ने भविष्यवाणी की है।
आइए हम यरूशलेम की वास्तविकता के बारे में जिसकी महिमा पूरे विश्व में प्रसारित होगी, और आशीष के बारे में जो यरूशलेम की महिमा में सम्मिलित होने वाले पाएंगे, बाइबल के वचन को जांचें।


पवित्र नगरी यरूशलेम

मसीह इस धरती पर दूसरी बार इसलिए आया कि वह हमें उद्धार दे।(इब्र 9:28) आइए हम प्रकाशितवाक्य की भविष्यवाणी के द्वारा, जांचें कि परमेश्वर दूसरी बार आकर कैसे उद्धार देता है।

प्रक 22:18-19 “मैं प्रत्येक को जो इस पुस्तक की नबूवत के वचनों को सुनता है गवाही देता हूं: यदि कोई इनमें कुछ बढ़ाएगा तो परमेश्वर इस पुस्तक में लिखी विपत्तियों को उस पर बढ़ाएगा। यदि कोई इस नबूवत की पुस्तक के वचनों को घटाएगा तो परमेश्वर इस पुस्तक में लिखित जीवन के वृक्ष और पवित्र नगरी से उसका भाग छीन लेगा।”

बाइबल के अन्तिम भाग में, परमेश्वर ने कड़ा आदेश दिया कि यदि कोई इस नबूवत की पुस्तक के अनुसार पालन नहीं करेगा, तो जीवन के वृक्ष और पवित्र नगरी से उसका भाग छीन लेगा। यहां जीवन के वृक्ष के पास न जाने का अर्थ है कि वह अनन्त जीवन नहीं पाएगा, और पवित्र नगरी में प्रवेश न करने का अर्थ है कि वह स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेगा।

यहां, सब से महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि पवित्र नगरी किसे संकेत करती है? उद्धार पाने के लिए, हमें पवित्र नगरी की जानकारी होनी चाहिए।

प्रक 21:2-4 “फिर मैंने पवित्र नगरी, नए यरूशलेम को परमेश्वर की ओर से स्वर्ग से उतरते देखा, वह ऐसी सजाई गई थी जैसी दुल्हिन अपने पति के लिए सिंगार किए हो...“देखो, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है, वह उनके मध्य निवास करेगा। वे उसके लोग होंगे तथा परमेश्वर स्वयं उनके मध्य रहेगा, और वह उनकी आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा, फिर न कोई मृत्यु रहेगी न कोई शोक, न विलाप और न पीड़ा रहेगी। पहिली बातें बीत गई हैं।”

प्रक 21:9-12 “फिर जिन सात दूतों के पास सात अंतिम विपत्तियों से भरे सात कटोरे थे, उनमें से एक ने मेरे पास आकर कहा, “यहां आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेमने की पत्नी दिखाऊंगा।” तब वह मुझे आत्मा में एक विशाल और ऊंचे पर्वत पर ले गया और उसने पवित्र नगरी यरूशलेम को स्वर्ग में से परमेश्वर के पास से नीचे उतरते हुए दिखाया। परमेश्वर की महिमा उसमें थी। उसकी चमक अत्यंत बहुमूल्य पत्थर अर्थात् उस यशब के समान थी जो स्फटिक सदृश उज्ज्वल था...”

प्रेरित यूहन्ना ने साक्षी दी कि जो स्वर्ग में से नीचे उतरती है, वह नगरी यरूशलेम है। यह यरूशलेम स्वर्ग में से नीचे उतरती है, और परमेश्वर का निवास मनुष्यों के बीच में है, इसलिए परमेश्वर की प्रजा स्वर्ग का अनन्त उद्धार पा सकती है।


उद्धार जो स्वर्गीय यरूशलेम के द्वारा पूरा होता है

यदि हम बाइबल में लिखित यरूशलेम नगरी की विशेषताओं के बारे में विस्तृत रूप से जांचें, तो हमें महसूस होगा कि यरूशलेम हमारे उद्धार से अति निकट संबंधित है।

यश 52:1–10 “हे सिय्योन, जाग, जाग! अपना बल धारण कर। हे पवित्र नगरी यरूशलेम, अपने अति शोभायमान वस्त्र धारण कर। क्योंकि ख़तनारहित और अशुद्ध लोग फिर तुझ में प्रवेश न करने पाएंगे। हे बन्धुवा यरूशलेम, अपनी धूल झाड़कर उठ खड़ी हो। हे सिय्योन की बन्धुवा पुत्री, अपने गले की ज़ंजीर को उतार डाल। क्योंकि यहोवा यों कहता है: “तुम जो सेंत– ­ ­ मेंत बिक गए थे, अब बिना रुपया दिए छुड़ाए भी जाओगे।”

ऊपर के वचन का अर्थ है कि जब पवित्र नगरी यरूशलेम शोभायमान वस्त्र पहन कर सिंहासन पर बैठेगी, तब सिय्योन की सन्तान, जो पाप और मृत्यु की जंजीर से बांधी गई है, छुड़ाई जाकर आजाद होगी, जिससे हम जान सकते हैं कि परमेश्वर के उद्धार का कार्य यरूशलेम के द्वारा पूरा हो जाएगा।

प्रक 21:23-27 “उस नगर को सूर्य और चांद के प्रकाश की आवश्यकता नहीं, क्योंकि परमेश्वर की महिमा ने उसे आलोकित किया है और मेमना उसका दीपक है। सब जातियां उसके प्रकाश में चलेंगी, और पृथ्वी के राजा अपने प्रताप को उसमें लाएंगे। उसके फाटक दिन के समय कभी बन्द न होंगे, क्योंकि वहां रात्रि न होगी। वे जातियों के वैभव और सम्मान को उसमें लाएंगे, परन्तु कोई भी अपवित्र वस्तु या कोई घृणित कार्य अथवा झूठ पर आचरण करने वाला उसमें प्रवेश करेगा, परन्तु केवल वे जिनके नाम मेमने के जीवन की पुस्तक में लिखे हैं।”

जिनके नाम मेमने के जीवन की पुस्तक में लिखे हैं, केवल वे ही पवित्र नगरी यरूशलेम में प्रवेश करेंगे। इसलिए यरूशलेम में रहने वालों की महिमा सचमुच बड़ी है। बाइबल हमें बताती है कि यरूशलेम के बिना, किसी को भी उद्धार पाने की योग्यता नहीं है।

जो यरूशलेम में प्रवेश करने का विशेष अधिकार और योग्यता रखते हैं, वे अनन्त जीवन का वादा पाते हैं, क्योंकि यरूशलेम ही परम पवित्रस्थान की असलियत है। यरूशलेम नगरी का आकार देखा जाए, तो नगर का रूप वर्गाकार है और उसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई एक समान है। वास्तव में यह परमेश्वर के पवित्रस्थान के आकार जैसा है।

प्रक 21:14-16 “नगर की शहरपनाह की बारह आधारशिलाएं थीं, जिन पर मेमने के बारह प्रेरितों के बारह नाम लिखे थे। जो मुझ से बातें कर रहा था उसके पास नगर और उसके फाटकों और शहरपनाह को नापने के लिए सोने का एक मापदण्ड था। नगर वर्गाकार बसा था। उसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई एक समान थी।”

1राजा 6:14-20 “अत: सुलैमान ने भवन को बनाकर पूरा किया। तब उसने भवन की दीवारों पर अन्दर की ओर देवदार के तख्.ते लगाए, और भवन के फ़र्श से छत तक की भीतर वाली दीवारों पर लकड़ी के तख्.ते जड़े और भवन के फ़र्श पर उसने सनौवर के तख्.तों को लगाया। फिर उसने भवन के पीछे की ओर बीस हाथ तक फ़र्श से लेकर छत तक देवदार के तख्.ते लगाए, उसने इसे भवन के भीतरी भाग में पवित्रस्थान वरन् परमपवित्र स्थान के लिए बनाया। भवन अर्थात् पवित्रस्थान के सामने के मन्दिर की लम्बाई चालीस हाथ थी...फिर उसने यहोवा की वाचा का सन्दूक रखने के लिए भवन के भीतर एक पवित्रस्थान बनाया। और भीतर वाले उस पवित्रस्थान की लम्बाई बीस हाथ, चौड़ाई बीस हाथ, और ऊंचाई बीस हाथ थी, और उसने उसे चोखे सोने से मढ़वाया और वेदी पर देवदार के तख्.ते लगवाए।”


परम(भीतर वाला) पवित्रस्थान ऐसा स्थान था जहां परमेश्वर बस कर अनुग्रह प्रदान करता था, और उसके अन्दर वाचा का सन्दूक रखा गया था जो जीवन के वृक्ष को दर्शाता है। जब सुलैमान ने पवित्रस्थान का निर्माण किया, उसने परम पवित्रस्थान की लम्बाई, चौड़ाई और ऊंचाई को एक समान बनाया। यह इस तथ्य को दिखाता है कि परम पवित्रस्थान की असलियत स्वर्गीय यरूशलेम है जो भविष्य में प्रकट होती है। अत: पवित्र नगरी यरूशलेम में प्रवेश करने का मतलब अनन्त जीवन में प्रवेश करना है। इस तरह से, परमेश्वर यरूशलेम के द्वारा हमें उद्धार देता है, जिसकी हम उत्सुकता से अभिलाषा करते हैं।


स्वर्गीय यरूशलेम हमारी माता है

पवित्र नगरी यरूशलेम, जो उद्धार की ओर हमारी अगुवाई करती है, हमारी आत्मिक माता है। बाइबल स्पष्ट रूप से इसकी साक्षी देती है।

गल 4:26-31 “परन्तु ऊपर की यरूशलेम स्वतन्त्र है, और वह हमारी माता है। क्योंकि लिखा है, “हे बांझ, तू जो नहीं जनती, प्रभु में आनन्द मना। तू जो प्रसव पीड़ा नहीं जानती, हर्षनाद कर, क्योंकि त्यागी हुई की सन्तान, सुहागिन की सन्तान से अधिक हैं।” और हे भाइयो, तुम इसहाक के समान प्रतिज्ञा की सन्तान हो...इसलिए हे भाइयो, हम दासी की नहीं परन्तु स्वतन्त्र स्त्री की सन्तान हैं।”

प्रकाशितवाक्य अध्याय 21 में, यरूशलेम के बारे में ऐसा कहा गया, “वह दुल्हिन यानी मेमने की पत्नी है”, और गलातियों में यरूशलेम को ‘हमारी माता’ कहा गया है। इसलिए इस युग में, पवित्र आत्मा की दुल्हिन, जो पिता परमेश्वर के साथ जीवन का जल देती है, हमारी स्वर्गीय माता है। इसका मतलब है कि हमारा उद्धार स्वर्गीय माता के द्वारा पूरा होता है।

परमेश्वर ने कहा कि हम इसहाक के समान प्रतिज्ञा की सन्तान हैं, क्योंकि स्वर्गीय माता के द्वारा, हम स्वर्ग के उत्तराधिकारी होंगे। इब्राहीम जो परमेश्वर को दर्शाता है, उसके परिवार की कहानी हमें शिक्षा देती है कि हमारे उद्धार के लिए स्वर्गीय माता का अस्तित्व निर्णायक कारक है, जैसे इब्राहीम के परिवार में इसहाक अपनी माता, सारा के द्वारा उत्तराधिकरी हुआ, वैसे ही हम भी स्वर्गीय माता के द्वारा उत्तराधिकारी होंगे।(लूक 16:19 ­ 24, उत 21:1 ­ 12 संदर्भ)

हम यरूशलेम माता की सन्तान हैं। परमेश्वर ने हमारी धार्मिकता के प्रत्येक कार्य को दुल्हिन, स्वर्गीय माता के शोभायमान मलमल की आभूषण के रूप में ठहराया है, जिससे कि हम भी यरूशलेम की अति पवित्र महिमा में सहभागी हो सकें।

हम, जिन्होंने यरूशलेम की महिमा में सहभागी होने का विशेष अधिकार लिया है, सचमुच आशीषित लोग हैं।
अब भी, संसार में अनेक आत्माएं हैं जो न तो यरूशलेम के अस्तित्व को जानती और न ही महसूस करती हैं। हमें यरूशलेम स्वर्गीय माता की महिमा को और अधिक प्रकट करना है, और इस आशीष को प्रसारित करना है ताकि खोए हुए भाइयों और बहनों को ढूंढ़ कर परमेश्वर को खुशी दे सकें।


यरूशलेम की संतान जो सारे देशों से आ रही हैं

स्वर्गीय सन्तान, जो पूरे विश्व में बिखर गई हैं, यरूशलेम माता की बांहों में आ रही हैं। वास्तव में ऐसी बात परमेश्वर के उद्धार ­ कार्य की योजना में पूर्व निश्चित की गई है।

यिर्म 3:17-18 “उस समय वे यरूशलेम को “यहोवा का सिंहासन” कहेंगे, और सब जातियां यहोवा के नाम में यरूशलेम में इकट्ठी की जाएंगी और वे फिर कभी अपने बुरे मन की ढिठाई के अनुसार नहीं चलेंगे। उन दिनों यहूदा का घराना इस्राएल के घराने के साथ चलेगा और वे दोनों मिल कर उत्तर के देश से इस देश में आएंगे जिसे मैंने तुम्हारे पूर्वजों को मीरास में दिया था।”

यिर्मयाह का वर्णन देखा जाए, तो भविष्यवाणी की गई है कि अन्तिम दिन में अनेक लोग परमेश्वर के नाम से यरूशलेम में इकट्ठे हो जाएंगे। मत्ती ग्रंथ में इस प्रकार व्यक्त किया गया है कि जैसे मुर्गी बच्चों को अपने पखों के नीचे इकट्ठा करती है।(मत 23:37 संदर्भ) वैसे ही यरूशलेम अपने बच्चों को बाहों में लेगी, जो सारे देशों से इकट्ठे होते हैं ।

परमेश्वर का पूर्व निश्चित उद्धार ­ कार्य तभी पूरा होता है जब स्वर्गीय यरूशलेम माता की बांहों में सन्तान आती हैं।
भविष्यवाणी मनुष्य की सामर्थ्य से नहीं रोकी जा सकती। यदि आप सच्चे दिल से उद्धार पाना चाहते हो, तो होशियारी से भविष्यवाणी की तुरही ­ नाद के अनुसार चलना चाहिए।

यिर्म 3:22-25 “हे विश्वासहीन पुत्रो, लौट आओ, मैं तुम्हारी विश्वासहीनता को चंगा करूंगा।” “देख, हम तेरे पास आए हैं, क्योंकि तू हमारा परमेश्वर यहोवा है। निश्चय, पहाड़ियां छल हैं, पर्वतों पर का कोलाहल व्यर्थ है। निश्चय ही, इस्राएल का उद्धार हमारे परमेश्वर यहोवा में ही है...”

उद्धार केवल परमेश्वर में ही है। स्वर्गीय पिता ने पहले से कहा कि वह इस धरती पर एलिय्याह का मिशन पूरा करने के लिए आया। जैसे 2 हज़ार वर्ष पहले, बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना ने एलिय्याह के मिशन से आकर साक्षी दी कि यीशु उद्धारकर्ता है, उसी प्रकार, स्वर्गीय पिता ने पहले आकर भविष्य में प्रकट होने वाली माता को हम पर प्रकट किया। हमें परमेश्वर की ऐसी योजना को महसूस करना है, और हमें उद्धार में, जो इस युग में यरूशलेम माता के द्वारा पूरा होता है, साथ शामिल होना चाहिए।


यरूशलेम से प्रेम रखनेवालों का मिशन

परमेश्वर ने हमारे मन की आखों और कानों को खोल दिया है ताकि हम यरूशलेम माता को स्वीकार कर सकें। इसके साथ ­ साथ, हम ने यह मिशन भी लिया है कि जब तक पृथ्वी पर यरूशलेम प्रशंसा न पाए तब तक हम चुप न रहें। हमें यह मिशन नहीं भूलना चाहिए और सामरिया और पृथ्वी के छोर तक यरूशलेम माता का प्रचार करने का काम खुशी से करना चाहिए।

यश 66:10-14 “यरूशलेम से प्रेम रखनेवाले हे सब लोगो, उसके साथ आनन्द मनाओ और उसके कारण मग्न होओ! उसके लिए विलाप करनेवाले हे सब लोगो, उसके साथ अत्यंत हर्षित होओ, जिस से कि तुम उसके शान्ति ­ दायक स्तनों से दूध पीकर तृप्त हो सको, और उसकी उदार छाती से दूध पीकर आनन्दित हो सको।” क्योंकि यहोवा यों कहता है, “देखो, मैं उसकी ओर शान्ति को नदी के समान, और जाति जाति का वैभव उमड़ती धारा के समान बहाऊंगा। तुम्हारा पालन ­ पोषण होगा, तुम गोद में लिए जाओगे और घुटनों पर दुलारे जाओगे। जैसे कोई अपनी मां से शांति पाता है वैसे ही तुम्हें भी मुझ से शान्ति मिलेगी, और तुम यरूशलेम में ही शान्ति पाओगे।” तब तुम यह देखोगे और तुम्हारा मन आनन्दित होगा, तुम्हारी हड्डियां नई घास के समान हरी ­ भरी होंगी, और यहोवा का हाथ उसके दासों पर प्रकट हो जाएगा, परन्तु उसके शत्रुओं पर उसका क्रोध भड़केगा।”

यश 66:18-20 “...समय आता है कि मैं सब जातियों और भिन्न भिन्न भाषा बोलने वालों को इकट्ठा करूं और वे आकर मेरी महिमा देखें...उनके जीवित बचे हुओं को उन जातियों के पास भेजूंगा जिन्होंने न तो मेरे यश के बारे में सुना है और न ही मेरी महिमा देखी है...तथा दूर दूर के द्वीपवासियों के पास भेजूंगा। और वे मेरी महिमा का वर्णन जाति जाति में करेंगे। तब जैसे इस्राएली शुद्ध पात्र में अन्नबलि को यहोवा के भवन में ले आते हैं, वैसे ही वे सब जातियों में से तुम्हारे सब भाइयों को यहोवा के लिए अन्नबलि के रूप में घोड़ों, रथों, पालकियों, खच्चरों तथा ऊंटों पर चढ़ाकर यरूशलेम में, मेरे पवित्र पर्वत पर ले आएंगे।”

परमेश्वर की पूर्व निश्चित इच्छा यह है कि वह यरूशलेम माता की बांहों में सिय्योन की सभी सन्तान को इकट्ठा करके उद्धार ­ कार्य पूरा करे। परमेश्वर की ऐसी इच्छा जानते हुए भी, चुप रहना अच्छा नहीं है।

अब यह भविष्यवाणी पूरी होने का समय है कि जैसे मुर्गी बच्चों को आपात स्थिति में झटपट इकट्ठा करती है, वैसे ही यरूशलेम माता अपने बच्चों को झटपट इकट्ठा करेगी। पूरा विश्व यरूशलेम माता की आवाज़ और उद्धार के हाथ का उत्सुकता से इन्तजार कर रहा है। इसलिए हमें यरूशलेम माता की महिमा को जल्दी प्रसारित करना है ताकि सिय्योन की सभी सन्तान महिमामय पंखों के नीचे उद्धार पा सकें जो पवित्र नगरी में तैयार किया गया। आशा है कि आप विश्वास करें कि बाइबल की सभी भविष्यवाणियों के अनुसार सब कुछ अवश्य पूरा होगा, और आप भविष्यवाणियों के अनुसार चलते हुए परमेश्वर की आशीष और प्रेम पाएं।