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परमेश्वर अपना महान कार्य निर्बलों और दीनों के द्वारा पूरा करता है

कहा जाता है कि सपना सच होता है। सपना न संजोने से, सपना पूरा नहीं होता। लेकिन जब कोई सपना संजोता है और सपना पूरा करने का प्रयास करता है, तब अवश्य ही सपना सच होता है। कहावत भी है, "जहां चाह, वहां राह।"

2 हज़ार वर्ष पहले, जब यीशु ने कहा कि ‘जाओ और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ तथा उन्हें पिता, पुत्र, पवित्र आत्मा के नाम से बपतिस्मा दो''(मत 28:19), उसने इसमें कोई शर्त नहीं लगाई। जो कोई जाने की इच्छा करे, वह जा सकता है। सभी लोग जो परमेश्वर पर सम्पूर्ण भरोसा करते हैं, परमेश्वर के आश्चर्यजनक कार्य में भाग ले सकते हैं।

इसलिए हरेक सदस्य को अपनी कमियों को सोच कर हिचकने के बजाय, उस परमेश्वर के सामर्थ्य की याद करनी है जो अपना महान कार्य निर्बलों और दीनों के द्वारा करता है। मैं आशा करता हूं कि आप सुसमाचार के प्रचार के प्रति ऐसा महान सपना रखें कि ‘मैं भी भविष्यवाणी का महानायक बनूंगा"।


विदेश सिय्योन से पहुंची सिय्योन की खुशबू

कुछ दिनों पहले, मुझे न्यूज़ीलैंड सिय्योन के अध्यक्ष से वहां की खबर सुनने का मौका मिला। मैंने सुना कि कोरिया का एक सदस्य जो मेरी जान पहचान का है, न्यूज़ीलैंड सिय्योन में जाकर बहुत से सुन्दर और अनुग्रहमय फल पैदा कर रहा है। जब मैंने यह सुना तो मुझे बहुत ही खुशी हुई। क्योंकि वह कोरिया में बहुत कायर और कमजोर था, इसलिए उसके वहां जाने से पहले, मैंने सोचा था कि ‘क्या सच में वह वहां जाकर मुंह खोल कर सुसमाचार का प्रचार साहस से कर सकेगा?'' और उसकी चिन्ता करता था।

और पेरू से आए अध्यक्ष से भी मुझे एक भाई के बारे में एक जैसी खबर मिली। मैंने सुना कि जब वह कोरिया में था, वह विश्वास में बहुत कमजोर था, लेकिन अब वह पेरू में ऊंची आवाज़ से, पूरे जोश के साथ सुसमाचार सुना रहा है, और वह युवा सदस्यों की अच्छी तरह से अगुवाई कर रहा है। जब मैंने यह सुना तो मुझे बहुत ही आश्चर्य लगा।

मनुष्य के विचार से वे उसे करने में कमजोर दिखते थे। लेकिन जब परमेश्वर ने उपकरण के रूप में उनका प्रयोग किया, तब उन्होंने बहुत ही अच्छे तरीके से उत्तम और महान कार्य किया है। सचमुच, मनुष्य के विचार से परमेश्वर की योजना का अनुमान नहीं किया जा सकता।

जैसे जैसे मैं खुश खबर सुनता हूं कि दीन–हीन और दुर्बल दिखने वाले सदस्य सिय्योन में ज्यादा फल पैदा कर रहे हैं, मुझे ऐसा महसूस होता है कि मजबूत विश्वास और जोश से हम कहीं भी सब कुछ कर सकते हैं। सिय्योन में सभी सदस्य नम्र होने से, अपने आप को बहुत छोटा समझते हैं, लेकिन हमें अपनी शक्ति नहीं, सिर्फ परमेश्वर पर विश्वास करते हुए सुसमाचार का प्रचार करना आवश्यक है।

सुसमाचार का प्रचार करने में आपको न तो ऐसा सोच कर चिन्ता करने की जरुरत है कि ‘मैं दुर्बल हूं, कैसे मैं सुसमाचार का प्रचार करूं?'', और न ही विदेशी भाषा में अपनी योग्यता या बुद्धि या बोलने की शक्ति पर गर्व रखना चाहिए। सुसमाचार का कार्य मनुष्य की शक्ति से कभी पूरा नहीं होता। लोग जो परमेश्वर की महान शक्ति पर विश्वास और निर्भर करते हैं और जो परमेश्वर की मदद मांगते हैं, चाहे वे कमजोर हों, उन्हीं के द्वारा ही, परमेश्वर सुसमाचार का कार्य पूरा करता है।


परमेश्वर निर्बलों और दीनों को चुनता है

जब हम उस उद्धार के कार्य को देखें जो पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के युग के अनुसार पूरा किया जा रहा है, तब हम परमेश्वर की यह इच्छा समझेंगे कि वह अपना महान कार्य निर्बलों और दीनों के द्वारा पूरा करना चाहता है।

जब परमेश्वर प्रत्येक युग में नबियों को चुनता था, लोग जो चुने जाते थे, उनमें से कोई चरवाहा था, कोई मछुआ था, और कोई चुंगी लेने वाला था। चरवाहा, मधुआ और चुंगी लेने वाले जैसे लोग, उस समय के प्रभावशाली नेता नहीं थे। वे उस समय में सबसे निर्बल और तुच्छ लोग ही थे।

1कुर 1:20–29 " ... जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार यह संसार अपने ज्ञान से परमेश्वर को न जान सका, तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों का उद्धार करे। ... परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से अधिक ज्ञानवान है, और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से अधिक बलवान है। हे भाइयो, अपने बुलाए जाने पर तो विचार करो कि शरीर के अनुसार तुम में से न तो बहुत बुद्धिमान, न बहुत शक्तिमान और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने संसार के मूर्खों को चुन लिया है कि ज्ञानवानों को लज्जित करे, और परमेश्वर ने संसार के निर्बलों को चुन लिया है कि बलवानों को लज्जित करे, और परमेश्वर ने संसार के निकृष्ट और दीनों को, वरन् उनको जो हैं भी नहीं चुन लिया, कि उन्हें जो हैं व्यर्थ ठहराए, जिससे कि कोई प्राणी परमेश्वर के सामने घमण्ड न करे।"

यह वह तरीका है जिससे परमेश्वर लोगों को चुनता है। परमेश्वर निर्बलों और दीनों के द्वारा उद्धार का महान कार्य पूरा करता है।

चरवाहा भी बढ़िया नबी बन सकता है, और मछुआ या चुंगी लेने वाला भी ऐसा प्रेरित बन सकता है जिसका नाम अनन्तकाल तक चमकता रहेगा, जब परमेश्वर उनका प्रयोग करता है। इसलिए जब प्रेरित पौलुस ने प्रचार किया,

उसने अपने ज्ञान की लुभानेवाली बातों से नहीं, परन्तु पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा प्रचार किया। क्योंकि उसने चाहा कि वह परमेश्वर के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

1कुर 2:4–5, 13–14 "मेरा सन्देश और मेरा प्रचार ज्ञान के लुभाने वाले शब्दों में नहीं था, परन्तु आत्मा और सामर्थ्य के प्रमाण में था, जिससे कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं परन्तु परमेश्वर की सामर्थ्य पर आधारित हो। ... उन्हीं को हम मनुष्यों के ज्ञान के सिखाए हुए शब्दों में नहीं, परन्तु आत्मा के द्वारा सिखाए हुए शब्दों में, अर्थात् आत्मिक विचारों को आत्मिक शब्दों से मिलाकर व्यक्त करते हैं। ... "

प्रचार के द्वारा लोगों को बचाने का कार्य, मनुष्य की बुद्धि पर निर्भर नहीं, परन्तु परमेश्वर की सामर्थ्य पर निर्भर है। परमेश्वर की सामर्थ्य के बिना, कोई भी फल पैदा नहीं कर सकता, चाहे वह बहुत ही प्रतिभाशाली व्यक्ति हो।
परमेश्वर अपने पर पूरी तरह से विश्वास और भरोसा करने वाले को सुन्दर फल पैदा करने देता है और उसका प्रयोग करता है, भले ही वह कमजोर और निर्बल दिखता हो। परमेश्वर की महिमा को प्रकट करने वाले उपकरण के रूप में यदि हमारा प्रयोग किया जाए, तो हमारे लिए यह धरती में और स्वर्ग में सबसे महान महिमा होगी।


लकड़ी की लाठी से प्रकट हुई परमेश्वर की सामर्थ्य

बेकार और साधारण उपकरण भी आश्चर्यकर्म कर सकता है जब परमेश्वर के हाथ के द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है। हम कमजोर लोग हैं, फिर भी परमेश्वर हमारे द्वारा अपना कार्य पूरा करता है। इसलिए सिय्योन के सदस्यों को इस पर खुश रहना चाहिए और धन्यवाद के मन से अन्त तक परमेश्वर का पालन करना चाहिए। आइए हम देखें कि लकड़ी की लाठी से क्या आश्चर्यकर्म किया गया जब परमेश्वर ने इसका प्रयोग किया।

निर्ग 4:2–5 "तब यहोवा ने उस से कहा, "तेरे हाथ में वह क्या है?" और उसने कहा, "लाठी।" तब उसने कहा, "उसे भूमि पर डाल दे।" अत: उसने उसे भूमि पर डाल दिया और वह सर्प बन गई, और मूसा उसके सामने से भागा। परन्तु यहोवा ने मूसा से कहा, "हाथ बढ़ाकर उसकी पूंछ पकड़ ले ... अत: उसने अपना हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ा और वह उसके हाथ में लाठी बन गई।"

वह जो मूसा ने उठाई, चरवाहे की लाठी थी जिसका उसने मिद्यान के याजक की भेड़–बकरियां चराते समय, प्रयोग किया था। वह न तो सोने का राजदण्ड था, और न ही उसमें कोई विशेषता थी। वह एक मामूली लकड़ी की लाठी थी। ऐसी बेकार और साधारण लाठी से, परमेश्वर ने महान कार्य किया।

निर्ग 14:13–16 " ... तब यहोवा ने मूसा से कहा, "तू क्यों मेरी दुहाई दे रहा है? इस्राएलियों को आगे बढ़ने की आज्ञा दे। और तू अपनी लाठी उठा और अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाकर उसे दो भाग कर। तब इस्राएली समुद्र के मध्य से होकर सूखी भूमि पर से चले जांएगे।"

परमेश्वर के सामर्थी हाथ में पकड़ी गई मूसा की लाठी, लाल समुद्र के दो भाग करके इस्राएलियों को मिस्र से कनान देश तक ले जाने के लिए प्रयोग की गई। ऐसा नहीं था कि लाठी सामर्थ्य रखती है, परन्तु परमेश्वर की सामर्थ्य लाठी पर रही। मिस्र से निकलने के बाद भी, मूसा की लाठी लगातार आश्चर्यजनक कार्य करती थी।

निर्ग 17:5–6 "तब यहोवा ने मूसा से कहा ... जिस लाठी से तू ने नील नदी पर मारा था, उसे अपने हाथ में लेकर इन लोगों के आगे बढ़ जा। देख, मैं तेरे सामने होरेब पहाड़ पर खड़ा होऊंगा। और तू चट्टान पर मारना और उसमें से पानी निकलेगा जिससे कि लोग पीएं।" और मूसा ने इस्राएल के पुरनियों के देखते वैसा ही किया।"

निर्ग 17:8–13 " ... तब मूसा ने यहोशू से कहा, "हमारे लिए पुरुषों को चुन ले और जाकर अमालेकियों से लड़। कल मैं परमेश्वर की लाठी लिए हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूंगा।" और जैसा मूसा ने यहोशू से करने को कहा था वैसा ही उसने किया और अमालेकियों से लड़ने लगा तथा मूसा, हारून और हूर, पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए। फिर ऐसा हुआ कि जब तक मूसा अपना हाथ ऊपर उठाए रहता तब तक इस्राएल प्रबल होता, और जब वह अपना हाथ नीचे करता तो अमालेक प्रबल होता था। ... हारून और हूर ने एक एक ओर खड़े होकर उसके हाथों को सहारा दिया। इस प्रकार उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे। अत: यहोशू ने अमालेकियों और उसके लोगों को तलवार की धार से पराजित किया।"

जब मूसा ने लाठी से चट्टान पर मारा, तब इतना अधिक पानी निकला कि सभी इस्राएली पी सके। और जैसे युद्ध में लाठी ऊपर उठाई गई, सब शत्रु पूरी तरह मर गए।

लाठी देखने में बहुत ही ताकतवर लगती है। लेकिन ये सब परमेश्वर की साामथ्र्य से पूरा हुआ। इस तरह सुसमाचार के प्रचार के लिए, परमेश्वर उपकरण के रूप में हमारा प्रयोग करना चाहता है। यीशु ने कहा कि ‘जाओ और सब जातियों के लोगों को चेले बनाओ!''। इस वचन में उपकरण के रूप में हमारा प्रयोग करने के लिए, यीशु की दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई देती है।

लकड़ी से बनाया गया उपकरण होते हुए भी, उसे स्वयं को छोटा नहीं समझना है, और सोने या बहुमूल्य मणि से बनाया गया उपकरण होने पर, उसे डींग नहीं हांकनी चाहिए। परमेश्वर ने अपनी सामर्थ्य को प्रकट करने और आश्चर्यजनक कार्य को पूरा करने के उपकरण के रूप में हमें चुना और बुलाया है। हमें सिर्फ इस पर खुश रहते हुए हमेशा परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए।


जौ की पांच रोटियों के टुकड़ों से किया गया आश्चर्यकर्म

परमेश्वर ने हमें अनुग्रह दिया है और अपने अन्तिम साक्षी के रूप में चुना है। इसलिए अब से मूसा की लाठी से किए गए आश्चर्यकर्मों से भी महान कार्य हम से किया जाएगा। इसलिए आइए हम अच्छा उपकरण बनें और कोई भी काम करने से पहले, हमेशा प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की सामर्थ्य धारण करने की याचना करें, ताकि परमेश्वर की सामर्थ्य हमारे द्वारा प्रकट हो जाए।

यूह 6:9–13 " "यहां एक लड़का है जिसके पास जौ की पांच रोटियां और दो मछलियां हैं, परन्तु इतने लोगों के लिए वे क्या हैं?" ... इसलिए पुरुष, जो गिनती में लगभग पांच हज़ार थे, बैठ गए। तब यीशु ने रोटियां लीं, और धन्यवाद करके, उन्हें जो बैठे थे बांट दीं, उसी तरह मछलियों को भी जितनी वे चाहते थे बांट दीं। जब वे तृप्त हो गए तो उसने अपने चेलों से कहा, "बचे हुए टुकड़ों को बटोर लो कि कुछ भी नष्ट न हो।" इसलिए उन्होंने उसे बटोरा और जौ की पांच रोटियों के टुकड़ों से, जो खाने वालों से बच गए थे, बारह टोकरियां भरीं।"

गलील की झील के किनारे, तिबिरियास में 5,000 लोग पूरे दिन यीशु के पीछे–पीछे चलते थे। यीशु ने उन पर तरस खाया और कुछ खिलाना चाहा। लेकिन सिर्फ जौ की पांच रोटियां और दो मछलियां थीं जो चेले उनके लिए लेकर आए। इस जौ की पांच रोटियों के द्वारा, यीशु ने 5,000 लोगों को खिलाने का आश्चर्यकर्म किया।

ऐसे आश्चर्यजनक कार्य करते समय, उसने निकम्मी वस्तु, जौ की रोटी का प्रयोग किया। जब यीशु ने यह जौ की रोटी पकड़ी, तब इससे इतना महान आश्चर्यकर्म किया गया कि सब 5,000 लोगों के खाने के बाद भी, बची रोटियों से बारह टोकरियां भरीं। बाइबल के वचनों को देखते हुए, हमें याद रखना चाहिए कि हम कमजोर होने पर भी, सब कुछ कर सकते हैं, यदि परमेश्वर का सामर्थी हाथ हमें पकड़ता है।


दाऊद जिसने बहुत लंबे–चौड़े गोलियत को मार डाला

दाऊद मैदान में भेड़–बकरियों को चरने वाला चरवाहा था। किसी ने भी उस पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब वह ऐसा उपकरण बना जिसे परमेश्वर ने अपने हाथ में पकड़ा, तब उसने लंबे–चौड़े गोलियत को मार डाला और परमेश्वर की महिमा को प्रकट करने का महान कार्य किया।

1शम 17:42–51 "जब पलिश्ती ने दाऊद को देखा तब उसे तुच्छ जाना। क्योंकि वह तो लड़का ही था, उसके मुख पर लाली झलकती थी और वह रूपवान् था। ... तब दाऊद ने पलिश्ती से कहा, "तू तो मेरे पास तलवार, भाला और बर्छी लेकर आया है, परन्तु मैं सेनाओं के यहोवा, इस्राएल की सेना के परमेश्वर के नाम से तेरे पास आया हूं जिसको तू ने ललकारा है। ... जिससे समस्त पृथ्वी जान ले कि इस्राएल में परमेश्वर है, और यह समस्त मण्डली जान लेगी कि यहोवा तलवार और भाले से छुटकारा नहीं देता। क्योंकि संग्राम तो यहोवा ही का है। और वह तुम्हें हमारे हाथ में कर देगा।" ... उसी समय दाऊद पलिश्ती से मिलने के लिए युद्ध–पंक्ति की ओर तेज़ी से दौड़ा। दाऊद ने अपना हाथ अपनी थैली में डाला, और उसमें से एक पत्थर निकाला और गोफन से फेंक कर पलिश्ती के मस्तक पर मारा। वह पत्थर उसके मस्तक में धंस गया जिस से वह भूमि पर औंधे मुंह गिर पड़ा। ... तब दाऊद दौड़कर पलिश्ती के ऊपर खड़ा हो गया, और उसकी तलवार पकड़कर उसकी म्यान से खींची, और उसे मार डाला तथा उसका सिर काटकर अलग कर दिया। जब पलिश्तियों ने देखा कि उनका शूरवीर मारा गया है तब वे भाग खड़े हुए।"

अपराजित राजा शाऊल भी, सेनापति भी और सैनिक भी गोलियत से मुकाबला नहीं कर सके, और डर के मारे कांपते हुए, सब ने उसे परमेश्वर की निन्दा करने के लिए छोड़ दिया। लेकिन दाऊद अत्यन्त क्रोधित होकर उससे लड़ने के लिए आगे निकला। उस समय वह छोटा लड़का ही था जो लड़ने का और झिलम पहने के अभ्यस्त नहीं था। वह किसी हथियार के बिना, सिर्फ एक छोटा पत्थर लिए आगे निकल गया, तब अजेय गोलियत ने उसकी कितनी ज्यादा हंसी उड़ाई होगी!

दाऊद तलवार और भाले या अपने युद्धकौशल और अपनी शक्ति को लेकर गोलियत के सामने नहीं गया। परन्तु वह परमेश्वर के उपकरण के रूप में, परमेश्वर की शक्ति पर भरोसा रखकर गोलियत के सामने गया। यह वह रवैया है जिसे हमें अपनाना चाहिए।

संसार में सबसे महान व्यक्ति वह है जो परमेश्वर के हाथ में पकड़ा जाता है। जब हम दाऊद के जैसे परमेश्वर के पवित्र आत्मा से प्रोत्साहित हों और परमेश्वर के हाथ में उपकरण के रूप में सामरिया और पृथ्वी के छोर तक आगे बढ़ें, तब जैसे दाऊद ने गोलियत को गिरा दिया, वैसे सभी दुष्टों को नष्ट करके सुसमाचार का कार्य पूरा कर सकेंगे।

लेकिन यदि आप बाइबल के बारे में अपने ज्ञान या अपनी बोलने की शक्ति पर विश्वास करके प्रचार करें, तो कोई भी आपकी बात न सुनेगा। प्रचार का कार्य मनुष्य की बुद्धि या योग्यता से पूरा नहीं किया जाता।

जैसे परमेश्वर ने दाऊद का प्रयोग किया, जैसे परमेश्वर ने मूसा की लाठी का प्रयोग किया, वैसे यदि परमेश्वर हमारा प्रयोग करे, तब हम शक्तिशाली हैं और अपराजित हैं। बाइबल का इतिहास हमें इसे स्पष्ट रूप से दिखा रहा है।


परमेश्वर का उपकरण बन कर आगे बढ़ें

परमेश्वर ने हमें तब चुना जब हम कमजोर और दुर्बल थे। और उसने हमें मनुष्य की शक्ति से नहीं, परन्तु अपने सामर्थी वचन और अपनी शक्ति से सब कुछ पूरा करने दिया। अब तक परमेश्वर निर्बलों और दीनों का प्रयोग करके महान कार्य करता आया है। इसलिए यदि हम कमजोर होते हुए भी, परमेश्वर के वचन का पालन करने की दृढ़ इच्छाशक्ति रखें, तब हमारे लिए सब कुछ करने का मार्ग खुला रहेगा।

आइए हम मूर्ख सन्तान न बनें जो यह सुसमाचार सुनने के बाद चुप बैठी रहती है। परमेश्वर ने कहा कि ‘तू मेरे मुंह की बात सुनकर, उन्हें मेरी ओर से चेताना''। इस वचन के अनुसार, संसार को चेताने के द्वारा ही, हमें बढ़िया परिणाम मिलेगा। यदि मूसा लाठी लिए हुए चुप बैठा होता, और यदि दाऊद गोलियत को देखने पर भी उससे लड़ने न गया होता, तो क्या उनसे परमेश्वर का आश्चर्यजनक कार्य पूरा किया गया होता? नहीं।

जैसे दाऊद सेनाओं के यहोवा के नाम से आगे बढ़ा, वैसे यदि हम पवित्र आत्मा और दुल्हिन के नाम से बड़े साहस से संसार की ओर आगे बढ़ें, तो कोई भी हमें नहीं रोक सकेगा। आइए हम पूरी तरह से विश्वास करें कि परमेश्वर ने अपना कार्य पूरा करने के लिए उपकरण के रूप में, हमें अपने हाथ में पकड़ा है, और संसार पर विजय पाकर परमेश्वर की इच्छा पूरी करें।

अब सामरिया और पृथ्वी के छोर तक सुसमाचार का प्रचार तेजी से किया जा रहा है। क्या आप उन लोगों के जैसे बनेंगे जो गोलियत को मार रहे दाऊद को दूर से बैठकर देखते ही रहे? आइए हम दाऊद के जैसे बनें जो परमेश्वर के हाथ में उपकरण के रूप में पकड़ा गया था और जिसने खुद ही गोफन और पत्थर को लिए हुए आगे जाकर गोलियत की ओर फेंका।

मैं निवेदन करता हूं कि सब सिय्योन के सदस्य परमेश्वर की इच्छा पूरी करने में जोर से जाग उठें और महिमामय विजय पाएं।