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Q. दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो यीशु की इच्छा पर चलने का दावा करते हैं। तब, ऐसा क्यों है की वे यीशु के स्थापित नई वाचा को नहीं रखते?

A. यीशु का इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य मनष्यों को अनंत जीवन देना है जो अपने पापों के कारण मृत्यु के बाध्य हैं। हमें उद्धार की ओर नेतृत्व करने के लिए, यीशु ने फसह के दिन पर वई वाचा को स्थापित किया और क्रूस पर अपना लहू बहाते हुए, हमारे लिए पापों की बलि बने। नई वाचा में फसह सहित तीन बार में साथ सात पर्व है, और साथ ही सब्त।

जो यीशु में विश्वास रखते हैं और बचाए जाना चाहते हैं उन्हें नई वाचा का पता होना चाहिए और उसे रखना चाहिए। आज, हालांकि, केवल कुछ ही लोग जो नई वाचा रखते है। यह इसलिए क्योंकि यीशु द्वारा स्थापित की गई नई वाचा की सच्चाई प्रेरितों के युग के बाद से बदलना आरंभ हुआ पूरी तरह गायब हो गया।

नई वाचा के गायब हो जाने के बारे में भविष्यवाणी



बाइबल में कई भविष्यवाणियां है जो दिखाता है कि नई वाचा नष्ट हो जाएगा, और चर्च में अधर्म प्रबल होगा। भविष्यवाणियों में से एक यीशु का कहा गया जंगली बीज का दृष्टांत है।


मत 13:24–30 यीशु ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया : “स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिसने अपने खेत में अच्छा बीज बोया। पर जब लोग सो रहे थे तो उसका शत्रु आकर गेहूं के बीच जंगली बीज बोकर चला गया। जब अंकुर निकले और बालें लगी, तो जंगली दाने के पौधे भी दिखाई दिए। इस पर गृहस्थ के दासों ने आकर उससे कहा, ‘हे स्वामी, क्या तू ने अपने खेत में अच्छा बीज न बोया था? फिर जंगली दाने के पौधे उसमें कहां से आए?’ उसने उनसे कहा, ‘यह किसी शत्रु का काम है।’ दासों ने उससे कहा, ‘क्या तेरी इच्छा है, कि हम जाकर उनको बटोर लें?’ उसने कहा, ‘नहीं, ऐसा न हो कि जंगती दाने के पौधे बटोरते हुए तुम उनके साथ गेहूं भी उखाड़ लो। कटनी तक दोनों को एक साथ बढ़ने दो, और कटनी के समय मैं काटनेवालों से कहूंगा कि पहले जंगली दाने के पौधे बटोरकर जलाने के लिये उनके गट्ठे बांध लो, और गेहूं को मेरे खत्ते में इकट्ठा करो’।”

मत 13:40–42 अत: जैसे जंगली दाने बटोरे जाते और जलाए जाते हैं वैसा ही जगत के अन्त में होगा।... कुकर्म करनेवालों को इकट्ठा करेंगे।... और उन्हें आग के कुण्ड में डालेंगे...

जंगली बीजों की एक मजबूत जीवन शक्ति होती है; यदि हम उन्हें गेंहू क साथ बढ़ने के लिए छोड़ दें, पूरा मैदान जंगली घास से भर जाएगा। तो, जंगली बीज, जो यीशु के दुनिया छोड़कर जाने के बाद बोया गया था, अपनी मजबूत जीवन शक्ति के साथ तेजी से बढ़ा, और पूरे खेत में व्यापक रूप से फेल गया। दूसरे शब्दों में, यह पूरी दुनिया अर्धम से भरा बन गया। यह परिणाम था परमेश्वर के विरोधी द्वारा शासित किया जा रहा चर्च का, दानिय्येल की भविष्यवाणी के अनुसार।

दान 7:25 और वह परमप्रधान के विरुद्ध बातें कहेगा, और परमप्रधान के पवित्र लोगों को पीस डालेगा, और समयों और व्यवस्था के बदल देने की आशा करेगा, वरन् साढ़े तीन काल तक वे सब उसके वश में कर दिए जाएंगे।

प्रकाशितवाक्य की किताब में भी यही भविष्यवाणी है।



प्रक 13:5–7 बड़े बोल बोलने और निन्दा करने के लिये उसे एक मुंह दिया गया, और उसे बयालीस महीने तक काम करने का अधिकार दिया गया। उसने परमेश्वर की निन्दा करने के लिये मुंह खोला कि उसके नाम और उसके तम्बू अर्थात् स्वर्ग के रहनेवालों की निन्दा करे। उसे यह भी अधिकार दिया गया कि पवित्र लोगों से लड़े और उन पर जय पाए, और उसे हर एक कुल और लोग और भाषा और जाति पर अधिकार दिया गया।

यह भविष्यवाणी कई गई है कि पशु संतों को स्वाधीन करेगा। इसका मतलब है कि वह उनके पास से सच्चाई दूर कर देगा।
पाप का पुरूष के प्रगट होने के विषय में जो जीवन की सच्चाई को नष्ट करेगा, प्रेरित पौलुस ने भी इस प्रकार भविष्यवाणी की:


2थिस 2:3–7... वह दिन न आएगा जब तक धर्म का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरुष अर्थात् विनाश का पुत्र प्रगट न हो। जो विरोध करता है, और हर एक से जो ईश्वर या पूज्य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहां तक कि वह परमेश्वर के मन्दिर में बैठकर अपने आप को ईश्वर ठहराता है।... क्योंकि अधर्म का भेद अब भी कार्य करता जाता है, पर अभी एक रोकनेवाला है, और जब तक वह दूर न हो जाए वह रोके रहेगा।

प्रे 20:29–30 मैं जानता हूं कि मेरे जाने के बाद फाड़नेवाले भेड़िए तुम में आएंगे जो झुण्ड को न छोड़ेंगे। तुम्हारे ही बीच में से भी ऐसे–ऐसे मनुष्य उठेंगे, जो चेलों को अपने पीछे खींच लेने को टेढ़ी–मेढ़ी बातें कहेंगे।

बाइबल की इन भविष्यवाणियों के अनुसार, नई वाचा की सारी सच्चाई गायब हो गई चूंकि प्रेरितों के युग के बाद अर्धम प्रकट हुआ।

बाइबल की भविष्यवाणियों द्वारा बना चर्च का इतिहास



चर्च के इतिहास के माध्यम से, आइए हम संक्षेप में जांच करें कैसे बाइबल के भविष्यवाणियों के आनुसार नई वाचा की सच्चाई गायब हो गई।

1) प्रेरितों का युग
बाइबल ने भविष्यवाणी की कि परमेश्वर पापों की क्षमा का आशीष और अनंत जीवन सिय्योन में प्रदान करेंगे, परमेश्वर के नियुक्त पर्वों का नगर। इस भविष्यवाणी के अनुसार, यीशु ने इस पृथ्वी पर मानव जाति के उद्धार के लिए चर्च ऑफ गॉड स्थपिता किया जब वह पहली बार आए थे करीब 2,000 वर्ष पहले। चर्च ऑफ गॉड, जिसके लिए यीशु द्वारा सीेधे सिखाए गए प्रेरियों ने काम किया, नई वाचा क सभी सच्चाईयों का पालन किया (यशा 33:20 भज 132:13–133:3)। यीशु के उदाहरणों का अनुसरण करते हुए, वे उनकी रीति के अनुसार नई वाचा का सब्त रखे और फसह मनाए—अनंत जीवन का सत्य (प्रे 17:2; 18:4; 1कुर 5:7; 11:23)

2) रोमियों के अत्याचार का समय
प्रेरितों के युग के बाद, चर्च रोमन सम्राज्य द्वारा गंभीर रूप से सताया गया जब तक ईसाई धर्म आधिकारिक रूप से रोम में स्थापित न हो गया। इस प्रक्रिया में, चर्च दो भागों में बंट गया। एशिया माइनर में पूर्वी चर्च मसीह के सुसमाचार का अनुसरण किया और सब्त रखे और फसह मनाए, जिसे यीशु और प्रेरितों ने मनाया। रोम में केंद्रित पश्चिमी चर्च, सूर्य–देवता की उपासना को स्वीकार किया और 100 ई. के आस पास सब्त को ठुकराते हुए रविवार रखना शुरू किए। इसके अलावा, रोमन के पोप—155 ई. के आस पास एनीसेटस और 197 ई. के आस पास विक्टर—जोर दिया कि पवित्र भोज फसह के बाद के रविवार को मानया जाना चाहिए—वह दिन जब यीशु पुनरूत्थान हुए, और उन्होंने पूर्वी चर्च को फसह त्याग करने के लिए मजबूर किया जो बाइबल के अनुसार मनाया जाता गया।


3) व्यावहारिकता का युग
जैसे मसीही धर्म आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया और ई. 313 में मिलान की घोषणा के द्वारा दुनिया में ऊपर उठाया गया, चर्च तेजी से व्यावहारिक बन गया। 321 ई. में, रोमन सम्राट कोंसटेंटाइन ने रविवार साम्राज्य भर में छुट्टी और आराम का दिन बना दिया। तो रविवार आराधना का दिन बन गया, जैसा पश्चिमी चर्च ने हठ किया। 325 ई. में, नाइसिया के सभा में फसह पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया, जिसने निर्धारित किया कि फसह वसंत विषुव के बाद पूर्णिमा का पीछा करते हुए पहला रविवार को मनाया जाए। 354 ई. में रोमन चर्च ने यीशु का जन्मदिन 25 दिसंबर को मनाना शुरू किया—सूर्य देवता का जन्मदिन।

जैसे वे रोमन कैथोलिक चर्च का अनुकरण करते हुए, सब्त और फसह को ठुकराए और रविवार और क्रिसमस अपनाए चर्चों में अधर्म प्रचलित हो गया। तब, जिन संतों के पास खरा विश्वास था उन्हें सच्चाई रखने के लिए पहाड़ों या रेगिस्तान में छिपना पड़ा। वे काफी कठिनाई से सच्चाई को जीवित रखे, लेकिन आखिरकार यह गायब हो गया जिससे दुनिया में कोई भी इतने लंबे समय तक सच्चाई का पता नहीं लगा पाए। यह उस भविष्यवाणी की पूर्ति थी कि शैतान परमेश्वर के विरूद्ध बातें कहेगा और परमेश्वर के निर्धारित समयों और व्यवस्था के बदल देने की आशा करेगा।

4) पोप के अधिकार का युग
चौथी सदी के अंत से, जर्मनी की जाती जिसने रोम में प्रवेश किया, रोमन कैथोलिक के धर्म में परिवर्तीत हुई; और पोप, रोमन कैथोलिक चर्च का अध्यक्ष, पूरे यूरोप में संपूर्ण अधिकार प्राप्त किया।तब सच्चाई गायब हो गई और अंधकार युग आया: विर्धम प्रचलित हुआ, और पोप ने 1,260 सालों तक पूर्ण ताकत का इस्तेमाल किया और न्यायिक जांच के माध्यम से परमेश्वर को पीड़ा दी और कई अन्य प्रकार के अत्याचार किए। (दान 7:25)

5) सुधार का युग
जब पोप अपने भ्रष्टाचार के सबसे खराब स्तर पर पहुंचा, प्रोटेस्टेंट सुधारक उठ खडे हुए और कई प्रोटेस्टेंट चर्च स्थापित किए गए। फिर भी, प्रेरितों के युग में मनाए जाने वाले नई वाचा के सत्य को कोई भी चर्च फिर से स्थापित नहीं कर पाया। सुधारक केवल चिल्लाते रहे पर रोमन रोमन कैथोलिक चर्च के सिद्धांतों का पालन करते रहे।

यहा तक की आज के दिन भी, कई प्रोटेस्टेंट चर्च अब तक रोमन कैथोलिक चर्च के बनाए गए नियमों का पालन कर रहे हैं; वे रविवार मनाते है, सूर्य–देवता मिथरा की उपासना के लिए रखा गया दिन, और वे 25 दिसंबर को क्रिसमस मनाते हैं, सूर्य–देवता का जन्म दिन। करीब 1,600 सालों तक चूंकि 325 ई. में फसह समाप्त कर दिया था, कई धार्मिक सुधारक और विद्वान प्रकट हुए और बाइबल का अध्ययन किया, पर उनमें से कोई भी नई वाचा की सच्चाई को फिर से स्थापित नहीं कर पाया जिसे यीशु अपने पहली बार आने पर स्थापित किया।

यीशु अपने दूसरी बार आने पर जीवन का सत्य फिर स्थापित करते हैं
भले ही धार्मिक सुधारकों और विद्वानों ने काफी प्रयास किया, वे अनंत जीवन का सत्य पुनस्र्थापित नहीं कर पाए जिसे यीशु ने पहली बार आने पर स्थापित किया। ऐसा इसलिए क्योंकि केवल यीशु, जिन्हें दूसरी बार आना है, नई वाचा की सच्चाई को पुनस्र्थापित कर सकते हैं जो पृथ्वी पर से गायब हो गई।

प्रक 5:1–5 जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी जो भीतर और बाहर लिखी हुई थी, और वह सात मुहर लगाकर बन्द की गई थी। फिर मैं ने एक बलवन्त स्वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्द से यह प्रचार करता था, “इस पुस्तक के खोलने और उसकी मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?” परन्तु न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला। तब मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक के खोलने, या उस पर दृष्टि डालने के योग्य कोई न मिला। इस पर उन प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा, “मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है।”

चूंकि नई वाचा की सच्चाई गायब हो गई, मनुष्यों का उद्धार नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति के संबंध मे, बाइबल अभिलेख करता है कि पुस्कत सात मुहर लगाकर बंद की गई थी। बाइबल का रहस्य, जो मुहरबंद किए गए थे, केवल दाऊद का मूल द्वारा खोला जा सकता है, यीशु जिन्हें दूसरी बार आना है (प्रका 22:16)

इस भविष्यवाणी के अनुसार, यीशु जीवन के सत्य को पुनस्र्थापित करने के लिए शरीर में दुबारा आय, जिसे संतों कभी खो दिया था (1कुर 4:5; 9:28)। फसह के सहित नई वाचा के पर्वों की सच्चाई इतनी महत्वपूर्ण है कि परमेश्वर स्वंय आए और उन्हें हमें प्रचार किया। इस पृथ्वी पर दुबारा आकर हमें विर्धम के जंजीर से मुक्त करने के लिए आइए हम परमेश्वर को धन्यवाद दें, और परमेश्वर द्वारा पुनस्र्थापित नई वाचा के पर्वों को मनाए, ताकि हम उद्धार पा सकें।