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कोरिया

66वां विदेशी मुलाकाती दल

  • देश | कोरिया
  • तिथि | 25/अप्रैल/2016

कोई भी न तो सर्दी को जाने से रोक सकता है और न ही वसंत को आने से रोक सकता है। जिस प्रकार प्रकृति के नियम के खिलाफ जाना हमारे लिए नामुमकिन होता है, उसी प्रकार परमेश्वर की भविष्यवाणियों का असफल होना भी नामुमकिन होता है।
25 अप्रैल 2016 में मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका और यूरोप के सदस्यों से गठित 66वें विदेशी मुलाकाती दल के सदस्यों ने एक के बाद एक इनचान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में प्रवेश किया। जैसे यशायाह के 60वें अध्याय में भविष्यवाणी की गई है, “जाति जाति के लोग यरूशलेम के पास प्रकाश के लिए बादल के समान, अपने दरबों की ओर उड़ते हुए कबूतरों के समान चले आएंगे,” अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, ग्रीस, रूस, पोलैंड इत्यादि कुल 17 देशों के 91 चर्चों से कुल 210 सदस्यों ने कोरिया की ओर उड़ान भरी। उनमें से ज्यादातर सदस्य 20 या 30 वर्ष की उम्र के सुसमाचार के सेवक थे और कोरिया में पहली बार आए। उन्होंने मुलाकाती दल में इसलिए भाग लिया, ताकि वे माता से, जिनसे मिलने के लिए वे बहुत तरसते थे, मुलाकात कर सकें और उनसे सात अरब लोगों को सुसमाचार का प्रचार करने के मिशन को पूरा करने के लिए पवित्र आत्मा की आशीष मांग सकें।
माता ने छह यूरोपीय भाषाओं में, जिनका वे उपयोग करते हैं, उन्हें स्वागत का संदेश दिया और अपना प्रेम व्यक्त करते हुए खुशी से उनका अभिवादन किया। माता ने उनसे निवेदन किया कि वे पिता से बहुतायत से पवित्र आत्मा की आशीष पाकर उसे अपने देशों के सदस्यों के साथ बांट लें और आशा के बिना जी रही गरीब आत्माओं को नई वाचा का प्रचार करके बहुतों की स्वर्ग के राज्य की ओर अगुवाई करें।
26 तारीख को आयोजित उद्घाटन की आराधना में प्रधान पादरी किम जू चिअल ने उपदेश दिया, “यदि कोई अंडा उसकी आंतरिक शक्ति से तोड़ा जाए, तब जीवन पैदा होता है, लेकिन यदि वह बाहरी शक्ति से तोड़ा जाए, तब जीवन नष्ट होता है। यदि आप अपनी आंतरिक शक्ति को इतना बढ़ाएंगे कि आप किसी भी मुश्किल परिस्थिति या हालात में हार न मानें, तब सात अरब लोगों को प्रचार करने का मिशन बिना असफल हुए पूरा हो जाएगा।” अगले दिन एक खास उपदेश में उन्होंने सात अरब लोगों को प्रचार करने के तरीके और लक्ष्य को विस्तार से बताया। विदेशी सदस्यों ने जिन्होंने उनके उपदेश को सुना था, अपने एहसास को इस तरह बताया, “चूजा इसलिए खुद अंडे को तोड़ सकता और बाहर निकल सकता है, क्योंकि मुर्गी उसके बाहर निकलने तक बिना आराम किए उसे अपने अन्दर समेट लेती है और उसकी चिंता करती है। उसी तरह माता ही सात अरब लोगों को प्रचार करने की शक्ति का स्रोत है।"

ⓒ 2016 WATV

66वें मुलाकाती दल के सदस्यों का ध्यान बाइबल सेमिनार के द्वारा परमेश्वर के वचनों को सीखने पर अधिक केंद्रित रहा और साथ ही उन्होंने कोरिया की प्रकृति, संस्कृति और विकास की स्थिति का अनुभव करने के लिए स्थानीय प्रशिक्षण संस्थानों, ग्यंगबोकगुंग महल, सुवन ह्वासङ किले, एन सियोल मिनार, फानग्यो टेक्नो वैली, और सोंगदो अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जिले आदि का दौरा किया। आराधना के दिन वे नई यरूशलेम फानग्यो मंदिर और इनचान के नाक्सम चर्च में गए। वहां उन्होंने पवित्र आत्मा और दुल्हिन के सुसमाचार के पदचिन्हों से भरी पवित्र जगहों का दौरा किया और कोरियाई भाइयों और बहनों के साथ जिन्होंने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, स्वर्गीय परिवार के प्रेम को साझा किया।
“अमेरिका को जागृत करो! यूरोप को जागृत करो! रूस को जागृत करो! संसार को जागृत करो(Awake America, Awake Europe, Awake Russia, Awake World)!"
अपने देशों की ओर प्रस्थान करने से एक दिन पहले उन्होंने माता के सामने जोर से अपना संकल्प पत्र पढ़ा और सात अरब लोगों को प्रचार करने के लिए जोर–जोर से नारा लगाया। उन्होंने सभी मानवजाति की उस स्वर्ग के राज्य की ओर अगुवाई करने का दृढ़ संकल्प किया जहां केवल अनंत खुशियां उमड़ती हैं और फिर एक–दूसरे से बिछड़ना नहीं है, और इस संकल्प के साथ उन्होंने माता से बिछड़ने के दुख को टाल दिया और ढाढ़स बांधते हुए कहा कि, “हमने यहां आकर उस महान प्रेम को पाया है जिसके योग्य हम पापी नहीं हैं और माता के बलिदान का एहसास किया है। माता के मन के साथ हम अपने भाई–बहनों से प्रेम करेंगे और उनकी देखभाल करेंगे और आगे अच्छे कार्य और प्रचार करने का भरसक प्रयास करेंगे ताकि हम माता के पास यह खुशी का समाचार जल्दी पहुंचा सकें, ‘माता, हमने सात अरब लोगों को प्रचार करने का मिशन समाप्त कर दिया है,’ ” ऐसा दृढ़ संकल्प करके वे अपने देशों की ओर लौट गए।

ⓒ 2016 WATV

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