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कोरिया

वर्ष 2016 फसह के पर्व, अखमीरी रोटी के पर्व और पुनरुत्थान के दिन की पवित्र सभा

  • देश | कोरिया
  • तिथि | 22/मार्च/2016
चर्च ऑफ गॉड जो अब सारे संसार के लोगों के उद्धार की अभिलाषा करते हुए सात अरब लोगों को प्रचार करने का आंदोलन चला रहा है, हर वर्ष तीन बार में सात पर्व मनाता है जो परमेश्वर ने मानव जाति के उद्धार के लिए स्थापित किए हैं। वर्ष 2016 में प्रथम वार्षिक पर्व, यानी फसह का पर्व 22 मार्च(पवित्र कैलेंडर के अनुसार पहले महीने का चौदहवां दिन) की शाम को दुनिया भर के 175 देशों के करीब 2,500 चर्चों में मनाया गया। उसके अगले दिन अखमीरी रोटी का पर्व मनाया गया और फिर 27 तारीख को पुनरुत्थान का दिन मनाया गया।

ⓒ 2016 WATV
फसह के पर्व की पवित्र सभा: मसीह के मांस और लहू के द्वारा परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया जाता है
फसह का पर्व वह दिन था जिस दिन यीशु ने मानव जाति से उस रोटी और दाखमधु के द्वारा, जो यीशु के मांस और लहू को दर्शाते हैं, पापों की क्षमा देने का वादा किया था और उन्हें पाप और मृत्यु के जुए से मुक्त किया था।

नई यरूशलेम फानग्यो मन्दिर में आयोजित फसह के पर्व की पवित्र सभा में माता ने पिता को धन्यवाद दिया जिन्होंने स्वर्ग के पापियों को अनन्त जीवन देकर स्वर्ग ले जाने के लिए फसह का पर्व दिया, और प्रार्थना की कि सभी संतान जो फसह का पर्व मनाती हैं, परमेश्वर की इस इच्छा के प्रति आज्ञाकारी रहें कि ‘तुम अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना,’ और मर रही आत्माओं को बचाकर सच्चे प्रेम को साकार करें।

ⓒ 2016 WATV

फसह का पर्व दो विधियों में संचालित होता है – पैर धोने की विधि और पवित्र भोज की विधि। पुराने नियम में एक ऐसी विधि थी जिसमें याजक पवित्रस्थान में प्रवेश करने से पहले पीतल की हौदी में अपने हाथ पांव धोते थे ताकि वे न मरें। यह एक भविष्यवाणी थी, और इसे नए नियम में यीशु ने पैर धोने की विधि के द्वारा पूरा किया। माता ने पवित्र भोज की विधि से पहले स्वयं अपनी संतानों के पैर धोए, और फिर सदस्यों ने उनके उदाहरण का अनुसरण किया और पवित्र भोज की विधि में भाग लिया।

प्रधान पादरी किम जू चिअल ने यह कहकर फसह के पर्व के महत्व पर जोर दिया, “जिस प्रकार हम अपने माता–पिता से उनका मांस और लहू प्राप्त करके उनकी संतान बनते हैं, उसी प्रकार वे जो फसह के पर्व में उस रोटी और दाखमधु को लेते हैं जो यीशु के मांस और लहू को दर्शाते हैं, परमेश्वर की संतान बनते हैं और परमेश्वर को पिता और माता कहकर बुला सकते हैं।” उन्होंने जोर दिया कि पाप और मृत्यु की जंजीर में बंधी हुई मानव जाति को अनन्त जीवन फिर से हासिल करने के लिए जो अत्यावश्यक है, वह फसह का पर्व है, और आशा जताई कि उन सभी सदस्यों को ढेर सारी आशीषें मिलें जो परमेश्वर के अनुग्रह की स्तुति करते हुए खुशी के साथ फसह का पर्व मनाते हैं(रो 8:16–18; यूह 6:53–57; मत 26:17–28; 2कुर 6:17–18; 1कुर 10:16–17; लैव 23:4–5)।

दो हजार वर्ष पहले फसह के दिन यीशु ने अपने चेलों से पापों की क्षमा का वाद किया था। सदस्यों ने परमेश्वर के प्रेम के लिए तह दिल से धन्यवाद दिया जिन्होंने उन्हें मुफ्त में उद्धार दिया है, और वे पवित्र मन से पवित्र भोज में शामिल हुए।

ⓒ 2016 WATV

अखमीरी रोटी के पर्व की पवित्र सभा: परमेश्वर का अनुग्रह जिन्होंने पापियों को बचाने के लिए मृत्यु के दुखों को सह लिया
फसह के पर्व के अगले दिन, 23 मार्च(पवित्र कैलेंडर के अनुसार पहले महीने का पंद्रहवां दिन) को दुनिया भर में सभी सदस्यों ने अखमीरी रोटी के पर्व की पवित्र सभा में भाग लिया। अखमीरी रोटी का पर्व वह दिन है जब हम मानव जाति को पापों की क्षमा देने के लिए क्रूस पर बलिदान हुए मसीह के दुख को स्मरण करते हैं। जैसे कि बाइबल में लिखा है, “वे दिन आएंगे जब दूल्हा उनसे अलग किया जाएगा; उस समय वे उपवास करेंगे,”(मर 2:20) सदस्य उपवास करके मसीह के दुखों में सहभागी हुए।

माता ने पिता को धन्यवाद दिया जिन्होंने अपनी संतानों को बचाने के लिए क्रूस के अत्यंत बड़े दुखों को सहन किया था, और आशा की कि सारी संतान पूरी तरह अपने पापों से पश्चाताप करके नए सिरे से जन्म लें और परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले जीवन जीएं।

प्रधान पादरी किम जू चिअल ने बाइबल के वर्णनों में यीशु के दुखों का जिक्र किया और उस विश्वास के रवैए के बारे में उपदेश किया जो सदस्यों को पापों की क्षमा पाने के बाद अपनाना चाहिए। फसह का पर्व मनाने के बाद यीशु यहूदियों के हाथ पकड़वाए गए थे। तब उन्होंने सभी प्रकार के अपमानों को चुपचाप सहन किया था, जैसे कि लोगों ने उनके चेहरे पर थूका था और रोमन सैनिकों ने उन्हें ठट्ठों में उड़ाया था और कोड़े से मारा था, और उन्होंने क्रूस पर चढ़ाए जाकर प्राण त्यागने तक अकथनीय पीड़ाओं को सह लिया था। प्रधान पादरी किम जू चिअल ने कहा, “यीशु ने सिर्फ हमारे उद्धार के लिए सभी दुखों को सह लिया, इसलिए चाहे हम अपने विश्वास के मार्ग पर मुश्किलों का सामना करें, आइए हम याद रखें कि परमेश्वर ने हमारे दुखों से बड़ा दुख सह लिया, और आइए हम अपने–अपने क्रूस को उठाते हुए दृढ़ता से विश्वास के मार्ग पर चलें।”

और फिर उन्होंने उन प्रेरितों का जिक्र किया जिन्होंने अत्याचार और बाधा का सामना करने पर भी मसीह के प्रेम को अपने हृदयों में अंकित करके दूर तक सुसमाचार का प्रचार किया था, और जोर देकर कहा, “उन लोगों की तरह जिन्होंने बहुत कष्ट सहने के बावजूद आत्माओं के उद्धार के लिए अपने आपको समर्पित किया था, कृपया सात अरब लोगों को प्रचार करने के लिए अपना पूरा मन और ताकत लगाइए।”(मत 26:56–75; फिलि 1:29–30; 1थिस 2:2–4; लूक14:27; गल 2:20; रो 8:16–39)

आराधना के बाद माता ने अपनी संतानों को सांत्वना दी जिन्होंने उपवास करके परमेश्वर के बलिदान को स्मरण किया, और कहा कि सही रूप से यह समझ लीजिए कि परमेश्वर को क्यों ऐसा बहुत बड़ा बलिदान करना पड़ा, और बहुतों की मन फिराव की ओर अगुवाई कीजिए। माता के निवेदन पर सदस्यों ने अपने मन में एक दृढ़ संकल्प कर लिया कि परमेश्वर जो दो हजार वर्ष पहले भी और आज भी दुख भरे मार्ग पर चल रहे हैं, उनके बलिदान को वे याद करेंगे और अधिक मेहनत से सुसमाचार का कार्य करेंगे।

ⓒ 2016 WATV

पुनरुत्थान के दिन की पवित्र सभा: पुनरुत्थान और स्वर्ग की आशा जो विश्वग्राम के सभी लोगों को एक साथ साझा करना चाहिए
अखमीरी रोटी के पर्व के बाद पहले सब्त के अगले दिन(27 मार्च) दुनिया भर के सारे चर्च ऑफ गॉड में उन परमेश्वर की स्तुति गाने की आवाज गूंज उठी जिन्होंने पुनरुत्थान और स्वर्ग की आशा दी है। दो हजार वर्ष पहले यीशु क्रूस पर मरने के बाद तीसरे दिन जी उठे और सारी मानवजाति को पुनरुत्थान की आशा रखने की अनुमति दी।

माता ने सदस्यों को परमेश्वर के अनुग्रह के बारे में समझाया जिन्होंने अधोलोक के वश पर विजयी होकर पुनरुत्थान पाया और सारी मानव जाति को पुनरुत्थान और रूपान्तर की आशा प्रदान की, और फिर उन्होंने उन सभी सदस्यों को प्रोत्साहन देते हुए कहा जो अपनी परिस्थितियों में अपने विश्वास को मजबूत रखते हुए यत्न से सुसमाचार का प्रचार करते हैं, “हम उस स्वर्ग के राज्य में जाने वाले हैं जहां हम शोक या दुख के बिना अनन्त जीवन की आशीषों का आनन्द उठाएंगे, इसलिए चाहे कोई भी कठिनाई आए, कृपया हमेशा हौसला रखिए।”

प्रधान पादरी किम जू चिअल ने प्रथम चर्च के संतों के इतिहास का हवाला दिया जिन्होंने यीशु के जी उठने के बाद अपने उद्धार और पुनरुत्थान पर पूर्ण विश्वास करते हुए सुसमाचार का प्रचार किया था, और पुनरुत्थान के दिन के अर्थ के बारे में बताया। उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रथम चर्च के संतों का साहसपूर्ण विश्वास हमारे हृदयों में भी फिर से पैदा होना चाहिए। सारी मानव जाति जो जीवन के अन्त में मृत्यु से नहीं बच सकती, अनन्त जीवन और पुनरुत्थान की खबर सुनने का इंतजार कर रही है, इसलिए आइए हम अपने प्रयास से सात अरब लोगों के भविष्य को बदलें और पूरी तरह से विश्वास करें कि परमेश्वर हमारे साथ हैं, और संसार के लोग सुनें या न सुनें, इस पर ध्यान दिए बिना समय या असमय उन्हें पुनरुत्थान और स्वर्ग की आशीषों का प्रचार करें।”(1कुर 15:20–58; यूह 20:1–18; 1थिस 4:13–18; लूक 24:13–34; मत 28:18–20; गिन 14:3–9)

उस दिन जब यीशु जी उठे थे, वह दो चेलों के सामने प्रकट हुए थे जो इम्माऊस की ओर जा रहे थे, और उनकी आत्मिक आंखों को आशीषित की गई रोटी के द्वारा खोल दिया था। इस घटना को याद करके पुनरुत्थान के दिन की विधि के अनुसार आराधना के बाद सदस्यों ने रोटी खाई। उन्होंने अपने परिवार वालों और रिश्तेदारों के साथ भी पुनरुत्थान के दिन की रोटी बांटकर पुनरुत्थान की आशा का संचार किया।

नेपाल के ऊंचे हिमालय में स्थित सेर्तुंग में, मंगोलिया के बंजर रेगिस्तान दलंजदगद में, फिजी और टोंगा गणराज्य जैसे दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों में... दुनिया भर में सिर्फ हर देश के राजधानी शहरों और मुख्य शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी फसह का पर्व मनाया गया। सदस्य परंपराओं और भाषाओं की सीमा से परे तेजी से फैल रहे सुसमाचार के विकास का अनुभव करके आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने अपनी महत्त्वाकांक्षा यह कहते हुए प्रकट की,

“अनन्त जीवन की आशीष जो हमें फसह के पर्व के द्वारा मिलती है, परमेश्वर का प्रेम और बलिदान जो हमें अखमीरी रोटी के पर्व के द्वारा महसूस होते हैं, पुनरुत्थान की आशा जो पुनरुत्थान के दिन हमारे मन में बोई जाती है – ये सब वास्तव में ऐसी आशीषें हैं जिनकी हर किसी को जरूरत होती है। जैसे परमेश्वर ने ये सब आशीषें मुफ्त में हमें दी हैं, वैसे ही हम भी अपने परिवार वालों और रिश्तेदारों के साथ और फिर अपने आसपास जिस किसी से भी हम मिलेंगे, उन सभी लोगों के साथ इन आशीषों को बांटने के लिए अपना पूरा मन और शक्ति लगाएंगे।”

पूरे संसार के सभी सदस्यों ने बाइबल के वचन के अनुसार नई वाचा के पर्व मनाए और कामना की कि जितनी जल्दी हो सके नई वाचा का सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाए जैसे कि बाइबल में भविष्यवाणी की गई है, ताकि वे सात अरब लोगों के साथ परमेश्वर की आशीष पा सकें।





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