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कोरिया

60वां विदेशी मुलाकाती दल

  • देश | कोरीया
  • तिथि | 25/अगस्त/2013
शरद ऋतु के प्रारंभ में जब गर्मी की लहर समाप्त हुई, मौसम के बदलाव की सूचना देनेवाली एक तरोताजा एवं ठंडी हवा की तरह विदेशी मुलाकाती दल नई यरूशलेम माता की बांहों में आया। 25 अगस्त में, 14 देशों में 62 चर्चों से खासकर नेपाल से 60वें विदेशी मुलाकाती दल के लगभग 140 सदस्यों ने कोरिया में प्रवेश किया।

माता ने हार्दिक रूप से सदस्यों का स्वागत किया जो भविष्यवाणियों के अनुसार बादलों और कबूतरों के समान उनके पास उड़कर आए, और यह कहते हुए, “चूंकि आप लोग दूर देशों से आए हैं, मेहनत से सच्चाई के वचनों को सीखिए ताकि आप ऐसे महान नबी बन सकें जो वापस लौटने पर लगन से जीवन का आहार देंगे,” उन्हें आशीष दी। 60वें विदेशी मुलाकाती दल में मुख्य रूप से वयस्क और युवा वयस्क सदस्य शामिल थे जो 20–40 वर्ष की उम्र के थे और महान भक्ति के साथ सुसमाचार का नेतृत्व कर रहे थे।

विदेशी सदस्यों ने परमेश्वर के वचनों की तलवार को बाइबल के अध्ययन के द्वारा तेज़ किया, और जब उन्होंने चर्च ऑफ गॉड इतिहास संग्रहालय, इनचान में नक्सम चर्च, सिओल में ग्वानक चर्च, डोंडेमुन चर्च इत्यादी का दौरा करते हुए स्वर्गीय पिता और माता के नक्शेकदम को याद किया, और उनका आत्मिक एहसास गहरा होता गया।

विदेशी मुलाकाती दल ने एलोहीम प्रशिक्षण संस्थान और ओकचन गो एंड कम प्रशिक्षण संस्थान का दौरा किया और कोरिया के सुंदर दृश्यों का आनंद उठाया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में, जो उनके अपने देश लौटने के एक दिन पहले तैयार किया गया था, विदेशी सदस्यों ने एलोहीम परमेश्वर के लिए दोनों कोरियाई और अपनी मातृभाषाओं में स्तुति गीत गाए। बदले में, कोरियाई सदस्यों ने कक्ष–संगीत और एक पुरुष मुखर चौकड़ी के साथ उन्हें सांत्वना दी।

ऊंचे हिमालय में स्थित नेपाल से आए सदस्यों के लिए इनचान में एक ताटीय घाट और वांगसान समुद्र–तट पर समुद्र देखने का एक विशेष समय दिया गया था। कोरिया में, वे बाइबल की सच्चाई और माता का प्रेम अनुभव कर सकते थे, जो समुद्र की तरह गहरा और चौड़ा है। वे बहुत लोगों का परमेश्वर की ओर नेतृत्व करने वाले “मनुष्यों के मछुए”(मत 4:19) बनने के दृढ़ संकल्प के साथ अपने देशों को लौटे।

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