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कोरिया

वर्ष 2013 अंतर्राष्ट्रीय बाइबल सेमिनार

  • देश | कोरिया
  • तिथि | 03/नवंबर/2013
3 और 7 नवंबर को, वर्ष 2013 अंतर्राष्ट्रीय बाइबल सेमिनार, ओकछन गो एन्ड कम प्रशिक्षण संस्थान और कोरिया के संगनाम शहर के बुनदांग में स्थित प्रधान कार्यालय के अंतर्राष्ट्रीय सभाकक्ष में आयोजित किया गया था।

पुरोहित कर्मचारियों समेत, जो हर दिन बाइबल का अध्ययन करते हैं, दुनिया के महाविद्वानों, वैज्ञानिकों, और विशेषज्ञों ने सेमिनार में भाग लिया। लोगों ने जो माता परमेश्वर के बारे में जानने के लिए उत्सुक थे, और लगभग 100 विदेशियों ने जो अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, पेरू, मेक्सिको, और मलेशिया जैसे 25 देशों से कोरिया में आए, सेमिनार में भाग लिया और ध्यान से उसे सुना।

ⓒ 2013 WATV
सेमिनार का विषय था, “माता परमेश्वर का अस्तित्व और आवश्यकता जिसके बारे में बाइबल और विज्ञान सबूत देते हैं।” दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों ने अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट उदाहरणों और प्रमाणों के साथ माता परमेश्वर के अस्तित्व, उनके प्रेम, और उनकी भूमिका के महत्व पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों के अध्ययन व शोध और अनुभव के आधार पर, सेमिनार की विषय वस्तुएं काफी गहरी, उद्देश्यपूर्ण और पेशेवर थीं।

ⓒ 2013 WATV
सेमिनार शुरू होने से पहले, प्रधान पादरी किम जू चिअल ने “बाइबल माता परमेश्वर की गवाही देती है,” शीर्षक के साथ मुख्य बात बताई। उन्होंने कहा, “उत्पत्ति की पुस्तक में, परमेश्वर को ‘हम’ से उल्लेखित किया गया है। ‘एलोहीम’ शब्द, जिसका मतलब एक से ज्यादा परमेश्वर हैं, 2,500 से भी ज्यादा बार प्रकट हुआ है। यह बाइबल का एक रहस्य रहा है जिसे हजारों सालों से बाइबल के विद्वान हल करने में असक्षम रहे हैं। लेकिन अगर हम बाइबल में सिर्फ माता परमेश्वर का अस्तित्व ढूंढ़ें तो हम इसका जवाब आसानी से पा सकते हैं।” लगातार, पादरी ने जोर दिया कि मानवजाति को उद्धार प्राप्त करने के लिए माता परमेश्वर को ढूंढ़ना चाहिए जिनकी बाइबल गवाही देती है।

छह प्रस्तुतकर्ता थे। सेमिनार जो 3 नवंबर को आयोजित हुआ था, उसमें अमेरिकी रॉकेट निर्माता, एरोजेट रॉकेटडाएन से एक प्रमुख तकनीकी परामर्शदाता, श्रीमान ऑगस्ट क्रुएसी ने “ब्रह्मांड में जीवन का सोता हमारी स्वर्गीय माता है,” इस शीर्षक के साथ भाषण दिया; अमेरिका प्रशांत कमान के उत्तर–पूर्व एशिया नीति विभाग में कोरिया देश का निर्देशक, श्रीमान पॉल विलकॉक्स, ने “माता का प्रेम संतुलन लाता है,” इस विषय के साथ एक प्रस्तुति पेश की; और सुश्री डेस्टीनी चेम्बर्स ने, जो अमेरिका के मैसाचुसेट्स में स्थित अमेरिकन इंटरनेशनल कॉलेज में तंत्रिका मनोविज्ञान की प्रोफेसर हैं, “माता का प्रेम: एक तंत्रिका मनोवैज्ञानिक स्नैपशॉट,” इस विषय के द्वारा माता परमेश्वर के अस्तित्व के बारे में बताया। 7 नवंबर को आयोजित हुए सेमिनार में, श्रीमान होर्हे माझा ने, जो पेरू के वायुसेना अकादमी के पूर्व प्रधानाचार्य थे, “माता, उद्धार के प्रशासन के लिए मास्टर कुंजी,” इस विषय के साथ भाषण दिया; श्रीमान एलिआस काइसेडो ने, जो इक्वाडोर के एसमेरालडस में राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग के रवास्थ्यरक्षा के मुख्य निर्देशक और डॉक्टर हैं, “मायटोकॉन्ड्रियल विरासत” के बारे में प्रस्तुति पेश की; और श्रीमान मिगुएल कार्लोस गुटीएरेज ने, जो पेरू के उआछो में सांछेस कारिओन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं, “ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से माता परमेश्वर के अस्तित्व की आवश्यकता,” इस शीर्षक के साथ समझाया और जोर दिया कि हमारी आत्माओं के उद्धार के लिए क्यों हमें माता परमेश्वर की जरूरत है।

उपस्थित लोगों ने, जिन्होंने दो बार आयोजित हुए सेमिनार के द्वारा दुनिया के महाविद्वानों की प्रस्तुतियों को सुना, एक स्वर में कहा कि जैसे दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ प्रमाणों के साथ माता परमेश्वर के बारे में गवाही दी, तो वे माता परमेश्वर के बारे में और ज्यादा जान सके। उन्होंने फिर से दृढ़ संकल्प किया कि वे उन आत्माओं को, जो माता परमेश्वर को न जानने के कारण जीवन का जल नहीं पी सकीं, यत्न से माता परमेश्वर के बारे में गवाही देंगे और ईमानदारी से माता के प्रेम का अधिक प्रचार करेंगे।

ⓒ 2013 WATV









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